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Don't get upset

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  किसी के द्वारा आलोचना किए जाने पर व्याकुल न हों। Don't get upset over rejection and disapproval. कुछ लोग बहुत बेचैन हो जाते हैं, जब वे या उनका काम या उनके विचार किसी के द्वारा अस्वीकार और नापसंद कर दिये जाते हैं। वे महसूस करने लगते हैं कि वे अयोग्य हैं और अन्य लोगों की तुलना में हीन हैं और इस कारण वे हताश और निराश हो जाते हैं। यदि तुम ऐसा करते हो तो तुम एक बहुत ही झूठी कल्पना बना रहे हो कि जो व्यक्ति तुम्हें अस्वीकार कर रहा है, वह हमेशा ठीक होता है और तुम हमेशा ग़लत होते हो। लेकिन वास्तविकता यह है कि वे हमेशा ठीक नहीं होते। जो व्यक्ति तुम्हें नकार रहा है, वह हो सकता है कि तकनीकी रूप से तुम्हारा मूल्यांकन करने के लिए सही न हो या वह तुम्हारे विरुद्ध  ईर्ष्या या पक्षपात करने वाला व्यक्ति हो। इसलिए तुम इसे कैसे ठीक कह सकते हो। तुम्हें अपने बारे में अन्य व्यक्तियों की राय सुननी चाहिए, पर केवल उस व्यक्ति की राय के अनुसार यदि तुम्हारे विचार अन्य लोगों के साथ नहीं मिलते, तो बेचैन होने की आवश्यकता नहीं है। वास्तव में जब कोई व्यक्ति तुम्हारे बारे में कोई राय देता है, तो वह तुम्हारी बजा...

सच्चा शृंगार

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सच्चा शृंगार  भारत माता का सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा Sung by- Bindu Jain, Delhi धुनः क्या मिलिए ऐसे लोगों से या मैं आँख में अंजन भर लूँ, या सबके दुःख भंजन कर लूँ। या मैं सबको खुशी बांट दूँ,या सबका अभिनन्दन कर लूँ।।  या सबको सत्पथ दिखला दूँ,या धर लूँ माथे पर बिंदिया,  या मैं उनका मर्दन कर दूँ, जिसने उड़ा दी मेरी निंदिया। झूठ और रिश्वतखोरी की, जड़ें जम गई हैं गहरी, ऐसी सरकार सुनेगी क्या, जो जन्मजात होती बहरी। या सबके दुःख-दर्द मिटा दूँ, या पहनूँ पैरों में पायल, या मैं सबक सिखा दूँ जिसने, किया है मेरे दिल को घायल। बेईमानी का पाठ सीख गए, बिना पढ़े ही ये बच्चे, अब मैं कैसे कह दूँ कि, ये बच्चे हैं मन के सच्चे। ये बच्चे ही कल को मेरा, प्यारा देश संभालेंगे, न जाने किस रंग-रूप में इस जननी को ढालेंगे। या बच्चों को समझ सिखादूँ, या मैं डालूँ गले में माला, या पूछूँ नेताओं से, क्या हाल देश का कर डाला? भ्रष्टाचार औ’ अनाचार ने, किया खोखला देश को,  हे भगवन्! अब तुम ही आकर, इसे नया परिवेश दो। धर्म की राह दिखा दूँ सबको, या सिंदूरी मांग सजा दूँ, भार...

Learn to appreciate others.

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दूसरों की प्रशंसा करना सीखो।  Learn to appreciate others. अच्छी बातों के लिए और दूसरों के द्वारा किये गये अच्छे कामों के लिए उन की प्रशंसा करना सीखो। यह उन्हें उत्साहित करेगा और चारों ओर स्वस्थ वातावरण का निर्माण होगा। दूसरों में कुछ अच्छाई देखने से तुम मानसिक रूप से सकारात्मक और प्रसन्न रहोगे। चाहे कोई व्यक्ति कितना भी बुरा क्यों न हो, लेकिन हरेक में कुछ न कुछ ‘अच्छा’ होता है। दूसरों की प्रशंसा करना सीखो (लघुकथा) एक बार एक बहुत ही प्रसिद्ध चित्रकार ने एक अद्भुत तस्वीर बनाई और उसे शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर टांग दिया। तस्वीर के नीचे लिखा था, “जिस किसी को भी इसमें कोई कमी दिखे, वह वहां निशान लगा दे।” शाम को जब चित्रकार ने तस्वीर देखी, तो वह हैरान रह गया। पूरी तस्वीर पर निशानों की भरमार थी, और एक भी कोना ऐसा नहीं था, जहां किसी ने कोई गलती न निकाली हो। चित्रकार बहुत उदास हो गया। उसे उदास देखकर, उसके एक समझदार मित्र ने कहा, “अगले दिन तुम एक नई तस्वीर बनाओ और उसे वहीं टांगना, लेकिन इस बार निर्देश अलग लिखना।” अगले दिन, चित्रकार ने वैसी ही खूबसूरत तस्वीर बनाई, लेकिन इस बार उसने लिखाः “ज...

Be independent.

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  स्वतंत्र बनो, अपने निर्णय ख़ुद लो। Be independent. Take your own decisions. कुछ लोगों को अपने लिए निर्णय लेने के लिए दूसरों की ओर देखने की आदत होती है। यह एक कमज़ोर दिमाग़ व आत्म-विश्वास के अभाव के लक्षण हैं। तुम्हें अधिकतर अपनी समस्याएं खुद ही हल करने की कोशिश करनी चाहिए और अपने निर्णय खुद लेने चाहिएं। अपना फैसला, अपनी उड़ान राजीव एक होनहार युवा था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी यह थी कि वह अपने जीवन का हर छोटा-बड़ा फैसला दूसरों से पूछकर लेता था। करियर चुनना हो, कपड़े खरीदने हों या दोस्तों के साथ घूमने जाना हो- वह हमेशा उलझन में रहता था कि “लोग क्या कहेंगे“ या “पापा क्या कहेंगे“। उसके पिता एक समझदार व्यक्ति थे। उन्होंने राजीव की इस आदत को भांप लिया था। एक दिन, राजीव को एक बड़ी कंपनी से अच्छी नौकरी का ऑफर आया, लेकिन वह नौकरी दूसरे शहर में थी। राजीव डर गया और उसने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से सलाह लेना शुरू कर दिया। कोई कहता, “बाहर मत जाओ, यहीं नौकरी ढूंढो,” तो कोई कहता, “इतनी अच्छी अपॉर्चुनिटी मत छोड़ो।” राजीव की उलझन और बढ़ गई। उसने फिर अपने पिता से पूछा। पिता ने मुस्कुराकर कहा, “राजीव, स...

‘माटी का दीया’

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  ‘माटी का दीया’ सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा Presented by Bindu Jain , Delhi एक माटी का दीया, जिसके उर में स्नेह भरा। जीवन की बाती को आकण्ठ, चिर स्नेह में भिगो कर, घर की मुंडेर पर बैठा,  तिल-तिल कर, रात भर जलता रहा। निष्ठुर सनम की राह तकता रहा। मन में यह आस लिए, पथ आलोकित करता रहा। मेरे साजन आएंगे। मुझे दोनों हाथों में उठा कर, घर के भीतर ले जाएंगे। आंगन के ऊंचे आले में, सहेज कर टिका देंगे। मैं भी वहाँ तेज़ हवा से बचता हुआ,  चैन की सांस लेता हुआ, सारे घर को आलोकित करूँगा, आजन्म उनके जीवन को, खुशियों के प्रकाश से भरूँगा। पर ‘हाय’................ रात बीती, सुबह होने को आई,  पक्षियों ने भी ली अंगड़ाई। सूरज की लालिमा भी पूर्व दिशा में नज़र आई, स्नेह (तेल) भी चुक गया, जीवन भी रुक गया। बाती ने शनैः शनैः घर की मुंडेर पर बैठे-बैठे, अपना जीवन खो दिया। और दीया............  सदा के लिए, मौत की नींद में सो गया। सनम ने न जाने क्यों अपना मुख मोड़ लिया। सारे सपने हो गए चकनाचूर,  दिल के अरमां हो गए रोने को मज़बूर। मेरे साजन ने राह बदल ली,...

Don’t compare

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  तुलना मत करो।   Don’t compare. कुछ लोगों की आदत होती है, दूसरों के साथ तुलना करना और हमेशा हताश रहना। ऐसे लोगों को महसूस करना चाहिए कि इस बड़ी दुनिया में तुलना का कोई अन्त नहीं है।  अनूठा कौवा एक जंगल में एक कौवा रहता था। वह अपने काले रंग से बहुत दुःखी था। उसने एक संत से हंस जैसा सफेद और सुंदर बनाने की विनती की।  संत ने कहा, “हंस से पूछो, क्या वह सुखी है?“ कौवा हंस के पास गया। हंस ने कहा, “मैं गोरा तो हूं, लेकिन मैं तालाब में कैद रहता हूँ। मुझे कोई खाना नहीं देता। मैं स्वयं को बेकार समझता हूं। तुम्हारे पास तो आजादी है, तुम कहीं भी जा सकते हो।“ कौवा समझ गया कि गोरा होना ख़ुशी का कारण नहीं है, उसकी आकाश में उड़ने की स्वतंत्रता ही उसकी असली ताकत है। उसने किसी से अपनी तुलना करना बंद कर दिया और अपनी जिंदगी में खुश रहने लगा।  शिक्षाः अपनी तुलना कभी किसी से मत करें। जो आपके पास है, वह सबसे अनमोल है। तुम किसी भी पद पर पहुँच जाओ, लेकिन हमेशा कुछ ऐसे लोग होंगे, जो तुमसे ऊपर होंगे और कुछ ऐसे भी लोग होंगे, जो तुमसे नीचे होंगे। यह दुनिया की प्रकृति (स्वभाव) है। इसी प्रका...

नदिया की धार

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  नदिया की धार     Sung by - Bindu Jain, Delhi नदिया की जल धारा बहती, मानो अश्रु धारा। मन का भेद न कोई समझा, हार गया जग सारा। घर से निकली, शांत सरल- चित्त, अब क्यों रुदन मचाती। पथरीली राहों पर चलती, आगे बढती जाती। क्या पता नहीं था, तन और मन, छलनी-छलनी हो जाएगा। आंखों से अश्रु-धार बहेगी, कोई न साथ निभाएगा। पर्वत ने भी समझाया था बिल्कुल मत घबराना। कंकर-पत्थर भी बनें न बाधक, आगे बढ़ती जाना। अपना रास्ता स्वयं बनाना, मंजिल को पा जाओगी। पीछे मुड़ कर कभी न देखो, जग में नाम कमाओगी। थाह कोई भी पा न सका, न नदिया की, न नयनों की। धार निरंतर बहती रहती, परवाह नहीं बाधाओं की। ऊंची, नीची राह मिले, या हो भूमि समतल मैदान। रुदन करे या शांत रहे पर, चलती अविरल और अविराम। गर मंजिल को पाना है तो कष्टों से मत घबराना,  चलते रहना, बढते रहना, मन को कभी न भटकाना। द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अ...

Don’t think or speak ill

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  किसी के लिए बुरा न सोचो, न बोलो। Don’t think or speak ill about anybody. विचार बहुत प्रभावशाली हथियार हैं। जब तुम किसी व्यक्ति के लिए बुरा बोलते या सोचते हो, तो तुम केवल उसी व्यक्ति को हानि नहीं पहुँचाते, बल्कि उन नकारात्मक तरंगों से अपने आप को भी अस्थाई रूप से नकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हो और इसीलिए अपने आप को हानि पहुँचाते हो। तुम विचारों द्वारा दूसरे को हानि पहुँचा कर कर्म के नियम के अनुसार स्वयं को दंडित करते हो। जैसा बोओगे, वैसा काटोगे  एक शहर में सोहन नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह स्वभाव से बहुत ईर्ष्यालु था। उसके पड़ोस में मोहन नाम का एक हंसमुख और मेहनती व्यक्ति रहता था। मोहन की तरक्की देखकर सोहन हमेशा जलता रहता था। सोहन के मन में हमेशा यह विचार आता था कि कैसे मोहन का कोई काम बिगड़ जाए या उसे नुकसान हो। एक दिन, सोहन ने मोहन को नुकसान पहुँचाने के लिए एक योजना बनाई। उसने मोहन के घर के सामने वाली गली में कुछ कंकड़ और कीलें बिखेर दीं, ताकि जब मोहन सुबह अपनी गाड़ी लेकर निकले, तो उसका टायर पंक्चर हो जाए। अगली सुबह, जब सोहन उठा, तो उसने देखा कि मोहन की गाड़ी वहां नहीं थी। वह खुश...

We are all connected

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  हम सब आपस में जुड़े हुए हैं।  We are all connected to each other. हम सभी व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से एक दूसरे से अलग अनुभव करते होंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह केवल शारीरिक अलगाव है। मानसिक रूप से हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए हम एक दूसरे की खुशी व ग़म को महसूस कर सकते हैं। सभी का मन दूसरे के मन से जुड़ा होता है और बदले में सभी मन ब्रह्माण्ड में स्थित मन (भगवान) से जुड़े होते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के मध्य एक महान् आन्तरिक संबंध है।  धागे का रहस्य रामपुर गाँव में सूखे के कारण हाहाकार मचा था। नदी सूख गई थी और खेत पत्थर बन गए थे। गाँव के लोग शहर की ओर पलायन करने की सोच रहे थे। गाँव के एक बुजुर्ग काका, जो बहुत ही समझदार माने जाते थे, उन्होंने गाँव वालों की सभा बुलाई। उन्होंने सबको एक-एक धागा दिया और कहा, “इस धागे को तोड़ो।” सबने आसानी से तोड़ दिया। फिर उन्होंने कहा, “अब इन धागों को एक साथ मिलाकर एक मोटी रस्सी बनाओ और फिर तोड़ो।” कोई भी उस रस्सी को नहीं तोड़ पाया। काका मुस्कुराए और बोले, “यही हम सबकी कहानी है। हम सब आपस में जुड़े हुए हैं। अगर हम अलग-अलग रहेंगे, तो स...

एक कली मुस्काई

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 एक कली मुस्काई  (15.4.2016) सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा प्रेरणा स्रोत -  मेरे आँगन में लगी मोतिया की बेल मेरे लिए संदेशा लाई। पहले दिन उसमें कलियां बनी, दूसरे दिन वे कलियां सुगन्धित फूल में परिवर्तित हो गई, तीसरे दिन वे फूल पीले पड़ने लगे और चौथे दिन झरने लगे। क्या बेटियों का जीवन भी इसी तरह खिल कर बिखर जाने के लिए है? Presented by Bindu Jain , Delhi एक कली सुन्दर बगिया में, फिर से मुस्कुराने लगी। हंसते-हंसते फूल बनी और, बगिया को महकाने लगी।। भौरें भी मंडराने लगे और, मीठी तान सुनाने लगे। मधुर-मधुर संगीत सुना कर, उसका मन बहलाने लगे।। बढ़े सभी के हाथ, उसे अपना बनाने के लिए। अपने सूने आँगन की, बगिया में सजाने के लिए।। तभी माली ने चुन-चुन कर, सब फूलों का इक हार बनाया। चला भेंट करने राजा को, उसके महलों में सजवाया।। फूल भी अपनी किस्मत पर, रह-रह कर इतराने लगा, कुछ शरमाने कुछ सकुचाने, मन ही मन मुस्काने लगा।। बुनने लगा महकते सपने, पर मन ही मन घबराने लगा। अपनी शीतल सुरभि से वह, राजमहल दमकाने लगा।। पर कुछ जल्लादी हाथों ने, उसको माला से अलग किया।...

You can learn from everybody

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  तुम इस दुनिया में हरेक से सीख सकते हो। You can learn from everybody in the world. तुम्हें किसी व्यक्ति को हीनता की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। इस दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कुछ नहीं जानता और न ही कोई व्यक्ति ऐसा है, जो सब कुछ जानता है। प्रत्येक व्यक्ति कुछ ऐसा जानता है, जो तुम नहीं जानते। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति से तुम कुछ सीखने व जानने की कोशिश करो। अनमोल गुरु बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में आर्यन नाम का एक बहुत ही विद्वान व्यक्ति रहता था। उसे अपनी विद्या और ज्ञान पर बहुत अहंकार था। उसे लगता था कि दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जो वह नहीं जानता। एक दिन उसने सुना कि पास के जंगल में एक महात्मा आए हैं, जो बहुत पहुंचे हुए हैं। आर्यन ने सोचा, “मैं इतना ज्ञानी हूँ, मुझे उस महात्मा से क्या सीखना होगा? लेकिन फिर भी, चलो चलकर देखता हूँ कि वे क्या सिखाते हैं।“ आर्यन महात्मा के पास पहुंचा। महात्मा एक पेड़ के नीचे शांत बैठे थे। उसने महात्मा से पूछा, “महाराज! मैंने वेद-पुराण, शास्त्र, सब पढ़ लिए हैं। क्या आप मुझे कुछ ऐसा सिखा सकते हैं, जो मैं नहीं जानता?“ महात्मा मुस्कुराए और उन्ह...

मुरझाया चमन

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*मुरझाया चमन* सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा Sung by - Bindu Jain , Delhi हर सुबह जब आईना मैं देखता हूँ,  वक्त की पहचान मुख पर देखता हूँ;  श्वेत केशों में छिपी जो कालिमा थी, कब व कैसे धुल गई, मैं सोचता हूँ। (1) वक्त के तूफान से टूटा घरौंदा, है न कश्ती और न साहिल, खोजता हूँ। (2) जिन्दगी रोशन थी मेरी जिसके दम पर, उस शमा को मैं पिघलते देखता हूँ। (3) मेरे माथे की लकीरें कह रही हैं,  उम्र को यूँ ही गुज़रते देखता हूँ।  (4) दर्द से रिश्ता जो मेरा बन गया है, उन ही रिश्तों को बिखरते देखता हूँ। (5) आँख नम होने लगी उनके विरह में, होठों को मैं थरथराते देखता हूँ। (6) आशियाँ में कब उदय होगा दिवाकर,  उन पलों की राह ही मैं देखता हूँ। द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद।  

अमर गीत

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अमर गीत सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा Sung by Bindu Jain   धुन: मैली चादर ओढ़ के कैसे, द्वार तुम्हारे आऊँ.......  मेरा गीत अमर हो जाए, ऐसा गीत लिखूं मैं कैसे? मेरी प्रीत अमर हो जाए,ऐसी प्रीत करूं मैं कैसे? मन में भाव तरंगें उठ-उठ, अनजाने पथ पर बह जाती कंटक पत्थर से टकरा, अन- कही वेदना को सह जाती भाव लेखनी के बंधन में, बतला दो बांधू मैं कैसे? मेरा गीत अमर हो जाए, ऐसा गीत  लिखूं मैं कैसे? बर्फीली वादी से निकल कर, सरिता कलकल बहती जाती बहती लहरों की गुंजन से, सबको मधुर  संगीत सुनाती तन मन को अमृत  से भर दे, ऐसा पान कराऊं मैं कैसे?  मेरा गीत अमर हो जाए, ऐसा गीत लिखूं मैं कैसे? प्यार  के  मीठे बोल बोल दो, सबका मन हर्षित  हो जाए  हर मानव को गले लगा लो, मानवता गर्वित  हो जाए  सबके मन को जोड़ सके जो, ऐसी तान सुनाऊं मैं कैसे?  मेरा गीत अमर हो जाए, ऐसा गीत लिखूं मैं कैसे? उम्र  है छोटी, काम बड़ा है, जो करना है, तत्पर कर लो नफरत  के कांटे न उगाओ, प्रेम  पुष्प से झोली भर...

Observe courtesy and good mannerism.

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  नम्रता और अच्छे व्यवहार को ध्यान में रखो।  Observe courtesy and good mannerism. हमारे प्रतिदिन के व्यवहार में हमें अच्छे व्यवहार, पर्याप्त शिष्टता और अच्छे सभ्य समाज के नियमों को ध्यान में रखना चाहिए।  उदाहरण के लिए- 1. ‘धन्यवाद’ और ‘कृपया’ शब्द का उदारता से प्रयोग करो। 2. अपने से बड़े आगन्तुक का स्वागत करते समय खड़े हो जाओ। 3. जो तुम उधार लेते हो, उसे समय पर वापिस कर दो। 4. व्यंग्य पूर्ण टिप्पणी करने से बचो। 5. रहस्यों को अपने तक रखो। उनको खोलने के लोभ से बचो। अपने घनिष्ठ मित्र पर रहस्य प्रकट करने से पहले दो बार सोचो। 6. जो लोग आपके आस पास रहते हैं उनके नाम याद रखो। 7. गोपनीयता (privacy) का सम्मान करो। किसी के कमरे में प्रवेश करने से पहले दरवाज़ा खटखटाओ। 8. जब कोई बोल रहा हो तो बीच में दख़ल देने के लोभ से बचो। 9. बिना चिड़चिड़ापन दिखाए असहमत होना सीखो। 10. लोगों को यह बताने से बचो कि कोई काम कैसे किया जाना चाहिए, जब तक पूछा न जाय। 11. अपने वायदों और वचनों पर कायम रहो। 12. व्यापार की बातों के विषय में सार्वजनिक स्थानों पर बहस न करो। 13. प्रशंसा सबके सामने करो, पर आलोचना अकेल...