नास्तिक से आस्तिक
नास्तिक से आस्तिक उदयराम शहर का एक अत्यंत कुशाग्र बुद्धि वाला तर्कशास्त्री था, जिसकी पहचान एक ऐसे कट्टर नास्तिक के रूप में थी, जो केवल प्रत्यक्ष प्रमाण और वैज्ञानिक आंकड़ों पर ही विश्वास करता था और अक्सर सभाओं में यह चुनौती देता था कि यदि ईश्वर है, तो वह दिखाई क्यों नहीं देता, क्योंकि उसकी दृष्टि में जो अस्तित्वहीन है, वही अदृश्य है। वह जीवन को रसायनों और भौतिक क्रियाओं का एक आकस्मिक मेल मात्र मानता था । जिसमें भावना या प्रार्थना का कोई स्थान नहीं था। परंतु उसके इस कठोर तार्किक संसार को एक ऐसी घटना ने झकझोर दिया, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। एक बार अपने शोध कार्य के लिए वह हिमालय की उन दुर्गम और निर्जन पहाड़ियों के भ्रमण पर था, जहाँ प्रकृति का सौंदर्य जितना मनमोहक था, उसकी कठोरता उतनी ही जानलेवा थी। एक शाम जब वह एक संकरी ढलान से गुजर रहा था अचानक तेज़ बारिश और भूस्खलन के कारण उसका पैर फिसला और वह हज़ारों फीट गहरी खाई की ओर लुढ़कने लगा, लेकिन किस्मत से उसकी शर्ट एक मज़बूत झाड़ी के तने में फंस गई और वह हवा में झूलने लगा। नीचे मौत का अंधेरा था और ऊपर बारिश की वजह से फि...