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world is duel in its nature.

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  दुनिया में हर वस्तु का पक्ष और विपक्ष होता है, दुनिया प्रकृति से ही द्विसूचक होती है।     There are pros and cons in every thing of the world, world is duel in its nature. यह संसार की परिभाषा है कि वह प्रकृति से ही द्वैत है अर्थात् हर बात के दो पहलू हैं जैसे-दिन-रात, जीवन-मृत्यु, गर्मी-सर्दी, नर-मादा, जवान-बूढ़ा, ख़ुशी-ग़म, सुख-दुःख, संयोग-वियोग। ये दोनों पहलू एक दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते। ये सांसारिक वस्तुओं की प्रकृति से ही निर्मित हुए हैं। ये एक सिक्के के दो पहलू हैं। इससे यह निष्कर्ष  निकलता है कि कोई वस्तु जो तुम्हें ख़ुशी देती है, वह दुःख भी अवश्य देगी। कोई व्यक्ति या वस्तु, जिसके साथ तुम्हारा संयोग हुआ है, उसका वियोग भी अवश्य होगा या तुम्हें लाभ हुआ है तो तुम्हें कभी न कभी हानि भी सहन करनी होगी। अंधेरा और रोशनी  एक गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था। उसके पास एक ही घोड़ा था। एक दिन, उसका घोड़ा जंगल में भाग गया।  गाँव वाले आए और बोले, “यह तो बहुत बुरा हुआ!“ किसान ने शांत भाव से कहा, “पता नहीं, क्या अच्छा है और क्या बुरा।“ अगले दिन, उसका घोड़ा वापस आ...

Be honest.

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  अपने कामों के प्रति ईमानदार, सत्यवादी और मार्मिक रहो। Be honest, truthful and righteous in your dealings. यह दैवीय नियम याद रखो-सत्य कभी गिरता नहीं और झूठ कभी टिकता नहीं। अस्थाई रूप से चाहे तुम असत्य की चकाचौंध से मुग्ध हो जाओ और बेईमानी से मोहित हो जाओ लेकिन अन्त में सत्य ही सफल होता है और जीतता है। सत्य की नाव जीवन की कठिनाइयों में डगमगा सकती है पर डूब नहीं सकती। झूठ, बेईमानी या धोखेबाजी के प्रभाव से किया गया बुरा काम उस व्यक्ति पर अवश्य ही विरुद्ध प्रतिक्रिया करता है, जहां से उस बुरे काम का जन्म होता है। हमारे अच्छे कामों का परिणाम ईनाम द्वारा और बुरे कामों का फल अनिवार्य रूप से दंड के रूप में अवश्य मिलता है। एक छोटे से गाँव में राम नाम का एक लड़का रहता था। राम बहुत ही ईमानदार और मेहनती था। वह हमेशा सच बोलता और अपने काम में पूरी निष्ठा रखता था। गाँव के लोग उसे बहुत पसंद करते थे क्योंकि वह कभी झूठ नहीं बोलता था और हमेशा दूसरों की मदद करता था। एक दिन गाँव में एक बड़ी समस्या आई, जब किसी ने अपनी फसल की चोरी की घटना की शिकायत की। सभी लोग परेशान थे कि चोर कौन हो सकता है। राम जानता था ...

Avoid suspicius, doubts; have faith.

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  शक और अविश्वास को दूर करो, विश्वास करना सीखो। Avoid suspicius, doubts; have faith. दूसरों को शक और अविश्वास की दृष्टि से न देखो। अपने विचारों को इस पक्षपात से आरम्भ न करो कि दूसरा व्यक्ति धोखेबाज़ है और निश्चय ही तुम्हें धोखा देगा व लूट लेगा। विश्वास रखो, यदि कोई तुम्हें धोखा देता है, वह वास्तव में पहले अपने आप को धोखा दे रहा है। जो हानि उसने तुम्हें पहुँचाई है, वह उस कार्य से ‘कर्मों’ के नियम के अनुसार तुमसे भी अधिक दुःखी होगा।  अंधेरे का भ्रम गाँव में रमन और श्याम नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। रमन की आर्थिक स्थिति श्याम से बेहतर थी। एक दिन, रमन का कीमती पेन खो गया। उसे शक हुआ कि उसके घर आए श्याम ने ही पेन चुराया है। इस शक के कारण रमन ने श्याम से बातचीत बंद कर दी और उसका व्यवहार रूखा हो गया। श्याम परेशान था, लेकिन उसने रमन से इसका कारण पूछा। रमन ने हिचकिचाते हुए कहा, “कल तुम आए थे और उसके बाद से मेरा पेन गायब है।“ श्याम मुस्कुराया और बोला, “दोस्त, क्या शक करना भरोसे से बड़ा है? याद है, जब कल तुम मेरे घर आए थे, तब वह पेन तुम्हारे हाथ में था।“ वह रमन को अपने घर ले गया और उसने ...

Take initiative in setting things right.

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  अव्यवस्थाओं को ठीक तरह व्यवस्थित करने की पहल करो।   Take initiative in setting things right. बहुत से लोग विभिन्न अव्यवस्थाओं और समाज की समस्याओं के लिए सरकार या लोगों को कोसने लगते हैं लेकिन वे अपनी ओर से इन अव्यवस्थाओं को नियंत्रित करने में कोई योगदान नहीं देते। केवल दूसरों को कोसने से कोई मदद नहीं करेगा। अपने क्षेत्र की समाजसेवी संस्थाओं की मदद से अपने क्षेत्र में विकास के काम किए जा सकते हें। बदलाव की पहल राजीव का कमरा किसी कबाड़खाने से कम नहीं था। किताबें मेज पर, कपड़े बिस्तर पर, और ज़रूरी कागज़ात कहीं फर्श के किसी कोने में। वह अक्सर अपनी ज़रूरी चीज़ें समय पर नहीं ढूँढ पाता था, जिससे उसका काम पेंडिंग रहता और तनाव बढ़ता। एक दिन इंटरव्यू के लिए निकलते समय, वह अपना महत्वपूर्ण दस्तावेज़ (Documents) नहीं ढूँढ पाया। खीझकर उसने अपनी माँ से कहा, “पता नहीं ये सब चीज़ें कहाँ गायब हो जाती हैं!“ माँ ने शांत स्वर में कहा, “अव्यवस्था को व्यवस्थित करो, राजीव। घर नहीं, पहले अपने काम करने के तरीके को बदलो।“ माँ की बात राजीव को चुभ गई। उसने ठान लिया कि अब और नहीं। अगले दिन, उसने एक योजना बनाईः पहच...

Don’t take revenge for the ills done by others

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  दूसरों ने जो बुराइयां तुम्हारे साथ की हैं, उनका बदला न लो। Don’t take revenge for the ills done by others माफ करने का तरीका अपनाओ। बदले की भावना न रखो बल्कि दूसरों की गलतियों को अनदेखा करो और माफ कर दो। यह कहा गया है कि बदला लेना ऐसा खेल है, जिसमें खिलाड़ी मर जाता है परन्तु खेल समाप्त नहीं होता।  बुराई का बदला भलाई से दें - यह लघुकथा सिखाती है कि प्रतिशोध से केवल नफरत बढ़ती है, जबकि क्षमा और दया से अपराधी का हृदय परिवर्तन संभव है। बदला न लेने से हम उस दूसरे व्यक्ति जैसे बनने से बचते हैं। कहानी के अनुसार, जब आप बुराई के बदले भलाई करते हैं, तो यह आपको असाधारण बनाता है और बुराई के चक्र को तोड़ता है।  बदला न लेने की शक्ति :- एक गाँव में रामू नाम का एक सीधा-सादा किसान रहता था। उसके पड़ोसी श्यामू को रामू से बहुत जलन थी। श्यामू अक्सर रामू की फसल को नुकसान पहुँचाता या उसके पशुओं को खोल देता। गाँव वालों ने रामू से कहा, “तुम भी श्यामू के खेत में वैसा ही क्यों नहीं करते?“ रामू हमेशा मुस्कुराकर कहता, “वह बुराई कर रहा है, अगर मैं भी करूँ, तो हममें फर्क क्या रहेगा?“ एक बार श्यामू बहुत बी...

Avoid fear of death.

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 मृत्यु के डर को भगाओ।  Avoid fear of death. मृत्यु जीवन की एक प्राकृतिक घटना है और ऐसी घटना है जो प्रकृति के नियमानुसार अवश्यम्भावी है न कि डराने वाली। मृत्यु केवल एक जीवन का दूसरे जीवन में बदलना है। इस दुःखदायी स्थिति की वास्तविकता को समझो और शांत भाव से स्वीकार करो। यह कहा गया है कि जो मृत्यु से नहीं डरता, मृत्यु उससे डरती है। वह मृत्यु को अपनी मुट्ठी में रखता है और एक चेतन मृत्यु से मरता है न कि हम सब की तरह, जो बिना जाने मृत्यु के जबड़े में निगल लिए जाते हैं। सबसे बड़ा सच एक शहर में धनी व्यापारी रहता था। उसे मृत्यु का बहुत डर लगता था। जब भी कोई मरता, उसे लगता कि अगली बारी उसकी है। इस डर से उसने खाना-पीना और व्यापार करना छोड़ दिया। एक दिन, एक ज्ञानी साधु उसके घर आए। व्यापारी ने रोते हुए कहा, “महाराज! मुझे हर पल मौत का डर सताता है। सब कुछ यहीं छूट जाएगा, इस विचार से मैं प्रतिपल मर रहा हूँ।“ साधु मुस्कुराए और बोले, “यह डर तुम्हें मौत से पहले ही मार रहा है। एक छोटा-सा उपाय करो। जब भी मौत का विचार आए, तो जोर से कहना- ’जब तक मौत नहीं आएगी, मैं जीऊंगा’।“ व्यापारी ने ऐसा ही किया। जब...

Remain above diseases of the body.

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शारीरिक बीमारियों से ऊपर उठो।   Remain above diseases of the body. शरीर एक भौतिक मशीन है और हर प्रकार के होने वाले दुःख, दर्द और बीमारियां इस पर निर्भर हैं कि तुम इसकी कितनी देखभाल करते हो तथा कुछ अन्य कारणों पर भी इसके दुःख, दर्द और बीमारियां निर्भर हैं। हम दर्द को सहन करने के लिए या दर्द को समाप्त करने के लिए मानसिक शक्ति का भी प्रयोग कर सकते हैं, क्योंकि शरीर मन के सीधे नियंत्रण में है। हम दर्द के अनुभव को मन को शरीर से अलग करके दूर कर सकते हैं और उसे किसी अन्य तटस्थ वस्तु पर केन्द्रित कर सकते हैं जैसे श्वसन क्रिया पर, किसी मंत्र पर या किसी प्रत्यक्ष वस्तु पर; जैसा ध्यान की अवस्था में किया जाता है। हम अन्तर्मन में (आँख बंद करके) उस दर्द वाले स्थान पर ध्यान केन्द्रित करके और वहां प्राणों के बहाव को अधिक करके भी दर्द को कम कर सकते हैं। अन्तर्मन को समझाने और उस स्थान पर दृष्टिपात करने के साथ-साथ दर्द वाले स्थान पर मानसिक रूप से ध्यान लगाकर यह प्रभाव बढ़ाया जा सकता है। मन की शक्ति एक शहर में माधव नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह अपनी सेहत को लेकर बहुत जागरूक था, शायद जरूरत से ज्यादा। वह...

Regulate your diet

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  अपने मन को पुष्ट करने के लिए तन को अच्छा पोषण दो। Regulate your diet for your mental well being. तुम्हारी ख़ुराक तुम्हारे मन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालती है। खाद्यपदार्थ जैसे चाय, कॉफी, एल्कोहल, नशे की दवाइयाँ, सिगरेट, कोको, भुने-तले पदार्थ, मिर्च-मसाले, मिठाइयां, ज्यादा गर्म या ज्यादा ठंडी चीजें दिमाग़ व मन को उत्तेजित करने व निष्क्रिय करने का काम करती हैं और मन-मस्तिष्क का संतुलन बिगाड़ देती हैं। इसी प्रकार अधिक खाना, कम खाना या विभिन्न अन्तरालों पर खाते रहना भी अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का परिचायक नहीं है। अच्छे स्वास्थ्य के रहस्यों में से एक है- हमेशा कुछ भूखे रहना। अधिक मात्रा में पानी, सब्जियां और फल लेने से तुम्हारा शरीर साफ़ और मन पवित्र रहता है। समय-समय पर उपवास करना तुम्हारे स्वास्थ्य और मानसिक नियंत्रण को बढ़ाने में सहायक होता है।  असली ताकत एक समय की बात है, आर्यभट्ट नाम का एक युवक था जो बहुत बुद्धिमान था। वह हमेशा किताबों में डूबा रहता और घंटों चिंतन करता था। उसे लगता था कि जीवन का सार केवल मानसिक विकास (ज्ञान) में है। नतीजा यह हुआ कि वह शारीरिक र...

Reduce your expectations.

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  दूसरों से उम्मीद करना छोड़ दो। Reduce your expectations from others. किसी से भी किसी भी प्रकार की उम्मीद न करो। उदाहरण के लिए तुम्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि वह तुम्हारा पुत्र है, उसे तुम्हारे लिए यह करना चाहिए; वह तुम्हारा रिश्तेदार है अतः उसे तुम्हारे लिए वह करना चाहिए या तुमने उसके लिए इतना किया तो उसे भी कम से कम तुम्हारे लिए इतना तो करना ही चाहिए।  उम्मीद का बोझ  सुमित एक बहुत ही संवेदनशील और मददगार व्यक्ति था। वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से बहुत उम्मीदें रखता था। उसका मानना था कि अगर वह दूसरों की मदद करता है, तो मुसीबत में वे भी उसके लिए खड़े होंगे। एक बार सुमित ने अपना एक बहुत ज़रूरी काम अपने सबसे करीबी दोस्त राहुल पर छोड़ दिया, यह सोचकर कि राहुल तो उसका अपना है, वह काम ज़रूर करेगा। सुमित ने खुद उस काम के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं किया। जब समय आया, तो पता चला कि राहुल ने वह काम किया ही नहीं। सुमित को बहुत नुकसान हुआ। वह टूट गया और उसने राहुल से कहा, “तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी।“ राहुल ने शांति से कहा, “सुमित, गलती मेरी नहीं, तुम्...

Improve quality of your sleep.

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  अपनी नींद की गुणवत्ता को बढ़ाओ। Improve quality of your sleep. यह भी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि तुम रात को सोने के लिए कैसे जाते हो और तुम्हारी नींद की गुणवत्ता कितनी है? सोने से पहले बिना उद्देश्य के इधर उधर घूम कर अच्छी प्रकार की नींद नहीं ली जा सकती। मन शांत न होने पर तुम्हें हर तरह के गंदे सपने आएंगे, जिन में तुम रोओगे, चिल्लाओगे, ठोकर मारोगे, घूंसे चलाओगे, कुश्ती करोगे और सुबह जीवन-शक्ति और ताज़गी से युक्त होने की बजाय बेचैन और थके हुए उठोगे। नींद की गुणवत्ता केवल समय पर नहीं, बल्कि चैन की नींद पर निर्भर करती है। 8 घंटे सोने के बाद भी थकान महसूस होना खराब गुणवत्ता का संकेत है, जबकि 6 घंटे की गहरी और निर्बाध नींद ऊर्जा से भर देती है। मोबाइल से दूरी, अंधेरा कमरा और निश्चित समय, अच्छी नींद के लिए ज़रूरी हैं।  सुकून की नींद राजीव एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जो रात को देर तक स्क्रीन के सामने रहता। वह 8-9 घंटे सोता, लेकिन सुबह उठते ही उसे सिर में भारीपन और थकान महसूस होती थी। उसे हमेशा चिड़चिड़ापन रहता था। एक दिन उसकी दादी ने पूछा, “बेटा, तू सोता तो बहुत है, पर सुकून क्यों नहीं दि...

Include rest in your routine

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  अपनी दिनचर्या में आराम को शामिल करो।  Include rest and relaxation phases in your routine तुम्हारा दैनिक कार्य कलाप आराम के उचित अन्तराल से संतुलित होना चाहिए। यह संतुलन बिगड़ गया तो काम के घंटे बढ़ने की बजाय तुम्हारी ताकत कम हो जाएगी और तुम्हें कम परिणाम मिलेगा। विश्राम से तुम्हारे शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है। शरीर के प्रत्येक भाग को थोड़ा हिलाकर और खींचने के बाद समतल बिस्तर पर या फ़र्श पर शवासन में लेटने से तुम्हें शारीरिक आराम मिल सकता है। धनुष की डोर  एक शहर में आर्यन नाम का एक बहुत ही प्रतिभाशाली युवक रहता था। वह अपनी सफलता को लेकर इतना जुनूनी था कि दिन-रात काम करता था। उसे लगता था कि आराम करना समय की बर्बादी है और वह अपनी सेहत पर ध्यान दिए बिना कड़ी मेहनत करता रहा। कुछ ही समय में आर्यन को सफलता तो मिली, लेकिन वह बहुत चिड़चिड़ा और थका हुआ रहने लगा। उसकी उत्पादकता (productivity) घटने लगी और काम में गलतियां होने लगीं। परेशान होकर वह अपने दादाजी के पास गया, जो एक अनुभवी तीरंदाज थे। उसने अपनी समस्या बताई। दादाजी ने आर्यन को अपना पुराना धनुष दिखाया और उसकी डोर को ढीला कर ...

Do regular exercise.

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प्रतिदिन व्यायाम करो।  Do regular exercise. लगातार स्ट्रैचिंग और एरोबिक व्यायाम तनाव और नसों की जकड़न को ढीला करते हैं और इस प्रकार नसों को आराम मिलता है। यह शारीरिक विश्राम मानसिक शान्ति की ओर ले जाता है क्योंकि शरीर और मस्तिष्क अन्दर से जुड़े हुए हैं। तीव्र गति से किया गया एरोबिक व्यायाम तुम्हारे फेफड़ों और दिल को मजबूत बनाता है और तुम्हारी सामान्य शक्ति व प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।  एक छोटा सा गाँव था, जहाँ आलसीराम नाम का एक लड़का रहता था। जैसा उसका नाम था, वैसा ही उसका काम -दिन भर बिस्तर पर पड़े रहना और जंक फूड खाना। उसके दादाजी, जो 80 की उम्र में भी एकदम चुस्त थे, उसे हमेशा समझाते, ‘बेटा, शरीर एक मशीन की तरह है। इसे जितना चलाओगे, यह उतना ही बेहतर चलेगा।ष्8पर आलसपुर उनकी बातों को हँसकर टाल देता। एक दिन गाँव में ‘दौड़ प्रतियोगिता’ का आयोजन हुआ। प्रथम पुरस्कार एक चमचमाती साइकिल थी। आलसीराम को साइकिल बहुत पसंद थी। उसने सोचा, ‘दौड़ना ही तो है, मैं तो तेज दौड़कर जीत जाऊँगा।’ जैसे ही दौड़ शुरू हुई, आलसीराम ने पूरी ताकत लगाई। लेकिन मात्र 100 मीटर दौड़ते ही उसकी साँस फूलने लगी, पैरों में...

Be above limitations of life.

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जीवन की सीमाओं से ऊपर उठो। Be above limitations of life. तुम्हारे जीवन में कुछ बंधन हो सकते हैं जो तुम्हें उन्नति करने से रोकते हैं, यद्यपि तुम उन्नति करना चाहते हो। कृपया नोट करें कि ये सब सीमाएं कर्मों के नियम और भाग्य के नियम के अनुसार हैं। तुम्हारे पिछले कर्मों के अलावा किसी को दोष नहीं दिया जा सकता। इसलिए अपने को, भगवान को या अन्यों को कोसने का कोई लाभ नहीं है। यह भी सच है कि इन में से बहुत सी सीमाएं तुम्हारे द्वारा एक रात में नहीं हटाई जा सकती अर्थात् तुम्हें उनके साथ ही रहना होगा। लेकिन याद रखो कि तुम्हारी कैसी भी अवस्थाएं या सीमाएं हैं, तुम कुछ न कुछ परिवर्तन हमेशा कर सकते हो। ये छोटे बदलाव एक बड़े बदलाव का रास्ता बना देंगे। किसी के लिए सभी दरवाज़े कभी बंद नहीं होते। हरेक को आगे बढ़ने का और कर्मों के नियम के दुष्चक्र से बाहर आने का एक मौका दिया जाता है, चाहे व्यक्ति के कितने ही बुरे कर्म क्यों न हों। किसी को चिर-नरक का दण्ड नहीं मिलता। एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक मूर्तिकार रहता था। वह पत्थर के बेजान टुकड़ों में भी जान फूंक देने की कला जानता था। एक बार उसने निश्चय किया क...

Give the world more

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  जितना तुमने संसार से लिया है, उससे ज़्यादा दो। Give the world more than what you take from it. पृथ्वी पर रहते हुए तुम बहुत सी वस्तुएं या लाभ अपने परिवार, पूर्वजों, समाज, देश, दुनिया और प्रकृति (हवा, पानी, धूप और धरती माता) से प्राप्त कर रहे हो। इस पृथ्वी पर तुम्हारा जीवन केवल तभी कीमती माना जाएगा, जब तुम दुनिया को उससे ज़्यादा दोगे, जितना तुमने संसार से लिया है। ‘संसार से जितना लिया है, उससे अधिक दो’ के मूल भाव पर आधारित लघुकथा-  अनमोल विरासत  एक वृद्ध व्यक्ति अपने अंतिम दिनों में एक बगीचा लगा रहा था। पड़ोसी ने पूछा, “बाबा, आपकी उम्र में फल का पेड़ लगाने का क्या फायदा? यह कब बड़ा होगा और कब आप फल खाएंगे?“ वृद्ध ने मुस्कुराकर कहा, “मैंने अपने पूरे जीवन में इस जमीन से फल, फूल और छाया ली है। जितना मैंने इस प्रकृति से लिया, क्या उतना ही वापस देना काफी है? मैं तो यहाँ और अधिक देने की उम्मीद से यह पेड़ लगा रहा हूँ। यह फल मैं नहीं, तो आने वाली पीढ़ी खाएगी।“ वृद्ध की आंखें संतुष्टि से चमक रही थीं। उसने संसार से केवल लिया नहीं, बल्कि लौटते हुए भी उससे अधिक दिया। सीखः हमें दुनिया को उ...