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We are all connected

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  हम सब आपस में जुड़े हुए हैं।  We are all connected to each other. हम सभी व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से एक दूसरे से अलग अनुभव करते होंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह केवल शारीरिक अलगाव है। मानसिक रूप से हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए हम एक दूसरे की खुशी व ग़म को महसूस कर सकते हैं। सभी का मन दूसरे के मन से जुड़ा होता है और बदले में सभी मन ब्रह्माण्ड में स्थित मन (भगवान) से जुड़े होते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के मध्य एक महान् आन्तरिक संबंध है।  धागे का रहस्य रामपुर गाँव में सूखे के कारण हाहाकार मचा था। नदी सूख गई थी और खेत पत्थर बन गए थे। गाँव के लोग शहर की ओर पलायन करने की सोच रहे थे। गाँव के एक बुजुर्ग काका, जो बहुत ही समझदार माने जाते थे, उन्होंने गाँव वालों की सभा बुलाई। उन्होंने सबको एक-एक धागा दिया और कहा, “इस धागे को तोड़ो।” सबने आसानी से तोड़ दिया। फिर उन्होंने कहा, “अब इन धागों को एक साथ मिलाकर एक मोटी रस्सी बनाओ और फिर तोड़ो।” कोई भी उस रस्सी को नहीं तोड़ पाया। काका मुस्कुराए और बोले, “यही हम सबकी कहानी है। हम सब आपस में जुड़े हुए हैं। अगर हम अलग-अलग रहेंगे, तो स...

एक कली मुस्काई

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 एक कली मुस्काई  (15.4.2016) प्रेरणा स्रोत -  मेरे आँगन में लगी मोतिया की बेल मेरे लिए संदेशा लाई। पहले दिन उसमें कलियां बनी, दूसरे दिन वे कलियां सुगन्धित फूल में परिवर्तित हो गई, तीसरे दिन वे फूल पीले पड़ने लगे और चौथे दिन झरने लगे। क्या बेटियों का जीवन भी इसी तरह खिल कर बिखर जाने के लिए है? Presented by Bindu Jain , Delhi एक कली सुन्दर बगिया में, फिर से मुस्कुराने लगी। हंसते-हंसते फूल बनी और, बगिया को महकाने लगी।। भौरें भी मंडराने लगे और, मीठी तान सुनाने लगे। मधुर-मधुर संगीत सुना कर, उसका मन बहलाने लगे।। बढ़े सभी के हाथ, उसे अपना बनाने के लिए। अपने सूने आँगन की, बगिया में सजाने के लिए।। तभी माली ने चुन-चुन कर, सब फूलों का इक हार बनाया। चला भेंट करने राजा को, उसके महलों में सजवाया।। फूल भी अपनी किस्मत पर, रह-रह कर इतराने लगा, कुछ शरमाने कुछ सकुचाने, मन ही मन मुस्काने लगा।। बुनने लगा महकते सपने, पर मन ही मन घबराने लगा। अपनी शीतल सुरभि से वह, राजमहल दमकाने लगा।। पर कुछ जल्लादी हाथों ने, उसको माला से अलग किया। रौंदा, कुचला और मसल-मसल कर, पुष्प का सौरभ नष्ट किया।। वह नन्हीं कल...

You can learn from everybody

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  तुम इस दुनिया में हरेक से सीख सकते हो। You can learn from everybody in the world. तुम्हें किसी व्यक्ति को हीनता की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। इस दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कुछ नहीं जानता और न ही कोई व्यक्ति ऐसा है, जो सब कुछ जानता है। प्रत्येक व्यक्ति कुछ ऐसा जानता है, जो तुम नहीं जानते। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति से तुम कुछ सीखने व जानने की कोशिश करो। अनमोल गुरु बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में आर्यन नाम का एक बहुत ही विद्वान व्यक्ति रहता था। उसे अपनी विद्या और ज्ञान पर बहुत अहंकार था। उसे लगता था कि दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जो वह नहीं जानता। एक दिन उसने सुना कि पास के जंगल में एक महात्मा आए हैं, जो बहुत पहुंचे हुए हैं। आर्यन ने सोचा, “मैं इतना ज्ञानी हूँ, मुझे उस महात्मा से क्या सीखना होगा? लेकिन फिर भी, चलो चलकर देखता हूँ कि वे क्या सिखाते हैं।“ आर्यन महात्मा के पास पहुंचा। महात्मा एक पेड़ के नीचे शांत बैठे थे। उसने महात्मा से पूछा, “महाराज! मैंने वेद-पुराण, शास्त्र, सब पढ़ लिए हैं। क्या आप मुझे कुछ ऐसा सिखा सकते हैं, जो मैं नहीं जानता?“ महात्मा मुस्कुराए और उन्ह...

मुरझाया चमन

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*मुरझाया चमन* सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा Sung by - Bindu Jain , Delhi हर सुबह जब आईना मैं देखता हूँ,  वक्त की पहचान मुख पर देखता हूँ;  श्वेत केशों में छिपी जो कालिमा थी, कब व कैसे धुल गई, मैं सोचता हूँ। (1) वक्त के तूफान से टूटा घरौंदा, है न कश्ती और न साहिल, खोजता हूँ। (2) जिन्दगी रोशन थी मेरी जिसके दम पर, उस शमा को मैं पिघलते देखता हूँ। (3) मेरे माथे की लकीरें कह रही हैं,  उम्र को यूँ ही गुज़रते देखता हूँ।  (4) दर्द से रिश्ता जो मेरा बन गया है, उन ही रिश्तों को बिखरते देखता हूँ। (5) आँख नम होने लगी उनके विरह में, होठों को मैं थरथराते देखता हूँ। (6) आशियाँ में कब उदय होगा दिवाकर,  उन पलों की राह ही मैं देखता हूँ। द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद।  

अमर गीत

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अमर गीत सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा Sung by Bindu Jain   धुन: मैली चादर ओढ़ के कैसे, द्वार तुम्हारे आऊँ.......  मेरा गीत अमर हो जाए, ऐसा गीत लिखूं मैं कैसे? मेरी प्रीत अमर हो जाए,ऐसी प्रीत करूं मैं कैसे? मन में भाव तरंगें उठ-उठ, अनजाने पथ पर बह जाती कंटक पत्थर से टकरा, अन- कही वेदना को सह जाती भाव लेखनी के बंधन में, बतला दो बांधू मैं कैसे? मेरा गीत अमर हो जाए, ऐसा गीत  लिखूं मैं कैसे? बर्फीली वादी से निकल कर, सरिता कलकल बहती जाती बहती लहरों की गुंजन से, सबको मधुर  संगीत सुनाती तन मन को अमृत  से भर दे, ऐसा पान कराऊं मैं कैसे?  मेरा गीत अमर हो जाए, ऐसा गीत लिखूं मैं कैसे? प्यार  के  मीठे बोल बोल दो, सबका मन हर्षित  हो जाए  हर मानव को गले लगा लो, मानवता गर्वित  हो जाए  सबके मन को जोड़ सके जो, ऐसी तान सुनाऊं मैं कैसे?  मेरा गीत अमर हो जाए, ऐसा गीत लिखूं मैं कैसे? उम्र  है छोटी, काम बड़ा है, जो करना है, तत्पर कर लो नफरत  के कांटे न उगाओ, प्रेम  पुष्प से झोली भर...

Observe courtesy and good mannerism.

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  नम्रता और अच्छे व्यवहार को ध्यान में रखो।  Observe courtesy and good mannerism. हमारे प्रतिदिन के व्यवहार में हमें अच्छे व्यवहार, पर्याप्त शिष्टता और अच्छे सभ्य समाज के नियमों को ध्यान में रखना चाहिए।  उदाहरण के लिए- 1. ‘धन्यवाद’ और ‘कृपया’ शब्द का उदारता से प्रयोग करो। 2. अपने से बड़े आगन्तुक का स्वागत करते समय खड़े हो जाओ। 3. जो तुम उधार लेते हो, उसे समय पर वापिस कर दो। 4. व्यंग्य पूर्ण टिप्पणी करने से बचो। 5. रहस्यों को अपने तक रखो। उनको खोलने के लोभ से बचो। अपने घनिष्ठ मित्र पर रहस्य प्रकट करने से पहले दो बार सोचो। 6. जो लोग आपके आस पास रहते हैं उनके नाम याद रखो। 7. गोपनीयता (privacy) का सम्मान करो। किसी के कमरे में प्रवेश करने से पहले दरवाज़ा खटखटाओ। 8. जब कोई बोल रहा हो तो बीच में दख़ल देने के लोभ से बचो। 9. बिना चिड़चिड़ापन दिखाए असहमत होना सीखो। 10. लोगों को यह बताने से बचो कि कोई काम कैसे किया जाना चाहिए, जब तक पूछा न जाय। 11. अपने वायदों और वचनों पर कायम रहो। 12. व्यापार की बातों के विषय में सार्वजनिक स्थानों पर बहस न करो। 13. प्रशंसा सबके सामने करो, पर आलोचना अकेल...

Don’t accept less than the best.

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  कोई भी ऐसा काम न तो करो और न स्वीकार करो, जो सबसे अच्छे से कम हो। Don’t do or accept anything which is less than the best. भगवान की दैवीय सन्तान होने के कारण तुम वह प्रत्येक वस्तु ग्रहण करने के हकदार हो, जो सबसे अच्छा है। ऐसा कोई कारण नहीं है, जिसकी वजह से तुम्हें दुःखों, बन्धनों और दासता का जीवन जीना पड़े। ये सब दुःख तुम्हारे अपने बनाए हुए हैं। लेकिन यह महान कृपा पाने के योग्य बनने के लिए तुम्हारे कन्धों पर एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है कि हर क्षेत्र में, जिनका तुमसे संबंध है, तुम्हें इस दुनिया को अच्छे से अच्छा देना है। सर्वोत्तम का चयन राजू एक पेंटर था, जो बहुत ही साधारण कलाकृति बनाता था। उसकी कला में बारीकी तो थी, लेकिन उसमें कोई जोश या नयापन नहीं था। लोग अक्सर उसकी कलाकृति को देखकर उसे ’ठीक-ठाक’ कहकर आगे बढ़ जाते थे। राजू इसी ’ठीक-ठाक’ में खुश था, क्योंकि उसे लगता था कि उसने मेहनत तो की ही है। एक दिन, शहर में एक प्रसिद्ध चित्रकार, मास्टरजी, आए। राजू अपनी सबसे अच्छी पेंटिंग लेकर उनके पास गया। पेंटिंग देखकर मास्टरजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “राजू! पेंटिंग अच्छी है। लेकिन क्या तुम्हें ...

Take and give help freely.

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  स्वतंत्रतापूर्वक सहायता दो और लो। Take and give help freely. किसी से मदद लेने और देने में कोई हिचकिचाहट या संकोच नहीं होना चाहिए। भगवान की दैवीय सन्तान होने के कारण यह प्रत्येक व्यक्ति का जन्म सिद्ध अधिकार है। फिर भी यदि कोई मदद करने से मना कर दे या कोई तुम्हारे द्वारा दी गई सहायता को महत्त्व न दे तो तुम्हारे दिल में कोई द्वेष की भावना नहीं होनी चाहिए। सहायता दो और लो - लघुकथा कड़कड़ाती ठंड की रात थी। रोहन अपने दफ्तर से घर लौट रहा था। उसने देखा कि सड़क के किनारे एक बुजुर्ग का स्कूटर खराब हो गया है और वे उसे स्टार्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। राहगीर आ-जा रहे थे, लेकिन कोई रुक नहीं रहा था। रोहन को दया आ गई। उसने अपनी कार रोकी और बुजुर्ग की मदद के लिए आगे बढ़ा। उसने कहा, “बाबा, आप थक गए होंगे, मुझे स्टार्ट करने दीजिए।” रोहन ने दस मिनट तक कड़ी मेहनत की और स्कूटर चालू हो गया। बुजुर्ग ने मुस्कुराकर रोहन को आशीर्वाद दिया। अगले दिन, रोहन की गाड़ी शहर के बीचों-बीच खराब हो गई। वह परेशान होकर उसे ठीक करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नाकाम रहा। अचानक वही बुजुर्ग अपने स्कूटर पर वहां से गुजरे और उन्हों...

Enjoy each moment of life.

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  जीवन के प्रत्येक क्षण का आनन्द लो। Enjoy each moment of life. अपने जीवन को ऐसे ढंग से बिताओ, जैसे तुम प्रत्येक क्षण का आनन्द ले कर जी रहे हो। कुछ लोग जीवन को ऐसे ढंग से बिताते हैं कि अब वे अधिक संघर्ष करेंगे और इसी प्रकार मुश्किलों में जी लेंगे, ताकि वे बाद में जीवन का सही आनन्द ले सकें। यह गलत बात है। तुम्हें काम और संघर्ष के मध्य ही जीवन का आनन्द लेना सीखना होगा। याद रखो- सभी भौतिक आरामदायक साधनों के बीच निठल्ले होकर बैठना वास्तविक आनन्द नहीं है। वास्तव में तो उस अवस्था में तुम बहुत ऊबाऊपन महसूस करोगे। मछुआरा और व्यवसायी एक बार एक अमीर व्यवसायी समुद्र के किनारे टहल रहा था। उसने देखा कि एक मछुआरा अपनी नाव के पास बैठा आराम से बीड़ी पी रहा है, जबकि अभी दोपहर ही हुई थी और काम का समय बाकी था। व्यवसायी ने मछुआरे से पूछा, “तुम इतनी जल्दी काम खत्म करके यहाँ खाली क्यों बैठे हो? थोड़ी और मछलियां क्यों नहीं पकड़ते?” मछुआरे ने शांति से कहा, “मैंने आज भर की ज़रूरत की मछलियाँ पकड़ ली हैं, जो मेरे परिवार के लिए काफी हैं।” व्यवसायी ने सलाह दी, “अगर तुम और मछलियां पकड़ो, तो उन्हें बेचकर और पैसे कमा स...

Don’t fight over religions

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  धर्म के लिए मत लड़ो, सभी धर्म अच्छे हैं। Don’t  fight over religions, all religions are good. दूसरों के धर्म पर अपने धर्म की बेहतरी स्थापित करने की कोशिश न करो। सभी धर्म अच्छे होते है। ये सब तुम्हें भगवान तक ले जाने के अलग-अलग रास्ते हैं। इसी प्रकार सभी गुरु महान हैं। वे सब तुम्हें अन्तिम लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए आवश्यक सीख और रास्ता दिखाने वाले शिक्षक हैं। अतः अन्त में लक्ष्य समान है, केवल रास्ते और गुरु अलग-अलग हैं। जो भी तुम्हें सुविधाजनक लगे उसे चुन सकते हो, लेकिन सभी धर्मों और गुरुओं के प्रति समान आदर की भावना रखो। उच्च स्तर के सभी संत और गुरु समान बन जाते हैं। वहां कोई अन्तर नहीं रहता। अतः एक दूसरे पर महत्ता स्थापित करने और अनावश्यक तुलना करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। जो धर्मों की तुलना करके लड़ता है उससे अधिक अधार्मिक व्यक्ति कोई नहीं है। एक ही पानी, अलग-अलग बर्तन एक समय की बात है, एक शहर में एक बहुत ज्ञानी साधु आए। उनके आश्रम में अक्सर धर्मों को लेकर बहस होने लगी। हिंदू, मुसलमान, ईसाई और सिख, सभी मानते थे कि उनका धर्म ही सर्वोच्च है। एक दिन, साधु ने एक अनोखा तरीका ...

Don’t try to be master of everything

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  सभी बातों में प्रवीण होने का प्रयत्न न करो, किसी एक विषय के विशेषज्ञ बनो।   Don’t try to be master of everything, be expert in one thing. सांसारिक बातों का ज्ञान असीमित है। किसी व्यक्ति के लिए सभी विषयों का समुचित ज्ञान होना व्यावहारिक रूप से असंभव है, इसलिए एक क्षेत्र के विशेषज्ञ बनो और उसी क्षेत्र में दुनिया की सेवा करो। अन्य क्षेत्रों में तुम सामान्य व्यवहार के उद्देश्य से सामान्य ज्ञान प्राप्त कर सकते हो।  लक्ष्य की एकाग्रता एक गाँव में दो मित्र रहते थे - सोहन और मोहन। सोहन बहुत प्रतिभाशाली था और उसे एक साथ कई काम करने का शौक था। वह कभी चित्रकारी करता, कभी संगीत सीखता, तो कभी कुश्ती के दांव-पेंच आजमाता। वहीं मोहन स्वभाव से धीमा था, लेकिन उसने अपना पूरा ध्यान केवल धनुर्विद्या (archery) पर लगा रखा था। गाँव में एक बड़ी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। सोहन ने उत्साह में आकर पाँच अलग-अलग स्पर्धाओं में अपना नाम लिखवा दिया। उसे पूरा विश्वास था कि वह अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सब जीत लेगा। प्रतियोगिता के दिन, सोहन एक इवेंट से दूसरे इवेंट की ओर भागता रहा। थकान और ध्यान बँटने के क...

Develop tolerance

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  सहनशीलता बढ़ाओ।   Develop tolerance. सहनशीलता एक सबसे बड़ा गुण है। अपने लिए दृढ़ बनो, लेकिन ओरों के दोषों और गलतियों के लिए सहनशील बनो। दूसरों के द्वारा सख्त शब्दों के द्वारा अपमान और मानसिक आघातों से पहुँचाई गई हानियों के लिए सहनशीलता विकसित करो। तुम्हें दूसरों के ग़लत कामों  को भुला देने और माफ कर देने की सामर्थ्य अपनानी चाहिए। तुम्हें विश्वास होना चाहिए कि भगवान ने सारा विधान मेरे भले के लिए बनाया है और भगवान की सहायता से तथा अपने मन की मज़बूती से मैं अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं पर विजय प्राप्त कर लूँगा, चाहे वह कैसी भी हो। सच्ची सहनशीलता (लघुकथा) एक बार प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात के शिष्यों ने उनसे पूछा, “गुरुजी, हम सहनशीलता का गुण कैसे विकसित करें?” सुकरात ने कहा, “कल सुबह मेरे घर आना।” अगले दिन सुबह जब शिष्य सुकरात के घर पहुंचे, तो घर के बाहर बड़ा कोहराम मचा था। सुकरात की पत्नी बहुत गुस्से में चिल्ला रही थी और बिना किसी बात के सुकरात पर बुरा-भला कह रही थी। सुकरात चुपचाप अपना सिर झुकाए खड़े थे और उनकी हर बात सहन कर रहे थे। जब पत्नी चिल्लाते-चिल्लाते थक गई, तो उ...

मुसाफ़िरखाना (शब्दचित्र)

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  मुसाफ़िरखाना (शब्दचित्र)   (22-03-2026) प्रेरणा स्रोत - कल 21-3-2026 को मंदिर जी में मुनिश्री निश्चिन्त सागर महाराज ने कहा कि कल मुझे हिसार से विहार करना है, तो मेरे मन में विचार आया कि हमें भी तो एक दिन दुनिया से विहार करना है। बस! उसी विचार ने इस कविता को जन्म दिया। Sung by Bindu Jain दुनिया क्या है, एक मुसाफ़िरखाना है, सब आते हैं, इक दिन सबको जाना है। 1.  सामानों की गठरी, लेकर बैठे हैं, ट्रेन की सीटी सुन, सामान उठाना है। दुनिया क्या है, एक...........। 2.  आसपास के सब, अपने से लगते हैं, सिग्नल होते ही, सब को छोड़ के जाना है। दुनिया क्या है, एक...........। 3.  ट्रेन के आते ही सब के दिल, लगे धड़कने, जल्दी-जल्दी कदम को, आगे बढ़ाना है।  दुनिया क्या है, एक...........। 4.  एक स्थान पर सभी, इकट्ठे हो गए हैं, भीड़ से बच कर, आगे बढ़ते जाना है।  दुनिया क्या है, एक...........। 5.  प्लेटफार्म पर भगदड़, मचने लगी है अब, अपना डिब्बा, खुद ने ही पहिचाना है। दुनिया क्या है, एक...........। 6.  माल असबाब उठाया, लेकिन छूट गया, भार बहुत था, यहीं छोड़ कर जाना है। ...

Don’t advertise your problems

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  अपनी कठिनाइयों या समस्याओं का दूसरों के सामने विज्ञापन न करें।  Don’t  advertise your problems or difficulties to others. कुछ लोगों की आदत होती है, अपनी कठिनाइयों या समस्याओं को यहां वहां और हर किसी को बताने की, जिससे वे मिलते हैं। जब तुम्हें वास्तव में किसी की मदद की आवश्यकता हो, तब उसके सिवाय अपनी कठिनाइयों या समस्याओं का दूसरों के सामने विज्ञापन न करो। इनको अपने तक ही रखो तथा साथ-साथ उनके निराकरण के लिए प्रयत्न करते रहो। एक साधारण मानवीय मनोविज्ञान के स्वभाव के अनुसार किसी को तुम्हारी समस्याओं में रुचि नहीं होती। उसे केवल अपनी समस्याओं में ही रुचि होती है। यहाँ एक लघु कथा है, जो इस विषय पर आधारित है कि हमें दूसरों को अपनी समस्याएँ क्यों नहीं बतानी चाहिएः लघु कथाः अपना बोझ स्वयं उठाएं  एक गाँव में मोहन नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह बहुत ही मेहनती था, लेकिन अपनी आर्थिक परेशानियों को लेकर हमेशा चिंतित रहता था। वह अक्सर गाँव के लोगों और अपने दोस्तों से अपनी समस्याओं का जिक्र करता रहता था। कोई उसे ‘हौसला’ देता, तो कोई ‘सलाह’, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।  एक द...