परमात्मा की चाह
परमात्मा की चाह आत्मा का कल्याण मनुष्य के मन और विचारों पर निर्भर है ! जब तक मन साफ नहीं भक्ति का भी कोई महत्व नहीं। जैसे पानी के हिलते रहने से उसमें सूर्य का प्रतिबिम्ब दिखाई नहीं पड़ता है उसी प्रकार जब तक मन में कामनाओं और वासनाओं की चंचलता रहती है तब तक उसमें ईश्वर का प्रतिबिम्ब नहीं ठहर सकता है। एक बार एक राजा विदेश गया। जब उसने वापस देश लौटने का विचार बनाया तो घर में अपनी चारों रानियों को अलग अलग पत्र लिखकर पूछा कि विदेश से उनकी पसंद की कौन सी वस्तु उनके लिए लाई जाय? उनमें से तीन रानियों ने अपने पसंद की वस्तु लिखकर वापस राजा के पास पत्र भिजवा दिये । किन्तु जो सबसे छोटी रानी थी, उसने सिर्फ 1 लिखकर पत्र वापस भिजवा दिया। राजा ने चारों चिट्ठियों को पढ़ा । किसी रानी ने वस्त्र लिखे थे, किसी ने आभूषण लिखे थे, किसी ने अपने पसंद की वस्तु लिखी थीं। राजा विदेश से वापस आया और जिस रानी ने जो वस्तु लिखी थी, वह उसके पास पहुंचा दी। सबसे छोटी रानी ने 1 लिखकर पत्र भेजा था । राजा इसका आशय नहीं समझ पाया। वह छोटी रानी के महल में गया और पूछा ...