अनोखा दोस्त

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अनोखा दोस्त

Image by -Rita-👩‍🍳 und 📷 mit ❤ from Pixabay

एक कौए और एक किसान में अनोखी दोस्ती थी। कौआ उस किसान के घर के आँगन के पेड़ पर रहता था। किसान रोज़ सुबह उसे खाने के लिए पहले कुछ देकर बाद में खुद खाता था। किसान के खेत में चले जाने के बाद कौआ रोज़ उड़ते-उड़ते ब्रह्मा जी के दरबार तक पहुँचता था और दरबार के बाहर जो नीम का पेड़ था, उस पर बैठकर ब्रह्मा जी की सारी बातें सुना करता था। शाम होते ही कौआ उड़ता हुआ किसान के पास पहुँचता और ब्रह्मा जी के दरबार की सारी बातें उसे सुनाया करता था।

एक दिन कौए ने सुना कि ब्रह्मा जी कह रहे हैं कि इस साल बारिश नहीं होगी, अकाल पड़ जायेगा। उसके बाद ब्रह्मा जी ने कहा - “पर पहाड़ों में खूब बारिश होगी।”

शाम होते ही कौआ किसान के पास आया और उससे कहा - “इस साल बारिश नहीं होगी। अभी से सोचो क्या किया जाये।”

किसान ने खूब चिन्तित होकर कहा - “तुम ही बताओ दोस्त! क्या किया जाये?”

कौए ने कहा - “ब्रह्मा जी ने कहा था कि पहाड़ों में ख़ूब बारिश होगी। क्यों न तुम पहाड़ पर खेती की तैयारी करना शुरु करो?”

किसान ने उसी वक्त पहाड़ पर खेती की तैयारी की। आस-पास के लोग उस पर हँसने लगे। उसे बेवकूफ कहने लगे। उसने कहा - “तुम सब भी यही करो। कौआ मेरा दोस्त है। वह मुझे हमेशा सही रास्ता दिखाता है।” पर लोगों ने उसकी बात नहीं मानी। उस पर और ज्यादा हँसने लगे। उस साल बहुत ही भयंकर सूखा पड़ा। वह किसान ही अकेला किसान था, जिसके पास ढेर सारा अनाज इकट्ठा हो गया।

देखते ही देखते साल बीत गया। इस बार कौए ने कहा - “ब्रह्मा जी का कहना था कि इस साल बारिश होगी। खूब फसल होगी। पर फसल के साथ-साथ ढेर सारे कीड़े पैदा होंगे और वे सारी फसल को चौपट कर देंगे।”

इस बार कौए ने किसान से कहा - “इस बार पहले से ही तुम मैना पंछी और छछूंदरों को ले आना ताकि वे कीड़ों को खा जायें।”

किसान ढेर सारे छछूंदरों को ले आया। मैना और अन्य पंछियों को ले आया। आसपास के लोग उसे ध्यान से देखने लगे, पर इस बार वे किसान पर हंसे नहीं।

इस साल भी किसान ने अपने घर में ढेर सारा अनाज इकट्ठा किया।

इसके बाद कौआ फिर से ब्रह्मा जी के दरबार के बाहर नीम के पेड़ पर बैठा हुआ था जब ब्रह्मा जी कह रहे थे - “फसल खूब होगी पर ढेर सारे चूहे फसल पर टूट पड़ेंगे।”

कौए ने किसान से कहा - “इस बार तुम्हें बिल्लियों को न्योता देना पड़ेगा - एक नहीं, दो नहीं, ढेर सारी बिल्लियाँ।”

इस बार आस-पास के लोग भी बिल्लियों को ले आये।

इस तरह पूरे गाँव में ढेर सारा अनाज इकट्ठा हो गया।

उनके अनोखे दोस्त कौए ने सबकी जान बचाई। अब वह सबका प्यारा दोस्त बन गया।

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 सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


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