स्त्रियों का सम्मान करें
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स्त्रियों का सम्मान करें
Image by David Mark from Pixabay
क्या आप ऐसा मानते हैं कि स्त्रियों में भी आत्मा होती है?
और क्या आप ऐसा भी मानते हैं कि दुःख-सुख का अनुभव करने की जैसी भावना पुरुषों में होती है, वैसी ही स्त्रियों में भी होती है?
यदि हाँ, तो ज़रा विचार करें कि जब पुरुष लोग सम्मान चाहते हैं तो क्या स्त्रियाँ सम्मान नहीं चाहेंगी? देखने में तो यही आता है कि जैसे पुरुष सुख चाहते हैं वैसे ही स्त्रियाँ भी सुख चाहती हैं। जैसे पुरुष दुःख नहीं चाहते, ऐसे ही स्त्रियाँ भी दुःख नहीं चाहती।
इस व्यवहार से यह पता चलता है कि पुरुषों और स्त्रियों में एक जैसी ही आत्मा होती है। बल्कि पशु-पक्षी आदि सभी प्राणियों में एक जैसी ही आत्मा होती है, क्योंकि वे सब प्राणी भी सुख ही चाहते हैं। दुःख तो कोई भी नहीं चाहता। अस्तु।
जब पुरुष लोग विवाह कर लेते हैं, तब विवाह से पूर्व तो वे स्त्रियों का बहुत सम्मान करते हैं, परंतु विवाह करने के बाद वह बात नहीं रहती। फिर तो वे स्त्रियों को अपनी संपत्ति समझ कर उनके साथ चाहे जैसा व्यवहार करने लगते हैं। ऐसा करना उचित नहीं है।
विवाह के बाद स्त्रियाँ, पुरुषों को अपनी संपत्ति समझ कर, यदि उनके साथ मनमाना व्यवहार करें, तो क्या पुरुषों को यह स्वीकार होगा? यदि नहीं, तो स्त्रियों को भी यह स्वीकार नहीं है। फिर स्त्रियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार क्यों?
इसलिए सब लोग मानवता के धर्म का पालन करें। स्त्री और पुरुष दोनों ही मनुष्य हैं। दोनों को एक दूसरे के सम्मान और इच्छाओं का ध्यान रखना चाहिए। एक दूसरे को सुख देना चाहिए। कोई भी किसी पर अन्याय या अत्याचार न करे तथा ईश्वर के दंड का पात्र न बने।
भारत में स्त्रियों को देवी के रूप में पूजा जाता है।
कहा भी है -
यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते, रमन्ते तत्र देवता।
जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं।
और यह तो सभी को ज्ञात है कि देवता हमेशा स्वर्ग में निवास करते हैं।
इस उक्ति का तात्पर्य यही है कि जहाँ स्त्रियों का सम्मान किया जाता है, वहाँ का वातावरण स्वर्ग के समान आनन्ददायक व सुखवर्धक हो जाता है।
यदि आप भी अपने घर-परिवार में ख़ुशी का माहौल देखना चाहते हैं, तो स्त्रियों को सदा मान-सम्मान की दृष्टि से देखें और बदले में आपको भी भरपूर सम्मान व प्रेम मिलेगा।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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