Avoid stress of perfection
पूर्ण प्रवीणता और आदर्शवादिता के तनाव से बचो। . Avoid stress of perfection and idealism. इस दुनिया में बहुत से लोग हैं जो हमेशा तनाव में रहते हैं क्योंकि वे प्रत्येक काम में पूर्ण दक्षता की उम्मीद रखते हैं परन्तु वे इसे पाने में समर्थ नहीं होते। इस संबंध में कृपया यह समझें कि पूर्ण दक्षता का गुण तो केवल ‘भगवान’ के पास है। परिभाषा के अनुसार- हम मनुष्य शत-प्रतिशत प्रवीण नहीं हो सकते। सवाल यह नहीं है कि हम किस स्तर तक पहुँचे हैं, लेकिन यह सच है कि हम ग़लतियां करना नहीं छोड़ पाते। हम अपने सतत ज्ञान व अभ्यास से अपनी अप्रवीणता को कम तो कर सकते हैं, लेकिन हम निष्कलंक प्रवीणता को प्राप्त नहीं कर सकते। एक मनुष्य केवल तभी पूर्ण दक्षता प्राप्त कर सकता है, जब वह चेतना के उच्चतम स्तर तक पहुँच जाए, जिसे ‘मोक्ष’ या ‘निर्वाण’ या ‘मुक्ति’ या ‘भगवद् सत्ता की अनुभूति’ की अवस्था कहते हैं। इस अवस्था में वह एक सामान्य व्यक्ति नहीं रहता और भगवान का सह-भागीदार बन जाता है। उसे फिर पाठ सीखने या प्रवीणता प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं रह जाती और वह जन्म और मृत्यु के चक्कर से आज़ाद हो जाता है। मिट्टी का ...