न्यूटन

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न्यूटन

Image by Ralph from Pixabay

न्यूटन एक महान प्रतिभाशाली वैज्ञानिक थे। उन्होंने केवल 22 वर्ष की अवस्था में ही बीजगणित के द्विपद सिद्धांत का आविष्कार किया था और बाद में सूर्य की किरणों में सात रंग क्यों हैं, समुद्र में ज्वार-भाटा क्यों आता है, सूर्य और चन्द्र क्षीण कैसे हो जाते हैं तथा फिर पूर्ण कैसे होते हैं, इन सब प्रश्नों का गंभीरतापूर्वक अध्ययन करके गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत का आविष्कार किया था।

उनके चिंतन एवं विद्वत्ता पर आज भी समस्त यूरोप को गर्व है। उन्हीं महान् वैज्ञानिक के पास एक बार एक महिला आई और आंतरिक सत्यता पूर्वक उनकी प्रतिभा और ज्ञान की प्रशंसा करने लगी।

महिला द्वारा की गई प्रशंसा को सुनकर न्यूटन ने चकित होकर कहा - बहिन! तुम क्या कह रही हो? मैं तो उस बालक के समान हूँ जो कि सत्य के विशाल समुद्र के किनारे पर बैठा हुआ केवल कंकर ही बीनता रहता है। ज्ञान के असीम सागर में तो मैंने अभी तक प्रवेश ही नहीं किया है।

आगंतुक महिला महा-विद्वान न्यूटन की विनम्रता देखकर बहुत चकित हुई और स्वयं भी उनके साथ खोजकार्य में लग गई।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


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