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हंस और सौ पुत्र

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 हंस और सौ पुत्र Image by Christiane from Pixabay महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। अपनी भुजाओं में दबाकर भीम को मारने की धृतराष्ट्र की कोशिश भगवान श्री कृष्ण ने नाकाम कर दी। धृतराष्ट्र लज्जित थे। विदुर जी ने उन्हें समझाया कि श्री कृष्ण भगवान हैं, जीवन के अंतिम क्षणों में आप उनसे ज्ञान लीजिए। धृतराष्ट्र ने श्री कृष्ण से पूछा - आप भगवान हैं, आप बताइए कि मेरे साथ इतना अन्याय क्यों हुआ? मैं अंधा पैदा हुआ, मेरे सौ पुत्र मारे गए। अब मेरे कुल का कोई नामलेवा तक नहीं रह गया। भगवन्! मैंने ऐसा कौन सा पाप किया है जिसकी सजा मिल रही है? भगवान श्री कृष्ण ने बताना शुरू किया - महाराज धृतराष्ट्र! पिछले जन्म में आप एक राजा थे। आपके राज्य में एक परम तपस्वी ब्राह्मण रहते थे। ब्राह्मण के पास हंसों का एक जोड़ा था, जिसके चार बच्चे थे। ब्राह्मण को तीर्थयात्रा पर जाना था, लेकिन हंसों की देखरेख की चिंता के कारण वह जा नहीं पा रहे थे। ब्राह्मण ने अपनी चिंता एक साधु को बताई। साधु ने कहा - तीर्थ यात्रा में हंसों को बाधक बताकर तुम पक्षियों के साथ अन्याय करते हुए उनका अगला जन्म खराब कर रहे हो। ब...

मृत्यु का देवता

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मृत्यु का देवता Image by Pri Pat from Pixabay मृत्यु के देवता ने अपने एक दूत को पृथ्वी पर भेजा। एक स्त्री मर गयी थी, उसकी आत्मा को लाना था। देवदूत आया, लेकिन चिंता में पड़ गया क्योंकि तीन छोटी-छोटी जुड़वां लड़कियां, उसके पास लेटी थी। एक अभी भी उस मृत स्त्री के स्तन से लगी थी। एक चीख रही है, पुकार रही है। एक रोते-रोते सो गयी है, उसके आंसू उसकी आंखों के पास सूख गए हैं। तीन छोटी जुड़वां बच्चियां और स्त्री मर गयी है। और कोई देखने वाला नहीं है। पति पहले मर चुका है। परिवार में और कोई भी नहीं है। इन तीन छोटी बच्चियों का क्या होगा? उस देवदूत को यह खयाल आ गया, तो वह खाली हाथ वापस लौट गया। उसने जा कर अपने प्रधान को कहा कि मैं न ला सका, मुझे क्षमा करें, लेकिन आपको स्थिति का पता ही नहीं है। तीन जुड़वां बच्चियां हैं - छोटी-छोटी, दूध पीती। एक अभी भी मृत स्तन से लगी है, एक रोते-रोते सो गयी है, दूसरी अभी चीख-पुकार रही है। मेरा हृदय उसे ला न सका। क्या यह नहीं हो सकता कि इस स्त्री को कुछ दिन और जीवन के दे दिए जाएं? कम से कम लड़कियां थोड़ी बड़ी हो जाएं। मृत्यु के देवता ने कहा, ‘तो तू फिर सम...

संसार का नियम

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 संसार का नियम Image by Stefan Schweihofer from Pixabay एक ग़रीब परिवार था। खाने को कुछ नहीं था। काफी सोचा कि काम मिले, मगर कोई काम नहीं मिला। परिवार में दो बच्चे थे और पत्नी थी। एक दिन उन्हें विचार आया कि इस गांव में काम मिलना मुश्किल है। चलो, कहीं और चलते हैं। इस इरादे से वे एक दिन गांव छोड़कर चल दिये। रात का समय था, रास्ता भी जंगली था। सोचा कि वृक्ष के नीचे रात गुज़ारी जाये। आदमी ने अपने एक लड़के को लकड़ी चुनने तथा दूसरे को पानी लाने के लिए भेज दिया तथा पत्नी को चूल्हा बनाने के लिए कहा और उसने जगह साफ़ कर दी। चारों ने अपने-अपने काम कर लिए। चूल्हा जलाया गया, पानी गर्म होने लग गया। वृक्ष के ऊपर एक हंस रहता था। वह सोचने लगा - ये कैसे मूर्ख हैं? इन्होंने चूल्हा तो जला लिया, मगर इनके पास पकाने को तो है ही नहीं कुछ भी। हंस ने उनसे पूछा - तुम्हारे पास पकाने को क्या है? वह आदमी बोला - तुझे मार कर खायेंगे। हंस बोला - मुझे क्यों मारोगे? आदमी बोला - हमारे पास न पैसा है और न ही सामान, तो क्या करें? हंस सोच में पड़ गया। इन्होंने चूल्हा भी जला लिया है। सब कर्मशील हैं, मुझे तो ये खा ...

अनमोल रत्न

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अनमोल रत्न Image by Ilo from Pixabay बुजुर्ग रघुवीर जी अपनी पत्नी के साथ अपनी रिटायर्ड जिंदगी बहुत हंसी-खुशी बिता रहे थे। पेंशन से दोनों पति-पत्नी अपनी जीविका से खुश थे। वैसे तो घर बड़ा था और उनके तीन बेटे-बहुएँ भी थी, मगर उनके तीनों बेटे अलग-अलग शहरों में अपने-अपने परिवारों के साथ व्यस्त थे। वैसे उन्होंने नियम बना रखा था। दीपावली हो या कोई अन्य त्यौहार, तीनों बेटे सपरिवार उनके पास आएंगे, साथ रहेंगे, खाएंगे, वक्त बिताएंगे, पूरे एक सप्ताह तक। वह एक सप्ताह कैसे मस्ती में बीत जाता था, कुछ पता ही नहीं चलता था। सारा परिवार खुशी से झूम उठता। अलग-अलग भले ही रहते थे, मगर उस एक सप्ताह में पूरी कसर साथ रहने की खत्म हो जाती। उन सुखद अनुभव और खुशियों के सहारे रघुवीर जी और सुधा की जिंदगी सुखद थी। मगर फिर उनकी खुशियों को जैसे नज़र ही लग गई। अचानक सुधा जी को एक रात दिल का दौरा पड़ा और एक झटके में उनकी सारी खुशियां बिखर गई। तीनों बेटे दुःखद समाचार पाकर दौड़े आए। उनके क्रिया-कर्म के बाद सब शाम को एकत्रित हो गए। बड़ी बहू ने बात उठाई - बाबूजी! अब आप यहां अकेले कैसे रह पाएंगे। आप हमारे सा...

लोक कल्याण

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 लोक कल्याण Image by Pri Pat from Pixabay पुराने जमाने की बात है। एक राजा ने दूसरे राजा के पास एक पत्र और सुरमे की एक छोटी-सी डिबिया भेजी। पत्र में लिखा था कि जो सुरमा भिजवा रहा हूँ, वह अत्यंत मूल्यवान है। इसे लगाने से अंधापन दूर हो जाता है। राजा सोच में पड़ गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि इसे किस-किस को दे। उसके राज्य में नेत्रहीनों की संख्या अच्छी-खासी थी, पर सुरमे की मात्रा बस इतनी थी, जिससे दो आँखों की रोशनी लौट सके। राजा इसे अपने किसी अत्यंत प्रिय व्यक्ति को देना चाहता था। तभी राजा को अचानक अपने एक वृद्ध मंत्री की स्मृति हो आई। वह मंत्री बहुत ही बुद्धिमान था, मगर आँखों की रोशनी चले जाने के कारण उसने राजकीय कामकाज से छुट्टी ले ली थी और घर पर ही रहता था। राजा ने सोचा कि अगर उसकी आँखों की ज्योति वापस आ गई तो उसे उस योग्य मंत्री की सेवाएं फिर से मिलने लगेंगी। राजा ने मंत्री को बुलवा भेजा और उसे सुरमे की डिबिया देते हुए कहा, ‘इस सुरमे को आँखों में डालें। आप पुनः देखने लग जाएंगे। ध्यान रहे यह केवल 2 आँखों के लिए है।’ मंत्री ने एक आँख में सुरमा डाला। उसकी रोशनी आ गई। उस...

सुन्दर और दुर्लभ सत्य कथा

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सुन्दर और दुर्लभ सत्य कथा Image by pkong88 from Pixabay एक बार गोपियों ने श्री कृष्ण से कहा - ‘हे कृष्ण! हमें अगस्त्य ऋषि को भोग लगाने जाना है और यह यमुना जी बीच में पड़ती हैं। अब बताओ कैसे जाएँ?’ भगवान श्री कृष्ण ने कहा - जब तुम यमुना जी के पास जाओ, तो कहना कि हे यमुना जी! अगर श्री कृष्ण ब्रह्मचारी हैं, तो हमें रास्ता दें। गोपियाँ हंसने लगी कि लो! ये कृष्ण भी अपने आप को ब्रह्मचारी समझता है। सारा दिन तो हमारे पीछे-पीछे घूमता है, कभी हमारे वस्त्र चुराता है, कभी मटकियाँ फोड़ता है। खैर! फिर भी हम बोल देंगी। गोपियाँ यमुना जी के पास जाकर कहती हैं - हे यमुना जी! अगर श्री कृष्ण ब्रह्मचारी हैं, तो हमें रास्ता दें। और गोपियों के कहते ही यमुना जी ने रास्ता दे दिया। गोपियाँ तो सन्न रह गई कि ये क्या हुआ, कृष्ण और ब्रह्मचारी? जब गोपियाँ अगस्त्य ऋषि को भोजन करवा कर वापिस आने लगी, तो उन्होंने अगस्त्य ऋषि से कहा कि अब हम घर कैसे जाएँ? यमुना जी बीच में पड़ेंगी। अगस्त्य ऋषि ने कहा कि तुम यमुना जी को कहना - अगर अगस्त्य जी निराहार हैं, तो हमें रास्ता दें। गोपियाँ मन में सोचने लगी कि अभी...