जैसे को तैसा

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जैसे को तैसा

Image by Petra from Pixabay

एक बार बड़ी कंपनी के अंदर एक कर्मचारी से एक छोटी-सी गलती हो गई। उस गलती की वजह से कंपनी का थोड़ा सा नुकसान भी हुआ। नुकसान होने की वजह से कंपनी का मालिक मैनेजर पर चिल्लाया। सब के सामने मालिक ने मैनेजर की ऐसी की तैसी कर दी। इस बात का मैनेजर को बहुत ज्यादा गुस्सा आया। मैनेजर गुस्से से लाल-पीला हो गया। मैनेजर सीधा उस कर्मचारी के पास गया जिसने ये गलती की थी।

वहाँ जाकर मैनेजर उस कर्मचारी को सबके सामने एक खींच के झापड़ लगाता है। सब ये देख कर हक्के-बक्के रह गए। कर्मचारी बेचारा करता तो क्या करता? उसको भी बहुत गुस्सा आया। उसने घर जाकर अपना गुस्सा अपनी पत्नी पर निकाला। कुछ बात होने पर उसने अपनी पत्नी को खींच कर रैपटा मारा। इस बात का पत्नी को भी बहुत गुस्सा आया। 

अपने पति के सामने तो कुछ कर नहीं सकती थी। इसलिए उसने अपना गुस्सा अपने बड़े बेटे के ऊपर निकाला। बड़े बेटे ने अपने छोटे भाई के ऊपर गुस्सा निकाला। अब छोटा बच्चा करता तो क्या करता? उसने अपने खिलौने पर गुस्सा निकाला और उसे ज़ोर से सड़क पर फेंक दिया। वह खिलौना सड़क पर चल रहे कुत्ते को लगा। कुत्ता चोट लगने के कारण इधर-उधर भागने लगा और उसने बीच रास्ते पर चल रहे एक इंसान को काट लिया। वह इंसान था वही मैनेजर, जिसने कर्मचारी को सबके सामने झापड़ मारा था।

हो गया न जैसे को तैसा!

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हम जैसा करेंगे वैसा ही हमें फल मिलेगा, चाहे देर से या सवेर से।

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 सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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