बद्रीनाथ धाम
लीला से जन्मा बद्रीनाथ धाम यह कहानी बद्रीनाथ धाम की उत्पत्ति से जुड़ी एक बहुत ही प्रसिद्ध और रोचक पौराणिक कथा है। यह कथा मुख्य रूप से यह दर्शाती है कि कैसे भगवान विष्णु ने अपनी चतुराई और भगवान शिव ने अपनी उदारता के कारण इस पवित्र स्थान का आदान-प्रदान किया। यहाँ इस कहानी का मूल संदर्भ और सार दिया गया है: कथा का मूल भाव: 'लीला' और 'त्याग' इस कहानी को "बद्रीनाथ का छल" या "विष्णु की बाल लीला" के नाम से भी जाना जाता है। एक दिन नारायण यानी विष्णु के पास नारद गए और बोले, 'आप मानवता के लिए एक खराब मिसाल हैं। आप हर समय शेषनाग के ऊपर लेटे रहते हैं। आपकी पत्नी लक्ष्मी हमेशा आपकी सेवा में लगी रहती हैं, और आपको लाड़ करती रहती हैं। इस ग्रह के अन्य प्राणियों के लिए आप अच्छी मिसाल नहीं बन पा रहे हैं। आपको सृष्टि के सभी जीवों के लिए कुछ अर्थपूर्ण कार्य करना चाहिए।' इस आलोचना से बचने और साथ ही अपने उत्थान के लिए (भगवान को भी ऐसा करना पड़ता है) विष्णु तप और साधना करने के लिए सही स्थान की तलाश में नीचे हिमालय तक आए। वहां उन्हें मिला बद्रीनाथ, एक अच्छा-सा, छोटा...