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Don’t indulge in mad race of money.

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   धन की पागल दौड़ में आसक्त न बनो। Don’t  indulge in mad race of money. आजकल यह देखने में आता है कि लोग चाहे किसी भी तरीके से अधिक से अधिक पैसा कमाने की पागल दौड़ में लीन हो रहे हैं। यह उनके लिए एक प्रकार का नशा बन गया है। वे केवल अपने धन को बढ़ाने में लगे हुए हैं, बिना यह जाने कि उन्हें इस की आवश्यकता है या नहीं और इस का कोई अन्त है या नहीं। वे अपने ही जाल में फंस कर रह जाते हैं और अपनी अन्तिम सांस के साथ ही आज़ाद होते हैं और मरणोपरांत उनके उत्तराधिकारियों में इस धन संपत्ति के विशाल भण्डार को हड़पने के लिए एक नई दौड़ आरम्भ हो जाती है। तब पता चलता है कि मरने वाले ने अपना समय धन का मज़ा लेने के स्थान पर उसको कमाने में ही अधिक बिताया था। धन की पागल दौड़ - लघुकथा रामदीन गाँव का सबसे मेहनती किसान था, लेकिन उसकी आँखों में हमेशा शहर जाकर करोड़पति बनने के सपने तैरते रहते थे। खेत से अच्छी आमदनी होने के बावजूद वह उसे कम समझता था।  “यह खेती-बाड़ी छोटी सोच है। मुझे तो बड़ा आदमी बनना है।“ वह अक्सर कहता।  शहर में उसके एक दूर के रिश्तेदार ने उसे एक ऐसे व्यापार का लालच दिया, जहाँ रातों-...

Live and work in this world

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  अपनी सतत उन्नति का एकमात्र लक्ष्य लेकर इस दुनिया में जीओ और काम करो।   Live and work in this world with the sole aim of your constant development. हम जो भी करते हों और चाहे जहां भी हों, जीवन में हमारा केन्द्रिय लक्ष्य लगातार शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास होना चाहिए। केवल यही एक वस्तु है जो हमारे साथ हमेशा रहेगी। अन्य सभी वस्तुएं जो नश्वर हैं जो अधिक समय के लिए महत्त्वपूर्ण नहीं हैं। वे एक-एक करके हमें रास्ते में ही छोड़ जाएंगी। जादुई आईनाः खुद को बदलो बहुत पुरानी बात है। एक शहर में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसे हर काम में दूसरों की कमियां निकालने और शिकायत करने की आदत थी। अपने नकारात्मक व्यवहार के कारण न तो उसके दोस्त थे और न ही वह ऑफिस में खुश था। एक दिन वह एक ज्ञानी साधु के पास गया और बोला, “महाराज! मैं सब कुछ जानता हूँ, फिर भी सफल और खुश क्यों नहीं हूँ?“ साधु ने उसे एक छोटा-सा मटमैला आईना दिया और कहा, “इस आईने में तुम्हें अपना व्यक्तित्व दिखेगा। इसे एक महीने तक अपने पास रखो और जब भी किसी दूसरे में कमी ढूँढो, तो खुद को आईने में देख...

Check your desires and craving for sensual enjoyment.

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  अपनी इच्छाओं और इन्द्रिय सुख की लालसा पर नियंत्रण करो।   Check your desires and craving for sensual enjoyment.   भौतिक इच्छाओं और इन्द्रिय सुखों की कोई सीमा नहीं है, जितना अधिक तुम्हें मिलेगा, उतना ही तुम पाना चाहोगे। एक इच्छा की पूर्ति दूसरी इच्छा को आमंत्रण देती है तथा यह शृंखला अंतहीन हो जाती है। इसलिए अपनी इच्छाओं को अपनी आधारभूत आवश्यकताओं और आराम तक ही सीमित रखो और एक के बाद एक इच्छाओं के ढेर मत लगाओ और ऐश्वर्य की चीज़ों के पीछे मत भागो। भौतिक इच्छाओं के आनन्द और इन्द्रिय सुखों से प्राप्त ख़ुशी थोड़े समय के लिए होती है और दुःख से भरी होती है। यह स्थाई सन्तुष्टि नहीं देती। इच्छाओं पर नियंत्रण न रखने से दुःख और मोह बढ़ता है, जबकि सीमित इच्छाएं ही सच्चे संतोष और सुख का मार्ग हैं। अनियंत्रित इच्छाएं चींटियों की बाम्बी की तरह बढ़ती रहती हैं।  जादुई घड़ा और संतोष एक गाँव में एक अत्यंत लालची किसान रहता था। उसने कड़ी मेहनत के बजाय जल्दी अमीर बनने की इच्छा पाल रखी थी। एक दिन उसे एक साधु से एक जादुई घड़ा मिला। साधु ने कहा, “इसमें तुम जो भी डालोगे, वह दोगुना हो जाएगा। ...

Don’t be too anxious to know your future.

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   अपने भविष्य को जानने के लिए बहुत अधिक उत्सुक न हों। Don’t be too anxious to know your future. कुछ लोग अपना बहुत सा समय ज्योतिषियों, भविष्यवक्ताओं से मिलने में व्यर्थ गवां देते हैं, केवल यह जानने के लिए कि भविष्य में उनके लिए वास्तव में क्या इकट्ठा किया गया है। इस संबंध में दो बातें नोट करो। पहली यह कि तुम्हारी किस्मत या भविष्य कुछ ऐसा नहीं है कि जो एकदम ठोस रूप से निश्चित है। कोई भविष्यवक्ता पूरे विश्वास से नहीं कह सकता कि जो वह कह रहा है वह 100% सच है। वह विभिन्न संभावनाओं का अच्छे से अच्छा संकेत दे सकता है लेकिन तुम्हारा भविष्य या भाग्य कुछ हद तक परिवर्तनशील है जो विभिन्न वस्तुओं पर निर्भर करता है। कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं जो अपने प्रयत्नों द्वारा अपने पुराने भाग्य को पूर्णतया बदल देते हैं और अपने लिए पूरी तरह एक नए भाग्य का निर्माण करते हैं। अन्य शब्दों में- वे अपने भाग्य का नियंत्रण अपने हाथों में रखते हैं। भविष्य का बोझ  एक बार एक प्रसिद्ध संत अपने शिष्यों के साथ नदी के किनारे टहल रहे थे। तभी एक धनी व्यापारी वहां रोता हुआ आया और बोला, “महाराज! मैं भविष्य को लेकर ब...

Maintain cleanliness and neatness in your surroundings.

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  अपने चारों ओर सफाई व स्वच्छता रखो।  Maintain cleanliness and neatness in your surroundings. तुमने यह कहावत सुनी होगी- भगवत्ता के बाद स्वच्छता ही आती है। आपके वातावरण की स्वच्छता आप के मन की स्थिति पर गहरा प्रभाव डालती है। अपने कार्यालय का और घर का वातावरण पूर्णतया साफ़-सुथरा रखो। धूल को यहां वहां इकट्ठी मत होने दो। देखो कि नाली की निष्कासन प्रणाली व मल-मूत्र आदि की निष्कासन-प्रक्रिया तो ठीक है। सिस्टम में कहीं भी पानी का जमाव या भराव तो नहीं है। जब कहीं कोई एसी दरार दिखाई दे तो संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने की तत्परता दिखाओ। एक बार पति ने पत्नी से कहा - सुनती हो!  पत्नी ने कहा - हाँ बोलिए!  ‘बड़ी जल्दी शुरू हो गई इस बार दिवाली की सफाई।’  ‘हाँ! मैंने अभी से सफाई शुरू कर दी है। आपको क्या करना  है, बस! बैठे-बैठे लिखते रहते हैं। जब हमें अकेले ही करना है, तो धीरे-धीरे कर लेंगे।’  ‘मगर करते समय जरा ध्यान रखना, वैसे तो सफाई तुम रोज ही घर में करती हो। शायद इस बार कबाड़ वगैरा में कहीं मेरी कोई किताब या कोई पुरानी डायरी ही मिल जाए। उसमें मेरी कुछ कविताएं होंगी...

ए खुदा

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  ए खुदा वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से ए खुदा तू बता तेरा क्या नाम है? तू रहता है कहाँ, तेरा क्या काम है? क्या है तेरी हकीकत, जो तू गुमनाम है? तुझ पे खुद को छुपाने का इल्ज़ाम है। (1) तूने दुनिया बनाई, तू मकसद बता, रूहें इस में बसाई, तू मतलब जता, तेरे जलवों से रोशन, जमीं आसमान, क्यों किसी को नज़र तू न आता यहाँ? तेरी पर्दानशीनी का अंजाम है, ढूंढता आज भी तुझ को इन्सान है। (2) धर्म मजहब में हैं तेरे चर्चे बयां, शान में तेरे लिखते हैं पर्चे वहां, सब के भगवान अपने, अपने ही है जहां, नासमझ होकर जो हैं लड़ते यहां, तू समझदार हो के भी अनजान है। (3) तूने जन्नत बनाने की जहमत भी की, फिर ये दोजख को लाने की जहमत क्यों की? खेल कैसा गजब का, जो गजब ढा दिया, नेकियों को बदी से मिला जो दिया, लेना तूने कहाँ तक इम्तिहान है? यह सभी के दिलों में इक अरमान है। ए खुदा तू बता तेरा क्या नाम है?...... द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 व...

Go close to nature whenever you find the opportunity.

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   जब भी तुम्हें अवसर मिले, प्रकृति के समीप जाओ।   Go close to nature whenever you find the opportunity. जब भी तुम्हें फुरसत हो, तो यहां वहां घूम कर अपना समय गंवाने की बजाय किसी ऐसे स्थान पर जाओ, जहां तुम प्रकृति के समीप हों। जैसे बाग़-बग़ीचे, जंगल, पर्वत, नदियां, बादल, झीलें आदि। वहां खुले आकाश के नीचे ताज़ी हवा में सांस लो। पक्षियों की चहचहाहट सुनो, चलती हुई हवा की आवाज़ सुनो, सूर्य की आरोग्यकर किरणें अपने शरीर पर पड़ने दो। ये आपके मन को बहुत ताज़गी देंगी और ऊँचा उठाएंगी। आर्यन शहर की आपाधापी में रहने वाला एक युवा इंजीनियर था। उसके जीवन में मोबाइल, लैपटॉप और काम के अलावा कुछ नहीं था। वह हमेशा थका हुआ और चिड़चिड़ा रहता था। एक दिन उसके डॉक्टर ने उसे सलाह दी, “कुछ दिन प्रकृति के समीप जाओ, शहर के शोर से दूर, तभी स्वस्थ हो पाओगे।“ आर्यन ने अनिच्छा से शहर से दूर एक छोटे से गाँव में अपने दादाजी के पुराने घर जाने का फैसला किया। पहले दिन, उसे वहां बहुत बोरियत हुई। न वहाँ वाई-फाई था, न ही कैफे। वह उदास होकर घर के पीछे बने बगीचे में एक पुराने सेब के पेड़ के नीचे बैठ गया। वह पेड़ बहुत प...

Install good photos and pictures.

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  अच्छे फ़ोटो और तस्वीरें लगाओ।  Install good photos and pictures. अपने घर और दफ्तर की दीवारों पर महान व्यक्तियों की और प्राकृतिक दृश्यों की तस्वीरें लगाओ। ये तुम्हारे मन पर एक बहुत ही सुधारवादी प्रभाव डालेंगी, क्योंकि कुछ तरंगें तस्वीरों से निकलती हैं और अपनी प्रकृति के अनुसार तुम्हारे शरीर को सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। दीवार पर अच्छी तस्वीरें लगाओ - लघुकथा एक छोटे से शहर में माधव नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह बहुत मेहनती था, लेकिन उसका मन अक्सर उदास रहता था। उसके घर की दीवारें भी उसके मन की तरह ही फीकी और खाली थीं, जिन पर उसने पुरानी, उदास कर देने वाली तस्वीरें लगा रखी थीं। एक दिन उसके घर एक बुजुर्ग मेहमान आए। उन्होंने उदास दीवारें देखीं और मुस्कुराकर कहा, “माधव, दीवार पर अच्छी तस्वीरें लगाओ।“ माधव ने पूछा, “इससे क्या होगा?“ बुजुर्ग ने कहा, “दीवारें घर का आईना होती हैं। जिन दृश्यों को तुम रोज देखोगे, वैसे ही तुम्हारे विचार बन जाएंगे। अगर तुम उदास तस्वीरें देखोगे, तो मन में उदासी रहेगी। अगर तुम जीवंत, प्रेरणादायक और खुशनुमा तस्वीरें लगाओगे, तो सकारात्मकता ...

Temperature, humidity and noise have an effect on your mind.

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  तापमान, उमस और आवाज़ तुम्हारे मन को प्रभावित करते हैं।   Temperature, humidity and noise have an effect on your mind. तापमान, आर्द्रता और आवाज़ का एक संतुलित स्तर होता है, जिस पर तुम्हारा शरीर और मन सबसे अच्छी तरह काम कर सकता है। उदाहरण के लिए तापमान का स्तर 20-25 डिग्री, आर्द्रता का 50 % व आवाज़ का आरामदाएक स्तर 45 डैसीबल है। इन संतुलित स्तरों का बदलाव शरीर और मन के संतुलन को अव्यवस्थित कर देता है और उसकी ताकत को कम कर देता है।  राजा फिर वेताल को कंधे पर ले कर जंगल से चला। रास्ते में वेताल बोला- ’राजा, इतने वर्षों से तुम्हारे पूर्वज राजा  मुझे निडर हो कर ले जाते रहे हैं और आज उनके वंशज तुम फिर मुझे लेने आ गए। तुम्हारे वंशज चतुर ही नहीं बुद्धिमान् भी थे, आज तुम्हारी भी परीक्षा लेता हूँ।  आज विश्व में जो कोविड-19 के कारण लाखों लोग मर रहे हैं और अनेक मौत के मुँह में जाने को हैं। छोटा क्या बड़ा क्या, अमीर क्या गरीब क्या, डॉक्टर क्या वैज्ञानिक क्या, नेता क्या अभिनेता क्या, दोषी-निर्दोषी सभी इस बीमारी से हताहत हो रहे हैं। मनुष्य ने ऐसा कौन-सा अपराध कर दिया है, जो ...

Maintain good postures.

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  अच्छा शारीरिक संतुलन बनाओ। Maintain good postures. खड़े होते हुए, बैठते हुए, लेटते हुए और चलते हुए अपनी शारीरिक स्थिति व हाव भाव ठीक रखो। ये तुम्हारे शरीर और मन को क्रियाशील, सुदृढ़ और विश्वास से परिपूर्ण रखते हैं।  सीधी पीठ, सीधा जीवन रवि हर समय कंप्यूटर के आगे झुककर बैठा रहता था। कंधे आगे की ओर मुड़े हुए, गर्दन झुकी हुई और पीठ में हमेशा कमान बनी रहती। 25 साल का रवि अभी से 50 साल का महसूस करता था। उसकी कमर में लगातार दर्द रहने लगा था। उसके ऑफिस में एक वरिष्ठ सहकर्मी, प्रकाश जी थे। वे हमेशा बिल्कुल सीधे बैठकर काम करते थे, चाहे कितनी भी व्यस्तता हो। एक दिन रवि को कराहते हुए देख, प्रकाश जी ने कहा, “रवि, अपनी हड्डियों पर अत्याचार करना बंद करो।“ रवि ने कहा, “यह सिर्फ आदत है, इससे क्या फर्क पड़ता है?“ प्रकाश जी ने रवि को कुर्सी पर सीधा बिठाया और कहा, “तुम्हारी रीढ़ की हड्डी तुम्हारा आधार है। यदि तुम झुककर बैठोगे, तो शरीर की प्राकृतिक मुद्रा (Posture) बिगड़ जाएगी। इससे नसें दबती हैं, पाचन खराब होता है और उम्र से पहले शरीर बूढ़ा हो जाता है। हमेशा याद रखोः कंधे पीछे, सीना सीधा और सिर ऊंचा।...

जीवन संगिनी की मधुर स्मृति में स्मरणांजलि

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स्वर्गीय श्रीमती सावित्री देवी की मधुर स्मृति में स्मरणांजलि वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से जीवन संगिनी की मधुर स्मृति मेरे जीवन में जन्म - 10 मार्च 1948 मेरे जीवन में आगमन - 14 जून 1970, निर्गमन - 19 अगस्त 2022 सावित्री देवी :- शत शत नमन व श्रद्धांजलि अर्पण स- सत्य, सनातन, सात्विक, सादगी की मूरत थी। आ- आत्मिक, आध्यात्मिक, अर्धागिंनी, अनुकरणीय थी। व- विश्वास, विवेकी, वैचारिक, व्यावहारिक थी। इ- इष्ट, ईशान, इमत्याहन, इलाज, ईमान थी। त- त्यागी, तपस्वी, त्रिगुणी, तरुणाईरूप थी। र- ऋद्धि, सिद्धि, ऋचा, रूह, रिहान थी। ई- इष्ट, निष्ठ, ईमानदार, जीवन का ईनाम थी। द- दयालु, दुआ, दर्द की दवा, दानशील थी। ए- एकान्त, एकाग्र, ऐश्वर्य, इन्सान एक ही थी। व- वीणा वादिनी, वर्ण, वास्तविक पहचान थी। ई- ईश्वरीय पथगामिनी, ईश्वरीय इशारा, ईमानदार थी। 14 जून 1970 से पहले ज़िन्दगी ख्वाब थी, अगस्त 2022 तक ज़िन्दगी गुले गुलज़ार थी, 52 वर्षों में ख़ुशियां भी थी, गम भी थे, पतझड़ भी थी, वसन्त भी थे, संघर्ष भी था, उत्कर्ष भी था, रोए भी थे, हंसे भी थे, रूठे भी थे, मने भी थे, ज...

Listen good soothing music.

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  अच्छा, भला लगने वाला संगीत सुनो। Listen good soothing music. आवाज़ का तुम्हारे मन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। एक व्याकुल और बेचैन मन, सुमधुर संगीत और अच्छे गीतों को सुनने से, आसानी से शांत हो सकता है।  जादुई धुन शहर की भागदौड़ और ऑफिस के तनाव से सुमित का जीवन नीरस हो गया था। उसे हर वक्त चिड़चिड़ापन और बेचैनी रहती थी। एक दिन, उसके पुराने दोस्त, रवि ने उसे देखा और कहा, “सुमित, तुम बहुत थक चुके हो। शाम को घर जाकर कोई अच्छा संगीत सुनो, मन शांत हो जाएगा।“ सुमित को अजीब लगा, संगीत से तनाव कैसे कम होगा? पर उसने रवि की बात मान ली। शाम को घर आकर उसने अपनी पसंद का शास्त्रीय संगीत (बांसुरी वादन) चालू किया और आँखें बंद कर लीं। शुरुआत में तो मन भटका, लेकिन जैसे ही धुन गहरी हुई, उसे लगा कि उसके दिमाग का तनाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। बाँसुरी के सुर जैसे उसकी रूह में उतर रहे थे। वह अपनी परेशानियों को भूलकर एक सुखद शांति का अनुभव करने लगा। वह अच्छा संगीत सुनकर इतना भावुक हो गया कि उसकी आँखों से खुशी के आंसू बह निकले। अगली सुबह सुमित तरोताजा महसूस कर रहा था। रवि ने उसे जीवन की सच्चाई सिखाई थी - अच्छा ...

Choose appropriate colours.

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उचित रंग चुनो।   Choose appropriate colours.   रंग भी तुम्हारे मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। उदाहरण के लिए हल्का नीला रंग मन पर शीतल प्रभाव डालता है। हरा रंग प्रेम का प्रतीक है। सफेद रंग पवित्रता और आध्यात्मिकता का प्रभाव उत्पन्न करता है। पीला रंग मन की ख़ुशी का प्रतीक है। काला रंग मन को उदासीनता, आलस और जड़ता से भर देता है, इसे प्रयोग नहीं करना चाहिए। इन बातों को ध्यान में रख कर अपने कमरों, परदों, फर्नीचर, दरवाज़ों, खिड़कियों और अपने कपड़ों के लिए उचित रंग का चुनाव करना चाहिए। एक बार एक राजा ने अपने तीन मंत्रियों की बुद्धिमानी परखने के लिए उन्हें बुलाया। राजा ने तीनों को एक-एक सफेद घोड़ा दिया और कहा, “जो इस घोड़े को सबसे अनोखे और उचित रंग में रंग कर लाएगा, उसे बड़ा इनाम मिलेगा।“ पहला मंत्री बाज़ार गया और सबसे महंगा सुनहरा रंग खरीदा। उसने घोड़े को सोने जैसा चमका दिया। उसे लगा कि राजा को भव्यता पसंद आएगी। दूसरा मंत्री प्रकृति प्रेमी था। उसने घोड़े को गहरे हरे और नीले रंगों से सजाया, ताकि वह जंगल में ओझल हो सके। उसे लगा कि राजा को उपयोगिता पसंद आएगी। तीसरा मंत्री शांत स्वभाव का था। वह ...