रघुनाथ जी प्यारी बहन
रघुनाथ जी प्यारी बहन अयोध्या के बहुत निकट ही पौराणिक नदी कुटिला है, जिसे आज टेढ़ी कहते हैं। उसके तट के निकट ही एक भक्त परिवार रहता था। उनके घर एक सरस्वती नाम की बालिका थी। वे लोग नित्य श्री कनक बिहारिणी बिहारी जी का दर्शन करने अयोध्या आते थे। सरस्वती जी का कोई सगा भाई नहीं था, केवल एक मौसेरा भाई ही था। वह जब भी श्री रधुनाथ जी का दर्शन करने आती, उसके मन मे यही भाव आता कि सरकार मेरे अपने भाई ही हैं । उसकी आयु उस समय मात्र दो वर्ष की थी। रक्षाबंधन से कुछ समय पूर्व उसने सरकार से कहा कि मैं आपको राखी बांधने आऊंगी। उसने सुंदर राखी बनाई और रक्षाबंधन पूर्णिमा पर मंदिर लेकर गयी। पुजारी जी से कहा कि हम भैया के लिए राखी लायी हैं। पुजारी जी ने छोटी-सी सरस्वती को गोद में उठा लिया और उससे कहा कि मै तुम्हें राखी सहित सरकार को स्पर्श कर देता हूं और राखी मैं बांध दूंगा। पुजारी जी ने राखी बांध दी और उसको प्रसाद दिया। अब हर वर्ष राखी बांधने का उसका नियम बन गया। समय के साथ वह बड़ी हो गयी और उसका विवाह निश्चित हो गया। वह पत्रिका लेकर मंदिर में आयी और कहा कि मेरा विवाह निश्चित हो गया है। मैं आपको न्योता देने ...