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मदद

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मदद Image by Mariya 💚 STAY SAFE ☘️ Take care of each other 🌍 from Pixabay ऑफिस से निकल कर शर्मा जी ने स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया कि पत्नी ने कहा था 1 दर्ज़न केले लेते आना। तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा केले बेचते हुए एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी। वैसे तो वे हमेशा “रामआसरे फ्रूट भण्डार” से फल लेते थे, पर आज उन्हें लगा कि क्यों न बुढ़िया से ही खरीद लूँ ? उन्होंने बुढ़िया से पूछा, “माई। केले कैसे दिए ? ” बुढ़िया बोली - बाबूजी! 20 रूपये दर्जन। शर्मा जी बोले - माई! 15 रुपये दूंगा। बुढ़िया ने कहा - 18 रुपये दे देना। दो पैसे मैं भी कमा लूंगी। शर्मा जी बोले - 15 रुपये लेने हैं तो बोल। बुझे चेहरे से बुढ़िया ने “न” में गर्दन हिला दी। शर्मा जी बिना कुछ कहे चल पड़े और ‘रामआसरे फ्रूट भण्डार’ पर आकर केले का भाव पूछा तो वह बोला - 28 रूपये दर्जन हैं। बाबूजी। कितने दर्जन दूँ ? शर्मा जी बोले - 5 साल से तुमसे ही फल ले रहा हूँ। ठीक भाव लगाओ। तो उसने सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा कर दिया। बोर्ड पर लिखा था - “मोल भाव करने वाले माफ़ करें”। शर्मा ...

जीवन बीमा

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 जीवन बीमा Image by kie-ker from Pixabay दो मित्र थे। बहुत परिश्रमी और सात्विक। अपने परिश्रम से दोनों एक दिन बड़े सेठ बन गए। दोनों ने बड़ा व्यवसाय खड़ा कर लिया। पहले सेठ ने अपनी सारी संपत्ति का बीमा करवा लिया। अब वह अपनी सम्पत्ति की सुरक्षा की ओर से निश्चिन्त हो गया था। उसने अपने मित्र को बार-बार यही परामर्श दिया कि वह भी अपनी सम्पत्ति का बीमा करवा ले। परन्तु दूसरे मित्र ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। दुर्भाग्य से एक दिन उनके गोदाम में आग लग गई। दोनों की सारी संपत्ति जल कर राख हो गई। पहले सेठ ने बीमा करवा रखा था इसलिये उसे सारी संपत्ति की कीमत वापिस मिल गई जबकि दूसरा मित्र निर्धन बन गया। मगर हाथ मलने के अतिरिक्त उसके पास कोई चारा नहीं बचा था। मनुष्य का यह जन्म भी सेठ की संपत्ति के समान है। हम सभी को मालूम है कि एक दिन इस शरीर को भस्म होना है मगर हम हैं कि जीवन के इस अटल सत्य को जानकर भी अनसुना कर देते हैं। हम इसका कभी बीमा नहीं करवाते। न सत्कर्म करते हैं, न धर्म के अभ्यास और वैराग्य द्वारा मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हैं, न योग मार्ग के पथिक बनते हैं, न ईश्वर का सा...

निंदा का फल

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 निंदा का फल Image by Pezibear from Pixabay एक बार की बात है। किसी राजा ने यह फैसला लिया कि वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा। एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध विषाक्त हो गया। उस ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए। राजा बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा। राजा परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगल में भक्ति करने के लिए चल पड़ा। ताकि इस पाप की माफ़ी मिल सके। रास्ते में एक गांव आया। राजा ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा कि क्या इस गांव में कोई भक्ति भाव वाला परिवार है ताकि उसके घर रात काटी जा सके ? चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन-भाई रहते हैं जो खूब बंदगी करते हैं। राजा उनके घर रात को ठहर गया। सुबह जब राजा उठा तो लड़की प्रभु-सिमरन के लिए बैठी हुई थी। इससे पहले लड़की का रूटीन था कि वह दिन निकलने से पहले ही भक्ति करके उठ जाती थी और नाश्ता तैयार करती थी। लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक सिमरन पर बैठी रही। जब लड़की सिमरन से उठी तो उसके भाई ने कहा कि बहन तूने इतनी देर लगा दी...

जड़भरत की कथा

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 जड़भरत की कथा Image by Bessi from Pixabay जड़भरत के पिता उन्हें पंडित बनाना चाहते थे, किंतु बहुत प्रयत्न करने पर भी वे एक भी श्लोक याद न कर सके। उनके पिता ने उन्हें जड़ समझ लिया। पिता की मृत्यु के पश्चात मां भी चल बसी। कुटुंब में रह गये भाई और भाभियां। वे जड़भरत के साथ बहुत बुरा व्यवहार करती थी। जड़भरत इधर-उधर मजदूरी करते थे। जो कुछ मिल जाता था, खा लिया करते थे और जहां जगह मिलती थी, सो जाया करते थे। वे सुख-दुःख और मान-सम्मान को एक समान समझते थे। भाईयों ने जब देखा कि उनके छोटे भाई के कारण उनकी अप्रतिष्ठा हो रही है, तो उन्होंने उन्हें खेती के काम में लगा दिया। जड़भरत रात-दिन खेतों की मेड़ों पर बैठकर खेतों की रखवाली करने लगे। वे शरीर से बहुत स्वस्थ और हट्टे-कट्टे थे। एक दिन राजा रहूगण पालकी पर बैठकर, आत्मज्ञान की शिक्षा लेने के लिए कपिल मुनि के पास जा रहे थे। मार्ग में पालकी के एक कहार की मृत्यु हो गई। राजा रहूगण ने अपने सेवकों से कहा कि वे कोई दूसरा कहार खोजकर लाएं। रहूगण के सेवक किसी दूसरे कहार की खोज में निकल पड़े। उनकी दृष्टि खेत की मेड़ पर बैठे हुए जड़भरत पर पड़...

भक्त की रक्षा

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 भक्त की रक्षा Image by Roman Grac from Pixabay एक गांव में कृष्णा बाई नाम की बुढ़िया रहती थी। वह भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त थी। वह एक झोपड़ी में रहती थी। कृष्णा बाई का वास्तविक नाम सुखिया था पर कृष्ण भक्ति के कारण इनका नाम गांव वालों ने कृष्णा बाई रख दिया। घर-घर में झाड़ू-पोछा, बर्तन साफ़ करना और खाना बनाना ही इनका काम था। कृष्णा बाई रोज़ फूलों की माला बनाकर दोनों समय श्री कृष्ण जी को पहनाती थी और घण्टों कान्हा से बात करती थी। गांव के लोग यही सोचते थे कि बुढ़िया पागल है। एक रात श्री कृष्ण जी ने अपनी भक्त कृष्णा बाई से यह कहा कि कल बहुत बड़ा भूचाल आने वाला है। तुम यह गांव छोड़ कर दूसरे गांव चली जाओ। अब क्या था! मालिक का आदेश था। कृष्णा बाई ने अपना सामान इकट्ठा करना शुरू किया और गांव वालों को बताया कि कल सपने में कान्हा आए थे और कह रहे थे कि इस गांव में प्रलय आने वाला है, तुम पास के गांव में चली जाओ। लोग कहाँ उस बूढ़ी पागल की बात मानने वाले थे। जो सुनता वही ज़ोर-ज़ोर से ठहाके लगाता। इतने में बाई ने एक बैलगाड़ी मंगाई, अपने कान्हा की मूर्ति ली और सामान की गठरी बांध क...

सच्ची लगन

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सच्ची लगन Image by Couleur from Pixabay एक शख्स सुबह सवेरे उठा, साफ़ कपड़े पहने और सत्संग-घर की तरफ चल दिया ताकि सत्संग का आनंद प्राप्त कर सके। चलते-चलते रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा। कपड़े कीचड़ से सन गए। वह वापिस घर आया। कपड़े बदलकर फिर सत्संग की तरफ रवाना हुआ। फिर ठीक उसी जगह ठोकर खा कर गिर पड़ा और वापस घर आकर कपड़े बदले और दोबारा सत्संग की तरफ रवाना हो गया। जब तीसरी बार उस जगह पर पहुंचा तो क्या देखता है कि एक शख्स चिराग हाथ में लिए खड़ा है और उसे अपने पीछे-पीछे चलने को कह रहा है। इस तरह वह शख्स उसे सत्संग घर के दरवाज़े तक ले आया। पहले वाले शख्स ने उससे कहा आप भी अंदर आकर सत्संग सुन लें, लेकिन वह शख्स चिराग हाथ मे थामे खड़ा रहा और सत्संग-घर में दाखिल नही हुआ। दो तीन बार इनकार करने पर उसने पूछा - आप अंदर क्यों नही आ रहे हैं ? दूसरे वाले शख्स ने जवाब दिया “इसलिए क्योंकि मैं काल हूँ।” यह सुनकर पहले वाले शख्स की हैरत का ठिकाना न रहा। काल ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - मैं ही था जिसने आपको ज़मीन पर गिराया था। जब आपने घर जाकर कपड़े बदले और दोबारा सत्संग घर की तरफ र...