Posts

प्रभु नाम का जाप

Image
प्रभु नाम का जाप  एक बार एक गांव में बहुत से महात्मा आकर यज्ञ कर रहे थे और वह वृक्षों के पत्तों पर चंदन से  श्री कृष्ण का नाम लिखकर पूजा कर रहे थे। वह जगह गांव से बाहर थी। वहां एक आदमी अपनी बकरियों को  रोज घास चराने जाता था। साधु हवन यज्ञ करके वहां से जा चुके थे, लेकिन वह पत्ते वहीं पड़े रह गए। तभी घास चरती बकरियों में से एक बकरी ने वो कृष्ण नाम रूपी पत्तों को खा लिया। जब आदमी सभी बकरियों को घर लेकर गया, तो सभी बकरियां अपने बाडे में जाकर 'मैं - मैं' करने लगी लेकिन वह बकरी, जिसने कृष्ण नाम को अपने अंदर ले लिया था, वह 'मैं - मैं' की जगह 'कृष्ण - कृष्ण' करने लगी, क्योंकि उसके अंदर कृष्ण वास करने लगे थे। उसका 'मैं' यानी अहम तो अपने आप ही दूर हो चुका था ! जब सब बकरियां उसको कृष्ण कृष्ण कहते सुनती हैं तो वह कहती हैं  - यह क्या कह रही हो? अपनी भाषा छोड़ कर यह क्या बोले जा रही है। मैं - मैं बोल।  तो वह कहती है - कृष्ण नाम रूपी पत्ता मेरे अंदर चला गया। मेरा तो "मैं" भी चला गया।  सभी बकरियां उसको अपनी भाषा में बहुत कुछ समझाती, परंतु वह टस से मस ना हुई और...

भाग्य और कर्मफल

Image
 भाग्य और कर्मफल रामदीन बेहद गरीब था। बचपन से आज तक का उसका जीवन अभावों में ही बीता था। समय के साथ माता.पिता छोड़ गए, किन्तु गरीबी ने नहीं छोड़ा। शादी हो गई, बच्चे हो गए; सब आए, मगर भाग्य लक्ष्मी न आई। रामदीन बेहद दुःखी रहता। कई बार सोचता आत्मघात कर लूं। मगर पत्नी और बच्चों का ख्याल करके ऐसा नहीं कर पाता था। ऐसा भी नहीं था कि वह निकम्मा था या कामचोर था, खूब मेहनत करता था, किन्तु मेहनत का फल नहीं मिल पाता था। एक दिन उसका एक पुराना मित्र शंकर शहर से आया तो उसके शाही ठाठ.बाट देखकर रामदीन को बड़ा आश्चर्य हुआ। शंकर कुछ साल पहले तक गांव में फटे.पुराने कपड़े पहने फिरा करता था, जिसके घर में खाने के लिए रोटी भी नहीं थी, आज वही शंकर कितना धनवान बन गया था। शंकर उसके घर आया तो बच्चों को रोते देखकर बोला - अरे रामदीन! तेरी जिन्दगी नहीं बदली! देख तो! तूने घर की क्या हालत बना रखी है, बच्चे भूख से तड़प रहे हैं। क्या करूं, शंकर भाई? मैं तो खुद ही इस जीवन से तंग आ गया हूँ। यह गरीबी मेरा पीछा ही नहीं छोड़ती। रामदीन! अब तुम मेरे साथ शहर चलोगे। ठीक है। मैं तुम्हारे साथ शहर चला चलूंगा, भाई। तो ठीक है। तू कल ही...

कर्म भोग

Image
  कर्म भोग गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है - प्रत्येक जीव को अपने किये हुए अच्छे एवं बुरे कर्मों के फल को भोगना पड़ता है।                 एक गाँव में एक किसान रहता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी और एक लड़का था। कुछ सालों के बाद पत्नी की मृत्यु हो गई उस समय लड़के की उम्र दस साल थी।     किसान ने दूसरी शादी कर ली। उस दूसरी पत्नी से भी किसान को एक पुत्र प्राप्त हुआ। किसान की दूसरी पत्नी की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई।     किसान का बड़ा बेटा, जो पहली पत्नी से प्राप्त हुआ था, जब शादी के योग्य हुआ, तब किसान ने बड़े बेटे की शादी कर दी। फिर किसान की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई।  किसान का छोटा बेटा जो दूसरी पत्नी से प्राप्त हुआ था और पहली पत्नी से प्राप्त बड़ा बेटा दोनों साथ साथ रहते थे। कुछ समय बाद किसान के छोटे लड़के की तबियत खराब रहने लगी।  बड़े भाई ने कुछ आस पास के वैद्यों से इलाज करवाया, पर कोई राहत ना मिली। छोटे भाई की दिन ब दिन तबियत बिगड़ती जा रही थी और बहुत खर्च भी हो रहा था। एक दिन बड़े भाई ने अपनी पत्नी ...

तपस्या का फल

Image
  तपस्या का फल   . भगवान शंकर को पति के रूप में पाने हेतु माता पार्वती कठोर तपस्या कर रही थी। उनकी तपस्या पूर्णता की ओर थी। एक समय वह भगवान के चिंतन में ध्यान मग्न बैठी थी। उसी समय उन्हें एक बालक के डूबने की चीख सुनाई दी। माता तुरंत उठकर वहां पहुंची। उन्होंने देखा एक मगर मच्छ बालक को पानी के भीतर खींच रहा है। बालक अपनी जान बचाने के लिए प्रयास कर रहा है तथा मगरमच्छ उसे आहार बनाने का। करुणामयी मां को बालक पर दया आ गई। उन्होंने मगरमच्छ से निवेदन किया कि बालक को छोड़ दीजिए। इसे आहार न बनाएं।  मगरमच्छ बोला - माता! यह मेरा आहार है। मुझे हर छठे दिन उदर पूर्ति हेतु जो पहले मिलता है, उसे मेरा आहार ब्रह्मा ने निश्चित किया है।  माता ने फिर कहा - आप इसे छोड़ दें। इसके बदले मैं अपनी तपस्या का फल दूंगी।  ग्राह ने कहा - ठीक है।  माता ने उसी समय संकल्प कर अपनी पूरी तपस्या का पुण्य फल उस ग्राह को दे दिया। ग्राह तपस्या के फल को प्राप्त कर सूर्य की भांति चमक उठा। उसकी बुद्धि भी शुद्ध हो गई।  उसने कहा - माता! आप अपना पुण्य वापस ले लें। मैं इस बालक को यू हीं छोड़ दूंगा।...

समस्या

Image
समस्या हर किसी के पास समस्याओं को सुलझाने के अपने-अपने तरीके होते हैं...!! एक पुराने खंडहर के बीच से भेड़ों का झुंड रास्ता पार कर रहा था। टूटी दीवारें, बिखरे पत्थर, और बीच रास्ते में एक रस्सी बंधी हुई। रस्सी बहुत ऊँची नहीं थी… पर इतनी भी छोटी नहीं कि अनदेखी की जा सके। अब दृश्य दिलचस्प था। कुछ भेड़ें आईं — बिना ज़्यादा सोचे सीधे रस्सी के ऊपर से फांद गईं। उनका तरीका साफ था —   “रुकना नहीं, बस छलांग लगाओ!” कुछ दूसरी भेड़ें आईं — उन्होंने झुककर रस्सी के नीचे से निकलना बेहतर समझा। उनका अंदाज़ अलग था —   “क्यों कूदना? झुको और निकल जाओ।” तभी दो भेड़ें रुकीं। एक छोटी, दूसरी सबसे सीनियर । छोटी भेड़ ने रस्सी को देखा, सीनियर भेड़ को निहारा… समझा…और फिर अपने सिर से उसे किनारे खिसका दिया। रस्सी हट गई। अब रास्ता सबके लिए खुल गया। सबसे अंत में वह बुजुर्ग, सीनियर भेड़ आई। न उसने छलांग लगाई… न झुककर निकली… न रस्सी हटाई… वह आराम से सीधे चलती हुई पार हो गई — क्योंकि समस्या अब थी ही नहीं। अब प्रसंग को समझे यही जीवन है। * कुछ लोग हर मुश्किल को ताकत से पार करते हैं। * कुछ लोग लचीलापन अपना...

कृत्रिम सेब

Image
  कृत्रिम सेब एक जंगल में बंदरों का बड़ा झुंड था। उस जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी इसलिए सारे बंदर बहुत आराम और संतुष्ट होकर रहते थे। एक दिन एक वैज्ञानिक अपनी बेटी के साथ उसी जंगल में शोध करने के लिए आया। अपना तम्बू लगाने के बाद वैज्ञानिक पौधों के नमूने इकट्ठा करने के लिए बाहर निकला । लेकिन लड़की तम्बू की सुंदरता को देखकर रुक गयी। उसने पहले जमीन पर एक पुराना कालीन रखा और उस पर एक बिस्तर बिछाया। तम्बू के बीच लालटेन लटकाई और उसके नीचे एक छोटी मेज और सफेद सेब से भरा कटोरा रख दिया। वह सेब देखने में बहुत ताजा, खुबसूरत और बड़े लग रहे थे। सारे बन्दर लालच से उस कृत्रिम सेब को पेड़ों पर बैठे देख रहे थे। तम्बू के सामने जगह साफ करने के लिए लड़की बाहर निकली, तब एक बंदर ने तेजी से झपटा मारा और एक कृत्रिम सेब उठा लिया। तभी उसी समय लड़की की नजर भी उस पर पड़ गयी, लड़की ने तुरंत बंदूक उठाकर निशाना लगाया और गोली दाग दी, लेकिन सभी बंदर इतनी देर में वहां से भाग गए। काफी देर के बाद सारे बन्दर रुक गए जब उन्होंने देखा कि अब उनका कोई पीछा नहीं कर रहा है। चोर बंदर ने हाथ उठाकर सबको सेब दिखाया। सभी बंदर हैर...

दया पर संदेह

Image
  दया पर संदेह   एक बार एक अमीर सेठ के यहाँ एक नौकर  काम करता था। अमीर सेठ अपने नौकर से तो बहुत खुश था, लेकिन जब भी कोई कटु अनुभव होता तो वह ईश्वर को अनाप शनाप कहता और बहुत कोसता था। एक दिन वह अमीर सेठ ककड़ी खा रहा था। संयोग से वह ककड़ी कच्ची और कड़वी थी। सेठ ने वह ककड़ी अपने नौकर को दे दी। नौकर ने उसे बड़े चाव से खाया जैसे वह बहुत स्वादिष्ट हो। अमीर सेठ ने पूछा - ककड़ी तो बहुत कड़वी थी। भला तुम ऐसे कैसे खा गये ? नौकर बोला - आप मेरे मालिक हैं। रोज ही स्वादिष्ट भोजन देते हैं। अगर एक दिन कुछ बेस्वाद या कड़वा भी दे दिया, तो उसे स्वीकार करने में भला क्या हर्ज है ?  अमीर सेठ अपनी भूल समझ गया। अगर ईश्वर ने इतनी सुख सम्पदाएँ दी हैं, और कभी कोई कटु अनुदान या सामान्य मुसीबत दे भी दे, तो उसकी सद्भावना पर संदेह करना ठीक नहीं, वह नौकर और कोई नहीं प्रसिद्ध चिकित्सक हकीम लुकमान थे। असल में यदि हम समझ सकें तो जीवन में जो कुछ भी होता है, सब परमात्मा की दया ही है। परमात्मा जो करता है, अच्छे के लिए ही करता है..!! द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन य...

अयोध्या का दिव्य प्रांगण!

Image
अयोध्या का दिव्य प्रांगण!   श्री अयोध्या जी में कनक भवन और हनुमानगढ़ी के मध्य स्थित है 'बड़ी जगह' जिसे दशरथ महल भी कहा जाता है। वर्षों पूर्व, यहाँ एक परम विरक्त संत निवास करते थे— श्री रामप्रसाद जी। उनका जीवन और आश्रम पूरी तरह प्रभु की कृपा पर निर्भर था। नियम सरल था: मंदिर में जो चढ़ावा आता, वह पलटू बनिया नाम के एक व्यापारी के पास भेज दिया जाता। बदले में पलटू राशन भेजता, जिससे ठाकुर जी का भोग बनता और संत-अभ्यागतों का भंडारा होता। न कोई संचय था, न कल की चिंता। एक दिन प्रभु ने कौतुक रचा। मंदिर में एक धेला भी चढ़ावा नहीं आया। सूर्यास्त होने को था, पर भंडार खाली था। विवश होकर रामप्रसाद जी ने दो साधुओं को पलटू के पास भेजा: "भैया, आज हाथ खाली है, प्रभु के भोग के लिए थोड़ा राशन उधार दे दो।" पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। पलटू बनिया रूखा होकर बोला— "महाराज, मेरा और महंत जी का व्यवहार तो नकद का है। उधार की यहाँ कोई जगह नहीं।" जब रामप्रसाद जी को यह पता चला, तो उन्होंने ठंडी आह भरी और कहा— "जैसी मेरे राघव की इच्छा।"  उस दिन मंदिर में केवल जल का भोग लगा। भूखे...

टाइम बैंक

Image
टाइम बैंक स्विट्ज़रलैंड में पढ़ाई कर रहा एक छात्र लिखता है👇  स्विट्ज़रलैंड में पढ़ाई करते समय, मैंने स्कूल के पास एक घर किराए पर लिया था। उस घर की मालकिन का नाम क्रिस्टिना था। वह 67 वर्ष की अविवाहित वृद्ध महिला थी। वह पहले माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका थीं और अब सेवानिवृत्त हो चुकी थीं। स्विट्ज़रलैंड में पेंशन बहुत अच्छी होती है, इसलिए बुढ़ापे में भोजन और रहने की कोई चिंता नहीं होती। फिर भी, उन्होंने एक “काम” स्वीकार किया था — एक 87 वर्षीय अविवाहित वृद्ध व्यक्ति की देखभाल करना।  मैंने उनसे पूछा, “क्या आप यह काम पैसे के लिए करती हैं?”  उनका जवाब मुझे चौंकाने वाला था: “मैं पैसे के लिए काम नहीं करती। मैं अपना समय ‘टाइम बैंक’ में जमा करती हूँ। जब मैं खुद बूढ़ी हो जाऊँगी और चल-फिर नहीं सकूँगी, तब मैं उस समय को निकालकर उपयोग करूँगी।” मैंने पहली बार “टाइम बैंक” की अवधारणा सुनी थी, इसलिए मुझे बहुत उत्सुकता हुई और मैंने उनसे इसके बारे में और जानकारी ली। “टाइम बैंक” मूल रूप से स्विट्ज़रलैंड के सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई एक योजना है। लोग अपनी युवावस्था में बुजुर्ग...

मां का पत्र बेटी के नाम

Image
मां का पत्र बेटी के नाम  14 Feb. 2004 वैलेंटाइन डे Sung by Bindu Jain, Delhi तेरी ज़िन्दगानी की कहानी भी अजीब है ये, कभी ये हंसाती और कभी ये रुलाती है।  कभी ये बिखेरती है खुशियों के फूल और, कभी अपने ही अंसुवन में नहाती है ॥ जो भी हम चाहते है पाया नहीं जाता, जो भी हम पाते हैं,  भाया नहीं जाता,  जो भी हमें भाता है वो रहता नहीं कभी, खट्टी मीठी यादों को तू भूल क्यों न जाती है॥ तेरी ज़िन्दगानी की..... ममता के फूलों से किया है शृंगार तेरा, विद्या रूपी धन से भरा है भंडार तेरा,  इस धन को तू रखना संभाल के, जीवन के कोष में यही तेरी थाती है॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....  जीवन की बगिया से फूल-फूल चुनना, कांटों को निकाल के तू दूर-दूर करना,  मान देना सबको और प्यार देना सबको, तेरी कोयल सी कूक सारे चमन को महकाती है ॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....  तेरे अंगना में जब गूंजी किलकारी है, 'मैया मैया' बोल के ये दुनिया संवारी है।  सोने के सिंहासन पे सजते हैं छोटे राजा, उनकी अदाओं पे तू बलिहारी जाती है ॥ तेरी ज़िन्दगानी की..... उसको गुणों के भंडार सौंप देना, लाड़, प्य...

बेटी

Image
  बेटी एक इलाके में एक भले आदमी का देहांत हो गया। लोग अर्थी  ले जाने को तैयार हुए और जब उसे उठाकर श्मशान ले जाने लगे तो एक आदमी आगे आया और अर्थी का एक पाऊं पकड़  लिया और बोला कि मरने वाले से मुझे मेरे 15 लाख लेने हैं। पहले मुझे मेरे पैसे दो, फिर उसको जाने दूंगा।  अब तमाम लोग खड़े तमाशा देख रहे हैं। बेटों ने कहा कि मरने वाले ने हमें तो कोई ऐसी बात नहीं की कि वह कर्जदार है। इसलिए हम कुछ नही दे सकते। मृतक के भाइयों ने कहा कि जब बेटे जिम्मेदार नहीं, तो हम क्यों दें?  अब सारे खड़े हैं और उसने अर्थी पकड़ी हुई है। जब काफ़ी देर गुज़र गई, तो बात घर की औरतों तक भी पहुंच गई। मरने वाले की एकलौती बेटी ने जब बात सुनी, तो फौरन अपना सारा ज़ेवर उतारा और अपनी सारी नक़द रकम जमा करके उस आदमी के लिए भिजवा दी और कहा कि भगवान के लिए ये रकम लो और ज़ेवर बेच कर उसकी रकम दे दो और मेरे पिताजी की अंतिम यात्रा को न रोको।  मैं मरने से पहले सारा कर्ज़ अदा कर दूंगी और बाकी रकम का जल्दी बंदोबस्त कर दूंगी। अब वह अर्थी पकड़ने वाला शख्स खड़ा हुआ और सारे लोगो से मुखातिब हो कर बोला - असल बात ये है कि मुझे म...

How to remain ever happy?

Image
  How to remain ever happy? जीवन का आनन्द प्राप्त करने के लिए ‘हर पल मुस्कुराइए’ Life is full of choices....and I choose happiness. इस महत्वपूर्ण मनोरंजक विषय पर विस्तृत विचार विनिमय प्रारम्भ करने से पहले, हमें इस वास्तविकता को समझना होगा कि खुशी और उदासी मूल रूप से हमारे मन व मस्तिष्क पर निर्भर है। यह मन-मस्तिष्क की वह अवस्था है जो बाहरी परिस्थितियों और घटनाओं पर आवश्यक रूप से निर्भर नहीं है। अन्य शब्दों में - यह हमारे भीतर से आती है, बाहर से नहीं। दो व्यक्ति एक ही परिस्थिति पर अलग-अलग प्रतिक्रिया कर सकते हैं। जहां एक व्यक्ति अत्यधिक तनावग्रस्त व बैचेन हो सकता है, दूसरा उस परिस्थिति के प्रति शांति व खुशी की स्थिति को बनाए रख सकता है। अतः हमारी खुशी या उदासी को निश्चित करने वाली बाहरी परिस्थितियां नहीं हैं, अपितु उन परिस्थितियों के प्रति हमारा रुख व मानसिक रूप से प्रतिक्रिया है। यदि हम कहें कि जीवन में मानसिक स्थिति ही सब कुछ है तो यह एक अतिशयोक्ति नहीं होगी। व्यक्ति को जीवन जीने की कला आनी चाहिए। जीने का अर्थ दिन काटना नहीं है। किसी को यह मत समझाओ कि क्रोध मत करो, बल्कि यह सिखाओ क...

दस प्रतिशत

Image
  दस प्रतिशत   एक बहुत अमीर आदमी ने रोड के किनारे एक भिखारी से पूछा - "तुम भीख क्यूँ मांग रहे हो? जबकि तुम तन्दुरुस्त  हो।   भिखारी ने जवाब दिया  - मेरे पास महीनों से कोई काम नहीं है। अगर आप मुझे कोई नौकरी दें, तो मैं अभी  से भीख मांगना छोड़ दूँ । अमीर मुस्कुराया और कहा - मैं तुम्हें कोई नौकरी तो नहीं दे सकता, लेकिन मेरे पास इससे भी अच्छा कुछ है। क्यूँ नहीं तुम मेरे बिज़नस पार्टनर बन जाओ? भिखारी को उसके  कहे पर यकीन नहीं हुआ - ये आप क्या कह रहे हैं? क्या ऐसा मुमकिन है?  हाँ! मेरे पास एक चावल का प्लांट हैl तुम चावल बाज़ार में सप्लाई करो और जो भी मुनाफ़ा होगा, उसे हम महीने के अंत में आपस में बाँट लेंगे ।  भिखारी के आँखों से ख़ुशी के आंसू निकल पड़े - आप मेरे लिए जन्नत के फ़रिश्ते बन कर आये हैं । मैं किस कदर आपका शुक्रिया अदा करूँ? फिर अचानक वो चुप हुआ और कहा - हम मुनाफे को कैसे बांटेंगे? क्या मैं 20% और आप 80% लेंगे ..या मैं 10% और आप 90% लेंगे? जो भी हो ...मैं तैयार हूँ और बहुत खुश हूँ..." अमीर आदमी ने बड़े प्यार से उसके सर पर हा...