एक विदेशी पर्यटक और संत
एक विदेशी पर्यटक और संत की कहानी एक बार एक विदेशी पर्यटक भारत आया। घूमते-घूमते उसने एक शांत जगह पर एक महात्मा (संत) को देखा।संत के पास रहने के नाम पर केवल एक छोटी-सी घास की कुटिया थी, पहनने के लिए गिनती के दो वस्त्र थे, और खाने-पीने के लिए बस एक कमंडल था। पर्यटक ने आश्चर्य से संत को देखा और पूछा, "महाराज, आपका बाकी का सारा सामान, फर्नीचर, अलमारी और कपड़े कहाँ हैं?" संत मुस्कुराए और उन्होंने पर्यटक से ही पलटकर एक सवाल पूछा, "अच्छा, तुम यह बताओ—तुम्हारा बाकी का सामान कहाँ है?" पर्यटक ने गर्व से कहा, "मेरा बाकी सामान? अरे, मैं तो एक विदेशी पर्यटक हूँ। मैं यहाँ कुछ दिनों के लिए घूमने आया हूँ, इसलिए मेरा सारा सामान मेरे होटल के बड़े सूटकेस में है।" संत ने शांत भाव से कहा, "बस! यही अंतर है। तुम इस दुनिया में केवल एक मुसाफिर या पर्यटक की तरह आए हो, फिर भी तुमने इतना सारा सामान जोड़ रखा है और उसे ढो रहे हो। जबकि मैंने यह जान लिया है कि यह शरीर और संसार भी मेरा स्थायी ठिकाना नहीं है। मैं इस संसार में केवल एक यात्री हूँ, इसलिए मैं अपने साथ कोई अनावश्यक बोझ (पर...