घमंडः हमारा सबसे बड़ा दुश्मन

 घमंडः हमारा सबसे बड़ा दुश्मन


 एक लड़का था। उसके पापा की इतनी बड़ी कंपनी थी कि अमरीका में बैठे-बैठे, अफ्रीका की सरकार को गिरा दे। उनके पास किसी चीज़ की कमी नहीं थी। पैसा, सत्ता सब उनके हाथ में था, लेकिन पैसा कमाते-कमाते वो अपने बच्चे को समय नहीं दे पाए। इसके बदले में बच्चे ने अपनी मनमानी करना शुरू किया। उसको कोई कुछ कहने वाला नहीं था। जैसे-जैसे बड़ा होता चला गया, उसको लगने लगा कि उसका कोई क्या बिगड़ सकता है? वह अपने सामने किसी को कुछ समझता ही नहीं था। 
एक दिन वह एक बड़ी होटल में कॉफ़ी पीने के लिए गया। वहाँ एक नौकर नज़दीक से गुज़र रहा था। नौकर के हाथ से एक कॉफ़ी का गिलास गिर गया। उस लड़के के नज़दीक गिलास गिरने की वजह से वह लड़का चिल्लाया और कहा कि साले! अंधे! तुझे दिखाई नहीं देता? बेवफ़ूक कहीं का। न जाने कहाँ-कहाँ से चले आते हैं? इतना बोल कर उसने कहा कि तुम्हारे मैनेजर को बुलाओ। 
नौकर के बहुत माफी मांगने पर भी वह नहीं माना। उतनी देर में वहां पर मैनेजर आ पहुँचा।
मैनेजर को लड़के ने कहा कि मुझे तुम्हारे कर्मचारी बिलकुल पसंद नहीं आये। मैं ये होटल खरीद कर अपने कर्मचारी रखूँगा। मुझे इस होटल के मालिक से बात करवाओ। 
मैनेजर के लाख कहने पर भी लड़का नहीं माना। उसने होटल के मालिक से बात की और कहा कि मुझे तुम्हारा होटल खरीदना है। आपको कितना पैसा चाहिए? 
होटल का मालिक उसे पहचान गया। वह सोच रहा था कि अगर मैं उसको अपना यह होटल नहीं बेचूंगा, तो यह मेरा बिज़नेस बर्बाद कर देगा।
इसलिए होटल के मालिक ने होटल की कीमत 400 करोड़ कही। लड़के ने अपने मैनेजर को कॉल करके 800 करोड़ का चेक बनवाया और इस तरह से उसने होटल को खरीद लिया। एक छोटी-सी बात के लिए उसने इतना बड़ा हंगामा कर लिया। 
इस बात से साफ पता चलता है कि इसके अंदर कितना घमंड था। लेकिन एक दिन ऐसा आया कि उसके पापा की मृत्यु हो गई, अब सारा कारोबार उसके कंधो पर आ गया। कभी कारोबार में ध्यान नहीं देने की वजह से वह कारोबार को अच्छे से संभाल नहीं पाया।
और एक दिन एक बड़े नुकसान की वजह से ऐसी नौबत आयी कि उसको अपना घर, गाड़ी सब कुछ बेच देना पड़ा। उसके घमंडी स्वभाव के कारण कोई उसकी मदद के लिए भी नहीं आया। अब न तो उसको पास खाने के लिए पैसे थे और न रहने के लिए घर था।
शिक्षाः-
जब तक आप अपने दायरे में रहकर विनम्रता से काम करते हो, तब तक आपके कर्मचारी भी आपका सहयोग करते हैं और आपको कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन जिस दिन आपने उस दायरे से बाहर जाने की कोशिश की, उस दिन आप मुश्किल में आ सकते हो। आपको सहयोग देने कोई भी आगे नहीं आएगा।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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धन्यवाद

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