महादेव के दरबार में न्याय
महादेव के दरबार में न्याय कहते हैं कि बैद्यनाथ धाम में महादेव के दर्शन के लिए वही आता है, जिसे बाबा बुलाते हैं , लेकिन कभी-कभी बाबा सिर्फ दर्शन देने के लिए नहीं, बल्कि कर्मों का हिसाब चुकता करने के लिए बुलाते हैं। यह कथा है “शालिनी” और “राघव” की। दस साल पहले एक गलत फहमी और गरीबी ने इन्हें अलग कर दिया था। आज शालिनी उस जिले की DM (डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) है और राघव उसी मंदिर की चौखट पर एक ऐसी हालत में है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती!! दस साल पहले राघव और शालिनी एक छोटे से कस्बे में रहते थे। राघव एक फैक्ट्री में काम करता था और शालिनी का सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का था। राघव ने अपनी पूरी जमा पूंजी और रातों की नींद शालिनी की पढ़ाई पर कुर्बान कर दी। लेकिन एक दिन फैक्ट्री में हुए एक भीषण हादसे में राघव ने अपने दोनों पैर खो दिए !! अपाहिज होने के बाद राघव को लगा कि वह अब शालिनी के लिए सिर्फ एक बोझ बन जाएगा। उसी समय शालिनी के परिवार ने उस पर दबाव डाला कि वह एक अपाहिज’ के साथ अपनी जिंदगी बर्बाद न करे। राघव ने एक कठोर फैसला लिया। उसने शालिनी से कहा कि वह अब उससे प्यार नहीं करता और...