समृद्ध बनाने का पवित्र मंत्र

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समृद्ध बनाने का पवित्र मंत्र

Photo by Francesco Ungaro from Pexels

एक गरीब औरत एक साधु के पास गई, “स्वामी जी! कोई ऐसा पवित्र मन्त्र लिख दीजिये जिससे मेरे बच्चों का रात को भूख से रोना बन्द हो जाये।”

साधु ने कुछ पल एकटक आकाश की ओर देखा फिर अपनी कुटिया में अन्दर गया और एक पीले कपड़े पर एक मन्त्र लिखकर उसे ताबीज की तरह लपेट-बाँधकर उस महिला को दे दिया।

साधु ने कहा, “इस मन्त्र को घर में उस जगह रखना, जहाँ अपनी नेक कमाई का धन रखती हो।” महिला खुश होकर चली गई।

ईश्वर की कृपा से उस दिन उसके पति की आमदनी ठीक हुई और बच्चों को भोजन मिल गया। रात शान्ति से कट गई। अगले रोज़ भोर में ही उन्हें पैसों से भरी एक थैली घर के आंगन में मिली। थैली में धन के अलावा एक पर्चा भी निकला, जिस पर लिखा था, कोई कारोबार कर लें।

इस बात पर अमल करते हुए उस औरत के पति ने एक छोटी सी दुकान किराए पर ले ली और काम शुरू किया। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा, तो दुकानें भी बढ़ती गई। जैसे पैसों की बारिश सी होने लगी।

पति की कमाई तिजोरी में रखते समय एक दिन उस महिला की नज़र उस मन्त्र लिखे कपड़े पर पड़ी। “न जाने, साधु महाराज ने ऐसा कौन सा मन्त्र लिखा था कि हमारी सारी गरीबी दूर हो गई?” सोचते-सोचते उसने वह मन्त्र वाला कपड़ा खोल डाला।

लिखा था -

जब पैसों की तंगी ख़त्म हो जाये, तो सारा पैसा तिजोरी में छिपा कर रखने की बजाय कुछ पैसे ऐसे घर में डाल देना जहाँ से रात को बच्चों के रोने की आवाज़ें आती हों!!

शायद साधु महाराज उनके पास आने वाले हर दुःखी व्यक्ति को यही मंत्र देते थे, जो स्वयं अमीर बनने के बाद औरों के दुःख दूर करने में लग जाता होगा।

आपको ज्ञात होगा कि अग्रोहा के महाराजा अग्रसेन के राज्य में आने वाले हर नए व्यक्ति को वहाँ रहने के लिए प्रत्येक निवासी एक रुपया और एक ईंट देता था ताकि वह अपना मकान बना सके और अपना व्यवसाय चला सके।

सभी को समृद्ध बनाने का यही पवित्र मंत्र है।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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