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दया पर संदेह

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  दया पर संदेह   एक बार एक अमीर सेठ के यहाँ एक नौकर  काम करता था। अमीर सेठ अपने नौकर से तो बहुत खुश था, लेकिन जब भी कोई कटु अनुभव होता तो वह ईश्वर को अनाप शनाप कहता और बहुत कोसता था। एक दिन वह अमीर सेठ ककड़ी खा रहा था। संयोग से वह ककड़ी कच्ची और कड़वी थी। सेठ ने वह ककड़ी अपने नौकर को दे दी। नौकर ने उसे बड़े चाव से खाया जैसे वह बहुत स्वादिष्ट हो। अमीर सेठ ने पूछा - ककड़ी तो बहुत कड़वी थी। भला तुम ऐसे कैसे खा गये ? नौकर बोला - आप मेरे मालिक हैं। रोज ही स्वादिष्ट भोजन देते हैं। अगर एक दिन कुछ बेस्वाद या कड़वा भी दे दिया, तो उसे स्वीकार करने में भला क्या हर्ज है ?  अमीर सेठ अपनी भूल समझ गया। अगर ईश्वर ने इतनी सुख सम्पदाएँ दी हैं, और कभी कोई कटु अनुदान या सामान्य मुसीबत दे भी दे, तो उसकी सद्भावना पर संदेह करना ठीक नहीं, वह नौकर और कोई नहीं प्रसिद्ध चिकित्सक हकीम लुकमान थे। असल में यदि हम समझ सकें तो जीवन में जो कुछ भी होता है, सब परमात्मा की दया ही है। परमात्मा जो करता है, अच्छे के लिए ही करता है..!! द्वारा -- सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन य...

अयोध्या का दिव्य प्रांगण!

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अयोध्या का दिव्य प्रांगण!   श्री अयोध्या जी में कनक भवन और हनुमानगढ़ी के मध्य स्थित है 'बड़ी जगह' जिसे दशरथ महल भी कहा जाता है। वर्षों पूर्व, यहाँ एक परम विरक्त संत निवास करते थे— श्री रामप्रसाद जी। उनका जीवन और आश्रम पूरी तरह प्रभु की कृपा पर निर्भर था। नियम सरल था: मंदिर में जो चढ़ावा आता, वह पलटू बनिया नाम के एक व्यापारी के पास भेज दिया जाता। बदले में पलटू राशन भेजता, जिससे ठाकुर जी का भोग बनता और संत-अभ्यागतों का भंडारा होता। न कोई संचय था, न कल की चिंता। एक दिन प्रभु ने कौतुक रचा। मंदिर में एक धेला भी चढ़ावा नहीं आया। सूर्यास्त होने को था, पर भंडार खाली था। विवश होकर रामप्रसाद जी ने दो साधुओं को पलटू के पास भेजा: "भैया, आज हाथ खाली है, प्रभु के भोग के लिए थोड़ा राशन उधार दे दो।" पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। पलटू बनिया रूखा होकर बोला— "महाराज, मेरा और महंत जी का व्यवहार तो नकद का है। उधार की यहाँ कोई जगह नहीं।" जब रामप्रसाद जी को यह पता चला, तो उन्होंने ठंडी आह भरी और कहा— "जैसी मेरे राघव की इच्छा।"  उस दिन मंदिर में केवल जल का भोग लगा। भूखे...

टाइम बैंक

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टाइम बैंक स्विट्ज़रलैंड में पढ़ाई कर रहा एक छात्र लिखता है👇  स्विट्ज़रलैंड में पढ़ाई करते समय, मैंने स्कूल के पास एक घर किराए पर लिया था। उस घर की मालकिन का नाम क्रिस्टिना था। वह 67 वर्ष की अविवाहित वृद्ध महिला थी। वह पहले माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका थीं और अब सेवानिवृत्त हो चुकी थीं। स्विट्ज़रलैंड में पेंशन बहुत अच्छी होती है, इसलिए बुढ़ापे में भोजन और रहने की कोई चिंता नहीं होती। फिर भी, उन्होंने एक “काम” स्वीकार किया था — एक 87 वर्षीय अविवाहित वृद्ध व्यक्ति की देखभाल करना।  मैंने उनसे पूछा, “क्या आप यह काम पैसे के लिए करती हैं?”  उनका जवाब मुझे चौंकाने वाला था: “मैं पैसे के लिए काम नहीं करती। मैं अपना समय ‘टाइम बैंक’ में जमा करती हूँ। जब मैं खुद बूढ़ी हो जाऊँगी और चल-फिर नहीं सकूँगी, तब मैं उस समय को निकालकर उपयोग करूँगी।” मैंने पहली बार “टाइम बैंक” की अवधारणा सुनी थी, इसलिए मुझे बहुत उत्सुकता हुई और मैंने उनसे इसके बारे में और जानकारी ली। “टाइम बैंक” मूल रूप से स्विट्ज़रलैंड के सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई एक योजना है। लोग अपनी युवावस्था में बुजुर्ग...

मां का पत्र बेटी के नाम

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मां का पत्र बेटी के नाम  14 Feb. 2004 वैलेंटाइन डे Sung by Bindu Jain, Delhi तेरी ज़िन्दगानी की कहानी भी अजीब है ये, कभी ये हंसाती और कभी ये रुलाती है।  कभी ये बिखेरती है खुशियों के फूल और, कभी अपने ही अंसुवन में नहाती है ॥ जो भी हम चाहते है पाया नहीं जाता, जो भी हम पाते हैं,  भाया नहीं जाता,  जो भी हमें भाता है वो रहता नहीं कभी, खट्टी मीठी यादों को तू भूल क्यों न जाती है॥ तेरी ज़िन्दगानी की..... ममता के फूलों से किया है शृंगार तेरा, विद्या रूपी धन से भरा है भंडार तेरा,  इस धन को तू रखना संभाल के, जीवन के कोष में यही तेरी थाती है॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....  जीवन की बगिया से फूल-फूल चुनना, कांटों को निकाल के तू दूर-दूर करना,  मान देना सबको और प्यार देना सबको, तेरी कोयल सी कूक सारे चमन को महकाती है ॥ तेरी ज़िन्दगानी की.....  तेरे अंगना में जब गूंजी किलकारी है, 'मैया मैया' बोल के ये दुनिया संवारी है।  सोने के सिंहासन पे सजते हैं छोटे राजा, उनकी अदाओं पे तू बलिहारी जाती है ॥ तेरी ज़िन्दगानी की..... उसको गुणों के भंडार सौंप देना, लाड़, प्य...

बेटी

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  बेटी एक इलाके में एक भले आदमी का देहांत हो गया। लोग अर्थी  ले जाने को तैयार हुए और जब उसे उठाकर श्मशान ले जाने लगे तो एक आदमी आगे आया और अर्थी का एक पाऊं पकड़  लिया और बोला कि मरने वाले से मुझे मेरे 15 लाख लेने हैं। पहले मुझे मेरे पैसे दो, फिर उसको जाने दूंगा।  अब तमाम लोग खड़े तमाशा देख रहे हैं। बेटों ने कहा कि मरने वाले ने हमें तो कोई ऐसी बात नहीं की कि वह कर्जदार है। इसलिए हम कुछ नही दे सकते। मृतक के भाइयों ने कहा कि जब बेटे जिम्मेदार नहीं, तो हम क्यों दें?  अब सारे खड़े हैं और उसने अर्थी पकड़ी हुई है। जब काफ़ी देर गुज़र गई, तो बात घर की औरतों तक भी पहुंच गई। मरने वाले की एकलौती बेटी ने जब बात सुनी, तो फौरन अपना सारा ज़ेवर उतारा और अपनी सारी नक़द रकम जमा करके उस आदमी के लिए भिजवा दी और कहा कि भगवान के लिए ये रकम लो और ज़ेवर बेच कर उसकी रकम दे दो और मेरे पिताजी की अंतिम यात्रा को न रोको।  मैं मरने से पहले सारा कर्ज़ अदा कर दूंगी और बाकी रकम का जल्दी बंदोबस्त कर दूंगी। अब वह अर्थी पकड़ने वाला शख्स खड़ा हुआ और सारे लोगो से मुखातिब हो कर बोला - असल बात ये है कि मुझे म...

How to remain ever happy?

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  How to remain ever happy? जीवन का आनन्द प्राप्त करने के लिए ‘हर पल मुस्कुराइए’ Life is full of choices....and I choose happiness. इस महत्वपूर्ण मनोरंजक विषय पर विस्तृत विचार विनिमय प्रारम्भ करने से पहले, हमें इस वास्तविकता को समझना होगा कि खुशी और उदासी मूल रूप से हमारे मन व मस्तिष्क पर निर्भर है। यह मन-मस्तिष्क की वह अवस्था है जो बाहरी परिस्थितियों और घटनाओं पर आवश्यक रूप से निर्भर नहीं है। अन्य शब्दों में - यह हमारे भीतर से आती है, बाहर से नहीं। दो व्यक्ति एक ही परिस्थिति पर अलग-अलग प्रतिक्रिया कर सकते हैं। जहां एक व्यक्ति अत्यधिक तनावग्रस्त व बैचेन हो सकता है, दूसरा उस परिस्थिति के प्रति शांति व खुशी की स्थिति को बनाए रख सकता है। अतः हमारी खुशी या उदासी को निश्चित करने वाली बाहरी परिस्थितियां नहीं हैं, अपितु उन परिस्थितियों के प्रति हमारा रुख व मानसिक रूप से प्रतिक्रिया है। यदि हम कहें कि जीवन में मानसिक स्थिति ही सब कुछ है तो यह एक अतिशयोक्ति नहीं होगी। व्यक्ति को जीवन जीने की कला आनी चाहिए। जीने का अर्थ दिन काटना नहीं है। किसी को यह मत समझाओ कि क्रोध मत करो, बल्कि यह सिखाओ क...

दस प्रतिशत

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  दस प्रतिशत   एक बहुत अमीर आदमी ने रोड के किनारे एक भिखारी से पूछा - "तुम भीख क्यूँ मांग रहे हो? जबकि तुम तन्दुरुस्त  हो।   भिखारी ने जवाब दिया  - मेरे पास महीनों से कोई काम नहीं है। अगर आप मुझे कोई नौकरी दें, तो मैं अभी  से भीख मांगना छोड़ दूँ । अमीर मुस्कुराया और कहा - मैं तुम्हें कोई नौकरी तो नहीं दे सकता, लेकिन मेरे पास इससे भी अच्छा कुछ है। क्यूँ नहीं तुम मेरे बिज़नस पार्टनर बन जाओ? भिखारी को उसके  कहे पर यकीन नहीं हुआ - ये आप क्या कह रहे हैं? क्या ऐसा मुमकिन है?  हाँ! मेरे पास एक चावल का प्लांट हैl तुम चावल बाज़ार में सप्लाई करो और जो भी मुनाफ़ा होगा, उसे हम महीने के अंत में आपस में बाँट लेंगे ।  भिखारी के आँखों से ख़ुशी के आंसू निकल पड़े - आप मेरे लिए जन्नत के फ़रिश्ते बन कर आये हैं । मैं किस कदर आपका शुक्रिया अदा करूँ? फिर अचानक वो चुप हुआ और कहा - हम मुनाफे को कैसे बांटेंगे? क्या मैं 20% और आप 80% लेंगे ..या मैं 10% और आप 90% लेंगे? जो भी हो ...मैं तैयार हूँ और बहुत खुश हूँ..." अमीर आदमी ने बड़े प्यार से उसके सर पर हा...

कान्हा की दीवानी

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कान्हा की दीवानी  कान्हा की दीवानी बनकर, मीरा ने घर छोड़ दिया। इक राजा की बेटी ने, गिरधर से नाता जोड़ लिया।।  कान्हा की ....... नाचे गाए मीरा बाई, लेकर हाथ में इकतारा। पग में घुंघरू, गले में माला, भेष जोगनिया है धारा। राजा की कुल आन बान को, मीरा ने है तोड़ दिया।। कान्हा की ....... सुरति ज्ञान था इकतारा में, हर घुंघरू में नाद भरा। हर गायन में बसे कन्हैया, भक्ति भाव का स्वाद भरा। जोत से जोत मिला ली उसने, जग से नाता तोड़ दिया।। कान्हा की ....... सास कहे कुल नासी मीरा, लोग कहें गलफांसी रे। कैसे जीना होगा मेरा, जग करता है हांसी रे। बन कर कान्हा की जोगनिया, राजपाट सब छोड़ दिया।। कान्हा की ....... सांप पिटारा डसने भेजा, हार मौत के सूलों का। हंस कर के मीरा ने पहना, हार बन गया फूलों का। प्रेम दीवानी मीरा देखो, मोह का बंधन तोड़ दिया।। कान्हा की ....... पी गई मीराबाई देखो, राणा के विष का प्याला। कौन बिगाड़ सका है उसका, जिसका गिरधर रखवाला। गिरधर के रंग में दासी ने, सबसे नाता तोड़ लिया।। कान्हा की ....... श्याम शरण में हैं जो जाते, श्याम के ही बन जाते हैं। भक्त दयालु भक्ति भाव से, मीरा के गुण गाते...

आज की कहानी

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  आज की कहानी  "जिस चौखट पर कल तक खुशियों की रंगोली सजती थी, आज उसी चौखट पर बैंक का 'नीलामी नोटिस' चिपका था। पर बुढ़ापे की लाठी बनने वाला बेटा घर बचाने के बजाय अपनी नई गृहस्थी के सपने सजा रहा था।" ​शाम का धुंधलका कानपुर की तंग गलियों में फैल रहा था। 'दीनानाथ क्लॉथ हाउस' का शटर पिछले पंद्रह दिनों से नहीं खुला था। उस लोहे के शटर पर चिपका सफेद कागज दीनानाथ जी की 40 साल की ईमानदारी की धज्जियां उड़ा रहा था। घर के अंदर सन्नाटा इतना गहरा था कि सुमित्रा जी की सिसकियों की आवाज़ भी गूंज रही थी। ​दीनानाथ जी अपनी पुरानी चारपाई पर पत्थर की मूरत बने बैठे थे। उनके सामने उनका इकलौता बेटा, अविनाश खड़ा था। उसके चेहरे पर दु:ख नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेरुखी थी। ​"पापा, मैंने पहले ही कहा था कि इस पुरानी दुकान और इन पुराने तौर-तरीकों से अब काम नहीं चलेगा। लेकिन आपको तो अपनी 'विरासत' प्यारी थी। अब देखिए, 20 लाख का कर्ज़ा है। बैंक वाले कभी भी हमें बाहर निकाल देंगे," अविनाश ने ठंडे स्वर में कहा। ​सुमित्रा जी ने कांपते हाथों से बेटे का हाथ पकड़ा, "बेटा, तेरे पापा की हाल...

पावन प्रेरणा

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  पावन प्रेरणा   मानव के जीवन में खुशियों का अभाव होता जा रहा है। आज के भौतिकवादी युग में हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के तनाव से ग्रस्त है, फिर चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, धन-प्राप्ति के बाद भी धन की लालसा बढ़ती ही जा रही है। मानव भौतिक वस्तुओं में सुख व शांति की खोज करते-करते अपनी तन-मन की शांति व सुख को खंडित कर बैठता है। अशांति को दूर न कर पाने के कारण वह अवसाद ;डि।ैशनद्ध का शिकार हो जाता है और कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। इस डिप्रैशन से बाहर निकलने का एक ही मार्ग है- स्वयं खुश रहना व दूसरों को खुशियाँ बाँटना। यदि व्यक्ति हर विषम परिस्थिति में सकारात्मक सोचने की आदत बना ले तो मन की उदासी एक पल में गायब हो सकती है। अच्छी पुस्तके पढ़ कर या संगीत की मधुर ध्वनि सुन कर मन के सभी नकारात्मक विचार समाप्त हो जाते हैं और मन-मस्तिष्क में नवीन ऊर्जा का संचार होने लगता है। आज का मनुष्य ज़िंदगी की भागमभाग में स्वयं के लिए समय ही नहीं निकाल पाता। उसे यह भान ही नहीं रहता कि एक बार समय हाथ से निकल गया तो वह वापिस लौट कर नहीं आ सकता। अतः समय रहते समय की कीमत को पहचानो और अपने ज...

कारवां गुज़र गया

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कारवां गुज़र गया  स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गए सिंगार सब, बाग के बबूल से। और हम खड़े-खड़े, बहार देखते रहे, कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे। नींद भी खुली न थी, कि हाय! धूप ढल गई, पाँव जब तलक उठे, कि ज़िन्दगी फिसल गई। पात-पात झर गए, कि शाख-शाख जल गई, चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई। गीत अश्क बन गए, छंद हो दफन गए, साथ के सभी दीए, धुआं पहन-पहन गए। और हम झुके-झुके, मोड़ पर रुके-रुके, उम्र के चढ़ाव का, उतार देखते रहे। कारवां गुज़र गया........ । क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा, क्या जमााल था कि, देख आईना मचल उठा। इस तरफ ज़मीन और, आसमां उधर उठा, थाम कर ज़िगर उठा कि, जो मिला नज़र उठा। एक दिन मगर यहाँ, ऐसी कुछ हवा चली, लुट गई कली-कली कि, घुट गई गली-गली। और हम लुटे-लुटे, वक्त से पिटे-पिटे, सांस की शराब का, खुमार देखते रहे। कारवां........ । हाथ थे मिले कि जुल्फ, चांद की सँवार दूँ, होठ थे खुले कि हर, बहार को पुकार दूँ। दर्द था दिया गया कि, हर दुःखी को प्यार दूँ, और सांस यूँ कि, स्वर्ग भूमि पर उतार दूँ। हो सका न कुछ मगर, शाम बन गई सहर, वह उठी लहर कि ढह, गए किले बिखर-बिखर। और हम डरे-ड...

We must give hold of our life to GOD.

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  अपने जीवन की डोर अपने आराध्य को सौंप दो।  We must give hold of our life to our adorable GOD. संसार में प्रत्येक प्राणी अपने छोटे से जीवन का भरपूर आनंद लेना चाहता है। इसके लिए कोई परिश्रम किए बिना और धन को खर्च किए बिना हमें मात्र निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना है - - अपनी बुद्धि, मन व विचारों को अपने आराध्य को समर्पित कर दो। - हमारा मन ही अपने विचारों द्वारा बुद्धि और विवेक पर प्रहार कर के इन्द्रियों से अपनी इच्छानुसार कार्य करवाता है। जब हम अपना मन भगवान को अर्पित कर देंगे, तो हमारा प्रत्येक कार्य उन्हीं के द्वारा निर्देशित होगा। जैसे एक माँ अपने असहाय नवजात शिशु की सभी आवष्यकताओं व सुविधाओं का ध्यान रखती है उसी प्रकार भगवान अपने प्रतिनिधि गुरु के रूप में हमारी पात्रता के अनुसार सुख-सुविधाओं का ध्यान रखेंगे और हम अपने जीवन को आनन्दपूर्वक व्यतीत कर उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सकेंगे। इसीलिए कहा गया है- “अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में, है जीत तुम्हारे हाथों में और हार तुम्हारे हाथों में।”  एक बार एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा, "गुरुदेव, जीवन में शांति औ...

महान आत्माएं

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  महान आत्माएं ख़ुशी के सम्बन्ध में क्या कहती हैं? 1. ख़ुशी वस्तुओं में नहीं, मन में है। 2. तुम्हारे स्वयं के अतिरिक्त अन्य कोई व्यक्ति तुम्हें प्रसन्न नहीं रख सकता। 3. सच्ची ख़ुशी धन से नहीं, मन से मिलती है। 4. ख़ुशी खरीदी नहीं जा सकती, यह केवल अनुभव की जा सकती है। 5. ख़ुशी का झरना तुम्हारे अन्दर है। इसे स्वतंत्रता से बहने दो। 6. यदि आप को पूरे विश्व का राजा बना दिया जाए और ख़ुशी की सब चीजें और उनको प्रयोग करने का हक भी सौंप दिया जाए, तो भी इसका पूर्ण विश्वास नहीं है कि आप ख़ुश हो ही जाएंगे। 7. ख़ुशी आपकी सच्ची वास्तविक प्रकृति है, इसे केवल खोजना है, बाहर से प्राप्त नहीं करना है। 8. तनाव का केन्द्र आपका मन है, मन को समझे व नियंत्रित किए बिना तनाव को दूर करना असंभव है। 9. किसी भी कार्य का सकारात्मक परिणाम पाने के लिए मुस्कुराना गणपति की पूजा के समान है। 10. ख़ुशी आपका कीमती ख़ज़ाना है। 11. जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो ख़ुशी हमारे पास अपने आप आ जाती है। भाई की नाव को पार कराने से अपनी नाव स्वयं ही पार हो जाती है। 12. ख़ुशी उस काम से नहीं आती जो हम करना पसंद करते हैं, बल्कि उससे आती है कि जो ...