लक्ष्य
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लक्ष्य
Image by bess.hamiti@gmail.com from Pixabay
एक लड़के ने एक बार एक बहुत ही धनवान व्यक्ति को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया। वह धन कमाने के लिए कई दिनों तक मेहनत करके धन कमाने के पीछे पड़ा रहा और बहुत सारा पैसा कमा लिया।
इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हो गई। विद्वान के सम्मान और ऐश्वर्य को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया और अब उसने विद्वान बनने का निश्चय कर लिया और अगले ही दिन से धन कमाने को छोड़कर पढने-लिखने में लग गया।
वह अभी अक्षर ज्ञान ही सीख पाया था, कि इसी बीच उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ से हो गई। उसको संगीत में अधिक आकर्षण दिखाई दिया, इसीलिए उसी दिन से उसने पढ़ाई बंद कर दी और संगीत सीखने में लग गया।
इसी तरह काफी उम्र बीत गई, न वह धनी हो सका, न विद्वान और न ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ।
एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत बड़े महात्मा से हुई। उसने महात्मा को अपने दुःख का कारण बताया। महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई न कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जी जान जगा कर उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनिया के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रुचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर पाओगे और कोई लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकोगे।”
युवक महात्मा की बात को समझ गया और एक लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा।
सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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