प्रेरणादायक कहानी
प्रेरणादायक कहानी .. ससुराल में कोहराम मच गया। मायके से भी फोन आए, भाई ने समझाया, "दीदी, थोड़ा सब्र करो।" पर नलिनी का सब्र अब स्वाभिमान में बदल चुका था। उसने अपना बैग उठाया, जिसमें उसके कपड़े कम और मेडिकल की किताबें ज्यादा थीं, और घर से निकल गई। बरामदे में रखी अपनी पुरानी आरामकुर्सी पर झूलते हुए, 70 वर्षीय नलिनी अपनी गोद में रखी डायरी के पन्नों को पलट रही थी। बाहर सावन की झड़ी लगी थी, ठीक वैसी ही बारिश, जैसी उस दिन हो रही थी जब उसकी विदाई हुई थी। आज वह अकेली थी, लेकिन यह अकेलापन उसे काटता नहीं था, बल्कि एक अजीब-सी शांति देता था। लोग कहते हैं कि बुढ़ापे का अकेलापन एक अभिशाप है, पर नलिनी के लिए यह उसकी 'जीत' का प्रमाण था। नलिनी अपने अतीत के गलियारों में झांकती है, तो उसे वह सीधी-सादी, पढ़ने में होशियार लड़की याद आती है। उसके पिता, मास्टर दीनानाथ जी, शहर के एक प्रतिष्ठित...