Think less and do more
सोचो कम, करो ज़्यादा। Think less and do more कुछ लोग अपना बहुत सारा समय सोचने और चिन्ता करने में ही व्यर्थ गंवाते है। वे अपनी कल्पना में ही बहुत सी योजनाएं बनाते हैं और लगातार सोचते रहते हैं कि वे यह करना चाहते हैं और वह करना चाहते हैं। यद्यपि उनके इरादे बुरे नहीं होते और असल में जीवन में कुछ सीखना और प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन वे जो चाहते हैं, उसे प्राप्त नहीं कर पाते, क्योंकि उनका तरीका ठीक नहीं है। वे जो प्राप्त नहीं कर सके उसी की हताशा और निराशा में रहते हैं। यह इसलिए है क्योंकि उनका बहुत सारा समय सोचने में खो जाता है और जब वे वास्तव में काम करते हैं, तो उनका मन केवल भविष्य की योजनायं बनाने में ही लगा रहता है। इसलिए वे अपने वर्तमान के कार्य पर भी ठीक तरह से ध्यान लगाने में समर्थ नहीं होते। एक गाँव में दो दोस्त रहते थे—आर्यन और कबीर। दोनों एक नया व्यवसाय शुरू करना चाहते थे। आर्यन बहुत योजनाएँ बनाता था। वह दिन-भर डायरी लेकर बैठता और सोचता, "अगर बारिश हुई तो क्या होगा? अगर ग्राहक नहीं आए तो क्या होगा? सबसे अच्छा मुहूर्त कब होगा?" वह महीनों तक बस 'परफेक्ट' प्लान बन...