प्रार्थना

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प्रार्थना

Image by Joe from Pixabay

एक रेस्टोरेंट में कई बार मैंने देखा कि एक व्यक्ति आता है और भीड़ का लाभ उठाकर नाश्ता कर चुपके से बिना पैसे दिए निकल जाता है।

एक दिन जब वह खा रहा था तो मैंने चुपके से दुकान के मालिक को बताया कि यह भाई भीड़ का लाभ उठाएगा और बिना बिल चुकाए निकल जाएगा।

मेरी बात सुनकर रेस्टोरेंट का मालिक मुस्कुराते हुए बोला - उसे बिना कुछ कहे जाने दो, हम इसके बारे में बाद में बात करेंगे।

हमेशा की तरह भाई ने नाश्ता करके इधर-उधर देखा और भीड़ का लाभ उठाकर चुपचाप चला गया।

उसके जाने के बाद मैंने रेस्टोरेंट के मालिक से पूछा - मुझे बताओ कि आपने उस व्यक्ति को क्यों जाने दिया?

रेस्टोरेंट के मालिक द्वारा दिया गया जवाब -

आप अकेले नहीं हो, कई भाइयों ने उसे देखा है और मुझे उसके बारे में बताया है। वह रेस्टोरेंट के सामने बैठता है और जब देखता है कि भीड़ है, तो वह चुपके से खाना खा लेता है। मैंने हमेशा इसे नज़रअंदाज़ किया और कभी उसे रोका नहीं, उसे कभी पकड़ा नहीं और न ही कभी उसका अपमान करने की कोशिश की, क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी दुकान में भीड़ इस भाई की प्रार्थना की वजह से है।

वह मेरे रेस्टोरेंट के सामने बैठे हुए प्रार्थना करता है कि जल्दी इस रेस्टोरेंट में भीड़ हो तो मैं जल्दी से अंदर जा सकूँ, खा सकूँ और निकल सकूँ।

और निश्चित रूप से जब वह अंदर आता है तो हमेशा भीड़ होती है। तो ये भीड़ भी शायद उसकी “प्रार्थना” से ही है।

शायद इसीलिए कहते हैं कि मत करो घमंड इतना कि मैं तुम्हें खिला रहा हूँ...।

क्या पता तुम खुद किसके भाग्य का खा रहे हो...?

--

 सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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