गुरु-दक्षिणा
गुरु-दक्षिणा एक बार एक शिष्य ने विनम्रता पूर्वक अपने गुरु जी से पूछा - गुरु जी! कुछ लोग कहते हैं कि जीवन एक संघर्ष है, कुछ अन्य कहते हैं कि जीवन एक खेल है और कुछ जीवन को एक उत्सव की संज्ञा देते हैं; इनमें कौन सही है? गुरु जी ने तत्काल बहुत ही धैर्य पूर्वक उत्तर दिया - पुत्र! जिन्हें गुरु नहीं मिला उनके लिए जीवन एक संघर्ष है, जिन्हें गुरु मिल गया, उनका जीवन एक खेल है और जो लोग गुरु द्वारा बताये गए मार्ग पर चलने लगते हैं, मात्र वे ही जीवन को एक उत्सव का नाम देने का साहस जुटा पाते हैं। यह उत्तर सुनने के बाद भी शिष्य पूरी तरह से संतुष्ट न था। गुरु जी को इसका आभास हो गया। वे कहने लगे - लो! तुम्हें इसी सन्दर्भ में एक कहानी सुनाता हूँ। ध्यान से सुनोगे, तो स्वयं ही अपने प्रश्न का उत्तर पा सकोगे। उन्होंने जो कहानी सुनाई वह इस प्रकार थी। एक बार की बात है कि किसी गुरुकुल में तीन शिष्यों नें अपना अध्ययन सम्पूर्ण करने पर अपने गुरु जी से यह बताने के लिए विनती की कि उन्हें गुरुदाक्षिणा में उनसे क्या चाहिए। गुरु जी पहले तो मंद मंद मुस्कुराये और फिर बड़े स्नेह पूर्वक कहने लगे - मु...