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ईश्वर स्वयं आते हैं

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ईश्वर स्वयं आते हैं  एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा "बीरबल! मैंने सुना है कि भगवान विष्णु एक हाथी की जान बचाने के लिए खुद आये थे  ।   बीरबल ने कहा  - जी महाराज !!. वो हाथी भगवन विष्णु का भक्त था और नदी से पानी पीते समय उसको मगर ने पकड़ लिया तो हाथी ने भगवान विष्णु को मदद ले लिए पुकारा, तो भगवान् ने स्वयं उस हाथी की रक्षा के लिए मगर का वध किया  ।   अकबर बोले - तो इस बात के लिए भगवान् को खुद आने की क्या जरूरत ? वो तो सब कुछ  बैठे बैठे ही कर सकते थे ।  किसी और को  हुक्म दे दिया होता ।   बीरबल  ने कहा - हुजुर! इसका जवाब आपको कुछ दिन के बाद दूंगा  ।  कुछ समय बाद दरबार के लोगों ने यमुना नदी में नौका विहार करने की योजना बनायी ।  अकबर उनके सेनापति अंगरक्षक और सभी दरबारी अलग अलग नावों में सवार होकर नदी में निकल पड़े ।   तभी एक छपाक की आवाज हुई और कोई चिल्लाया - शहजादे  सलीम नदी  में गिर गए !  अकबर ने तुरंत उस तरफ पानी में छलांग लगा दी और  डूबते हुए शहजादे को पकड़ कर  उठाया,  लेकिन ये क्या ?.व...

पूर्व के 24 महापाप के कारण

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पूर्व के 24 महापाप के कारण विद्यारण्य नाम के एक बहुत बड़े संन्यासी थे। उनका जन्म एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ। गरीब होने के कारण उनके पास अपने माता-पिता के पोषण के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी।  वह ब्राह्मणत्व में स्थित थे और उन्होंने संतों का संग किया था। धन की व्यवस्था के लिए उन्होंने गायत्री का अनुष्ठान किया।  चौबीस लाख बार गायत्री मंत्र का जप करने से एक पुरश्चरण होता है। उन्होंने ऐसे तेईस पुरश्चरण किए, परंतु उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ। .इस समय में उनके माता पिता का भी निधन हो गया। उनकी आयु भी अधिक हो गई और उन्होंने संन्यास ले लिया!  जैसे ही उन्होंने सन्यास लिया, माता गायत्री उनके सामने प्रकट होकर बोलीं, ‘तुम्हें जो भी माँगना हो माँग लो, मैं तुम्हें कुछ भी देने के लिए तत्पर हूँ।’  उन्होंने कहा, ‘अब तो मैं संन्यासी हूँ, अब मुझे कुछ नहीं चाहिए। उन्होंने पूछा आप पहले क्यों नहीं आईं?’  तब माता गायत्री ने कहा, ‘तुम्हारे पूर्व के चौबीस महापाप थे। तुम्हारे तेईस पाप पुरश्चरण से और अंतिम पाप संन्यास लेने से नष्ट हुआ और इसके बाद मैं तुरंत आ गई।’ इस कहानी से हमें यह पता चल...

अभागा राजा

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  अभागा राजा और भाग्यशाली दास एक बार एक गुरुदेव अपने शिष्य को अहंकार पर एक शिक्षाप्रद कहानी सुना रहे थे।  एक विशाल नदी जो कि सदाबहार थी, उसके दोनों तरफ दो सुन्दर नगर बसे हुये थे! नदी के उस पार महान और विशाल देव मन्दिर बना हुआ था! नदी के इधर एक राजा था। राजा को बहुत अहंकार था। कुछ भी करता तो अहंकार का प्रदर्शन करता। वहाँ एक दास भी था, बहुत ही विनम्र और सज्जन! एक बार राजा और दास दोनों नदी के पास गये। राजा ने उस पार बने देव मंदिर को देखने की ईच्छा व्यक्त की। दो नावें थीं। रात का समय था। एक नाव में राजा सवार हुआ और दुसरी में दास सवार हुआ। दोनों नावों के बीच मे बड़ी दूरी थी! राजा रात भर चप्पू चलाता रहा, पर नदी के उस पार न पहुँच पाया। सूर्योदय हो गया, तो राजा ने देखा कि दास नदी के उस पार से इधर आ रहा है! दास आया और देव मन्दिर का गुणगान करने लगा। तो राजा ने कहा - तुम रातभर मन्दिर मे थे! दास ने कहा - हाँ और राजाजी! क्या मनोहर देव प्रतिमा थी, पर आप क्यों नही आये! अरे मैंने तो रात भर चप्पू चलाया पर ..... गुरुदेव ने शिष्य से पूछा - वत्स! बताओ कि राजा रातभर चप्पू चलाता रहा, पर फिर भी उस पा...

विश्वास की शक्ति - हरिनाम

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  विश्वास की शक्ति - हरिनाम  एक गांव में एक नौजवान को सत्संग सुनने की बड़ी लगन थी . किसी से पता चला कि गांव के बाहर नदी के उस पार परम संत तुलसी दास जी ने डेरा लगाया हुआ है और आज उनका संध्या को  सत्संग का आयोजन है l वह नौका के द्वारा नदी पार करके  सत्संग में पहुंच गया ! प्रेमी था, बड़े प्यार से सत्संग सुना और बड़ा आनंद आया! जब जाने लगा तो थोड़ा अंधेरा हो गया ! देखा कि तूफान बहुत ज्यादा था और बारिश के कारण नदी बड़े तूफान पर चल रही थी ! अब जितनी नौका वाले मल्लाह थें सब डेरे में रुक गए कोई नौका से आने जाने का साधन नहीं है !  संत तुलसी दास जी के पास पहुंचा और बोला - महाराज! मेरी नई नई शादी हुई है, मेरी पत्नी भी इस गांव में अनजान है और घर में मेरे कोई नहीं है। मेरे पास गहना वगैरा बहुत है, नकदी भी है और हमारे गांव में चोर लुटेरे भी बहुत हैं तो किसी भी हालत में मुझे वहां जाना ही पड़ेगा, नहीं तो पता नहीं क्या हो जाएगा.  संत तुलसी दास जी ने एक कागज पर कलम से कुछ लिखा और बिना बताए उस कागज को मोड़कर और उसके हाथ में पकड़ा दिया और कहा - इसको खोलकर मत देखना कि इसमें क्या ...

भगवान के भक्त निर्धन क्यों?

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  भगवान के भक्त निर्धन क्यों?           भगवान कृष्ण के भक्त निर्धन जबकि अन्य देवी-देवताओं के धनवान, ऐसा क्यों? भगवान, जिनकी सेवा स्वयं लक्ष्मी जी करती हैं और जो स्वयं लक्ष्मी पति कहलाते हैं, फिर उनके भक्त निर्धन जबकि अन्य देवी-देवताओं के धनवान, यह कैसे हो सकता है? शास्त्रों के द्वारा हम जान सकते हैं कि शिवजी कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं, जिनके पास स्वयं रहने के लिए कोई भवन नहीं, पर रावण ने अपनी भक्ति से प्रसन्न कर उनसे सोने की लंका मांग ली। दूसरी ओर भगवान स्वयं पांडवों  के साथ थे, पर पांडवों को 13 वर्ष वन में रहना पड़ा जबकि भगवान के पास ऐसे अन्य कितने लोक हैं, जो पांडवो को दे सकते थे। पर अंत समय में हम सभी जानते हैं कि रावण का क्या हुआ और पांडवों की भगवान ने किस प्रकार रक्षा की । इस प्रश्न को महाराज परीक्षित सुखदेव गोस्वामी से पूछते हैं  कि भगवान ऐसा क्यों करते हैं ? सुखदेव गोस्वामी बताते हैं कि भगवान स्वयं कहते है - यदि मैं किसी पर विशेष कृपा करता हूँ तो उसका लोभ, लालच, मोह आदि सब अवगुण  छीन लेता हूँ।      ...

भाग्य में लिखा मिट नहीं सकता

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 भाग्य में लिखा मिट नहीं सकता  चंदन नगर का राजा चंदन सिंह बहुत ही पराक्रमी एवं शक्तिशाली था । उसका राज्य भी धन-धान्य से पूर्ण था । राजा की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। एक बार चंदन नगर में एक ज्योतिषी पधारे। उनका नाम था भद्रशील। उनके बारे में विख्यात था कि वह बहुत ही पहुंचे हुए ज्यातिषी हैं और किसी के भी भविष्य के बारे में सही-सही बता सकते हैं। वह नगर के बाहर एक छोटी कुटिया में ठहरे थे। उनकी इच्छा हुई कि वह भी राजा के दर्शन करें। उन्होंने राजा से मिलने की इच्छा व्यक्त की और राजा से मिलने की अनुमति उन्हें सहर्ष मिल गई।  राज दरबार में राजा ने उनका हार्दिक स्वागत किया। चलते समय राजा ने ज्योतिषी को कुछ हीरे-जवाहरात देकर विदा करना चाहा, परंतु ज्योतिषी ने यह कह कर मना कर दिया कि वह सिर्फ अपने भाग्य का खाते हैं। राजा की दी हुई दौलत से वह अमीर नहीं बन सकते।  राजा ने पूछा - ‘इससे क्या तात्पर्य है आपका गुरुदेव?’ ‘कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत और मेहनत से गरीब या अमीर होता है। यदि राजा भी किसी को अमीर बनाना चाहे तो नहीं बना सकता। राजा की दौलत भी उसके हाथ से निकल जाएगी।’  यह सुनक...

मैल और धूल

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मैल और धूल  एक सेठ नदी पर आत्महत्या करने जा रहा था। संयोग से एक लंगोटीधारी संत भी वहाँ थे। संत ने उसे रोक कर कारण पूछा, तो सेठ ने बताया कि उसे व्यापार में बड़ी हानि हो गई है।  संत ने मुस्कुराते हुए कहा- बस इतनी सी बात है? चलो मेरे साथ, मैं अपने तपोबल से लक्ष्मी जी को तुम्हारे सामने बुला दूंगा। फिर उनसे जो चाहे माँग लेना। सेठ उनके साथ चल पड़ा। कुटिया में पहुँच कर, संत ने लक्ष्मी जी को साक्षात् प्रकट कर दिया। वे इतनी सुंदर, इतनी अधिक सुंदर थीं कि सेठ अवाक् रह गया और धन माँगना भूल गया। देखते देखते सेठ की दृष्टि उनके चरणों पर पड़ी। उनके चरण मैल से सने थे।  सेठ ने हैरानी से पूछा- माँ! आपके चरणों में यह मैल कैसी?  माँ- पुत्र! जो लोग भगवान को नहीं चाहते, मुझे ही चाहते हैं, वे पापी मेरे चरणों में अपना पाप से भरा माथा रगड़ते हैं। उनके माथे की मैल मेरे चरणों पर चढ़ जाती है। ऐसा कहकर लक्ष्मी जी अंतर्ध्यान हो गईं।  अब सेठ धन न माँगने की अपनी भूल पर पछताया, और संत चरणों में गिर कर, एकबार फिर उन्हें बुलाने का आग्रह करने लगा। संत ने लक्ष्मी जी को पुनः बुला दिया। इस बार लक्ष्मी जी क...

तेरी बंसी की धुन सुन कर

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तेरी बंसी की धुन  सुन कर   धुन - मुझे तेरी मुहब्बत  का ..... तेरी बंसी की धुन  सुन कर, मैं बरसाने से आई हूँ। मेरे रसिया, ओ मनबसिया, मैं मुरली साथ लाई हूँ। (1)  सुना है मेरे मनमोहन, तुम माखन भी चुराते हो। मेरे रसिया, ओ मनबसिया, मैं माखन साथ लाई हूँ। तेरी.... (2)   सुना है मेरे मनमोहन, तुम गैया भी चराते हो। मेरे रसिया, ओ मनबसिया, मैं ग्वाले साथ लाई हूँ। तेरी.... (3) सुना है मेरे मनमोहन, तुम रास भी रचाते हो। मेरे रसिया, ओ मनबसिया, मैं सखियां साथ लाई हूँ। तेरी.... (4)   सुना है मेरे मनमोहन, तुम गीता भी सुनाते हो। मेरे रसिया, ओ मनबसिया, मैं अर्जुन बन के आई हूँ। तेरी.... (5)   सुना है मेरे मनमोहन, तुम अपना भी बनाते हो। मेरे रसिया, ओ मनबसिया, मैं तेरी बनने आई हूँ। तेरी.... (6)   सुना है मेरे मनमोहन, तुम सत्संग भी सुनाते हो। मेरे रसिया, ओ मनबसिया, मैं संगत साथ लाई हूँ। तेरी.... द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचार...

गुलाब का घमंड

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  गुलाब का घमंड     (एक शिक्षाप्रद कहानी)  वसंत ऋतु थी। जंगल के बीचों-बीच एक गुलाब का पौधा खिला हुआ था। उसके फूल बेहद सुंदर थे और वह अपनी सुंदरता पर इतराता रहता था। पास ही कुछ लंबे-चैड़े चीड़ के पेड़ खड़े थे। वे आपस में बातचीत कर रहे थे। एक चीड़ ने गुलाब की ओर देखकर कहा, “गुलाब के फूल कितने सुंदर होते हैं। काश! मैं भी इतना सुंदर होता।” दूसरे चीड़ ने उसे समझाया, “मित्र, हर किसी के पास सब कुछ नहीं हो सकता। तुम्हारे पास मजबूती है, ऊँचाई है, छाया है और वह भी कम सुंदर नहीं है।” गुलाब ने यह बात सुन ली और अपने सौंदर्य पर और अधिक घमंड कर बैठा। उसने गर्व से कहा, “इस जंगल में सबसे सुंदर मैं ही हूँ!” तभी पास ही खिला सूरजमुखी का फूल बोला, “गुलाब, ऐसा कैसे कह सकते हो? इस जंगल में बहुत सारे सुंदर फूल हैं और तुम बस उनमें से एक हो।” गुलाब हँस पड़ा, “लेकिन सब मेरी ही तारीफ करते हैं और देखो उस नागफनी को - कितना कुरूप है! उस पर तो कांटे ही कांटे हैं। कोई उसे देखना भी नहीं चाहता।” चीड़ के पेड़ ने टोका, “गुलाब, तुम खुद भी कांटों से भरे हो, फिर भी तुम सुंदर हो। हो सकता है, नागफनी में भी कोई अच्छाई...

प्रायश्चित

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  प्रायश्चित एक कस्बे में एक गरीब महिला जिसे आँखों से कम दिखता था, भिक्षा माँगकर किसी तरह अपना जीवन यापन कर रही थी। एक दिन वह बीमार हो गई, किसी दयावान व्यक्ति ने उसे इलाज के लिये 500रु का नोट देकर कहा कि माई! इससे दवा खरीद कर खा लेना। वह भी उसे आशीर्वाद देती हई अपने घर की ओर बढ़ गई। अंधेरा घिरने लगा था, रास्ते में एक सुनसान स्थान पर दो लड़के शराब पीकर ऊधम मचा रहे थे।  वहाँ पहुँचने पर उन लड़कों ने भिक्षापात्र में 500रु का नोट देखकर शरारतवश वह पैसा अपने जेब में डाल लिया, महिला को आभास तो हो गया था, पर वह कुछ बोली नहीं और चुपचाप अपने घर की ओर चली गई। सुबह दोनों शरारती लड़कों का नशा उतर जाने पर वे अपनी इस हरकत के लिये शर्मिंदा महसूस कर रहे थे।  वे शाम को उस भिखारिन को रुपये वापस करने के लिये इंतजार कर रहे थे। जब वह नियत समय पर नहीं आयी, तो वे पता पूछकर उसके घर पहुँचे, जहाँ उन्हें पता चला कि रात्रि में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गयी और दवा न खरीद पाने के कारण वृद्धा की मृत्यु हो गई थी। यह सुनकर वे स्तब्ध रह गये कि उनकी एक शरारत ने किसी की जान ले ली थी।  इससे उनके मन में स्वयं के प...

How to remain ever happy? (continued-3)

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How to remain ever happy? (continued-3) जीवन का आनन्द प्राप्त करने के लिए ‘हर पल मुस्कुराइए’   (25) दुनिया में कुछ भी अत्यावश्यक नहीं है ।  There is nothing urgent or indispensable in the world. (26) दुनिया में कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता ।  There is nothing free of cost  in this world. (27) काम का आनन्द लो, फल की चिन्ता न करो । Enjoy the work, don’t  worry the fruits. (28) नए बदलाव व विकास को स्वीकार करने में लचीलापन दिखाओ । Be flexible for adopting new changes and improvements. (29) लालच को दूर करो, सब वस्तुएं भगवान की संपत्ति हैं। Avoid greediness, everything belongs to God.  (30) छोटे काम भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं जितने बड़े काम ।  Small things are as important as big things. (31) किसी विषय को चुनने या निर्णय लेने में चंचलता और पागलपन न दिखाओ ।  Don't show fickle mindedness and madness in choosing or deciding something. (32) जितना ज़्यादा तुम दोगे, उतना ही ज़्यादा मिलेगा ।   The more you give, the more you get. (33) स्वार्थ को त...

How to remain ever happy? (continued-6)

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How to remain ever happy? (continued-6) जीवन का आनन्द प्राप्त करने के लिए ‘हर पल मुस्कुराइए’ (61) अच्छे फ़ोटो और तस्वीरें लगाओ।    Install good photos and pictures. (62) अपने भविष्य को जानने के लिए बहुत अधिक उत्सुक न हों। Don’t be too anxious to know your future. (63) अपनी इच्छाओं और इन्द्रिय सुख की लालसा पर नियंत्रण करो।  Check your desires and craving for sensual enjoyment. (64) धन की पागल दौड़ में आसक्त न बनो। Don’t  indulge in mad race of money. (65) अपनी सतत उन्नति का एकमात्र लक्ष्य लेकर इस दुनिया में जीओ और काम करो।   Live and work in this world with the sole aim of your constant development. (66) कोई वस्तु व्यर्थ न होने दो। Don’t waste any thing. (67) तुच्छ बातों पर उपद्रव मत करो।  .Don’t be fussy over trifles. (68) क्रोध कमज़ोरी की निशानी है।  Anger is a sign of weakness. (69) तुम दुनिया के लिए अत्यावश्यक नहीं हो।  You are not indispensable for the world. (70) अपनी कठिनाइयों या समस्याओं का दूसरों के सामने विज्ञापन न करो। 70.  Don...

How to remain ever happy? (continued-5)

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How to remain ever happy? (continued-5) जीवन का आनन्द प्राप्त करने के लिए ‘हर पल मुस्कुराइए’   (49) दुनिया को बदलने के लिए अपने आप को बदलो।   Change yourself to change the world. (50) दूसरों ने जो बुराइयां तुम्हारे साथ की हैं, उनका बदला न लो।  Don’t take revenge for the ills done by others. (51) शक और अविश्वास न करो, विश्वास करना सीखो। Avoid suspicious, doubts; have faith. (52) अपने कामों के प्रति ईमानदार, सत्यवादी और धार्मिक रहो। Be honest, truthful and righteous in your dealings.  (53) दुनिया में हर वस्तु का पक्ष और विपक्ष होता है, दुनिया प्रकृति से ही द्विसूचक होती है।  There are pros and cons in every thing of the world, world is duel in its nature. (54) अपने बच्चों को भगवान के बच्चे मानो। Consider your children as children of God.  (55) उचित रंग चुनो।   Choose appropriate colors. (56) अच्छा शारीरिक संतुलन बनाओ।  Maintain good postures. (57) मन को अच्छा लगने वाला संगीत सुनो।  Listen good soothing music. (58) जब भी तुम्हें अवसर म...

How to remain ever happy? (continued-9)

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  How to remain ever happy? (continued-9) जीवन का आनन्द प्राप्त करने के लिए ‘हर पल मुस्कुराइए’ (99) दुर्घटनाओं और दुर्भाग्यों में भी आगे बढ़ना जारी रखो।  continue to progress even in tragedies and misfortunes (100) अपने जीवनसाथी (पति या पत्नी) से सामान्य से अधिक आशाएं न रखो।  Don’t have supernormal expectations from your spouse. (101) एक बार में एक दिन को जीओ, दौड़ न लगाओ। Live One Day at a time don't rush  (102) अपने मन की गति को कम करो। Reduce the velocity of your mind  (103) क्या आपकी बातचीत प्राय: व्याकुलता और दिल को जलाने से समाप्त होती है? Does your conversation often end in irritation and heart burning? (104) एक समय में एक समस्या का सामना करो। Cope with one problem at a time  (105) अपने मन को निकम्मा मत छोड़ो, उसके सामने हमेशा कुछ लक्ष्य रखो। Don't leave your mind idol .keep always some goals before it  (106) जीवन में समस्याओं और दुर्घटनाओं की कल्पना मत करो, जब वे आ जाएं तो केवल उनका सामना करो। Don't imagine problems and mishappening in life; ju...