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Avoid selfishness

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  स्वार्थ को त्यागो, अपनी चेतना के विकास में सारे विश्व को अपने परिवार की तरह शामिल करो।  Avoid selfishness. Expand your consciousness to include the whole world as your family. तुम्हें सभी वस्तुएं केवल अपने आराम, ख़ुशी व लाभ के लिए प्राप्त हुई हैं, ऐसा सोचने का ढंग छोड़ दो। यह नियम याद रखो कि अपने आप को ख़ुश करने का सबसे अच्छा रास्ता है, यह सुनिश्चित करना कि दूसरे ख़ुश हैं। तुम्हें इस दृष्टिकोण से काम करना चाहिए कि सारा संसार ख़ुश होना चाहता है और अच्छा बनना चाहता है न कि केवल तुम। यदि कोई व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, तो पास खड़ा व्यक्ति पुलिस थाने के चक्कर काटने से बचने के लिए उसकी सहायता नहीं कर पाता। मान लो कि उसके स्थान पर तुम होते तो क्या सोचते? यदि हमारे सहयोग से किसी की जान बच सके, तो हमें उसकी सहायता करके जो ख़ुशी मिलेगी वही उसका प्रतिफल होगा। स्वार्थ का फल और त्याग की मिठास एक गाँव में भयंकर अकाल पड़ा। खाने-पीने की भारी कमी हो गई। गाँव के एक अमीर व्यापारी ने घोषणा की कि वह रोज सुबह गाँव के हर बच्चे को एक रोटी देगा। अगले दिन सुबह व्यापारी के घर के बाहर बच्चों की भीड़ जमा...

more give, more get.

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  जितना ज़्यादा तुम दोगे, उतना ही ज़्यादा मिलेगा। The more you give, the more you get. यह एक आश्चर्यजनक दैवीय नियम है कि जो तुम दूसरों को देते हो, वह दुगुना और तिगुना हो कर तुम्हें वापिस मिलता है; चाहे वह ज्ञान हो या भौतिक वस्तुएँ। कुछ लोग ज्ञान को छिपाने की कोशिश करते हैं, ताकि अन्य लोग उनके स्तर तक न पहुँच सकें, लेकिन वास्तविकता यह है कि तुम देने से और अधिक पाओगे। अपना ज्ञान दूसरों को देने से तुम अधिक ज्ञानवान बन जाओगे। असली ख़ुशी देने में है न कि पाने में। इसलिए दूसरों को देने में उदारवादी बनो।  जितना दोगे, उससे अधिक मिलेगा- एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास बहुत कम जमीन थी, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। जो भी उसके द्वार पर आता, वह उसे खाली हाथ नहीं जाने देता था। एक दिन गाँव में भीषण अकाल पड़ा। रामू के घर में भी अनाज खत्म होने वाला था। उसके पास केवल एक मुट्ठी बाजरा बचा था, जिससे वह अपने परिवार के लिए खिचड़ी बनाने वाला था। तभी उसके दरवाजे पर एक बूढ़ा और कमज़ोर साधु आया।  साधु ने कहा, “बेटा, मैं तीन दिनों से भूखा हूँ, क्या कुछ खाने ...

Don't show madness in choosing

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  किसी विषय को चुनने या निर्णय लेने में अस्थिरता और पागलपन न दिखाओ।   (Don't show fickle mindedness and madness in choosing or deciding something.) इस दुनिया में हर क्षेत्र में अन्तहीन वस्तुएं व परिस्थितियां हैं। एक अस्थिर मन वाला व्यक्ति किसी वस्तु के चुनाव में या निर्णय करने में आसानी से असमंजस में पड़ जाता है और उसका चित्त भ्रान्त हो जाता है, लेकिन यदि तुम ध्यान से देखो तो इस बड़ी समस्या का हल शांत चित्त रह कर खोजा जा सकता है। अच्छा या बुरा जो हम इस दुनिया में हम देखते हैं, वह हमारी अज्ञानता के कारण है। आध्यात्मिकता से सम्पन्न व्यक्ति अपनी आवश्यकता व रुचि के अनुसार किसी वस्तु का चुनाव करने या कोई निर्णय लेने में आसानी से सक्षम हो सकता है। इसलिए वह बाधित और असमंजस की स्थिति में नहीं होता। निर्णय लेने में अस्थिरताः एक लघुकथा रामू एक बहुत ही बुद्धिमान युवक था, लेकिन उसमें एक बहुत बड़ी कमी थी - वह निर्णय लेने में बहुत अस्थिर था। वह हर काम में “यह करूँ या वह“ की उलझन में फंसा रहता था। एक दिन, रामू शहर जाकर नौकरी पाने का निश्चय करता है। बस में बैठते ही उसने सोचा, “नौकरी करना तो गुला...

Small things are also important

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 छोटे काम भी उतने ही महत्त्वपूर्ण होते हैं, जितने बड़े काम। Small things are as important as big things. तुम्हें छोटे से छोटे काम को भी पूर्ण एकाग्रता और अविभाजित मनोयोग से करना चाहिए। तब प्रत्येक काम तुम्हें महत्त्वपूर्ण दिखाई देने लगेगा, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, रुचिकर हो या अरुचिकर। तभी तुम वास्तव में महानता के पथ पर अग्रसर होना आरम्भ कर दोगे।  नन्ही गिलहरी और राम सेतु जब भगवान श्री राम लंका जाने के लिए समुद्र पर पुल (राम सेतु) का निर्माण कर रहे थे, तब विशाल वानर सेना बड़े-बड़े पत्थर उठाकर समुद्र में डाल रही थी। हर कोई अपनी पूरी शक्ति से इस महान कार्य में जुटा था। उसी भीड़ में एक छोटी-सी गिलहरी भी थी। वह समुद्र के किनारे जाती, अपने शरीर को पानी में भिगोती और फिर रेत पर लोटती। जब उसके शरीर पर रेत के कण चिपक जाते, तो वह पुल के पत्थरों के बीच जाकर उन्हें झाड़ देती। वह बार-बार ऐसा ही कर रही थी। एक बंदर ने उसे देखा और हंसते हुए बोला, “नन्ही गिलहरी! तुम यह क्या कर रही हो? तुम्हारे इन छोटे-छोटे रेत के कणों से इस विशाल पुल को क्या फ़र्क पड़ेगा? रास्ते से हट जाओ, कहीं किसी पत्थर के नीचे न द...

Avoid greediness

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  लालच को दूर करो, सब वस्तुएं भगवान की संपत्ति हैं। Avoid greediness, everything belongs to God. किसी भी वस्तु पर अपना अधिकार न जताओ। हर वस्तु भगवान की है। जिसे तुम अपना कहते हो, वह वास्तव में तुम्हें अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अस्थाई रूप से दी गई है।  एक किसान के पास थोड़ी-सी ज़मीन थी, जिस पर वह खेती करके अपना निर्वाह करता था। उसके मन में अमीर बनने की बहुत चाह थी। वह राजा के पास अधिक ज़मीन पाने की इच्छा से प्रार्थना करने गया।  राजा ने कहा-‘ठीक है, कल तुम सूरज उगते ही चलना शुरू करना। सूरज ढलने तक जितनी ज़मीन पर चल कर वापिस उसी स्थान पर आ जाओगे, वह तुम्हारी हो जाएगी।’  ग़रीब किसान ने अगले दिन सुबह चलना तो क्या दौड़ना शुरू कर दिया। लेकिन सूरज ढलने से पहले वह उसी स्थान पर वापिस पहुँचने से पहले ही भूख-प्यास से थक कर गिर पड़ा और अपनी जान से ही हाथ धो बैठा।  राजा ने उस की थोड़ी सी ज़मीन के एक कोने में ही उस की कब्र बनवा दी। इसलिए सांसारिक वस्तुओं पर अपना अधिकार जमाने का या उन्हें इकट्ठा करने का लालच छोड़ दो, जो नाशवान हैं,  परिवर्तनशील हैं और अपनी प्रकृति के अनुसार नष...

Be flexible

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  नए बदलाव को व विकास को स्वीकारने में लचीलापन दिखाओ।  Be flexible for adopting new changes and improvments परिवर्तन प्रकृति का नियम है। विश्व की परिभाषा यही है कि यह विश्व परिवर्तनशील है। इसमें प्रति क्षण बदलाव घटित हो रहा है। जो हम एक घंटा पहले थे, अब हम वे नहीं हैं। अतः जीवन में परिवर्तन का विरोध न करो। इस परिवर्तन को आगे बढ़ने और कुछ सीखने के अवसरों की तरह प्रयोग करो। यह परिवर्तन का दर्शन शास्त्र है। यदि जीवन में परिवर्तन नहीं होंगे तो हम स्थिर और नीरस हो जाएंगे। अतः परिवर्तनों का आदर करना सीख़ो और परेशान होने के स्थान पर अपने लिए लाभदायक बनाने के लिए उपयोग करो। उदाहरण के लिए, मान लो तुम्हारा तबादला एक स्थान से दूसरे स्थान पर हो जाता है। अपने नए स्थान या नए काम के बारे में किसी प्रकार के शक, डर और नकारात्मक सोच को शुरू न कर दो। तुम वास्तव में पाओगे कि ये सब डर तुम्हारी कल्पना मात्र थे। वास्तविक स्थिति उस से अलग थी। एक राजा ने किसी पहुँचे हुए संत से विपत्ति से बचाने वाला सूत्र देने का आग्रह किया। संत ने एक ताबीज में एक मंत्र बांधकर दिया और कहा कि जब तुम बहुत बड़ी विपत्ति में फ...

‘ Learn to say ‘No’.

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  ‘न’ कहना सीखो।  Learn to say ‘No’.   अपने लक्ष्य की ओर देखो, साहसी बनो और कभी भी कहीं भी जब परिस्थिति का तकाज़ा हो, ‘न’ कहने से हिचकिचाओ नहीं। ‘न’ कहने का हल्का-सा साहस कभी-कभी सारे जीवन को परेशानी से को बचा सकता है। दूसरों के प्रभाव से अपने जीवन का संचालन न करो। अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व बनाओ। यदि तुम ठीक हो, तो तीव्र विरोध होने पर भी चट्टान की तरह अडिग रहो। किसी भी अन्याय या ग़लती होने के विरोध में अपनीआवाज़ उठाने का साहस भी रखो।  सहयोग करने की भी एक सीमा होती है। कार्यालय से घर लौटते समय शाम का ट्रैफ़िक अपने चरम पर था। थकी-हारी शालिनी बस घर पहुँचकर आराम करना चाहती थी। तभी उसकी नज़र सड़क किनारे खड़े अपने पुराने सहकर्मी, रमेश पर पड़ी। रमेश हाथ हिलाकर उसे बुला रहा था। शालिनी ने एक पल सोचा कि अनदेखा करके निकल जाए, लेकिन रमेश की मदद मांगने वाली आँखों ने उसे रोक लिया। रमेश ने पास आते ही कहा, “शालिनी! मेरी बाइक खराब हो गई है और मुझे तुरंत अपने बीमार पिताजी के पास अस्पताल पहुँचना है। क्या तुम मुझे थोड़ी लिफ्ट दे सकती हो? रास्ता थोड़ा लंबा है, तुम्हारे घर के रास्ते में भी नहीं पड़ेग...

Enjoy your work

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  काम का आनन्द लो, फल की चिन्ता न करो। Enjoy your work, don't worry about the fruits. जो काम तुम कर रहे हो उसमें आनन्द लेना सीखो, क्यांकि फल तुम्हारे हाथ में नहीं है और वह केवल भगवान के हाथ में है। तुम्हें अपनी ख़ुशी के लिए फल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। मान लो तुम कहते हो कि तुमने कठिन परिश्रम किया था, लेकिन फिर भी तुम्हें अब तक फल नहीं मिला। तुम अपना दिमाग़ इस विश्लेषण में क्यों लगाना चाहते हो? इसका विश्लेषण करना भगवान का काम है।  एक शहर में एक गरीब रिक्शा चालक था, रामू। उसका जीवन हर रोज़ कमाने और खाने में बीतता था। उसके पास न धन था, न सुविधाएँ, लेकिन उसका मन शांत रहता था। वह अपने काम को बोझ नहीं, बल्कि अपनी ज़िम्मेदारी समझता था। एक दिन, बहुत मेहनत के बाद, रामू ने पाँच रुपये बचाए। यह उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। उसने घर जाकर अपनी पत्नी को वे पैसे दिए और कहा, “यह हमारी मेहनत के बचे हुए पैसे हैं, इन्हें संभाल कर रखना, यह कभी काम आएँगे।“ उस दिन रामू के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह किसी अमीर के चेहरे पर भी मुश्किल से मिलती थी। उसी शहर में एक और व्यक्ति था, मोहन; जो एक बड़े दफ्तर में काम ...

मित्र की परिभाषा

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  मित्र की परिभाषा वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से                                                                                               जिसके साथ खून का रिश्ता नहीं,  फिर भी वह प्रिय लगे, वह है मित्र। जिस से दुनिया भर की बातें करके भी थकें नहीं, वह है मित्र। जिसके साथ छोटी-सी बात पर भी  खुल कर हंस लें, वह है मित्र। जिस के कंधे पर माथा रख कर खुल कर रो सकें, वह है मित्र। जिस के साथ ठण्डी चाय भी एकदम गर्म लगे, वह है मित्र। जिस के साथ खिचड़ी खाने में भी दावत जैसी महक आए, वह है मित्र। जिस को आधी रात को भी उठा कर दिल की बात कर सकें, वह है मित्र। जिस के साथ भूमिका बनाए बिना खुल कर बात कर सकें, वह है मित्र। एक अरसे के बाद भी जिस को मिलते ही दिल झूम उठे, वह है मित्र। मित्र वह है, जो हर मुसीबत में हर स...

nothing free of cost

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 दुनिया में कुछ भी मुफ़्त में नहीं मिलता। There is nothing free of cost  in this world. तुम्हें जो कुछ भी दुनिया में मिलता है उस प्रत्येक वस्तु के लिए कीमत चुकानी पड़ती है। दैवीय कानून के अर्न्तगत कुछ भी मुफ़्त नहीं कहा जा सकता। वे वस्तुएं जो स्पष्ट रूप से तुम्हें मुफ्त में मिली हुई दिखाई देती हैं, जैसे तुम्हारे पूर्वजों की जायदाद, लाटरी, यहां तक कि घूस से प्राप्त धन भी, तुम्हें इसके लिए किसी न किसी रूप में कीमत चुकानी पड़ेगी, यद्यपि तुम इसे सीधे तौर पर नहीं देख सकते। मुफ़्त का भार एक छोटे, शांत गाँव में रामू नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह ईमानदार था और अपनी सरल जीवन शैली से संतुष्ट था, लेकिन हमेशा एक बेहतर, आसान जीवन की कामना करता था। वह अक्सर सोचता, “काश, मुझे कुछ भी मुफ़्त में मिल जाए, तो जीवन कितना अच्छा हो!“  एक दिन, गाँव के बाहर जंगल से गुजरते हुए, उसे एक प्राचीन, चमचमाती बोतल मिली। उत्सुकतावश, उसने उसे खोला और एक पल में, एक शक्तिशाली जिन्न बाहर निकला। जिन्न ने कहा, “हे मानव! मैं तुम्हारी ईमानदारी से प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हें एक विशेष वरदान देता हूँ। आज से तुम्हें...

There is nothing urgent in the world.

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  दुनिया में कुछ भी ‘अति आवश्यक’ नहीं है।  There is nothing urgent or indispensable in the world. कुछ लोग हमेशा विभिन्न कार्यों को पूरा करने के तनाव में रहते  हैं। वे हमेशा समय की कमी या समय पर काम को पूरा करने के दबाव में रहते हैं। उनके विचार में यदि कोई काम सीमित समय अवधि में समाप्त नहीं होगा, तो या तो ज़मीन गिर पड़ेगी या विश्व लड़खड़ा जायगा। कई प्रबंधक अपने मातहतों को प्रत्येक कार्य पर ‘अति आवश्यक’ का लेबल लगा कर काम के साथ-साथ अपने तनाव को भी आगे बढ़ा देते हैं और अपनी उत्तेजनाएं और बेचैनियां भी उन तक पहुंचा देते हैं जब कि कुछ कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध होता है । “दफ़्तर की दौड़” सुरेश एक मध्यमवर्गीय दफ़्तर में काम करता था, जहाँ हमेशा काम का अंबार लगा रहता। उसे अक्सर यह तनाव रहता कि समय पर काम कैसे पूरा होगा। हर सुबह वह नई ऊर्जा से आता, पर जल्द ही काम के बोझ तले दब जाता। एक दिन, उसकी दस साल की बेटी ने उससे पूछा, “पापा! आप हमेशा इतने परेशान क्यों रहते हो?” सुरेश ने कहा, “बेटी! काम बहुत है और समय कम। जल्दी ख़त्म करने का तनाव रहता है।” बेटी ने मासूमियत से जवा...

Always remain near to God.

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  हमेशा भगवान के समीप रहो Always remain near to God. जब तुम बात करते हो, खाते हो, चलते हो, सोते हो, यात्रा करते हो, तब भी भगवान की उपस्थिति को अपने निकट महसूस करो। भगवान को अपने हर काम में सम्मिलित करो। जब तक तुम अपना हाथ भगवान के हाथ में पकड़ाए रखोगे, तुम दुनिया में सभी कठिनाइयों से सुरक्षित रहोगे, जैसे ही तुम्हारा हाथ छूटेगा, तुम हर प्रकार के डर, चिन्ताओं, उत्सुकताओं, उत्तेजनाओं, अनिश्चितताओं, दुःखों, बेचैनियों, असफलताओं व निराशाओं से घिर जाओगे। एक चिड़िया जंगल में एक पेड़ पर रहती थी। जंगल बिलकुल सूखा हुआ था। न घास, न पेड़, न फूल, न फल। जिस वृक्ष पर चिड़िया रहती थी, उस पर भी सिर्फ सूखी टहनियाँ थीं। पत्ते भी नहीं थे। चिड़िया वहीं रह कर हर समय शंकर भगवान का जाप और गुणगान करती रहती थी। एक बार नारद जी जंगल में हो कर जा रहे थे। चिड़िया ने देख लिया। तुरंत आकर बोली - नारद जी! आप कहाँ जा रहे हैं? नारद ने कहा - शंकरजी के पास जा रहा हूँ।  चिड़िया ने कहा - भगवान शंकर मेरा बड़ा ध्यान रखते हैं। मेरे सूखे जंगल के बारे में उन्हें पता नहीं है शायद। कृपया उनसे कह दीजिएगा मेरे जंगल को हरा भरा कर दें। ...

Don’t linger things.

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   काम को टालने से बचो Don’t linger things.   काम को कल के लिए या भविष्य के लिए टाल देने की आदत से बचो। सफल व्यक्ति वे होते हैं, जो अपने स्थान से उठते हैं और उसी समय उचित कार्यवाही करते हैं।  एक गाँव में टालू राम नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसका नाम उसके स्वभाव पर बिल्कुल सटीक बैठता था। उसे कोई भी काम दिया जाता, वह उसे तुरंत करने की बजाय टाल देता। “अभी तो बहुत समय है,” “इसे कल कर लेंग,” या “थोड़ी देर आराम कर लूँ, फिर करूँगा” - ये उसके पसंदीदा बहाने थे। एक बार गाँव के मुखिया ने सभी निवासियों को आदेश दिया कि वे अपने घरों के सामने की नालियों की सफाई करें, क्योंकि बारिश का मौसम आने वाला था और पानी जमा होने से बीमारियाँ फैलने का खतरा था। मुखिया ने सभी को तीन दिन का समय दिया। गाँव के बाकी लोग तुरंत काम पर लग गए। उन्होंने पहले ही दिन अपनी-अपनी नालियाँ साफ कर लीं। लेकिन टालू राम ने सोचा, “अभी तीन दिन हैं, मैं आराम से कर लूँगा।” पहला दिन बीता। दूसरे दिन भी वह बैठा रहा। तीसरे दिन सुबह उसने सोचा कि दोपहर तक काम पूरा कर लेगा। लेकिन दोपहर होते-होते आसमान में काले बादल छा गए और मूसल...

Always remain optimistic.

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  हमेशा आशावादी रहो।  Always remain optimistic. इस का महत्त्व नहीं है कि तुम्हें अपने काम के लक्ष्य को प्राप्त करने में कितनी असफलताएं मिली, तुम तो बस! अपनी सफलता के बारे में आशावादी रहो। यदि तुमने उचित कारण से लक्ष्य निर्धारित किया है, तो याद रखो कि इस पृथ्वी पर या स्वर्ग में ऐसी कोई ताकत नहीं है, जो तुम्हें तुम्हारी इच्छित वस्तु प्राप्त करने के लिए रोक सके। आवश्यकता है केवल भगवान में अटूट विश्वास के साथ दृढ़ निश्चय की। यह भी याद रखो कि तुम्हारे द्वारा किया गया छोटा सा प्रयत्न भी व्यर्थ नहीं जाता। यह प्रकृति का नियम है। कई तरह से किये गए प्रयत्न, संघर्ष व तुम्हारे द्वारा किया गया परिश्रम जल्दी या देर से निश्चय ही तुम्हेंं फल देगा।  एक बहुत ही छोटा लगभग सात साल का बालक था। वह बहुत बुद्धिमान था। उसका नाम आलोक था। उसके पिता सेठ धनीराम एक व्यापारी थे। आलोक जब पांच वर्ष का था, तभी उसकी माँ उसे छोड़ कर भगवान के पास चली गयी। बेचारा आलोक अब हमेशा उदास रहने लगा।  उसके पिता को जब व्यापार से समय मिलता, तो उसके साथ समय बिताते थे। यूँ तो आलोक के पिता आलोक से बहुत प्यार करते थे, कि...