हथौड़ा और चाबी

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हथौड़ा और चाबी

Image by Bruno from Pixabay

नैतिक शिक्षा देती है यह हिंदी कहानी।

शहर की तंग गलियों के बीच एक पुरानी ताले की दुकान थी। लोग वहाँ से ताला-चाबी खरीदते और कभी-कभी चाबी खोने पर डुप्लीकेट चाबी बनवाने भी आते। ताले वाले की दुकान में एक भारी-भरकम हथौड़ा भी था, जो कभी-कभार ताले तोड़ने के काम आता था।

हथौड़ा अक्सर सोचा करता कि आखिर इन छोटी-छोटी चाबियों में कौन-सी खूबी है, जो इतने मजबूत तालों को भी चुटकियों में खोल देती हैं; जबकि मुझे इसके लिए कितने प्रहार करने पड़ते हैं?

एक दिन उससे रहा नहीं गया और दुकान बंद होने के बाद उसने एक नन्ही चाबी से पूछा - बहन! ये बताओ कि आखिर तुम्हारे अन्दर ऐसी कौन सी शक्ति है जो तुम इतने जिद्दी तालों को भी बहुत आसानी से खोल देती हो; जबकि मैं इतना बलशाली होते हुए भी ऐसा नहीं कर पाता?

चाबी मुस्कुराई और बोली - दरअसल तुम तालों को खोलने के लिए बल का प्रयोग करते हो। उनके ऊपर प्रहार करते हो और ऐसा करने से ताला खुलता नहीं अपितु टूट जाता है। जबकि मैं ताले को बिलकुल भी चोट नहीं पहुँचाती, बल्कि मैं तो उसके मन में उतर कर उसके हृदय को स्पर्श करती हूँ और उसके दिल में अपनी जगह बनाती हूँ। इसके बाद जैसे ही मैं उससे खुलने का निवेदन करती हूँ, वह फ़ौरन खुल जाता है।

दोस्तों! मनुष्य-जीवन में भी ऐसा ही कुछ होता है। यदि हम किसी को सचमुच जीतना चाहते हैं, अपना बनाना चाहते हैं तो हमें उस व्यक्ति के हृदय में उतरना होगा। जोर-जबरदस्ती या बलपूर्वक किसी से कोई काम कराना संभव तो है, पर इस तरह से हम ताले को खोलते नहीं बल्कि उसे तोड़ देते हैं। यानि उस व्यक्ति की उपयोगिता को नष्ट कर देते हैं। जबकि प्रेमपूर्वक किसी का दिल जीत कर हम सदा के लिए उसे अपना मित्र बना लेते हैं और उसकी उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देते हैं।

इस बात को हमेशा याद रखिये -

हर एक चीज जो बल से प्राप्त की जा सकती है, उसे प्रेम से भी पाया जा सकता है, लेकिन हर एक चीज़ जिसे प्रेम से पाया जा सकता है उसे बल से नहीं प्राप्त किया जा सकता।

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 सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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