मित्र की परिभाषा
मित्र की परिभाषा एक बार उद्धव जी ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा - हे "कृष्ण"! आप तो महाज्ञानी हैं, भूत, वर्तमान व भविष्य के बारे में सब कुछ जानने वाले हो आपके लिए कुछ भी असम्भव नही। मैं आपसे मित्र धर्म की परिभाषा जानना चाहता हूँ। उसके गुण धर्म क्या क्या हैं? भगवान बोले - उद्धव! सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय बिना मांगे ही अपने मित्र की सहायता करे। उद्धव जी ने बीच मे रोकते हुए कहा - "हे कृष्ण"! अगर ऐसा ही है, तो फिर आप तो पांडवों के प्रिय बांधव थे। एक बांधव के रूप में उन्होंने सदा आप पर विश्वास किया, किन्तु आपने सच्चे मित्र की जो परिभाषा दी है, उसके अनुरूप मित्रता नही निभाई। आप चाहते तो पांडव जुए में जीत सकते थे। आपने धर्मराज युधिष्ठिर को जुआ खेलने से क्यों नही रोका। ठीक है! आपने उन्हें नहीं रोका, लेकिन यदि आप चाहते तो अपनी दिव्य शक्ति के द्वारा पासे को धर्मराज के पक्ष में भी तो कर सकते थे, लेकिन आपने भाग्य को धर्मराज के पक्ष में भी नहीं किया। आप कम से कम उन्हें धन, राज्य और स्वयं को हारने के बाद भी तो रोक सकते थे। उसके बाद जब धर्मराज ने अपने भाइयों को दांव पर ल...