एक गिलहरी
एक गिलहरी एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से करती थी❗ गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर के भी खूब खुश थी, क्यों कि उसके मालिक, जंगल के राजा शेर ने उसे दस बोरी अखरोट देने का वादा कर रखा था❗ गिलहरी काम करते करते थक जाती थी तो सोचती थी कि थोडी आराम कर लूँ , वैसे ही उसे याद आता कि शेर उसे दस बोरी अखरोट देगा❗ गिलहरी फिर काम पर लग जाती❗ गिलहरी जब दूसरे गिलहरीयों को खेलते देखती थी, तो उसकी भी इच्छा होती थी कि मैं भी खेलूं , पर उसे अखरोट याद आ जाता, और वो फिर काम पर लग जाती❗ ऐसा नहीं कि शेर उसे अखरोट नहीं देना चाहता था, शेर बहुत ईमानदार था❗ ऐसे ही समय बीतता रहा .... एक दिन ऐसा भी आया जब जंगल के राजा शेर ने गिलहरी को दस बोरी अखरोट दे कर आज़ाद कर दिया❗ गिलहरी अखरोट के पास बैठ कर सोचने लगी कि अब अखरोट मेरे किस काम के❓ पूरी जिन्दगी काम करते-करते दाँत तो घिस गये, इन्हें खाऊँगी कैसे❗ यह कहानी आज जीवन की हकीकत बन चुकी है❗ इन्सान अपनी इच्छाओं का त्याग करता है, पूरी ज़िन्दगी नौकरी, व्योपार, और धन कमाने में बिता देता है❗ 60 वर्ष की उम्र में जब वो सेवा निवृत्त होता है...