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देह में रहते विदेही

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देह में रहते विदेही  हिदीं शब्दकोष में विदेह का अर्थ होता है बिना देह का ....लेकिन विदेही उसे कहते हैं, जो देह में रह कर भी देह से पूरी तरह अनासक्त (कहीं दूर चले जाना) हो गया हो।  महाराजा जनक के एक मंत्री ने उनसे एक दिन पूछा - महाराज! आप देहधारी होकर भी विदेही क्यों कहे जाते है? महाराज जनक बोले - कुछ दिनों बाद इसका जवाब देंगे।  एक दिन राजा जनक ने दूत को बुलाकर कहा - जाकर शहर में ढिंढोरा पिटवाओ कि मंत्री के हाथों घोर अपराध होने के कारण उन्हें शाम चार बजे सूली पर चढ़ा दिया जाएगा। ढिंढोरे की कार्यवाही होने के बाद राजा ने मंत्री को दोपहर बारह बजे भोजन के लिए आमंत्रित किया। मंत्री नियत समय पर भोजन के लिए पहुंचा। राजा ने भोजन पर अनेकों प्रकार के व्यंजन बनवाए, किंतु भोजन में जहां जरूरत थी, वहां नमक बिल्कुल भी नहीं डलवाया। मंत्री का ध्यान तो सूली की तरफ था। खाने की बिल्कुल भी इच्छा न होने पर भी उन्होंने राजा के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए जैसे तैसे भोजन किया।  भोजन के पश्चात जनक ने पूछा - कैसा लगा भोजन?  मंत्री डरते हुए बोला - महाराज मौत के भय के कारण मुझे भोजन में कुछ ...

माता-पिता

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  माता-पिता वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से ऊपर जिसका अन्त नहीं उसे आसमाँ कहते हैं संसार में जिसका अन्त नहीं उसे पिता और माँ कहते हैं करो दिल से सिजदा, इबादत बनेगी  माँ बाप की सेवा, अमानत बनेगी खुलेगा जब तुम्हारे कर्मों का खाता तो माँ बाप की भक्ति, तुम्हारी जमानत बनेगी   माँ सत्य है, पिता विश्वास है इस लिए माता-पिता परमात्मा के खास हैं माँ आग में तपती है, पिता धूप में तपता है, तब जा कर कहीं सन्तान पलती है. वक्त का पता नहीं चलता अपनों के साथ पर अपनों का पता चलता है वक्त के साथ वक्त नहीं बदलता किसी के साथ पर अपने बदल जाते हैं वक्त के साथ. पुजारी कहता है कि भगवान नहीं मिलता मुल्लाँ कहता है कि रहमान नहीं मिलता मैं कहता हूँ कि आज इस इंसानों की दुनिया में ढूंढने पर भी इन्सान नहीं मिलता. सपने वो नहीं होते जो सोने पे आते हैं ,  सपने वो होते है जो सोने नहीं देते .  अपने वो नहीं होते, जो रोने पे आते हैं ,  अपने वो होते हैं जो कभी रोने नहीं देते . सच बोलू तो अपने रूठ जाते हैं ,  झूठ बोलू तो शब्द रूठ जाते हैं .  ईमानदार...