बर्थडे गिफ्ट

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बर्थडे गिफ्ट

Image by Veronika Andrews from Pixabay

चारों ओर यही आवाज़ गूंज रही थी - ‘हैप्पी बर्थडे टू यू, राजू!!’

आज राजू कितना प्रसन्न है। आज केक कटेगा, मिठाई खाएंगे। आज का हीरो तो मैं ही होऊँगा। मम्मी आज मुझे कैमरा देगी। पापा स्कूटर दिलाएंगे और सभी रंग-बिरंगे उपहार देंगे।

अभी जन्मदिन का समारोह चल ही रहा था कि राजू की दृष्टि दूर खड़े अपने मित्र चक्रेश पर पड़ गई, जो उसके पास आने में झिझक महसूस कर रहा था, क्योंकि वह बहुत गरीब था। ऐसी शानदार पार्टी में वह कभी गया नहीं था।

राजू ने देखा कि चक्रेश वही गरम कोट पहने हुए था, जो उसने आज सुबह ही उसे दिया था, जब वह कड़कड़ाती ठंड में केवल एक कच्छा और बनियान पहने सरकारी नल पर पानी भर रहा था।

राजू की मम्मी ने भी चक्रेश को गर्म कोट पहने देखा। वह एकदम आपे से बाहर हो गई - ‘राजू! तुम जानते हो न! यह कोट कितने में बना था? पूरे 1000 रुपए लगे थे। तुमने यह कोट उसे क्यों दिया?’

राजू ने कहा - ‘मम्मी! मेरे पास तो कई कोट हैं। यह पुराना भी हो गया था और वह जाड़े में कंपकंपा रहा था। इसलिए मैंने....।’ राजू हकलाते हुए बोला।

मम्मी ने कहा - ‘कई कोट थे तो वे तुम्हारे लिए थे। इसके लिए तो नहीं बनवाए थे न!’

चक्रेश ने देखा कि राजू उसकी ओर आ रहा है। वह साहस बटोर कर कुछ आगे बढ़ा और बोला - ‘जन्मदिन मुबारक हो, राजू! हम तोहफा तो कुछ नहीं दे सकते, परन्तु मेरी मम्मी ने इस कागज पर कुछ लिखकर भेजा है।’

राजू ने पढ़ा। उसमें लिखा था - ‘किसी की मजबूरी में व गरीबों को कभी दया की दृष्टि से कुछ मत दो, बेटा! देना है तो उसे शक्ति दो ताकि वह योग्य बन सके। तुम्हारे जन्मदिन की मेरी ओर से यही बधाई है।’

राजू कभी कोट को देख रहा था और कभी अपनी मम्मी से उस चक्रेश की मम्मी का मिलान कर रहा था। एक के पास सब कुछ है, बहुत ज्यादा है पर वह देना नहीं चाहती और दूसरी के पास कुछ भी नहीं है, फिर भी वह लेना नहीं चाहती। इनमें से कौन दया का पात्र है?

राजू को आज ऐसा उपहार मिल गया था उस सीख के रूप में, जो उसे जीवन में एक नया मोड़ अवश्य देगा। चक्रेश की मम्मी का उपहार उन सब रंग-बिरंगे उपहारों से कहीं अधिक चमक रहा था राजू की आंखों में।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


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धन्यवाद।


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