सरप्राइज

👼👼💧💧👼💧💧👼👼

सरप्राइज

Image by free stock photos from www.picjumbo.com from Pixabay

मोहन बाबू ने कमरे में घुसते ही कहा - सरप्राइज....सरप्राइज....।

‘क्या सरप्राइज है पापा?’, सुमित उत्सुकता से बोला।

‘सुमित और तान्या, ये लो बगल वाली सोसायटी में 2 बी.एच.के. फ्लैट तुम्हारे लिये।’

‘व्हाट....? ये आप क्या कह रहे हैं पापा? हमारे लिए अलग से फ्लैट....? हम यहाँ खुश हैं, पापा! क्यों तान्या?’

‘हां पापा....सुमित सही कह रहा है, मुझे यहाँ कोई दिक्कत नहीं है’, तान्या बोली।

इससे पहले मोहनबाबू कुछ बोलें, सुमित बीच में बोल पड़ा, ‘और पापा! हर माँ-बाप चाहते हैं कि उनकी औलाद उनके पास रहे, तो आपकी ये अलग फ्लैट वाली बात....? और इतने पैसे कहां से आए आपके पास?’

‘बेटा! बात ऐसी है, तुम्हारी शादी के लिए बहुत कुछ जोड़कर रखा था, तुम हमारे इकलौते बेटे जो ठहरे। बड़े अरमान थे - यह करूँगा, वह करूँगा। सब धरे के धरे रह गए, क्योंकि तुमने लव मैरिज जो कर ली। तो शादी के तामझाम में होने वाला मेरा खर्चा बच गया, तो उसी से तुम दोनों के लिए एक फ्लैट....। तुम दोनों कमाते हो, दोनों सुबह ऑफिस निकल जाते हो, ई.एम.आई. है कुछ सालों की, भर दिया करना और कल को बच्चे होंगे, तो उनके भविष्य के लिए अपना मकान होना बड़ी बात होगी। लो संभालो पेपर्स।’

कहकर मोहनबाबू ने पेपर्स सुमित और तान्या को दे दिए।

आखिर दोनों ने पहले तो ना नुकुर की, मगर जब मोहनबाबू जिद पर अड़े रहे, तो अलग फ्लैट में रहने के लिए राजी हो गए, अपना सामान लिए बगल वाली सोसायटी में शिफ्ट हो गए।

उसी रात सुधा ने मोहनबाबू से पूछा - ‘एक बात पूछूं....?’

‘हां, पूछो न सुधा।’

‘ये अलग फ्लैट दिलाने की....मेरा मतलब आपको तो सुमित की पसंद भी स्वीकार थी, फिर तान्या को अपने से दूर करने की बात....मुझे कुछ अटपटी सी लग रही है।’

‘सुधा....अटपटी-सी बात जरूर है, मगर बात बहुत गहरी है। जानती हो सुधा, बचपन से तुमने सुमित की हर तमन्नाओं को, गैर जरूरी इच्छाओं को हर बार पूरा किया मेरे मना करने के बावजूद। इससे वह थोड़ा अड़ियल, जिद्दी-सा हो गया था, अपनी मनमर्जी करना, यहाँ तक कि उसने हमारे बिना पूछे, हमारे बिना देखे एक अलग ही समाज की लड़की से गुपचुप शादी तक कर ली। बच्चे बड़े होकर अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेते हैं, ठीक है मगर क्या हम दोनों उसके दुश्मन थे जो हमें बताना भी मुनासिब नहीं समझा? खैर! मैं उसका यहाँ भी बचपना समझकर चुप कर गया, बहू को स्वीकार किया, बेटी की तरह मान दिया।

मगर उसने यहाँ आकर हमें अपनाया नहीं न! बल्कि वह तुम्हें और मुझे एक सर्वेंट समझने लगी थी। स्वयं से कभी चाय नहीं बनाकर पिलाई, ऑफिस जाते समय मम्मी आज राजमा, चावल, आलू गोभी....कभी ये कभी वह बना लेना....और वह नालायक सुमित....उसे भी शायद हम दोनों नौकर ही लगने लगे थे....।

मुझे तो आदत है बाहर से सामान वगैरह लेकर आने की मगर तुम्हें....अब हम बूढ़े हो रहे हैं सुधा और बुढ़ापे में हर माँ-बाप अपने बेटे-बहुओं से उम्मीद करते हैं, वह उनके लिए जियें, उनके साथ जियें। यहाँ तो तुम्हारे साथ जरा-सा नमक तेज होने पर बदतमीजी होने लगी थी। उस दिन टी.वी. देखते हुए अचानक तान्या ने टी.वी. बंद कर दिया था, बिजली बिल बढ़ जाएगा कहकर। अरे अपने घर में अपने टी.वी. पर मनपसंद प्रोग्राम नहीं देख सकते क्या हम? मुझे तुम्हारे लिए बहुत बुरा लगा था। मैंने उसे समझाया तो बोली - घर-खर्च हम चलाते हैं, बजट बनाकर चलना होगा।

तुम और मैं, हमारे लिए तो हमारी पेंशन ही काफी है और साथ वाला कमरा किराए पर दे देने से हमें एक्स्ट्रा इनकम भी हो जाएगी और उसमें रहने वाले परिवार का साथ भी, जिस पर वे दोनों रहकर अपना हक जमा रहे हैं। देखो! अब ऐसे तो वह यहाँ से जाते नहीं, तो मैंने ये फ्लैट वाली स्कीम खेली। दोनों लालच में चले गए। अब भरेंगे हर महीने ई.एम.आई., वहाँ का बिजली बिल, मेंटेनेंस वगैरह। स्वयं बनाकर खाएंगे या होटलों से मंगवा कर, तब पता चलेगा माँ-बाप क्या होते हैं? उनके होने न होने का फर्क....।’

‘मगर....ये सब करना जरुरी था क्या?’

‘सुधा....जब मरीज डायबिटीज का हो तो उसे करेले का जूस देकर ठीक किया जाता है, मीठी-मीठी जलेबी नहीं देते और वैसे भी कहीं दूर नहीं भेजा उन्हें। पास की सोसायटी में रहेंगे तो हम उनके आसपास ही तो रहेंगे। कल यदि वह अपनी गलतियों से सीखकर हमारे साथ रहना चाहेंगे, तो कुछ शर्तों के साथ उन्हें साथ में भी रख लेंगे।’

‘और यदि वे अपने स्वभाव में बदलाव नहीं करते तो....’, सुधा जी ने प्रश्न दागते हुए कहा।

‘तो....हम दोनों तो हैं न। पहले भी थे, आज भी हैं। साथ खाएंगे, साथ रहेंगे, मगर स्वाभिमान के साथ।’

इस बार सुधा जी भी मोहनबाबू के साथ-साथ मुस्कुरा उठी।

--

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद।

Comments

Popular posts from this blog

ईश्वर की कृपा

समर्पण भाव होना चाहिए

समस्या का सामना

चरणों की धूल

आधे रास्ते को मंजिल न समझें

एक बुढ़िया की रोचक कहानी

Y for Yourself

जो चाहोगे सो पाओगे

राजा मोरध्वज

जहाँ प्रेम वहीं ईश्वर