हनुमान जी की चुटकी सेवा
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 हनुमान जी की चुटकी सेवा Image by Ilo from Pixabay अयोध्या में प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक होने के बाद हनुमान जी वहीं रहने लगे। उन्हें तो श्री राम की सेवा का व्यसन (नशा) था। सच्चे सेवक का लक्षण ही है कि वह आराध्य के चित्त की बात जान लिया करता है। उसे पता रहता है कि मेरे स्वामी को कब क्या चाहिए और कब क्या प्रिय लगेगा? श्री राम को कोई वस्तु चाहिए तो हनुमान जी पहले से लेकर उपस्थित। किसी कार्य, किसी पदार्थ के लिए संकेत तक करने की आवश्यकता नहीं होती थी। हनुमान जी की सेवा का परिणाम यह हुआ कि भरत आदि भाइयों को श्री राम की कोई भी सेवा प्राप्त करना कठिन हो गया। इससे घबराकर सबने मिलकर एक योजना बनाई और श्री जानकी जी को अपनी ओर मिला लिया। प्रभु की समस्त सेवाओं की सूची बनाई गई। कौन-सी सेवा कब कौन करेगा, यह उसमें लिखा गया। जब हनुमान जी प्रातःकाल सरयू-स्नान करने गए तब अवसर का लाभ उठाकर तीनों भाइयों ने सूची श्री राम के सामने रख दी। प्रभु ने देखा कि सूची में कहीं भी हनुमान जी का नाम नहीं है। उन्होंने मुस्कुराते हुए उस योजना पर अपनी स्वीकृति दे दी। हनुमान जी को कुछ पता नहीं था। दू...