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Enjoy your work

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  काम का आनन्द लो, फल की चिन्ता न करो। Enjoy your work, don't worry about the fruits. जो काम तुम कर रहे हो उसमें आनन्द लेना सीखो, क्यांकि फल तुम्हारे हाथ में नहीं है और वह केवल भगवान के हाथ में है। तुम्हें अपनी ख़ुशी के लिए फल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। मान लो तुम कहते हो कि तुमने कठिन परिश्रम किया था, लेकिन फिर भी तुम्हें अब तक फल नहीं मिला। तुम अपना दिमाग़ इस विश्लेषण में क्यों लगाना चाहते हो? इसका विश्लेषण करना भगवान का काम है।  एक शहर में एक गरीब रिक्शा चालक था, रामू। उसका जीवन हर रोज़ कमाने और खाने में बीतता था। उसके पास न धन था, न सुविधाएँ, लेकिन उसका मन शांत रहता था। वह अपने काम को बोझ नहीं, बल्कि अपनी ज़िम्मेदारी समझता था। एक दिन, बहुत मेहनत के बाद, रामू ने पाँच रुपये बचाए। यह उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। उसने घर जाकर अपनी पत्नी को वे पैसे दिए और कहा, “यह हमारी मेहनत के बचे हुए पैसे हैं, इन्हें संभाल कर रखना, यह कभी काम आएँगे।“ उस दिन रामू के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह किसी अमीर के चेहरे पर भी मुश्किल से मिलती थी। उसी शहर में एक और व्यक्ति था, मोहन; जो एक बड़े दफ्तर में काम ...

मित्र की परिभाषा

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  मित्र की परिभाषा वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से                                                                                               जिसके साथ खून का रिश्ता नहीं,  फिर भी वह प्रिय लगे, वह है मित्र। जिस से दुनिया भर की बातें करके भी थकें नहीं, वह है मित्र। जिसके साथ छोटी-सी बात पर भी  खुल कर हंस लें, वह है मित्र। जिस के कंधे पर माथा रख कर खुल कर रो सकें, वह है मित्र। जिस के साथ ठण्डी चाय भी एकदम गर्म लगे, वह है मित्र। जिस के साथ खिचड़ी खाने में भी दावत जैसी महक आए, वह है मित्र। जिस को आधी रात को भी उठा कर दिल की बात कर सकें, वह है मित्र। जिस के साथ भूमिका बनाए बिना खुल कर बात कर सकें, वह है मित्र। एक अरसे के बाद भी जिस को मिलते ही दिल झूम उठे, वह है मित्र। मित्र वह है, जो हर मुसीबत में हर स...

nothing free of cost

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 दुनिया में कुछ भी मुफ़्त में नहीं मिलता। There is nothing free of cost  in this world. तुम्हें जो कुछ भी दुनिया में मिलता है उस प्रत्येक वस्तु के लिए कीमत चुकानी पड़ती है। दैवीय कानून के अर्न्तगत कुछ भी मुफ़्त नहीं कहा जा सकता। वे वस्तुएं जो स्पष्ट रूप से तुम्हें मुफ्त में मिली हुई दिखाई देती हैं, जैसे तुम्हारे पूर्वजों की जायदाद, लाटरी, यहां तक कि घूस से प्राप्त धन भी, तुम्हें इसके लिए किसी न किसी रूप में कीमत चुकानी पड़ेगी, यद्यपि तुम इसे सीधे तौर पर नहीं देख सकते। मुफ़्त का भार एक छोटे, शांत गाँव में रामू नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह ईमानदार था और अपनी सरल जीवन शैली से संतुष्ट था, लेकिन हमेशा एक बेहतर, आसान जीवन की कामना करता था। वह अक्सर सोचता, “काश, मुझे कुछ भी मुफ़्त में मिल जाए, तो जीवन कितना अच्छा हो!“  एक दिन, गाँव के बाहर जंगल से गुजरते हुए, उसे एक प्राचीन, चमचमाती बोतल मिली। उत्सुकतावश, उसने उसे खोला और एक पल में, एक शक्तिशाली जिन्न बाहर निकला। जिन्न ने कहा, “हे मानव! मैं तुम्हारी ईमानदारी से प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हें एक विशेष वरदान देता हूँ। आज से तुम्हें...

There is nothing urgent in the world.

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  दुनिया में कुछ भी ‘अति आवश्यक’ नहीं है।  There is nothing urgent or indispensable in the world. कुछ लोग हमेशा विभिन्न कार्यों को पूरा करने के तनाव में रहते  हैं। वे हमेशा समय की कमी या समय पर काम को पूरा करने के दबाव में रहते हैं। उनके विचार में यदि कोई काम सीमित समय अवधि में समाप्त नहीं होगा, तो या तो ज़मीन गिर पड़ेगी या विश्व लड़खड़ा जायगा। कई प्रबंधक अपने मातहतों को प्रत्येक कार्य पर ‘अति आवश्यक’ का लेबल लगा कर काम के साथ-साथ अपने तनाव को भी आगे बढ़ा देते हैं और अपनी उत्तेजनाएं और बेचैनियां भी उन तक पहुंचा देते हैं जब कि कुछ कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध होता है । “दफ़्तर की दौड़” सुरेश एक मध्यमवर्गीय दफ़्तर में काम करता था, जहाँ हमेशा काम का अंबार लगा रहता। उसे अक्सर यह तनाव रहता कि समय पर काम कैसे पूरा होगा। हर सुबह वह नई ऊर्जा से आता, पर जल्द ही काम के बोझ तले दब जाता। एक दिन, उसकी दस साल की बेटी ने उससे पूछा, “पापा! आप हमेशा इतने परेशान क्यों रहते हो?” सुरेश ने कहा, “बेटी! काम बहुत है और समय कम। जल्दी ख़त्म करने का तनाव रहता है।” बेटी ने मासूमियत से जवा...

Always remain near to God.

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  हमेशा भगवान के समीप रहो Always remain near to God. जब तुम बात करते हो, खाते हो, चलते हो, सोते हो, यात्रा करते हो, तब भी भगवान की उपस्थिति को अपने निकट महसूस करो। भगवान को अपने हर काम में सम्मिलित करो। जब तक तुम अपना हाथ भगवान के हाथ में पकड़ाए रखोगे, तुम दुनिया में सभी कठिनाइयों से सुरक्षित रहोगे, जैसे ही तुम्हारा हाथ छूटेगा, तुम हर प्रकार के डर, चिन्ताओं, उत्सुकताओं, उत्तेजनाओं, अनिश्चितताओं, दुःखों, बेचैनियों, असफलताओं व निराशाओं से घिर जाओगे। एक चिड़िया जंगल में एक पेड़ पर रहती थी। जंगल बिलकुल सूखा हुआ था। न घास, न पेड़, न फूल, न फल। जिस वृक्ष पर चिड़िया रहती थी, उस पर भी सिर्फ सूखी टहनियाँ थीं। पत्ते भी नहीं थे। चिड़िया वहीं रह कर हर समय शंकर भगवान का जाप और गुणगान करती रहती थी। एक बार नारद जी जंगल में हो कर जा रहे थे। चिड़िया ने देख लिया। तुरंत आकर बोली - नारद जी! आप कहाँ जा रहे हैं? नारद ने कहा - शंकरजी के पास जा रहा हूँ।  चिड़िया ने कहा - भगवान शंकर मेरा बड़ा ध्यान रखते हैं। मेरे सूखे जंगल के बारे में उन्हें पता नहीं है शायद। कृपया उनसे कह दीजिएगा मेरे जंगल को हरा भरा कर दें। ...

Don’t linger things.

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   काम को टालने से बचो Don’t linger things.   काम को कल के लिए या भविष्य के लिए टाल देने की आदत से बचो। सफल व्यक्ति वे होते हैं, जो अपने स्थान से उठते हैं और उसी समय उचित कार्यवाही करते हैं।  एक गाँव में टालू राम नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसका नाम उसके स्वभाव पर बिल्कुल सटीक बैठता था। उसे कोई भी काम दिया जाता, वह उसे तुरंत करने की बजाय टाल देता। “अभी तो बहुत समय है,” “इसे कल कर लेंग,” या “थोड़ी देर आराम कर लूँ, फिर करूँगा” - ये उसके पसंदीदा बहाने थे। एक बार गाँव के मुखिया ने सभी निवासियों को आदेश दिया कि वे अपने घरों के सामने की नालियों की सफाई करें, क्योंकि बारिश का मौसम आने वाला था और पानी जमा होने से बीमारियाँ फैलने का खतरा था। मुखिया ने सभी को तीन दिन का समय दिया। गाँव के बाकी लोग तुरंत काम पर लग गए। उन्होंने पहले ही दिन अपनी-अपनी नालियाँ साफ कर लीं। लेकिन टालू राम ने सोचा, “अभी तीन दिन हैं, मैं आराम से कर लूँगा।” पहला दिन बीता। दूसरे दिन भी वह बैठा रहा। तीसरे दिन सुबह उसने सोचा कि दोपहर तक काम पूरा कर लेगा। लेकिन दोपहर होते-होते आसमान में काले बादल छा गए और मूसल...

Always remain optimistic.

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  हमेशा आशावादी रहो।  Always remain optimistic. इस का महत्त्व नहीं है कि तुम्हें अपने काम के लक्ष्य को प्राप्त करने में कितनी असफलताएं मिली, तुम तो बस! अपनी सफलता के बारे में आशावादी रहो। यदि तुमने उचित कारण से लक्ष्य निर्धारित किया है, तो याद रखो कि इस पृथ्वी पर या स्वर्ग में ऐसी कोई ताकत नहीं है, जो तुम्हें तुम्हारी इच्छित वस्तु प्राप्त करने के लिए रोक सके। आवश्यकता है केवल भगवान में अटूट विश्वास के साथ दृढ़ निश्चय की। यह भी याद रखो कि तुम्हारे द्वारा किया गया छोटा सा प्रयत्न भी व्यर्थ नहीं जाता। यह प्रकृति का नियम है। कई तरह से किये गए प्रयत्न, संघर्ष व तुम्हारे द्वारा किया गया परिश्रम जल्दी या देर से निश्चय ही तुम्हेंं फल देगा।  एक बहुत ही छोटा लगभग सात साल का बालक था। वह बहुत बुद्धिमान था। उसका नाम आलोक था। उसके पिता सेठ धनीराम एक व्यापारी थे। आलोक जब पांच वर्ष का था, तभी उसकी माँ उसे छोड़ कर भगवान के पास चली गयी। बेचारा आलोक अब हमेशा उदास रहने लगा।  उसके पिता को जब व्यापार से समय मिलता, तो उसके साथ समय बिताते थे। यूँ तो आलोक के पिता आलोक से बहुत प्यार करते थे, कि...

Eliminate ego

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  अहंकार और कर्त्तापन के भाव से बचो। Eliminate ego and doership feeling. जो भी काम या बातें तुम करते हो, उनमें यह भावना रखो कि यह भगवान का काम है और तुम उसके प्रतिनिधि के रूप में उसके निर्देशन में काम कर रहे हो। वह ही असली कर्त्ता है। तुम भगवान के हाथों में एक उपकरण या केवल एक माध्यम हो। वह काम समाप्त होने के बाद श्रद्धा और मानवीयता के साथ भगवान को समर्पित कर दो। कभी भी अभिमान या अहंकार न बढ़ाओ कि ये तुम ही हो, जो यह काम कर सकते हो और इस के लिए अब तुम प्रशंसा और इनाम पाने की भी उम्मीद रखते हो। एक गांव में एक मूर्तिकार रहता था, जो इतनी जीवंत मूर्तियाँ बनाता था कि देखने वाले दंग रह जाते थे। धीरे-धीरे उसके मन में यह अहंकार बैठ गया कि “मैं” ही श्रेष्ठ कलाकार हूँ। एक रात उसे सपना आया कि अगले सात दिनों में उसकी मृत्यु निश्चित है। यमदूतों को चकमा देने के लिए उसने अपनी ही जैसी दस हूबहू मूर्तियाँ बनाईं और खुद उनके बीच जाकर बैठ गया। जब यमदूत आए, तो वे ग्यारह एक जैसे चेहरों को देखकर चकित रह गए। वे पहचान ही नहीं पा रहे थे कि असली कलाकार कौन है। यमदूत वापस लौट गए और यमराज को सब बताया। यमराज मुस्...

Avoid making advice to others

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   जब तक पूछा न जाय तब तक दूसरों की आलोचना करने व टिप्पणी या नसीहत देने से बचो।  Avoid making remarks / comments / advice to others unless asked. जीवन में केवल अपनी उन्नति की ओर ध्यान दो। दूसरे क्या कर रहे हैं इस विषय में चिन्ता करने या दख़ल देने में समय को नष्ट न करो। दूसरों के कामों के बारे में आलोचना, टिप्पणी और उन के दोष ढूँढने से बचो। कुछ लोगों को हरेक को अनावश्यक सलाह देने की आदत होती है, चाहे पूछी गई हो या नहीं। यहाँ भी तुम्हें केवल पूछने पर ही नसीहत देनी चाहिए और यदि तुम मामले से परिचित नहीं हो तो ग़लत और अस्पष्ट नसीहत देने की बजाय क्षमा मांग लेनी चाहिए। इसी प्रकार कोई शिक्षा जो तुम दूसरों को लाभ पहुँचाने के लिए देना चाहते हो, उसे शब्दों से देने के स्थान पर अपने व्यवहार से दो। तब उसका अधिक प्रभाव होगा। यह भी याद रखो कि तुम किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के बिना नहीं मोड़ सकते। बिना मांगे नसीहत न दो (Don't give advice without being asked) विषय पर एक लघुकथा यहाँ दी गई है, जो बताती है कि कैसे अनावश्यक सलाह देना अक्सर उल्टा पड़ जाता है, और सच्ची समझदारी तब दिखती है जब ह...

Be positive

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  व्यर्थ की बातों से यानि कचरे से अपने अवचेतन मन को मत भरो।  Don’t fill your sub concious mind with all sorts of garbage. तुम्हारा अवचेतन मन चेतन मन के द्वारा ग्रहण होने वाले विचारों का बहुत बड़ा भण्डार है। जो कुछ तुम देखते, सुनते, सोचते और अनुभव करते हो, वह सब स्थाई स्मृति के रूप में यहां इकट्ठा हो जाता है, लेकिन समस्यात्मक भाग यह है कि अपने विचारों और इन्द्रिय प्रभावों के साथ-साथ हम इसमें बहुत-सा भावनात्मक कचरा और नकारात्मकता जैसे घृणा, बदला, डर, क्रोध, ईर्ष्या आदि अनजाने में, लगातार और निर्दयतापूर्वक उड़ेलते रहते हैं, जो असल में हमारी बरबादी का कारण बनता है। कई लोग हमारे पक्ष में होते हैं, तो कुछ लोग हमारे विपक्ष में भी होते हैं। जो लोग विपक्ष में होते हैं, वे लगातार हमारी बुराई करते हैं। हम कुछ भी करें, ऐसे लोग सिर्फ हमारे विरुद्ध गलत बातें ही प्रचारित करते हैं। ऐसे लोगों से बचना चाहिए। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। एक संत और उनका शिष्य एक गांव से दूसरे गांव लगातार यात्राएं करते थे। इस दौरान वे अलग-अलग गांवों में रुकते भी थे। संत बहुत विद्वान थे। उनके प्रवचन सुनने के ल...

Accept your weaknesses.

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   अपनी कमियों को स्वीकार करो और पहचानो। Accept  and  recognise your weaknesses. एक बार तुम अपनी कमियों को पहचान लेते हो तो समझो तुमने पहले ही उन्हें दूर करने का पहला कदम उठा लिएा है। औरों के सामने अपनी कमज़ोरियों को स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए और वास्तविकता को छिपाने की कोशिश भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति में स्वाभाविक रूप से कोई न कोई कमी होती है  और उसे स्वीकार भी किया जाना चाहिए।  एक जंगल में एक गधा रहता था, जो हमेशा शेर की तरह दहाड़ने की कोशिश करता रहता था। वह चाहता था कि सब उससे डरें और उसकी ताकत का लोहा मानें, लेकिन जब भी वह दहाड़ता, उसके मुख से सिर्फ़ गधों जैसी ही आवाज़ निकलती और सब जानवर उस पर हँसते थे। गधा बहुत दुःखी होता और रोने लगता। एक दिन एक संत वहाँ से गुज़रे। उन्होंने गधे को उदास देखा और पूछा,"क्या बात है, तुम इतने दुखी क्यों हो?" गधे ने रोते हुए कहा, "संत जी! मैं शेर की तरह दहाड़ना चाहता हूँ, लेकिन मेरी आवाज़ इतनी कमज़ोर है कि सब मेरा मज़ाक उड़ाते हैं। मैं अपनी इस कमी से बहुत परेशान हूँ।" संत मुस्कुराए और बोले,"मेरे ...

Self-satisfaction

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  दूसरों को सन्तुष्ट करने से पहले अपने आप को सन्तुष्ट करें। Self-satisfaction before satisfaction of others. पुराने समय की बात है, एक गाँव में दो किसान रहते थे। दोनों ही बहुत ग़रीब थे, दोनों के पास थोड़ी थोड़ी ज़मीन थी। दोनों उसमें ही मेहनत करके अपना और अपने परिवार का गुज़ारा चलाते थे। अकस्मात् कुछ समय पश्चात दोनों की एक ही दिन एक ही समय पर मृत्यु हो गयी। यमराज दोनों को एक साथ भगवान के पास ले गए। भगवान ने उन्हें देख कर उनसे पूछा - अब तुम्हें क्या चाहिये? तुम्हारे इस जीवन में क्या कमी थी और अब तुम्हें क्या बना कर मैं पुनः संसार में भेजूं?  भगवान की बात सुनकर उनमें से एक किसान बड़े गुस्से से बोला -  हे भगवान! आपने इस जन्म में मुझे बहुत कष्टमय ज़िन्दगी दी थी। आपने कुछ भी नहीं दिया था मुझे। पूरी ज़िन्दगी मैंने बैल की तरह खेतों में काम किया है। जो कुछ भी कमाया, वह बस पेट भरने में लगा दिया। न ही मैं कभी अच्छे कपड़े पहन पाया और न ही कभी अपने परिवार को अच्छा खाना खिला पाया। जो भी पैसे कमाता था, कोई आकर मुझसे लेकर चला जाता था और मेरे हाथ में कुछ भी नहीं आया। देखो! कैसी जानवरों जैसी ज़िन्दगी...

master of destiny

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 तुम अपने भाग्य के स्वामी स्वयं हो  You are master of your destiny. जो लोग विपत्ति का सामना करते समय अपने भाग्य को कोसना शुरू कर देते हैं, वे कृपया याद रखें कि तुम अपने जीवन में जो भी हो, उस के जिम्मेदार शत-प्रतिशत तुम ही हो। तुमने अपना भाग्य अपने हाथों से बनाया है। तुम्हारे भूतकाल ने तुम्हारा वर्तमान बनाया है और तुम्हारा वर्तमान तुम्हारा भविष्य बनाएगा। जो तुमने पहले किया है, उसी का फल तुम्हें आज मिल रहा है। यदि तुम अपने वर्तमान को सावधानी से अपने अधीन रखते हो तो भविष्य अभी भी तुम्हारे हाथ में है। इसलिए विपत्तियों के लिए भाग्य को मत कोसो, बल्कि वास्तविकता का साहस से सामना करो। जीवन के प्रति उत्तरदायित्व को स्वीकार करो और अनुभव करो कि तुम्हारे विचार, शब्द और क्रियाएं ही तुम्हारा भविष्य बनाती हैं और जीवन के प्रति तुम्हारे दृष्टिकोण में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। तुम अपने अन्दर छिपी बड़ी शक्ति के द्वारा अपने वर्तमान भाग्य को बदल भी सकते हो और सुधार भी सकते हो। तुम्हें भाग्य के हाथों असहाय दास बनने की आवष्यकता नहीं है। विभिन्न बाधाओं के विरुद्ध सकारात्मक सोच का अभ्यास करके और दृढ़ इच...