हंसमुख डॉक्टर
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हंसमुख डॉक्टर
Image by Susann Mielke from Pixabay
एक हंसमुख डॉक्टर बहुत ही होशियार थे। उनके बारे में यह कहा जाता था कि वह मौत के मुंह में से भी बीमार को वापस ले आते थे।
डॉक्टर के पास जो भी मरीज आता, वह उससे एक फॉर्म भरवाते थे।
मरीज से यह पूछते कि आप इस फार्म में लिखें कि यदि आप बच गए तो किस तरह से बाकी जिंदगी जियेंगे और आपके जीवन में क्या करना शेष रह गया है, जो आप करना चाहेंगे?
सभी मरीज अपने मन की बात लिखते।
अगर मैं बच गया तो अपने परिवार के साथ अपना समय बिताउंगा।
मैं अपने पुत्र और पुत्री की संतानों के साथ जी भर कर खेलूंगा।
मैंने अपने पति और उनके माता-पिता का बहुत दिल दुखाया है, ऑपरेशन के बाद मैं उन सबसे माफी मांगूंगी और उनके साथ हंसी-खुशी मिलकर रहूँगी।
किसी ने जी भर कर पर्यटन, घूमने का शौक पूरा करने का लिखा।
किसी ने तो यह भी लिखा कि मेरे द्वारा जिंदगी में यदि किसी को ठेस पहुंची है तो मैं उससे माफी मागूँगा।
किसी ने लिखा कि मैं अपनी जिंदगी में हँसी की मात्रा बढ़ा दूंगा।
जिंदगी में किसी से भी शिकायत नहीं करूँगा और न किसी को शिकायत का मौका दूंगा। किसी का भी मन न दुखे, ऐसा काम करूँगा।
बहुत से लोगों ने तरह-तरह की बातें लिखी।
डॉक्टर ऑपरेशन करने के बाद जब मरीज को छुट्टी देते, तब वह लिखा हुआ फार्म उन्हें वापस कर देते थे।
मरीज से कहते कि आपने जो फॉर्म में लिखा है वह आप अपनी जिंदगी में कितना पूरा कर पा रहे हैं, उस पर निशान लगाते जाएं। वापस आएं और मुझे बताएं कि आपने इसमें से किस तरह की जिंदगी जी है।
डॉक्टर ने कहा कि एक भी व्यक्ति ने ऐसा नहीं लिखा कि अगर मैं बच गया तो मुझे किसी से बदला लेना है।
अपने दुश्मन को खत्म कर दूंगा।
मुझे बहुत धन कमाना है।
अपने आपको बहुत व्यस्त रखना है।
सबसे हंस-बोल कर रहना है।
प्रत्येक का जीवन जीने का नजरिया अपना-अलग था।
डॉक्टर ने प्रश्न किया कि जब आप स्वस्थ थे, तब आपने इस तरह का जीवन क्यों नहीं जिया, आप को कौन रोक रहा था?
अभी कौन सी देर हो गई है?
कुछ क्षण अपने जीवन के बारे में चिंतन-मनन करें। हमें अपनी जिंदगी में किस तरह का जीवन जीना शेष रह गया है, जो हम जीवन जीना चाहते थे?
बस! इस तरह का जीवन जीना प्रारम्भ करें।
जीवन का आनंद तब ही है, जब जीवन की यात्रा पूर्ण हो तो कोई कामना नहीं रहे, कोई अफ़सोस न रहे कि काश! हमें कुछ और जीने को मिल जाता तो हम अपने मन की यह कर लेते, वह कर लेते। जो करना है, अभी कर लो, फिर गया वक्त हाथ नहीं आएगा।
मन में यह न रहे कि मैं जैसा हँसमुखी जीवन जीना चाहता था, वैसा जीवन नहीं जी सका।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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