पावन प्रेरणा
पावन प्रेरणा मानव के जीवन में खुशियों का अभाव होता जा रहा है। आज के भौतिकवादी युग में हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के तनाव से ग्रस्त है, फिर चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, धन-प्राप्ति के बाद भी धन की लालसा बढ़ती ही जा रही है। मानव भौतिक वस्तुओं में सुख व शांति की खोज करते-करते अपनी तन-मन की शांति व सुख को खंडित कर बैठता है। अशांति को दूर न कर पाने के कारण वह अवसाद ;डि।ैशनद्ध का शिकार हो जाता है और कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। इस डिप्रैशन से बाहर निकलने का एक ही मार्ग है- स्वयं खुश रहना व दूसरों को खुशियाँ बाँटना। यदि व्यक्ति हर विषम परिस्थिति में सकारात्मक सोचने की आदत बना ले तो मन की उदासी एक पल में गायब हो सकती है। अच्छी पुस्तके पढ़ कर या संगीत की मधुर ध्वनि सुन कर मन के सभी नकारात्मक विचार समाप्त हो जाते हैं और मन-मस्तिष्क में नवीन ऊर्जा का संचार होने लगता है। आज का मनुष्य ज़िंदगी की भागमभाग में स्वयं के लिए समय ही नहीं निकाल पाता। उसे यह भान ही नहीं रहता कि एक बार समय हाथ से निकल गया तो वह वापिस लौट कर नहीं आ सकता। अतः समय रहते समय की कीमत को पहचानो और अपने ज...