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Improve quality of your sleep.

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  अपनी नींद की गुणवत्ता को बढ़ाओ। Improve quality of your sleep. यह भी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि तुम रात को सोने के लिए कैसे जाते हो और तुम्हारी नींद की गुणवत्ता कितनी है? सोने से पहले बिना उद्देश्य के इधर उधर घूम कर अच्छी प्रकार की नींद नहीं ली जा सकती। मन शांत न होने पर तुम्हें हर तरह के गंदे सपने आएंगे, जिन में तुम रोओगे, चिल्लाओगे, ठोकर मारोगे, घूंसे चलाओगे, कुश्ती करोगे और सुबह जीवन-शक्ति और ताज़गी से युक्त होने की बजाय बेचैन और थके हुए उठोगे। नींद की गुणवत्ता केवल समय पर नहीं, बल्कि चैन की नींद पर निर्भर करती है। 8 घंटे सोने के बाद भी थकान महसूस होना खराब गुणवत्ता का संकेत है, जबकि 6 घंटे की गहरी और निर्बाध नींद ऊर्जा से भर देती है। मोबाइल से दूरी, अंधेरा कमरा और निश्चित समय, अच्छी नींद के लिए ज़रूरी हैं।  सुकून की नींद राजीव एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जो रात को देर तक स्क्रीन के सामने रहता। वह 8-9 घंटे सोता, लेकिन सुबह उठते ही उसे सिर में भारीपन और थकान महसूस होती थी। उसे हमेशा चिड़चिड़ापन रहता था। एक दिन उसकी दादी ने पूछा, “बेटा, तू सोता तो बहुत है, पर सुकून क्यों नहीं दि...

Include rest in your routine

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  अपनी दिनचर्या में आराम को शामिल करो।  Include rest and relaxation phases in your routine तुम्हारा दैनिक कार्य कलाप आराम के उचित अन्तराल से संतुलित होना चाहिए। यह संतुलन बिगड़ गया तो काम के घंटे बढ़ने की बजाय तुम्हारी ताकत कम हो जाएगी और तुम्हें कम परिणाम मिलेगा। विश्राम से तुम्हारे शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है। शरीर के प्रत्येक भाग को थोड़ा हिलाकर और खींचने के बाद समतल बिस्तर पर या फ़र्श पर शवासन में लेटने से तुम्हें शारीरिक आराम मिल सकता है। धनुष की डोर  एक शहर में आर्यन नाम का एक बहुत ही प्रतिभाशाली युवक रहता था। वह अपनी सफलता को लेकर इतना जुनूनी था कि दिन-रात काम करता था। उसे लगता था कि आराम करना समय की बर्बादी है और वह अपनी सेहत पर ध्यान दिए बिना कड़ी मेहनत करता रहा। कुछ ही समय में आर्यन को सफलता तो मिली, लेकिन वह बहुत चिड़चिड़ा और थका हुआ रहने लगा। उसकी उत्पादकता (productivity) घटने लगी और काम में गलतियां होने लगीं। परेशान होकर वह अपने दादाजी के पास गया, जो एक अनुभवी तीरंदाज थे। उसने अपनी समस्या बताई। दादाजी ने आर्यन को अपना पुराना धनुष दिखाया और उसकी डोर को ढीला कर ...

Do regular exercise.

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प्रतिदिन व्यायाम करो।  Do regular exercise. लगातार स्ट्रैचिंग और एरोबिक व्यायाम तनाव और नसों की जकड़न को ढीला करते हैं और इस प्रकार नसों को आराम मिलता है। यह शारीरिक विश्राम मानसिक शान्ति की ओर ले जाता है क्योंकि शरीर और मस्तिष्क अन्दर से जुड़े हुए हैं। तीव्र गति से किया गया एरोबिक व्यायाम तुम्हारे फेफड़ों और दिल को मजबूत बनाता है और तुम्हारी सामान्य शक्ति व प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।  एक छोटा सा गाँव था, जहाँ आलसीराम नाम का एक लड़का रहता था। जैसा उसका नाम था, वैसा ही उसका काम -दिन भर बिस्तर पर पड़े रहना और जंक फूड खाना। उसके दादाजी, जो 80 की उम्र में भी एकदम चुस्त थे, उसे हमेशा समझाते, ‘बेटा, शरीर एक मशीन की तरह है। इसे जितना चलाओगे, यह उतना ही बेहतर चलेगा।ष्8पर आलसपुर उनकी बातों को हँसकर टाल देता। एक दिन गाँव में ‘दौड़ प्रतियोगिता’ का आयोजन हुआ। प्रथम पुरस्कार एक चमचमाती साइकिल थी। आलसीराम को साइकिल बहुत पसंद थी। उसने सोचा, ‘दौड़ना ही तो है, मैं तो तेज दौड़कर जीत जाऊँगा।’ जैसे ही दौड़ शुरू हुई, आलसीराम ने पूरी ताकत लगाई। लेकिन मात्र 100 मीटर दौड़ते ही उसकी साँस फूलने लगी, पैरों में...

Be above limitations of life.

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जीवन की सीमाओं से ऊपर उठो। Be above limitations of life. तुम्हारे जीवन में कुछ बंधन हो सकते हैं जो तुम्हें उन्नति करने से रोकते हैं, यद्यपि तुम उन्नति करना चाहते हो। कृपया नोट करें कि ये सब सीमाएं कर्मों के नियम और भाग्य के नियम के अनुसार हैं। तुम्हारे पिछले कर्मों के अलावा किसी को दोष नहीं दिया जा सकता। इसलिए अपने को, भगवान को या अन्यों को कोसने का कोई लाभ नहीं है। यह भी सच है कि इन में से बहुत सी सीमाएं तुम्हारे द्वारा एक रात में नहीं हटाई जा सकती अर्थात् तुम्हें उनके साथ ही रहना होगा। लेकिन याद रखो कि तुम्हारी कैसी भी अवस्थाएं या सीमाएं हैं, तुम कुछ न कुछ परिवर्तन हमेशा कर सकते हो। ये छोटे बदलाव एक बड़े बदलाव का रास्ता बना देंगे। किसी के लिए सभी दरवाज़े कभी बंद नहीं होते। हरेक को आगे बढ़ने का और कर्मों के नियम के दुष्चक्र से बाहर आने का एक मौका दिया जाता है, चाहे व्यक्ति के कितने ही बुरे कर्म क्यों न हों। किसी को चिर-नरक का दण्ड नहीं मिलता। एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक मूर्तिकार रहता था। वह पत्थर के बेजान टुकड़ों में भी जान फूंक देने की कला जानता था। एक बार उसने निश्चय किया क...

Give the world more

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  जितना तुमने संसार से लिया है, उससे ज़्यादा दो। Give the world more than what you take from it. पृथ्वी पर रहते हुए तुम बहुत सी वस्तुएं या लाभ अपने परिवार, पूर्वजों, समाज, देश, दुनिया और प्रकृति (हवा, पानी, धूप और धरती माता) से प्राप्त कर रहे हो। इस पृथ्वी पर तुम्हारा जीवन केवल तभी कीमती माना जाएगा, जब तुम दुनिया को उससे ज़्यादा दोगे, जितना तुमने संसार से लिया है। ‘संसार से जितना लिया है, उससे अधिक दो’ के मूल भाव पर आधारित लघुकथा-  अनमोल विरासत  एक वृद्ध व्यक्ति अपने अंतिम दिनों में एक बगीचा लगा रहा था। पड़ोसी ने पूछा, “बाबा, आपकी उम्र में फल का पेड़ लगाने का क्या फायदा? यह कब बड़ा होगा और कब आप फल खाएंगे?“ वृद्ध ने मुस्कुराकर कहा, “मैंने अपने पूरे जीवन में इस जमीन से फल, फूल और छाया ली है। जितना मैंने इस प्रकृति से लिया, क्या उतना ही वापस देना काफी है? मैं तो यहाँ और अधिक देने की उम्मीद से यह पेड़ लगा रहा हूँ। यह फल मैं नहीं, तो आने वाली पीढ़ी खाएगी।“ वृद्ध की आंखें संतुष्टि से चमक रही थीं। उसने संसार से केवल लिया नहीं, बल्कि लौटते हुए भी उससे अधिक दिया। सीखः हमें दुनिया को उ...

Problems are a part of life.

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  समस्याएं जीवन का अविभाजित अंग हैं। Problems are an integral part of life. बहुत से लोग सोचते हैं कि जब उनकी सभी समस्याएं हल हो जाएंगी, तब वे जीवन की उन्नति की योजनाएं बनाना आरंभ करेंगे। लेकिन याद रखो कि समस्याएं जीवन का अविभाजित अंग हैं। वे कभी समाप्त नहीं होंगी। एक समस्या जाएगी तो दूसरी आ जाएगी। यह जीवन की प्रकृति है। जीवन को इस प्रकार बनाया गया है कि जब तुम समस्याओं का सामना करोगे तो आगे बढ़ने के लिए आवश्यक ‘सबक’ भी सीख लोगे। यह केवल तुम्हारे साथ नहीं है, सबके साथ है। कोई भी समस्याओं से मुक्त नहीं है। जीवन में समस्याएं (चुनौतियां) अपरिहार्य हैं, वे विकास और चरित्र निर्माण के लिए आती हैं।  एक बाबा ने ऊंट चरा रहे परेशान व्यक्ति को समझाया कि जैसे ऊंट अपनी मर्जी से बैठते हैं, वैसे ही कुछ समस्याएं खुद हल हो जाती हैं, कुछ प्रयास से, और कुछ समय पर छोड़ देनी चाहिए। उनसे डरने के बजाय, उन्हें जीवन का हिस्सा मानकर मुस्कुराते हुए उनका सामना करना चाहिए।  बाबा और ऊंटों का समाधान  एक बार एक व्यक्ति जीवन की समस्याओं से बहुत परेशान होकर एक बाबा के पास गया। उसने कहा, “बाबा! मैं अपनी ...

Reduce collection

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  सांसारिक वस्तुओं को इकट्ठा करना कम कर दो। Reduce collection of worldly things. कम से कम सीमा तक अपनी सांसारिक वस्तुओं व ऐशो आराम की वस्तुओं को सीमित कर दो, जो तुम्हारे जीवित रहने या मूलभूत आराम के लिए आवश्यक हों। सामान्यतया यह देखा गया है कि हम अपनी आवश्यकताओं से अधिक इकट्ठा कर लेते हैं। अधिक से अधिक वस्तुओं को इकट्ठा करना और समेट कर रखना, चाहे हमें उसकी आवश्यकता हो या न हो, हमारे लिए और अधिक उलझनें ले आएगा। उनको सुरक्षित रखने के तनाव के कारण हमारी शक्ति का अपव्यय होने लगेगा, उन की लगातार सार-संभाल में समय नष्ट होगा और उनको रखने में भी स्थान घिरेगा। कुछ समय के बाद हमारे घर या दफ़्तर में कुछ पुरानी रद्दी वस्तुएं इकट्ठी हो जाती हैं जिनकी हमें आवश्यकता नहीं होती। रद्दी वस्तुओं को रखना व अनुपयोगी होने के कारण उनकी सुरक्षा करना अपनी ऊर्जा पर एक प्रकार का टैक्स है।  असली खजाना एक गाँव में रमन नाम का एक बहुत अमीर व्यापारी रहता था। उसके पास आलीशान घर, नौकर-चाकर और ढेर सारा सोना-चांदी था, लेकिन रमन का मन कभी शांत नहीं रहता था। उसे हमेशा और अधिक धन और सांसारिक वस्तुएं इकट्ठा करने की ध...

Always smile .

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 हमेशा अपने चेहरे पर मुस्कुराहट रखो। Always keep a smile on your face. कोशिश करो कि बोलते हुए, बैठे हुए, खड़े हुए और अन्य सभी समयों पर अपने चेहरे पर एक प्राकृतिक मुस्कुराहट रखो। यह सुनिश्चित करेगा कि तुम बिना किसी प्रयास के हर समय प्राकृतिक रूप से सकारात्मक रहोगे। मुस्कुराने से शरीर में ऐसे रसायन बनते हैं जो तुम्हें तनाव से मुक्त होने में सहायक होते हैं। इस का प्रयास करो और अपने आप महसूस करो। अपनी दिनचर्या में हंसी मज़ाक को अवश्य शामिल करो। जादुई मुस्कान राजू शहर की एक बड़ी कंपनी में काम करता था। काम का बोझ और शहर की भागदौड़ के कारण वह हमेशा तनाव में रहता था। उसके चेहरे पर कभी मुस्कुराहट नहीं दिखती थी। एक दिन, भारी बारिश के कारण वह अपने ऑफिस से घर लौटते समय एक छोटी सी चाय की दुकान पर रुका। वहां एक 70 वर्षीय बुजुर्ग मुस्कुराते हुए चाय बना रहे थे। उनके चेहरे पर अनगिनत झुर्रियां थीं, लेकिन मुस्कान ऐसी थी, जो किसी का भी दिन बना दे। राजू ने झुंझलाते हुए कहा, “बाबा, चाय जल्दी दीजिए, मुझे बहुत तनाव हो रहा है।“ बुजुर्ग मुस्कुराए और बोले, “साहब! इस लोहे की मशीन (तनाव) को थोड़ी देर बाहर रखकर चाय ...

Have a good company

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  अच्छी संगति करो।    Have a good company अपनी संगति का चुनाव करने में सावधान रहो क्योंकि यह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से तुम पर बहुत प्रभाव डालेगी। गुणहीन, अपरिपक्व बुद्धि वाले और भौतिक दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्तियों के मेलजोल से बचो। केवल गिनती के मित्र बनाओ, जिन्हें तुमने समय-समय पर विभिन्न परिस्थितियों में परख़ा हुआ हो और जो तुम्हारे अनुकूल हो और एक बार मित्रता करो तो उसे स्थिर रखने की कोशिश करो। बार-बार मित्रता को तोड़ना अवयस्कता और अपरिपक्वता की निशानी है। एक बार दो दोस्त रेगिस्तानी इलाके से गुज़र रहे थे। किसी बात पर दोनों में बहस छिड़ गई और पहले दोस्त ने दूसरे दोस्त को तमाचा मार दिया। दूसरा दोस्त सीधा ज़मीन पर बैठ गया और बालू पर लिखने लगा - ‘आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे तमाचा मारा।’ पहले दोस्त ने इसे पढ़ा, पर वह कुछ नहीं बोला। वे दोनों आगे चलने लगे। दो दिन के बाद दोनों दोस्त एक तालाब में नहाने के लिए उतरे, अचानक दूसरे दोस्त का पाँव फिसल गया। पहले दोस्त ने दूसरे को डूबते देखा तो अपनी जान की परवाह न करते हुय वह पानी में कूद गया और उसे बचा लिएा। दूसरे दोस्त ने पत्...

Reduce worldly involvement.

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  अनावश्यक सांसारिक भागीदारी को कम करो। Reduce unnecessary worldly involvement. दुनिया एक बड़े जंगल के समान है। जितना तुम इसके अन्दर जाओगे, उतना ही तुम भ्रमित हो जाओगे और खो जाओगे। अतः सांसारिक कामों में केवल एक सीमा तक ही शामिल होओ जो तुम्हारे जीवित रहने और सांसारिक कर्त्तव्यों को निभाने के लिए आवश्यक हों। सांसारिक भागीदारी कम करो।  एक समय की बात है, एक शहर में राघव नाम का व्यक्ति रहता था। वह बहुत मेहनती था, लेकिन अपनी मेहनत से ज़्यादा, दूसरों के मामलों में दखल देने और सांसारिक बातों में फंसा रहता था। पड़ोसी के घर क्या बन रहा है, दफ्तर में कौन किससे राजनीति कर रहा है, दुनिया में क्या हो रहा है- इन सबमें उसे बहुत दिलचस्पी थी। इस चक्कर में वह अक्सर तनाव में रहता और अपने परिवार को समय नहीं दे पाता था। एक दिन वह एक संत के पास गया और बोला, “महाराज, मैं बहुत अशांत रहता हूँ। मन में हमेशा हलचल रहती है।“ संत मुस्कुराए और बोले, “तुम बहुत बोझ उठा रहे हो। अपनी सांसारिक भागीदारी कम करो।“ राघव ने पूछा, “इसका क्या मतलब है?“ संत ने कहा, “कल सुबह नदी किनारे आना।“ अगले दिन सुबह राघव नदी किनारे पह...

Avoid selfishness

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  स्वार्थ को त्यागो, अपनी चेतना के विकास में सारे विश्व को अपने परिवार की तरह शामिल करो।  Avoid selfishness. Expand your consciousness to include the whole world as your family. तुम्हें सभी वस्तुएं केवल अपने आराम, ख़ुशी व लाभ के लिए प्राप्त हुई हैं, ऐसा सोचने का ढंग छोड़ दो। यह नियम याद रखो कि अपने आप को ख़ुश करने का सबसे अच्छा रास्ता है, यह सुनिश्चित करना कि दूसरे ख़ुश हैं। तुम्हें इस दृष्टिकोण से काम करना चाहिए कि सारा संसार ख़ुश होना चाहता है और अच्छा बनना चाहता है न कि केवल तुम। यदि कोई व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, तो पास खड़ा व्यक्ति पुलिस थाने के चक्कर काटने से बचने के लिए उसकी सहायता नहीं कर पाता। मान लो कि उसके स्थान पर तुम होते तो क्या सोचते? यदि हमारे सहयोग से किसी की जान बच सके, तो हमें उसकी सहायता करके जो ख़ुशी मिलेगी वही उसका प्रतिफल होगा। स्वार्थ का फल और त्याग की मिठास एक गाँव में भयंकर अकाल पड़ा। खाने-पीने की भारी कमी हो गई। गाँव के एक अमीर व्यापारी ने घोषणा की कि वह रोज सुबह गाँव के हर बच्चे को एक रोटी देगा। अगले दिन सुबह व्यापारी के घर के बाहर बच्चों की भीड़ जमा...

more give, more get.

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  जितना ज़्यादा तुम दोगे, उतना ही ज़्यादा मिलेगा। The more you give, the more you get. यह एक आश्चर्यजनक दैवीय नियम है कि जो तुम दूसरों को देते हो, वह दुगुना और तिगुना हो कर तुम्हें वापिस मिलता है; चाहे वह ज्ञान हो या भौतिक वस्तुएँ। कुछ लोग ज्ञान को छिपाने की कोशिश करते हैं, ताकि अन्य लोग उनके स्तर तक न पहुँच सकें, लेकिन वास्तविकता यह है कि तुम देने से और अधिक पाओगे। अपना ज्ञान दूसरों को देने से तुम अधिक ज्ञानवान बन जाओगे। असली ख़ुशी देने में है न कि पाने में। इसलिए दूसरों को देने में उदारवादी बनो।  जितना दोगे, उससे अधिक मिलेगा- एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास बहुत कम जमीन थी, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। जो भी उसके द्वार पर आता, वह उसे खाली हाथ नहीं जाने देता था। एक दिन गाँव में भीषण अकाल पड़ा। रामू के घर में भी अनाज खत्म होने वाला था। उसके पास केवल एक मुट्ठी बाजरा बचा था, जिससे वह अपने परिवार के लिए खिचड़ी बनाने वाला था। तभी उसके दरवाजे पर एक बूढ़ा और कमज़ोर साधु आया।  साधु ने कहा, “बेटा, मैं तीन दिनों से भूखा हूँ, क्या कुछ खाने ...

Don't show madness in choosing

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  किसी विषय को चुनने या निर्णय लेने में अस्थिरता और पागलपन न दिखाओ।   (Don't show fickle mindedness and madness in choosing or deciding something.) इस दुनिया में हर क्षेत्र में अन्तहीन वस्तुएं व परिस्थितियां हैं। एक अस्थिर मन वाला व्यक्ति किसी वस्तु के चुनाव में या निर्णय करने में आसानी से असमंजस में पड़ जाता है और उसका चित्त भ्रान्त हो जाता है, लेकिन यदि तुम ध्यान से देखो तो इस बड़ी समस्या का हल शांत चित्त रह कर खोजा जा सकता है। अच्छा या बुरा जो हम इस दुनिया में हम देखते हैं, वह हमारी अज्ञानता के कारण है। आध्यात्मिकता से सम्पन्न व्यक्ति अपनी आवश्यकता व रुचि के अनुसार किसी वस्तु का चुनाव करने या कोई निर्णय लेने में आसानी से सक्षम हो सकता है। इसलिए वह बाधित और असमंजस की स्थिति में नहीं होता। निर्णय लेने में अस्थिरताः एक लघुकथा रामू एक बहुत ही बुद्धिमान युवक था, लेकिन उसमें एक बहुत बड़ी कमी थी - वह निर्णय लेने में बहुत अस्थिर था। वह हर काम में “यह करूँ या वह“ की उलझन में फंसा रहता था। एक दिन, रामू शहर जाकर नौकरी पाने का निश्चय करता है। बस में बैठते ही उसने सोचा, “नौकरी करना तो गुला...

Small things are also important

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 छोटे काम भी उतने ही महत्त्वपूर्ण होते हैं, जितने बड़े काम। Small things are as important as big things. तुम्हें छोटे से छोटे काम को भी पूर्ण एकाग्रता और अविभाजित मनोयोग से करना चाहिए। तब प्रत्येक काम तुम्हें महत्त्वपूर्ण दिखाई देने लगेगा, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, रुचिकर हो या अरुचिकर। तभी तुम वास्तव में महानता के पथ पर अग्रसर होना आरम्भ कर दोगे।  नन्ही गिलहरी और राम सेतु जब भगवान श्री राम लंका जाने के लिए समुद्र पर पुल (राम सेतु) का निर्माण कर रहे थे, तब विशाल वानर सेना बड़े-बड़े पत्थर उठाकर समुद्र में डाल रही थी। हर कोई अपनी पूरी शक्ति से इस महान कार्य में जुटा था। उसी भीड़ में एक छोटी-सी गिलहरी भी थी। वह समुद्र के किनारे जाती, अपने शरीर को पानी में भिगोती और फिर रेत पर लोटती। जब उसके शरीर पर रेत के कण चिपक जाते, तो वह पुल के पत्थरों के बीच जाकर उन्हें झाड़ देती। वह बार-बार ऐसा ही कर रही थी। एक बंदर ने उसे देखा और हंसते हुए बोला, “नन्ही गिलहरी! तुम यह क्या कर रही हो? तुम्हारे इन छोटे-छोटे रेत के कणों से इस विशाल पुल को क्या फ़र्क पड़ेगा? रास्ते से हट जाओ, कहीं किसी पत्थर के नीचे न द...