अंत समय
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अंत समय
Image by donations welcome from Pixabay
एक साधक ने नम्रतापूर्वक गुरु से प्रश्न पूछा - हे नाथ! हे मेरे प्यारे गुरुवर! यदि अंत समय में भगवान याद न आये तो क्या होगा? मेरा कहाँ, किस योनि में जन्म होगा? कृपा कर बताइये। गुरु भगवान जी ने प्रेम भरी वाणी में समझाया - वत्स! गीता जी में भगवान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन से कहा है -
हे पार्थ! जो मेरे मार्ग में आ गया, उसका तो कल्याण ही कल्याण है और कल्याण के मार्ग पर सदा प्राणी का हित ही हित है। अन्त समय में यदि तुझे किसी कारण से मेरी याद न आई तो तेरे अभ्यास के बल से मैं तुझे अपनी याद दिला दूँगा और मैं ही तुझे लेने भी आऊँगा। तू नाम सिमरन करने का अभ्यास तो कर।
हे पार्थ! अभ्यास करने का सरल तरीका है कि अपना हर कर्म मेरे समर्पित हो कर किया कर। मुझे हर पल याद रख। तू बस मेरी शरण में आ जा। शरणागत होकर पूर्णतया समर्पित हो जा।
हे पार्थ! सब यज्ञों में जप यज्ञ मैं हूँ। तू नामजप कर। बार-बार कर। नियम से कर और जब अभ्यास होगा, तभी मेरी याद बनी रहेगी। अभ्यास होगा तो मैं अवश्य आऊँगा।
आओ, हम सब भी प्रार्थना करें - हे नाथ! आप मुझे सदैव याद रहें। आप मुझे प्यारे लगें। आप मुझे मीठे लगें। मैं आपका हूँ और आप मेरे हैं।
गुरु भगवान जी के कितने शुक्राने हैं कि उन्होंने जप माला दे कर हमें प्रभु के साथ एक डोरी में बाँध दिया है। जैसे-जैसे हम माला जपते जाते हैं, प्रभु के और नज़दीक होते जाते हैं। गुरु भगवान जी के अनंत-अनंत शुक्राने हैं।
राधे राधे!!
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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