जागृति
जागृति *संत ने चोर को कहा कि तू चोरी कर लेकिन...फिर... क्या हुआ...?* नागार्जुन से एक चोर ने कहा था कि तुम ही एक आदमी हो जो शायद मुझे बचा सको। यूं तो मैं बहुत महात्माओं के पास गया, लेकिन मैं जाहिर चोर हूं, मैं बड़ा प्रसिद्ध चोर हूं, और मेरी प्रसिद्धि यह है कि मैं आज तक पकड़ा नहीं गया हूं, मेरी प्रसिद्धि इतनी हो गई है कि जिनके घर चोरी भी नहीं कि वह भी लोगों से कहते है कि उसने हमारे घर चोरी की। क्योंकि मैं उसी के घर चोरी करता हूं जो सच में ही धनवान है। हर किसी ऐरे-गैरे-नत्थू-खैरे के घर चोरी नहीं करता। सम्राटों पर ही मेरी नजर होती है और कोई मुझे पकड़ नहीं पाया है। लेकिन तुमसे मैं पूछता हूं और महात्माओं से पूछता हूं तो वे कहते हैं: पहले चोरी छोड़ो। और उस चोर ने कहा, आप समझ सकते हैं कि यह तो मैं नहीं छोड़ सकता। यह छोड़ सकता तो इन महात्माओं के पास ही क्यों जाता? खुद ही छोड़ देता। कोई ऐसा तरकीब बता सकते हो कि मुझे चोरी छोड़ना न पड़े और छूट जाए। क्योंकि छोड़ना पड़े तो मुझसे न छूट सकेगा। यह मैं कर-कर के देख चुका हूं। बहुत नियम संयम बहुत दफे कसमें खा लीं। सब कसमें टूट गई और हर बा...