आराम ही तो करना है
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आराम ही तो करना है
Image by Светлана Бердник from Pixabay
“माँ! मुझे थोड़ा आराम करना है -" स्कूल, क्लास और पढ़ाई से थक कर बेटी ने माँ से कहा।
“अरी बिटिया! अच्छी पढ़ाई कर ले, बाद में आराम ही तो करना है!”
बिटिया उठी, पढ़ने बैठी और फिर आराम करना तो रह ही गया।
“माँ! मुझे थोड़ा समय दो, दो घड़ी आराम कर लूँ, मैं थक गई हूँ”, ऑफिस से थक कर आयी बिटिया ने कहा।
“अरी! शादी कर ले और सैटल हो जा, फिर आराम ही करना है।”
बिटिया शादी के लिए तैयार हो गई और आराम करना तो रह ही गया।
“अरे! इतनी क्या जल्दी है - एकाध साल रुकते हैं न!”
“अरी! समय के साथ बच्चे हो जायें तो टेंशन नहीं, फिर आराम ही आराम है।”
बिटिया माँ बन गई और आराम करना तो रह ही गया।
“तुम माँ हो, तुम्हें ही बच्चे के साथ जागना पड़ेगा, मुझे तो सुबह ऑफिस जाना है। बस थोड़े दिन! बच्चे बड़े हो जाएँ, फिर आराम ही आराम है।”
वह बच्चों के लिए कई रातें जागी और आराम करना तो रह ही गया।
“सुनो जी, बच्चे अब स्कूल जाने लगे हैं, अब तो दो घड़ी बैठने दो आराम से।”
“बच्चों की तरफ ध्यान दो। उनको पढ़ा लो, फिर आराम ही आराम है।”
बच्चों का प्रोजेक्ट बनाने बैठी और आराम करना तो रह ही गया।
“बच्चे पढ़-लिख कर अपने पैरों पर खड़े हो गए। अब कुछ आराम कर लूँ।”
“अब बच्चों की शादी करनी है। ये जिम्मेवारी पार पड़े तो फिर आराम ही आराम है।”
उसने हिम्मत जुटाई। बच्चों की शादी का काम निपटाया और फिर आराम करना तो रह ही गया।
“बच्चों का अपना संसार चलने लगा। अब मैं ज़रा आराम कर लूँ।”
“अरी! अब अपनी बिटिया माँ बनने वाली है। पहला बच्चा मायके में होगा न! चलो तैयारी करें।”
हमारी बिटिया की भी डिलीवरी हो गई, बहू की भी और आराम करना रह ही गया।
“चलो। ये जिम्मेदारियाँ भी पूरी हुई। अब आराम....”
“माँ जी! मुझे नौकरी पर वापस जाना होगा, तो आप आरव को सम्भाल लेंगी न?”
पोते के पीछे दौड़ते-दौड़ते थक गई और आराम करना रह ही गया।
“चलो! पोता भी बड़ा हो गया। अब सारी जिम्मेदारियाँ खत्म। अब मैं आराम करूँगी।”
“अरी! सुनती हो, घुटने दुःख रहे हैं मेरे। मुझसे उठा नहीं जा रहा। बी.पी. भी बढ़ गया है शायद? डायबिटीज़ है सो अलग। डॉक्टर ने परहेज़ करने को कहा है।”
पति की सेवा में बचा-खुचा जीवन गुज़र गया…. और ….आराम करना तो रह ही गया।
एक दिन भगवान खुद धरती पर आए और कहा - “आराम करना है न तुझे?”
उसने हाथ जोड़े और भगवान उसे अपने साथ ले गए। आखिरकार उसे आराम मिल ही गया।
हमेशा के लिए!!!
कहानी घर-घर की!!
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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