विश्वास की शक्ति- हरिनाम
विश्वास की शक्ति- हरिनाम
एक गांव में एक नौजवान को सत्संग सुनने की बहुत लगन थी। किसी से पता चला कि गांव के बाहर नदी के उस पार परम संत तुलसी दास जी ने डेरा लगाया हुआ है और आज संध्या को उनका सत्संग का आयोजन है। वह नौजवान नौका के द्वारा नदी पार करके सत्संग में पहुंच गया। प्रेमी था, बड़े प्यार से सत्संग सुना और बहुत आनंद आया!
जब वह जाने लगा, तो थोड़ा अंधेरा हो गया था। उसने देखा कि तूफान बहुत ज्यादा था और बारिश के कारण नदी बड़े ऊफान पर चल रही थी। अब जितनी नौका वाले मल्लाह थे, सब डेरे में रुक गए। नौका से आने-जाने का कोई साधन नहीं है।
वह संत तुलसी दास जी के पास पहुंचा और बोला - महाराज! मेरी नई-नई शादी हुई है, मेरी पत्नी भी उस गांव में अनजान है और मेरे घर में कोई नहीं है। उसके पास गहना वगैरा बहुत है, नकदी भी है और हमारे गांव में चोर लुटेरे भी बहुत हैं। तो किसी भी हालत में मुझे वहां जाना ही पड़ेगा, नहीं तो पता नहीं क्या हो जाएगा।
संत तुलसी दास जी ने एक कागज पर कलम से कुछ लिखा और बिना बताए उस कागज को मोड़कर और उसके हाथ में पकड़ा दिया और कहा - इसको खोलकर मत देखना कि इसमें क्या लिखा है। जब नदी के पास पहुंचो तो नदी को मेरा संदेश देना।
जब वह नदी के किनारे पहुंचा, तो देखा कि तूफान बड़े जोरों का है। उसने चिट्ठी नदी की ओर दिखाते हुए कहा - यह संत तुलसी दास जी ने तुम्हारे लिए भेजी है।
इतना सुनते ही नदी बीच में से अलग हो गई और ज़मीन दिखने लगी, पैदल चलने के लिए। वह बहुत हैरान हुआ। उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। उसने आंखें मलीं और सोचा - कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूं?
फिर वह पैदल नदी पार करने लगा। मन में जिज्ञासा उठी कि देखूं तो सही, इस चिट्ठी में क्या लिखा है? जब उसने चिट्ठी खोली तो उसमें लिखा था - “राम“। वह बहुत हैरान हुआ। इतने में नदी वापस भर गई और आगे का रास्ता बंद हो गया। वह दौड़कर फिर वापस किनारे पर आ गया।
वह उसी समय संत तुलसी दास जी के पास पहुंचा और संत तुलसी दास जी को सारी बात कहकर सुनाई, तो संत तुलसी दास जी ने कहा - भाई! मैंने पहले ही कहा था कि चिट्ठी खोलना नहीं। खैर! उसी समय दूसरी चिट्ठी दी और कहा - इस चिट्ठी को खोलना नहीं और वैसे ही करना!
वह बहुत हैरान था।
संत तुलसी दास जी से पूछा - महाराज! उस चिट्ठी पर “राम“ लिखा था, तो इसमें अलग क्या है?
सन्त बोले - विश्वास की शक्ति। राम नाम व हरिनाम हो या कोई मंत्र हो, जब तक विश्वास नहीं है, तब तक ये साधारण लगते हैं लेकिन जैसे ही विश्वास होता है तो असीम शक्तिशाली हो जाते हैं। विश्वास की शक्ति तो भवसागर से भी पार लगा देती है, फिर नदी को पार करना कौन-सी बड़ी बात है।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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