सब दिन न होत एक समान
सब दिन न होत एक समान कहते हैं समय की धारा कभी एक सी नहीं बहती। जैसे नदी का पानी हर पल बदलता है, वैसे ही जीवन भी हर क्षण नया रूप लेता है। पेड़ पर लगे पत्ते एक जैसे नहीं होते, मौसम हर महीने बदलता है, और आकाश में हर दिन नया रंग घुल जाता है। यही परिवर्तन जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। एक छोटे से गाँव में करण नाम का युवक रहता था। वह स्वभाव से थोड़ा अधीर था। जब उसके जीवन में कठिनाइयाँ आईं, खेती में नुकसान हुआ, मित्र दूर हो गए और परिवार में बीमारी ने दस्तक दी तो वह अक्सर आकाश की ओर देखकर शिकायत करता, मेरे साथ ही ऐसा क्यों? क्या मेरा समय कभी नहीं बदलेगा? गाँव के बाहर एक विशाल पीपल का पेड़ था। करण रोज़ उसके नीचे बैठता और अपने दुःखों को सोचता रहता। एक दिन वहाँ से गुजरते हुए एक वृद्ध साधु ने उसे उदास देखा। उन्होंने मुस्कुराकर पूछा, “बेटा, क्यों इतने चिंतित हो?” करण ने कहा, “मेरा समय खराब चल रहा है। सब कुछ उल्टा हो रहा है। लगता है जीवन ऐसा ही रहेगा। साधु ने पीपल के पेड़ की ओर इशारा करते हुए पूछा, “क्या तुमने कभी इस पेड़ को ध्यान से देखा है? करण ने कहा, “हाँ, यह तो हमेशा ऐसा ही रहता है...