क्रोध में हार की झलक

👼👼💧💧👼💧💧👼👼

क्रोध में हार की झलक

Image by Uwe Jacobs from Pixabay

बहुत समय पहले की बात है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ की निर्णायक थी मंडन मिश्र की धर्म पत्नी देवी भारती।

हार-जीत का निर्णय होना बाकी था, इसी बीच देवी भारती को किसी आवश्यक कार्य से कुछ समय के लिये बाहर जाना पड़ गया, लेकिन जाने से पहले देवी भारती ने दोनों ही विद्वानों के गले में एक-एक फूल माला डालते हुए कहा, ‘ये दोनों मालाएं मेरी अनुपस्थिति में आपकी हार और जीत का फैसला करेंगी।’

यह कहकर देवी भारती वहाँ से चली गई।

शास्त्रार्थ की प्रक्रिया आगे चलती रही।

कुछ देर बाद देवी भारती अपना कार्य पूरा करके लौट आई। उन्होंने अपनी निर्णायक नजरों से शंकराचार्य और मंडन मिश्र को बारी-बारी से देखा और अपना निर्णय सुना दिया। उनके फैसले के अनुसार आदि शंकराचार्य विजयी घोषित किये गये और उनके पति मंडन मिश्र की पराजय हुई थी।

सभी लोग ये देखकर हैरान हो गये कि बिना किसी आधार के इस विदुषी ने अपने पति को ही पराजित करार दे दिया।

एक विद्वान ने देवी भारती से नम्रतापूर्वक जिज्ञासा की - हे देवी! आप तो शास्त्रार्थ के मध्य ही चली गई थी, फिर वापस लौटते ही आपने ऐसा फैसला कैसे दे दिया?

देवी भारती ने मुस्कुराकर जवाब दिया - जब भी कोई विद्वान शास्त्रार्थ में पराजित होने लगता है और उसे जब हार की झलक दिखने लगती है, तो इस वजह से वह क्रोधित हो उठता है और मेरे पति के गले की माला उनके क्रोध की ताप से सूख चुकी है जबकि शंकराचार्य जी की माला के फूल अभी भी पहले की भांति ताजे हैं। इससे ज्ञात होता है कि शंकराचार्य की विजय हुई है।

विदुषी देवी भारती का फैसला सुनकर सभी दंग रह गये, सबने उनकी काफी प्रशंसा की।

कथासार

क्रोध मनुष्य की वह अवस्था है जो जीत के नजदीक पहुंचकर हार का नया रास्ता खोल देता है।

क्रोध न सिर्फ हार का दरवाजा खोलता है, बल्कि रिश्तों में दरार का कारण भी बनता है। इसलिये कभी भी क्रोध को खुद पर हावी न होने दें।

कोध्र से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है और जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है। जब तर्क नष्ट होता है, तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।

--

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद।

Comments

Popular posts from this blog

ईश्वर की कृपा

समर्पण भाव होना चाहिए

समस्या का सामना

चरणों की धूल

आधे रास्ते को मंजिल न समझें

एक बुढ़िया की रोचक कहानी

Y for Yourself

जो चाहोगे सो पाओगे

राजा मोरध्वज

जहाँ प्रेम वहीं ईश्वर