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Showing posts from February, 2024

हनुमान जी की चुटकी सेवा

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 हनुमान जी की चुटकी सेवा Image by Ilo from Pixabay अयोध्या में प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक होने के बाद हनुमान जी वहीं रहने लगे। उन्हें तो श्री राम की सेवा का व्यसन (नशा) था। सच्चे सेवक का लक्षण ही है कि वह आराध्य के चित्त की बात जान लिया करता है। उसे पता रहता है कि मेरे स्वामी को कब क्या चाहिए और कब क्या प्रिय लगेगा? श्री राम को कोई वस्तु चाहिए तो हनुमान जी पहले से लेकर उपस्थित। किसी कार्य, किसी पदार्थ के लिए संकेत तक करने की आवश्यकता नहीं होती थी। हनुमान जी की सेवा का परिणाम यह हुआ कि भरत आदि भाइयों को श्री राम की कोई भी सेवा प्राप्त करना कठिन हो गया। इससे घबराकर सबने मिलकर एक योजना बनाई और श्री जानकी जी को अपनी ओर मिला लिया। प्रभु की समस्त सेवाओं की सूची बनाई गई। कौन-सी सेवा कब कौन करेगा, यह उसमें लिखा गया। जब हनुमान जी प्रातःकाल सरयू-स्नान करने गए तब अवसर का लाभ उठाकर तीनों भाइयों ने सूची श्री राम के सामने रख दी। प्रभु ने देखा कि सूची में कहीं भी हनुमान जी का नाम नहीं है। उन्होंने मुस्कुराते हुए उस योजना पर अपनी स्वीकृति दे दी। हनुमान जी को कुछ पता नहीं था। दू...

जो होता है, वह दिखता नहीं और जो दिखता है, वह होता नहीं

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 जो होता है, वह दिखता नहीं और जो दिखता है, वह होता नहीं Image by Ilo from Pixabay एक समय की बात है। एक संत प्रातःकाल भ्रमण हेतु समुद्र के तट पर पहुँचे। समुद्र के तट पर उन्होंने एक पुरुष को देखा जो एक स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ था। पास में शराब की ख़ाली बोतल पड़ी हुई थी। यह दृश्य देख कर संत बहुत दुःखी हुए। उन्होंने विचार किया कि यह मनुष्य कितना तामसिक और विलासी है, जो प्रातःकाल शराब सेवन करके स्त्री की गोद में सर रख कर प्रेमालाप कर रहा है। थोड़ी देर बाद समुद्र से बचाओ-बचाओ की आवाज़ आई। संत ने देखा कि एक मनुष्य समुद्र में डूब रहा है, मगर स्वयं तैरना नहीं आने के कारण संत देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे। स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ व्यक्ति उठा और डूबने वाले को बचाने हेतु पानी में कूद गया। थोड़ी देर में उसने डूबने वाले को बचा लिया और किनारे पर ले आया। संत विचार में पड़ गए कि इस व्यक्ति को बुरा कहें या भला। वे उसके पास गए और बोले - भाई! तुम कौन हो और यहाँ क्या कर रहे हो? उस व्यक्ति ने उत्तर दिया - मैं एक मछुआरा हूँ, मछली मारने का काम करता हूँ। आज कई ...

संसार और साधना

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 संसार और साधना Image by hesnikof from Pixabay एक घुड़सवार कहीं दूर जा रहा था। बहुत देर से पानी न मिलने के कारण उसका घोड़ा प्यास से बेहाल था। तभी उसे एक खेत में रहट चलता दिखाई दिया। वह घोड़े को रहट के पास ले आया, ताकि घोड़ा पानी पी सके। पर वह रहट बहुत जोर से टक-टक-टक-टक आवाज कर रहा था। उस आवाज से घबरा कर घोड़ा पीछे हट गया। घुड़सवार के कई बार प्रयास करने पर भी वह घोड़े को पानी न पिला सका, तो उसने खेत के मालिक को आवाज लगाकर कहा - भैया! आप कुछ देर के लिए अपना रहट बंद कर दो, ताकि घोड़ा पानी पी सके। रहट की टक-टक के कारण घोड़ा पानी नहीं पी पा रहा है। खेत का मालिक उसकी बात सुन कर हंसने लगा और बोला - भाई! तुम समझदार लगते हो, फिर ऐसी मूर्खतापूर्ण बात क्यों करते हो? अगर रहट बंद हो जाएगा तो पानी आना भी तो बंद हो जाएगा। तब घोड़ा पियेगा क्या? अगर तुम अपने घोड़े की प्यास बुझाना चाहते हो, तो तुम्हें उसे इस टक-टक की आवाज़ में ही पानी पीने का अभ्यास कराना पड़ेगा। दूसरा कोई उपाय नहीं है। जानते हो, वह घुड़सवार कौन था? वह घुड़सवार और कोई नहीं, हम ही हैं। मन ही हमारा घोड़ा है। जगत की चिक-चिक ही रहट की...

विश्वास की जीत

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 विश्वास की जीत Image by Ilo from Pixabay एक बार एक गांव में एक सज्जन पुरुष रहते थे। वे बहुत ही दयालु तथा हृदयग्राही थे। किसी को भी कभी अपशब्द नहीं कहते थे। जो भी उनके घर आता, वे अच्छे से उसका आतिथ्य सत्कार करते। लोग उनसे सलाह मशविरा लेने आया-जाया करते थे। एक बार एक कैदी जेल से भाग जाता है। पुलिस उसके पीछे लगी रहती है। वह जब गांव के बीच में पहुंचता है तो उसे एक घर का दरवाजा खुला दिखता है। वह घर उसी सज्जन पुरुष का था। वह बिना इजाजत के अन्दर प्रवेश करता है। जैसे ही वह कैदी अन्दर पहुंचता है, तो वे सज्जन पुरुष बड़ी सौम्यता से कहते हैं - आइए, महाराज! आपका स्वागत है। वे उसे आराम से बिठाते हैं और पूछते हैं कि तुम कौन हो और कहाँ से आ रहे हो? वह कैदी कहता है कि मैं रास्ता भटक गया हूँ, क्या आप मुझे आज रात रहने की जगह दे सकते हैं? आपका बहुत एहसान होगा। वे सज्जन पुरुष कहते हैं - क्यों नहीं? आप आराम से यहाँ रहिए। आप नहा लीजिए, मैं आपके लिये खाने-सोने की व्यवस्था करता हूँ। जब तक वह कैदी नहाता है, तब तक वे सज्जन पुरुष उसके लिए सब व्यवस्था करते हैं। खाना खाने के बाद सब सो जाते हैं,...

अच्छा और बुरा

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अच्छा और बुरा Image by ZenAga from Pixabay एक गांव में दो भाई रहते थे। उनमें से एक बड़ा बिजनेसमैन था, जिसकी पूरे देश भर में नाम व प्रतिष्ठा थी। दूसरा निठल्ला था और नशा करता था। लोगों को उन दोनों भाईयों को देखकर आश्चर्य होता था कि आख़िर दोनों में इतना अंतर क्यों है? कुछ लोगों ने इसका पता लगाने का निश्चय किया और शाम को दोनों भाईयों के घर पहुँचे। अंदर घुसते ही उन्हें नशे में धुत एक व्यक्ति दिखा। उन्होंने उससे पूछा - तुम बेवजह लोगों से लड़ाई झगड़ा करते हो? आख़िर यह सब करने की वजह क्या है? “मेरे पिता” - उसने उत्तर दिया। वह बोला - मेरे पिता शराबी थे, वे अक्सर मेरी माँ और हम दोनों भाईयों को पीटा करते थे। ऐसे में तुम लोग मुझसे और क्या उम्मीद कर सकते हो? इसलिए मैं भी बचपन के संस्कारों के कारण अपने पिता के जैसा ही बन गया हूँ। फिर वे दूसरे भाई के पास गए। लोगों ने उससे भी वही प्रश्न किया - आप इतने सम्मानित और प्रतिष्ठित बिजनेसमैन हैं, इसकी वजह क्या है? “मेरे पिता” - दूसरे भाई ने उत्तर दिया। यह सुनकर लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने पूछा - “भला वो कैसे?” वह बोला - मेरे पिता शराब...

सुखी जीवन का रहस्य

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सुखी जीवन का रहस्य Image by 👀 Mabel Amber, who will one day from Pixabay एक महान संत हुआ करते थे, जो अपना स्वयं का आश्रम बनाना चाहते थे। जिसके लिए वे कई लोगों से मुलाकात करते थे। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह यात्रा के लिए जाना पड़ता था। इसी यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक साधारण-सी विदुषी कन्या से हुई। विदुषी ने उनका स्वागत किया और संत से कुछ समय कुटिया में रुक कर आराम करने की याचना की। रात्रि का समय था। संत उसके मीठे व्यवहार से प्रसन्न हुए और उन्होंने उसका आग्रह स्वीकार किया। विदुषी ने संत को अपने हाथों से बनाया हुआ स्वादिष्ट भोजन कराया और उनके विश्राम के लिए खटिया पर एक दरी बिछा दी और खुद फर्श पर टाट बिछा कर सो गई। विदुषी को लेटते ही नींद आ गई। उसके चेहरे के भाव से पता चल रहा था कि विदुषी चैन की सुखद नींद ले रही है। उधर संत को खाट पर नींद नहीं आ रही थी। उन्हें मोटे नरम गद्दे की आदत थी, जो उन्हें दान में मिला था। वे रात भर विदुषी के बारे में सोच रहे थे कि वह कैसे इस कठोर जमीन पर इतने चैन से सो रही है। दूसरे दिन सवेरा होते ही संत ने विदुषी से पूछा कि तुम कैसे इस कठो...

पक्का साधक

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 पक्का साधक Image by Gabriela Piwowarska from Pixabay एक बार एक गुरु जी अपने शिष्यों को भक्ति का उपदेश देते हुए समझा रहे थे कि बेटा पक्के साधक बनो, कच्चे साधक न बने रहो। कच्चे-पक्के साधक की बात सुनकर एक नये शिष्य के मन में सवाल पैदा हुआ। उसने पूछ ही लिया, “गुरु जी! ये पक्के साधक कैसे बनते हैं?” गुरु जी मुस्कुराये और बोले, “बेटा एक गाँव में एक हलवाई रहता था। हलवाई हर रोज़ कई तरह की मिठाइयाँ बनाता था, जो एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट होती थी। आस-पास के गाँवो में भी हलवाई की बड़ी धाक जमी हुई थी। अक्सर लोग हलवाई की मिठाईयों और पकवानों का आनंद लेने आते थे। एक दिन हलवाई की दुकान पर एक पति-पत्नी आये। उनके साथ उनका छोटा-सा बच्चा भी था, जो बहुत ही चंचल था। उसके पिता ने हलवाई को हलवा बनाने का आदेश दिया। वे दोनों तो प्रतीक्षा करने लगे, लेकिन वह बच्चा बार-बार आकर हलवाई से पूछता, “हलवा बन गया क्या?” हलवाई कहता, “अभी कच्चा है, थोड़ी देर और लगेगी।” वह थोड़ी देर प्रतीक्षा करता और फिर आकर हलवाई को आकर पूछता, “खुशबू तो अच्छी आ रही है, हलवा बन गया क्या?” हलवाई कहता, “अभी कच्चा है, थोड़ी देर और ...