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Don't stop your work

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  यदि तुम्हारा मूड ठीक न हो तो भी अपना काम मत रोको। Don't stop your work when your mood is upset जब कई लोगों का मूड ख़राब होता है तो वे अपना काम बंद कर देते हैं या कम से कम धीमा तो कर ही देते हैं। मूड या तो किसी की दुःख पहुँचाने वाली बातें करने से या किसी अपमान से या कहीं कड़वी निंदा होने से या किसी काम में असफल हो जाने से या इसी प्रकार की किसी बात से ख़राब हो सकता है। जब तक उनका मूड ठीक नहीं होता, उनके सभी काम धीमी गति से होने लगते हैं, काम अपनी सामान्य गति में नहीं आ पाते क्योंकि उनका मूड खराब है। उनको यह पता नहीं चलता कि ख़राब मूड के कारण अपना काम बंद कर देने से वे अपनी बड़ी हानि कर रहे हैं क्योंकि जितने समय तक उन्होंने काम बंद किया या धीमा किया, वे उतना कीमती समय नष्ट कर चुके हैं। एक समय की बात है, एक कुशल मूर्तिकार एक विशाल मंदिर के लिए मूर्तियाँ बना रहा था। एक सुबह उसका मन बहुत उदास था और उसे काम करने की बिल्कुल इच्छा नहीं हो रही थी। उसे लगा कि इस मनःस्थिति में वह अच्छी कलाकृति नहीं बना पाएगा। तभी उसके गुरु वहाँ आए और बोले, "बेटा, प्रेरणा का इंतज़ार मत करो। अनुशासन मूड का मोह...

हरियाणा यशोगान

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  हरियाणा यशोगान  धुन- क्या मिलिए ऐसे लोगों से, जिनकी फितरत छिपी रही, नकली चेहरा सामने आया, असली सूरत छिपी रही देशी भाषा, स्वदेशी लिबासा, दूध दही का है खाना, साहस का यह बिगुल बजाता, मेरा देश है हरियाणा। गीता का बहता ज्ञान जहाँ, शिक्षा में कृषि विज्ञान जहाँ, मैं पूजूँ उस माटी को, है दूध दही की खान जहाँ, धर्मक्षेत्र या कर्मक्षेत्र हो, हरियाणा सबसे आगे, है नहीं असम्भव काम कोई, जब दृढ़ निश्चय इनका जागे, योग करें व निरोग रहें, सारी दुनिया को सिखलाना,  साहस ......................। देश प्रेम जिनके दिल में, हैं ऐसे वीर जवान यहाँ,  आतंकवाद या मैदाने जंग, छोड़े अमिट निशान यहाँ, करगिल या सैक्टर लाहौर हो, अद्भुत नाम कमाया है, जान गई पर आन गई न, ये परचम लहराया है, ले कदम ताल, चले वीर लाल, झुकता है सारा ज़माना, साहस ............................। खेलों में नाम है जग जाहिर, है छोटा सा पर बड़े काम, कुश्ती, क्रिकेट और कबड्डी, मुक्केबाजों से बढ़ी शान, नहरों में बहता शीतल जल, खेतों में सुरभित हरियाली, गाँव-गाँव बिजली पानी है, सड़कों की तो बात निराली, खेती किसान है इसकी जान, और वीर है बाँका मस...

Don't rush

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 ए क बार में एक दिन को जीओ, दौड़ न लगाओ।  Live One Day at a time don't rush  अपने जीवन को दिनों में बाँट लो और एक समय में एक दिन का आनन्द लो। सभी कल (पिछले और आने वाले) को बंद कर दो। तब तुम्हें केवल एक दिन की ही समस्याओं पर विजय प्राप्त करनी पड़ेगी और कोई भी व्यक्ति एक दिन की समस्याओं को तो जीत ही सकता है। एक जंगल में एक छोटा सा खरगोश रहता था, जिसका नाम था चिक्कू। चिक्कू हमेशा भविष्य की चिंता में रहता था। जब वह गाजर खा रहा होता, तो सोचता कि कल खाना मिलेगा या नहीं। जब वह धूप सेकता, तो उसे आने वाली बारिश का यह डर सताता। वह हर पल बस दौड़ता रहता था—कभी खाने के पीछे, तो कभी खयाली डर के पीछे। एक दिन उसकी मुलाकात एक बूढ़े कछुए से हुई, जो बड़े आराम से एक पेड़ के नीचे बैठा ताजी घास चबा रहा था। चिक्कू ने हैरानी से पूछा, "दादा, आप इतने शांत कैसे हैं? क्या आपको कल की फिक्र नहीं? अगर हम आज तेजी से दौड़ेंगे नहीं, तो पीछे छूट जाएंगे!" कछुआ मुस्कुराया और बोला, "बेटा, हम अक्सर कल की तैयारी में आज को जीना भूल जाते हैं। अगर तुम आज का खाना भी कल के डर में खाओगे, तो तुम्हें उसका स्वाद कभी नही...

Don't imagine problems

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जीवन में समस्याओं और दुर्घटनाओं की कल्पना मत करो, जब वे आ जाएं तो केवल उनका सामना करो।  Don't imagine problems and mishappening in life, just face them as they come. कुछ लोग भविष्य में आने वाली समस्याओं की कल्पना करने में बहुत सा समय बिता देते हैं या व्यर्थ में गवां देते हैं, जैसे कहीं ऐसा या वैसा उनके जीवन में घटित न हो जाए। इस सम्बन्ध में कृपया याद रखो कि जीवन में आने वाली समस्याओं और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का, जब वे आएं, तब केवल उनका सामना किया जाना चाहिए। एक व्यक्ति को  भविष्य की संभावित समस्याओं पर लगातार मन को केन्द्रित नहीं करना चाहिए।  उदाहरण के लिए, यह मत सोचो कि ‘यदि मुझे केंसर हो गया तो क्या होगा? यदि मेरे बच्चे मुझे बुढ़ापे में अकेला छोड़ गए, तो क्या होगा? यदि मेरी नौकरी छूट गई तो क्या होगा?’ आदि। वास्तव में तुम पाओगे कि तुम्हारी कल्पना की हुई 99ः% बातें  कभी घटित नहीं होती। वे केवल तुम्हारे शंकाग्रस्त मन और व्यर्थ की कल्पनाओं की उपज हैं।  जैसा पहले बताया गया है, यदि कोई दुर्घटना घट भी जाय तो तुम्हारे अंदर हमेशा उन्हें संभालने की ताकत होनी चाहिए।  ...

जीवन की रेल

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जीवन की  रेल  छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की....२   हंसना रोना जागना सोना खाेना पाना, सुख दुःख दुःख सुख   छुक छुक छुक छुक..........  1) छोटी-छोटी सी बातों से, मोटी-मोटी खबरों तक..  ये गाड़ी ले जाएगी हमको, मां की गोद से कब्रों तक .. सब चिल्लाते रह जाएंगे, रुक रुक रुक रुक रुक...... छुक छुक छुक छुक ...........। 2) सामां बांध के रखो लेकिन चोरों से होशियार रहो.....२  जाने कब चलना पड़ जाए ,चलने को तैयार रहो.....२  जाने कब सीटी बज जाए, सिग्नल जाए झुक ..... छुक छुक छुक छुक ........। 3) पाप और पुण्य की गठरी बांधे, सत्य नगर को जाना है, जीवन नगरी छोड़ के हमको दूर सफर को जाना है..... ये भी सोच ले हमने क्या-क्या, माल किया है बुक...... छुक छुक छुक छुक........। 4) रात और दिन इस रेल के डिब्बे, और सांसों का इंजन है ...२ उमर है  इस गाड़ी के पहिए और चिता स्टेशन है ..२ जैसे दो पटरी हों वैसे,  साथ चले सुख दुःख  ........ छुक छुक छुक छुक........। द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणा...

Avoid the strain

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    दूसरों को प्रभावित कर पाने के तनाव को छोड़ दो।  Avoid the strain of impressing others. आधुनिक समाज में एक आदमी के लिए तनाव के बड़े स्रोतों में से एक यह है कि वह दूसरों की नज़रों में हमेशा ऊँचा उठना चाहता है। जब कि असल में किसी को पता नहीं होता कि वह उस स्तर पर है भी या नहीं। हम दूसरों के द्वारा नापसंद हो कर नहीं रह सकते। दूसरों की राय का डर सबसे बड़ी धमकी है, जो आधुनिक मनुष्य ने अपने लिए बना ली है। हम इस भयंकर तनाव को पहचानने में असफल हो जाते हैं जो अपने ऊपर दूसरों की दृष्टि में ऊँचा उठने के लिए डाल रहे हैं। दूसरों को प्रभावित करने और उससे आनन्द प्राप्त करने की कोशिश में तुम अप्रत्यक्ष रूप से अपनी ख़ुशी की चाबी दूसरे को थमा रहे हो, अर्थात् यदि वे चाहें तो तुम्हें ख़ुश कर देंगे और यदि वे चाहें तो तुम्हारे जीवन को दुःखमय बना देंगे। तुम केवल दूसरों के हाथों की कठपुतली बन जाओगे, जो अपनी पसंद की धुन पर तुम्हें नचाएंगे। अन्य शब्दों में दूसरों की दया पर अपनी ख़ुशी को गिरवी रख कर तुम एक दास या भिखारी के स्तर तक अपने आप को नीचा गिरा दोगे। तुम्हारी ख़ुशी और सन्तोष तुम्हारे अन्दर ...

नर्क कहाँ है?

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  नर्क क्या है और कहाँ है?  अज्ञानता नरक है अन्ध विश्वास नर्क है  कर्म काण्ड, मूर्खता नर्क है  असाध्य रोग है तो नर्क है  राग है तो नर्क है  द्वेष है तो नर्क है  क्रोध लोभ है तो नर्क है  अभाव है तो नर्क है  प्रभाव है तो नर्क है  पद उपाधि का अभिमान नर्क है  उम्मीद इच्छा है तो नर्क है  अपेक्षा आकांक्षा है तो नर्क है  व्याभिचार है तो नर्क है  झूठ और बेईमानी है तो नर्क है  दुष्कर्म अत्याचार नर्क है  दृष्टि शब्द, रस, गन्ध, स्पर्श में जीना भी नर्क है  देहाभिमान, धन गुमान नर्क है  अधर्म पर चलना नर्क है  ज्ञानी आत्मज्ञानी आत्मदर्शी नहीं,  ईश्वर से दूर घोर नर्क गामी है  ईश्वर का सान्निध्य ही स्वर्ग है, नरक की कोई अलग नगरी नहीं   अपने अन्दर नर्क है  सावधान रहें  इति सिद्धम द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसर...

Cope with one problem at a time

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  एक समय में एक समस्या का सामना करो। Cope with one problem at a time  हम सब जानते हैं कि हम अनगिनत समस्याओं से घिरे हुए हैं। यदि हम एक ही समय में सभी समस्याओं के बारे में सोचने लगें और उनका सामना करने लगें तो हम पागल हो जाएंगे और यहां तक कि एक भी समस्या का हल करने में समर्थ नहीं होंगे। सही तरीका यह है कि तुम अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार सभी समस्याओं की सूची बना लो और तब एक समय में केवल एक ही समस्या पर ध्यान केन्द्रित करो। अस्थाई तौर पर अन्य सभी समस्याओं को भुला दो।  एक गाँव में एक बूढ़ा मूर्तिकार रहता था, जिसे एक बहुत विशाल और कठिन पत्थर से मूर्ति तराशने का काम मिला। पत्थर इतना बड़ा था कि मूर्तिकार उसे देखकर घबरा गया और सोचने लगा, "मैं इसे अकेले कैसे पूरा करूँगा?" वह कई दिनों तक बस पत्थर को देखता रहा और काम शुरू ही नहीं कर पाया। उसकी चिंता देख उसके मित्र ने एक सलाह दी: "पूरे पत्थर को मत देखो। बस आज उस एक हिस्से को देखो जिसे तुम अभी तराश सकते हो।" मूर्तिकार को बात समझ आ गई। उसने पूरे पहाड़ जैसी समस्या को देखना छोड़ दिया और केवल उस छोटे से हिस्से पर ध्यान दिया जो उसके ...

स्वर्ग कहाँ है?

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  स्वर्ग क्या है और कहाँ है? वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से सद्ज्ञान है, तो स्वर्ग है सत्य, विश्वास है, तो स्वर्ग है योग और निरोग है, तो स्वर्ग है प्रेम निस्वार्थ है, तो स्वर्ग है वैराग्य है, तो स्वर्ग है ज़रूरत में जीना स्वर्ग है कुछ नहीं चाहिए, तो स्वर्ग है सम भाव में जीना स्वर्ग है ब्रह्मचर्य है, तो स्वर्ग है सत् कर्म, ईमानदारी ही स्वर्ग है देह भान से परे स्वर्ग है धर्म पर चले, तो स्वर्ग है आत्मज्ञानी है, तो स्वर्ग है आत्मदर्शी है, तो स्वर्ग है परमात्म दर्शन परमानंद है स्वर्ग की भी कोई विशेष नगरी नहीं स्वर्ग यहीं है, अपने अन्दर है समझ दारी से जीना ही स्वर्ग है ईश्वर का सानिध्य ही स्वर्ग है, ईमानदार प्रयास की आवश्यकता है सावधान रहें  इति सिद्धम् द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद।

समय की महिमा

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  समय की महिमा वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से समय की महिमा जो समझ न पाए वो परेशान है, जो समझ गया उस के लिए वरदान है। समय ईश्वर की बेमिसाल रचना है।  सारी सृष्टि का चक्र समय बद्ध है।  एक पल भी इधर उधर नहीं होता। समय ओऽम नमः शिवाय है।  समय सत्य शिवम् सुन्दरम् है।  समय सत् चित आनंद है।  समय सत श्री अकाल है। समय विधि और विधान है।  समय ज्ञान और विज्ञान भी है। समय अभिशाप है तो वरदान भी है।  समय अमंगल है तो कल्याण भी है।  समय प्रयोग है तो परिणाम भी है। समय रिद्धि भी है सिद्धी भी है। समय निमित है निर्माण भी है। समय जीवन है तो निर्वाण भी है। समय समस्या है तो समाधान भी है।  समय भक्ति है तो शक्ति भी है। समय काल चक्र है तो महाकाल भी है। समय कर्म है तो समय धर्म भी है।  समय सृष्टा है तो दृष्टा भी है।  समय उत्कर्ष है तो अपकर्ष भी है। समय पथ है तो मजिल भी है। समय की कद्र कर समझ तू ए बन्दे! समय भक्त भी है भगवान भी है। समय बेनूर को नूर बना देता है  समय बेअदब को दस्तूर बना देता है  समय को समझ और कद्र...

Learn to change your thoughts

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अपने विचारों को शीघ्रता व सजगता से बदलना सीखो।  Learn to change your thoughts quickly and conciously. इस समय तुम्हारी चित्त-वृत्ति (mood) उन विचारों पर निर्भर है, जो वर्तमान समय में तुम्हारे मन में हैं। यदि तुम उन विचारों को बदल दो तथा कुछ और सोचना शुरू कर दो तो अवश्य ही तुम्हारी चित्त-वृत्ति (mood) बदल जाएगी। तुम्हारे पास एक साधारण सा सूत्र है। जब भी तुम व्याकुलता महसूस करो, केवल अपने मन और विचारों को किसी दूसरी जगह लगा दो। वह व्याकुलता उसी समय दूर हो जायगी। उदाहरण के लिए मान लो तुम अपने लड़के की सेहत के लिए चिन्तित हो जो हॉस्टल में रहता है। ऐसी स्थिति में तुम अपने विचारों को किसी ऐसे आवश्यक काम की ओर मोड़ दो जो तुम्हें कल दफ्तर में खत्म करना है या उन मीटींग व मुलाकातों की ओर, जो तुम्हें कल दफ्तर में करनी हैं। उन चिन्ता के विचारों को उसी समय दूर होना पड़ेगा क्योंकि दिमाग़ एक बार में कई बातें नहीं सोच सकता। इसलिए किसी के द्वारा व्याकुल किया जाना संभव नहीं है, जब तक तुम उस के बारे में सोचना न शुरू कर दो।  जादू की छड़ी (दृष्टिकोण का बदलाव) एक शहर में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। वह...

अधिकार का वरदान

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  मानव को कर्म के अधिकार का वरदान  वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से ईश्वर ने मानव को ज्ञान जिज्ञासा विवेक युक्त कर्म करने का अधिकार दिया है। अच्छा और बुरा भी दिया है।  सकारात्मकता जीवन है, स्वर्ग योग है; नकारात्मक मृत्यु है, नरक है और भोग है। चुनाव आप का है।  दिन - रात                    गर्मी - सर्दी                  ज्ञान - अज्ञान  विश्वास - अन्धविश्वास धर्म - अधर्म                  सुख - दुःख                   अच्छा - बुरा सत्य - असत्य सत्कर्म - दुष्कर्म इच्छा - त्याग जागना - सोना हंसना - रोना लोभ - क्रोध सात्विक - तामसिक रस - गन्ध दृष्टि - शब्द योग - भोग राग - द्वेष  पाप - पुण्य   हिंसा - अहिंसा  सद्कर्म - कर्मकाण्ड  बेईमानी - ईमानदारी  - यह सच है कि सृष्टि की रचना की है मैंने, यह भी सच है कि हर सुविधा की व...

ईश्वर नहीं होता खफा

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 ईश्वर नहीं होता खफा वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से एक तुम्हीं हो, जो मुझ से न होवे खफा, प्रभु! क्यों न करूं, मैं साथ तेरे वफा? एक तूने ही मुझ को, लगाया गले, ज़िन्दगी में तुम्हीं ,मेरे संग संग चले, तूने मुझ को निकाला है, उस दौर से, जब लगी चोट दिल को, बड़े जोर से, हाथ थामा है तूने, मेरा हर दफा ........... वक्त ऐसे ही इंसान को, आजमाता है, आ कर तू ही ज़मी पर, उस को समझाता है, सब से ऊँचा ही तेरा, ये किरदार है, जिस ने समझा तुझे, वो समझदार है, खुद को जोड़ा जो तुम से, मिली है शफा, हाथ थामा है तूने, मेरा हर दफा ........  मुझ को मालूम है, तुम में है ताकत बड़ी, आज दुनिया ये तेरे ही, दम पे खड़ी, हौसला मुझ में तुम ने, गजब भर दिया, मेरे पैरों पर मुझ को, खड़ा कर दिया, तेरा बन के मुझ को, हुआ है नफा।  हाथ थामा है तूने, मेरा हर दफा द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए...

Continue to progress

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दुर्घटनाओं और दुर्भाग्यों में भी आगे बढ़ना जारी रखो। Continue to progress even in tragedies and misfortunes कुछ लोग ऐसे होते हैं जब उन्हें किसी दुर्घटना या अवांछित परिस्थिति का सामना करना पड़ता है तब वे अपने जीवन को पूर्णतया निष्क्रिय और नीरस बना लेते हैं। वे निराशा और हताशा से ग्रस्त हो जाते हैं, जैसे जीवन में कुछ भी शेष नहीं रहा हो। जब तक दुर्घटना का भावनात्मक प्रभाव उनके मन से नहीं जाता, तब तक वे अपना जीवन इसी दुःखदाई अवस्था में व्यतीत करते रहते हैं और इसी में उनके जीवन का सबसे मूल्यवान समय चला जाता है। टूटे पंख और नई उड़ान रवि एक मेधावी छात्र था, जो एथलीट बनकर देश का नाम रोशन करना चाहता था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक सड़क हादसे में उसने अपना बायां पैर खो दिया। हादसे के बाद रवि बुरी तरह टूट गया। उसके पास 'दुर्भाग्य' को कोसने के अलावा कुछ नहीं था। वह कमरे में बंद रहता और अपने सुनहरे अतीत को याद कर रोता। उसे लगता कि अब उसकी जिंदगी खत्म हो चुकी है। एक दिन, उसके पड़ोस में रहने वाले बुजुर्ग, जिन्हें लोग 'बाबा' कहते थे, रवि के पास आए। उन्होंने रवि के कमरे के बाहर लग...