पुत्र पर अधिकार

  पुत्र पर अधिकार


पत्नी किसी अन्य पुरुष से पुत्र प्राप्त कर ले, तो उस पर किसका अधिकार.?

एक गाँव में एक गरीब आदमी रहता था। उसकी शादी हो गई। कुछ दिनों बाद वह पत्नी से बोला - मैं बाहर व्यापार करने जा रहा हूँ, आज ही के दिन एक बरस बाद लौट आऊँगा!! 

ऐसा कह कर वह चला गया.!

पति वहाँ व्यापार में व्यस्त हो गया. पत्नी यहाँ अकेली थी, जो रोज सुबह नहा धोकर पैदल ही सब्जी खरीदने जाती थी।

उसी बाजार में एक धनवान पुरुष भी रोज़ कार से सब्जी खरीदने आता था, वह रोज इस महिला को आते हुए देखता था. एक दिन वह उस महिला से बोला - आओ मैं आपको घर तक छोड़ दूँगा.

नहीं! मै चली जाऊँगी.!

डरो मत!! मेरा घर भी अगली गली में है, मैं आपको सकुशल पहुँचा दूँगा.

वह स्त्री कार में बैठ गई. उस पुरुष ने शांति शालीनता के साथ उस स्त्री को उसके घर के सामने उतारा और चला गया.

अब यह रोज का क्रम बन गया.

एक दिन उस पुरुष ने उस स्त्री से स्नेह तथा आदर से कहा - आओ! चाय पीकर चली जाना. स्त्री ने उसका आग्रह स्वीकार कर लिया तथा चाय पीकर चली गई. सिलसिला आगे बढ़ा भोजन भी होने लगा, उन दोनों के मध्य प्रेम उत्पन्न हो गया और परिणाम हुआ - एक सुन्दर पुत्र.

वह स्त्री अपने पुत्र को उस पुरुष के घर ही रखती व नित्य एक बार जाकर उसे लाड़ प्यार से दूध पिला कर लौट आती.

एक बरस पूरा हो गया. पति के लौट आने की तारीख़ आ गई.!! पति आ गया.!! पत्नी का ध्यान पुत्र में होने के कारण वह पति की बातों पर ध्यान न दे पा रही थी. उसे अशांत व खिन्न देखकर पति ने उससे पूछा - सच सच बताओ क्या हुआ.?

पत्नी ने सब बात कह दी और पुत्र की याद आना बताया!!

पति बोला - अपना पुत्र है! जा ले आ!!

पत्नी गई और जाकर उस पुरुष से बोली कि मेरे पति आ गये हैं और मैं अपना पुत्र लेने आई हूँ .!

वह पुरुष बोला - पुत्र नही दूँगा, वह मेरा है.

अब स्त्री और उसका पति दोनों पुत्र माँग रहे हैं तथा वह पुरुष पुत्र को अपने पास रखना चाहता है। मामला न्यायालय में गया। न्यायाधीश के समक्ष सबने अपने तर्क़ सुनाए।

1) पति ने कहा - जब मेरी शादी हुई तो मेरे पास जमीन थी। मैं व्यापार करने परदेश गया तथा यह कहकर गया कि जब बोवनी का समय आएगा तब आ जाऊँगा. परन्तु यदि किसी कारण न आ पाऊँ तो तू किसी से खेत बुआ लेना, बरसात शुरू हो गई और मै न आ पाया तो मेरी पत्नी ने मेरा खेत दूसरे से बुआ लिया, अब बोने वाला व्यक्ति कह रहा है कि फसल मेरी है!! तो फसल तो खेत मालिक की ही रहेगी!! बुआई करने वाला चाहे तो मजदूरी ले ले!! परन्तु फसल पर अधिकार तो खेत मालिक का ही रहेगा।।

2) उस पुरुष ने कहा - मैं रोज सैर करने जाता था, सड़क पर मुझे एक खाली डिब्बी पड़ी मिली, मैं ने इधर उधर देखा। मुझे कोई डिब्बी का मालिक दिखाई न दिया, डिब्बी सुन्दर थी!

मैंने डिब्बी उठा ली तथा अपने जेब से एक हीरा निकाल कर डिब्बी में रख दिया, दूसरे दिन मुझे एक आदमी मिला, वह कहने लगा कि यह डिब्बी तो मेरी है!! मैंने डिब्बी में से हीरा निकाल कर अपने पास रख लिया और डिब्बी उसके मालिक को लौटा दी. अब वह आदमी कहता है कि हीरा भी मुझे दो!! हीरा मैंने रखा था, तो हीरा तो मैं ही रखूँगा, उसकी डिब्बी मैं वापस देने को तैयार हूँ पर हीरे का मालिक तो मै ही हूँ!!

3) पत्नी ने कहा - जब मेरी शादी हुई तो मेरे पिता ने एक भैंस दी थी, भैंस दूध देती थी, एक दिन मेरे पास जामन नहीं था, मैंने एक पड़ौसी से माँगकर जामन ले लिया, दूध जमा लिया फिर उस दही को मथ कर घी निकाला! अब वह जामन देने वाला कह रहा है कि घी मेरा है!! घी तो उस का ही रहेगा जिसका दूध था!! जरा सा जामन दे देने से घी उसका कैसे हो सकता है? वह चाहे तो जामन के पैसे ले ले??

तीनों के अपने अपने किस्से व तर्क थे, तीनों की बात सुनकर न्यायाधीश महोदय ने संन्यास ले लिया।

अब पुत्र किसे मिलना चाहिये? है क्या जवाब किसी के पास.!

मेरे विचार से तो यह निष्कर्ष निकलता है कि एक जीते-जागते बच्चे की तुलना खेत की फसल, हीरे की डिब्बी और दही के जामन से करना उचित नहीं है।

एक बच्चे को माँ का प्यार और पिता का दुलार- दोनों की आवश्यकता है। उस स्त्री का पति तो बेवजह उस पुत्र को पाने का दावा कर रहा है। रहेगा तो वह अपने पिता के पास ही। यदि माँ उस पर अपना हक जमाना चाहती है, तो उसे दो काम करने होंगे। या तो वह बच्चे को भूल जाए और अपने पति के साथ रहे। या वह अपने पति से तलाक लेकर उस व्यक्ति से विवाह कर ले, जिससे उसे पुत्र प्राप्त हुआ है। फैसला उसका ही होगा। बच्चे और समाज के हित में तो दूसरा फैसला ही उचित रहेगा, क्योंकि बच्चा भी बड़ा होकर अपनी माँ के बारे में पूछेगा, तब वह व्यक्ति क्या जवाब देगा? अपनी राय अवश्य लिखें।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।


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