हमारी पहचान
हमारी पहचान "मम्मी मैंने तुमसे हजार बार कहा है- कि चिंटू (आरव) के सामने अपनी ये गंवारी भाषा मत बोला करो। कल उसका 'इंटरनेशनल स्कूल' में इंटरव्यू है। अगर उसने वहां जाकर 'कांई है, 'कांई हाल हे' या "राम-राम" बोल दिया न, तो मेरी नाक कट जाएगी। तुम्हें पता है वहां डोनेशन देकर भी एडमिशन नहीं मिलता है सिर्फ स्टेटस और क्लास देखी जाती है।" पवन ने अपनी माँ, गुणमाला देवी पर झुंझलाते हुए कहा। गुणमाला देवी, जो गांव से आई थीं और शुद्ध देसी बोली बोलती थीं, बेटे की डांट सुनकर चुप हो गईं। उन्होंने अपनी पोटली में से जो लड्डू निकाले थे, उन्हें वापस अंदर रख लिया। उनका मन था कि पोते को अपने हाथ के बने लड्डू खिलाएं और ढेर सारा आशीर्वाद दें । लेकिन बेटे के 'स्टेटस' के आगे उनकी ममता सहम गई। पवन और उसकी पत्नी, रिया, अपने पांच साल के बेटे आरव (चिंटू) को पिछले एक महीने से तोते की तरह रटा रहे थे। "Say हेलो," "Say गुड मॉर्निंग," "माय नेम इज़ आरव।" घर का माहौल ऐसा था जैसे कोई मिलिट्री ट्रेनिंग चल रही हो...