इनाम
इनाम सात वर्षीय बेटी दूसरी कक्षा में प्रवेश पा गयी..... वह क्लास में हमेशा से अव्वल आती रही है। पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाजार ले गया.... बेटी ने जूते लेने से यह कह कर मना कर दिया कि पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरूरत है। वे अभी इस साल काम दे सकते हैं..... अपने जूतों की बजाए उसने मुझे अपने दादा की कमज़ोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा... मैंने सोचा कि बेटी अपने दादा से शायद बहुत प्यार करती है, इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी समझ रही है.... खैर! मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुंचा..... दुकानदार ने बेटी के साइज की सफेद शर्ट निकाली... डाल कर देखने पर शर्ट एक दम फिट थी। फिर भी बेटी ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा.... मैंने बेटी से कहा....आराध्या बेटा.... ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है, तो फिर और लम्बी क्यों? .... बेटी ने कहा .... पापा जी मुझे शर्ट स्कर्ट के अंदर ही डालनी होती है, इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा.....लेकिन यही शर्ट म...