जीवन में सुख चाहिए

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जीवन में सुख चाहिए

Image by Martin Winkler from Pixabay

एक व्यक्ति था। उसके पास नौकरी, घर-परिवार, रुपया-पैसा, रिश्तेदार और बच्चे सभी कुछ था। कहने का सार यह है उस व्यक्ति के पास किसी चीज़ की कोई कमी नही थी। अब जीवन है तो कुछ परेशानियां भी थी उसके जीवन में, जिससे वह हर-पल जूझता ही रहता था। वह किसी भी तरह अपनी परेशानियों से मुक्ति चाहता था ताकि जीवन में सुख-शांति से रह सके।

एक बार किसी ने उसे बताया कि नगर सीमा पर कोई बहुत बड़े संत ठहरे हुए है, जिनके पास हर समस्या और प्रश्न का हल है। इतना सुनते ही वह व्यक्ति भागा-भागा संत की कुटिया में पहुँचा। वहाँ भीड़ अधिक होने के कारण उसकी बारी आते-आते रात हो गई। उसने संत से पूछा - बाबा! मेरे जीवन की परेशानियां कैसे ख़त्म होंगी? मैं भी सुख-शांति से जीवन जीना चाहता हूँ। 

संत ने कहा, ”इसका उत्तर मैं कल सुबह दूंगा। तब तक तुम एक काम करो। मेरे साथ जो ऊँटों का रखवाला आया था, वह बीमार हो गया। तुम आज की रात ऊँटों की देखभाल का जिम्मा ले लो। जब यह सभी ऊँट सो जाएं, तब तुम भी सो लेना।

सुबह वह व्यक्ति संत के पास पहुँचा और कहने लगा - मैं तो रात भर जगा रहा, सो ही नहीं पाया। कभी कोई ऊँट खड़ा हो जाता है तो कभी कोई। एक को बिठाने का प्रयास करता हूँ तो दूसरा खड़ा हो जाता है। कई ऊँट तो बैठना ही नहीं चाहते और कई ऊँट थोड़ी देर में अपने आप बैठ जाते हैं। कुछ ऊँटों ने तो बैठने में बहुत समय लिया। मैं तो सारी रात भाग-दौड़ ही करता रहा।

संत ने मुस्कुराहट के साथ कहा - यही तुम्हारे कल के प्रश्नों का उत्तर है। कल पूरी रात का घटनाक्रम ही तुम्हारा जीवन है। अगर ऊँटों को परेशानियां मान ली जाएं, तो समझना आसान होगा कि जीवन में कभी भी किसी भी क्षण सारी परेशानियां ख़त्म नही हो सकती। कुछ न कुछ हमेशा लगा ही रहेगा, लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि हम जीवन का आनंद ही न लें। हमें समस्याओं के बीच रहते हुए भी सुख के पल खोजने होंगे।

संत ने आगे कहा - अगर तुम्हारे जीवन में समस्याओं का ताँता लगा हुआ है तो उन्हें सुलझाने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन हर पल उनके पीछे ही नहीं भागना चाहिए। ऊँटों के व्यवहार से तुम जान गए होंगे कि कुछ समस्याएं कोशिशों से ख़त्म हो जाती हैं, तो कुछ अपने आप सुलझ जाती हैं, कुछ का जीवन पर कोई असर नहीं होगा और कुछ समय के साथ धीरे-धीरे सुलझ जाएंगी।

लेकिन इस बीच कुछ नई समस्याएं भी जन्म लेंगी, जिनका सामना भी ऐसे ही करना पड़ेगा और इसी तरह जीवन चलता ही रहेगा। अब यह तुम पर निर्भर करता है कि तुम इस बीच जीवन में आनंद लेते हो या समस्याओं के पीछे हैरान-परेशान व दुखी होकर भागते रहते हो।


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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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