एक बुढ़िया की रोचक कहानी
एक बुढ़िया की रोचक कहानी पथवारी माता की कहानियाँ ग्रामीण लोककथाओं का हिस्सा हैं, इसलिए इनके कई रूप मिलते हैं। लेकिन सबसे प्रचलित और "मूल" मानी जाने वाली कथा कार्तिक मास के स्नान और तुलसी माता के साथ उनके संबंध को दर्शाती है। बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक गरीब बुढ़िया रहती थी। वह नियम से हर रोज सुबह जल्दी उठकर नदी में स्नान करती और लौटते समय गाँव की पथवारी (रास्तों की देवी) और तुलसी की पूजा करती थी। वह सादगी से अपना जीवन जीती और भगवान का नाम लेती थी। उसी गाँव के साहूकार की बहू बहुत घमंडी थी। वह भी कार्तिक स्नान करती थी, लेकिन उसे अपनी धन-दौलत और सज-धज पर बहुत मान था। वह अक्सर बुढ़िया का मजाक उड़ाती कि "यह फटे हाल बुढ़िया रोज यहाँ पत्थर पूजने आती है, इससे क्या मिलेगा?" परीक्षा की घड़ी एक दिन बुढ़िया माई ने श्रद्धा के साथ पथवारी माता से विनती की कि "हे माता! मुझे मोक्ष की राह दिखाना और मेरे कष्ट हरना।" उधर साहूकार की बहू ने सोचा कि वह सबसे महंगी पूजा करेगी ताकि उसकी प्रसिद्धि हो। कुछ समय बाद, भगवान ने दोनों की परीक्षा ली। रास्ते में एक कठिन मोड़ आया,...