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प्रोत्साहन

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 प्रोत्साहन Image by CANDICE CANDICE from Pixabay मनुष्य का मन हमेशा दुविधा में डूबा रहता है और आशा-निराशा के झूले में झूलता हुआ वह आगे-पीछे होता रहता है, लेकिन जिस प्रकार दूसरों को आप अपना समय देकर, धन देकर या सलाह देकर उनका कुछ न कुछ भला कर सकते हैं, उसी प्रकार प्रोत्साहन देकर भी अनेकों की भलाई करना संभव हो सकता है। दूसरों को बताएं कि आप भी कामयाब हो सकते हैं। बहुत से लोगों को यह सुनना बहुत ही अच्छा लगता है कि वे भी कामयाब हो सकते हैं। किसी को कुछ समय में ही प्रेरित करने के लिए बस आप उन्हें यह बताएं कि वे भी सफल हो सकते हैं। यह बताने के साथ ही आप विश्वास भी दिलाएँ। सफल होने के बारे में बताने के बाद आप उन्हें यह भी बताएं कि वे कैसे सफल हो सकते हैं। आप किसी भी काम के लिए किसी को मोटिवेट कर सकते हैं। आओ कहानी सुनें - बहुत समय पहले की बात है। उन्नीसवीं सदी के मशहूर पेंटर दांते गेब्रियल रोजेटी के पास एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति पहुँचा। उसके पास कुछ स्केच और ड्राइंग्स थी जो वो रोजेटी को दिखा कर उनकी राय जानना चाहता था कि वे अच्छी हैं, या कम से कम उन्हें देखकर कलाकार में कु...

मालिक कौन

👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मालिक कौन Image by Jill Wellington from Pixabay एक आदमी एक गाय को घर की ओर ले जा रहा था। गाय जाना नहीं चाहती थी। वह आदमी लाख प्रयास कर रहा था, पर गाय टस से मस नहीं हो रही थी। ऐसे ही बहुत समय बीत गया। एक संत यह सारा माजरा देख रहे थे। अब संत तो संत हैं, उनकी दृष्टि अलग ही होती है, तभी तो दुनिया वाले उनकी बातें सुन कर अपना सिर खुजलाते रह जाते हैं। संत अचानक ही ठहाका लगाकर हंस पड़े। वह आदमी कुछ तो पहले ही खीज रहा था, संत की हंसी उसे तीर की तरह लगी। वह बोला - “तुम्हें बड़ी हंसी आ रही है?” संत ने कहा - “भाई! मैं तुम पर नहीं हंस रहा। अपने ऊपर हंस रहा हूँ।” अपना झोला हाथ में उठा कर संत ने कहा - “मैं यह सोच रहा हूँ कि मैं इस झोले का मालिक हूँ, या यह झोला मेरा मालिक है?” वह आदमी बोला - “इसमें सोचने की क्या बात है? झोला तुम्हारा है, तो तुम इसके मालिक हो। जैसे ये गाय मेरी है और मैं इसका मालिक हूँ।” संत ने कहा - “नहीं भाई! ये झोला मेरा मालिक है, मैं तो इसका गुलाम हूँ। इसे मेरी जरूरत नहीं है, मुझे इसकी जरूरत है। तुम गाय की रस्सी छोड़ दो। तब मालूम पड़ेगा कि कौन किसका मालिक है? जो जि...