कान्हा की दीवानी बनकर
कान्हा की दीवानी बनकर
धुनः चांदी की दीवार न तोड़ी......
कान्हा की दीवानी बनकर, मीरा ने घर छोड़ दिया।
इक राजा की बेटी ने, गिरधर से नाता जोड़ लिया।।
कान्हा की .......
नाचे गाए मीरा बाई, लेकर हाथ में इकतारा।
पग में घुंघरू, गले में माला, भेष जोगनिया है धारा।
राजा की कुल आन बान को, मीरा ने है तोड़ दिया।।
कान्हा की .......
सुरति ज्ञान था इकतारा में, हर घुंघरू में नाद भरा।
हर गायन में बसे कन्हैया, भक्ति भाव का स्वाद भरा।
जोत से जोत मिला ली उसने, जग से नाता तोड़ दिया।।
कान्हा की .......
सास कहे कुल नासी मीरा, लोग कहें गलफांसी रे।
कैसे जीना होगा मेरा, जग करता है हांसी रे।
बन कर कान्हा की जोगनिया, राजपाट सब छोड़ दिया।।
कान्हा की .......
सांप पिटारा डसने भेजा, हार मौत के सूलों का।
हंस कर के मीरा ने पहना, हार बन गया फूलों का।
प्रेम दीवानी मीरा देखो, मोह का बंधन तोड़ दिया।।
कान्हा की .......
पी गई मीराबाई देखो, राणा के विष का प्याला।
कौन बिगाड़ सका है उसका, जिसका गिरधर रखवाला।
गिरधर के रंग में दासी ने, सबसे नाता तोड़ लिया।।
कान्हा की .......
श्याम शरण में हैं जो जाते, श्याम के ही बन जाते हैं।
भक्त दयालु भक्ति भाव से, मीरा के गुण गाते हैं।
भव सागर से तर गई मीरा, देह का बन्धन तोड़ दिया।।
कान्हा की .......
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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