भगवान के भक्त निर्धन क्यों?
भगवान के भक्त निर्धन क्यों?
भगवान कृष्ण के भक्त निर्धन जबकि अन्य देवी-देवताओं के धनवान, ऐसा क्यों?
भगवान, जिनकी सेवा स्वयं लक्ष्मी जी करती हैं और जो स्वयं लक्ष्मी पति कहलाते हैं, फिर उनके भक्त निर्धन जबकि अन्य देवी-देवताओं के धनवान, यह कैसे हो सकता है?
शास्त्रों के द्वारा हम जान सकते हैं कि शिवजी कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं, जिनके पास स्वयं रहने के लिए कोई भवन नहीं, पर रावण ने अपनी भक्ति से प्रसन्न कर उनसे सोने की लंका मांग ली। दूसरी ओर भगवान स्वयं पांडवों के साथ थे, पर पांडवों को 13 वर्ष वन में रहना पड़ा जबकि भगवान के पास ऐसे अन्य कितने लोक हैं, जो पांडवो को दे सकते थे।
पर अंत समय में हम सभी जानते हैं कि रावण का क्या हुआ और पांडवों की भगवान ने किस प्रकार रक्षा की । इस प्रश्न को महाराज परीक्षित सुखदेव गोस्वामी से पूछते हैं कि भगवान ऐसा क्यों करते हैं ?
सुखदेव गोस्वामी बताते हैं कि भगवान स्वयं कहते है - यदि मैं किसी पर विशेष कृपा करता हूँ तो उसका लोभ, लालच, मोह आदि सब अवगुण छीन लेता हूँ। नि:सहाय होने पर उसके पास अन्य कोई मार्ग नहीं बचता। इस प्रकार वह पूरी तरह से मेरी शरण में आ जाता है। अन्यथा वह यह सोचता रहेगा कि मेरे धन-सम्पत्ति मेरी रक्षा करेंगे।
भगवान सोचते हैं कि यह मेरा भक्त तो है, पर इसकी आसक्ति अभी भी भौतिक पदार्थों में है। जब तक मैं इसको इन सबसे दूर नहीं करूँगा, यह मेरी अच्छी प्रकार से भक्ति नहीं करेगा।
क्योंकि भगवान नहीं चाहते कि उनका भक्त बार-बार इस दु:खालय जगत में जन्म-मृत्यु-जरा और व्याधि में पड़कर दुःख भोगता रहे। इसलिए भगवान अपने भक्तों को कांच के टुकड़े नहीं, अपितु पारस मणि देते हैं जबकि अन्य उस कांच के टुकड़े को पारस मणि समझकर उसमें अपना जीवन व्यर्थ कर देते हैं..!!
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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