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युधिष्ठिर को कलियुग का ज्ञान था कि क्या होगा?

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 युधिष्ठिर को कलियुग का ज्ञान था कि क्या होगा ? Image by Capri23auto from Pixabay पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल में छिपने का स्थान ढूंढ रहे थे। उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी। शनिदेव के मन में विचार आया कि इन पाँचों में बुद्धिमान कौन है ? चलो! परीक्षा ली जाए। शनिदेव ने एक माया का महल बनाया कई योजन दूरी में। उस महल के चार कोने थे - पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण। अचानक भीम की नजर महल पर पड़ी और वह आकर्षित हो गया। भीम युधिष्ठिर से बोला - “भैया! मुझे महल देखना है।” भाई ने कहा - “जाओ।”  भीम महल के द्वार पर पहुंचा। वहाँ शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे। भीम बोला - “मुझे महल देखना है!” शनिदेव ने कहा - “महल की कुछ शर्त है।” 1 - महल में चार कोने हैं। आप एक ही कोना देख सकते हैं। 2 - महल में जो देखोगे, उसकी सार सहित व्याख्या करोगे। 3 - अगर व्याख्या नहीं कर सके तो कैद कर लिए जाओगे । भीम ने कहा - “मैं स्वीकार करता हूँ, ऐसा ही होगा।” वह महल के पूर्व छोर की ओर गया। वहां जाकर उसने अद्भुत पशु-पक्षी और फूलों एवं फलों से लदे वृक्षों का नजारा देखा, आगे जाकर देखता...

संपर्क (Contact) और जुड़ाव (Connection)

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 संपर्क (Contact) और जुड़ाव (Connection) Image by Christophe BILLARD from Pixabay एक बड़े पत्रकार एक साधु का न्यूयार्क में Interview ले रहे थे।  पत्रकार - Sir , आपने अपने Last Lecture में संपर्क ( Contact ) और जुड़ाव ( Connection ) पर स्पीच दिया लेकिन यह बहुत Confuse करने वाला था। क्या आप इनका अंतर समझा सकते हैं ? साधु मुस्कुराए और उन्होंने कुछ अलग प्रश्न पत्रकारों से ही पूछने शुरू कर दिए।  “आप न्यूयॉर्क से हैं ? “ पत्रकार - “ Yeah ..“ संन्यासी - “आपके घर में कौन-कौन हैं ? “ पत्रकार को लगा कि साधु उनका सवाल टालने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उनका सवाल बहुत व्यक्तिगत और उसके सवाल के जवाब से अलग था। फिर भी पत्रकार बोला - मेरी माँ अब नहीं है, पिता हैं तथा 3 भाई और एक बहन है। सब शादीशुदा हैं।“ साधु ने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए पूछा - “आप अपने पिता से बात करते हैं ? “ पत्रकार के चेहरे से गुस्सा झलकने लगा। साधू ने पूछा, “आपने अपने Father से Last Time कब बात की थी ? “ पत्रकार ने अपना गुस्सा दबाते हुए जवाब दिया - “शायद एक महीने पहले।“ साधू ने पूछा - “क्या आप...

रामायण जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती है

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 रामायण जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती है Image by No-longer-here from Pixabay भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी, माँ सीता ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया। परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण जी कैसे रामजी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी वन जाने की, परन्तु जब पत्नी उर्मिला के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा!! क्या कहूंगा!! यही सोच-विचार करके लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल लेकर खड़ी थी और बोली - “आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु की सेवा में वन को जाओ। मैं आपको नहीं रोकूंगी। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आए, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।“ लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था। परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया। वास्तव में यही पत्नी का धर्म है। पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से बाहर कर दे!! लक्ष्मण जी चले ...

ईश्वर तू ही अन्नदाता है

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 ईश्वर तू ही अन्नदाता है Image by MichaelGaida from Pixabay किसी राज्य में एक प्रतापी राज्य हुआ करता था। वह राजा रोज़ सुबह उठकर पूजा-पाठ करता और गरीबों को दान देता। अपने इस उदार व्यवहार और दया की भावना की वजह से राजा पूरी जनता में बहुत लोकप्रिय हो गया था। रोज़ सुबह दरबार खुलते ही राजा के यहाँ गरीबों और भिख़ारियों की लंबी लाइन लग जाती थी। राजा हर इंसान को संतुष्ट करके भेजते थे। किशन और गोपाल नाम के दो गरीब भिख़ारी रोज़ राजा के यहाँ दान लेने आते। किशन और गोपाल में से राजा जब किशन को दान देता तो वह राजा की बहुत वाहवाही करता और राजा को दुआएं देता। वहीं जब राजा गोपाल को दान देता तो वह हर बार एक ही बात बोलता, “ हे ईश्वर! तू बड़ा दयालु है, तूने मुझे इतना सब कुछ दिया।” राजा को उसकी बात थोड़ी बुरी लगती। राजा सोचता कि दान मैं देता हूँ और यह गुणगान उस ईश्वर का करता है। एक दिन राजकुमारी का जन्मदिन था। उस दिन राजा ने दिल खोल कर दान दिया। जब किशन और गोपाल का नंबर आया तो राजा ने पहले किशन को दान दिया और किशन राजा के गुणगान करने लगा लेकिन राजा ने जैसे ही गोपाल को दान दिया वह हाथ ...