आनन्दमयी जीवन के मूलभूत सिद्धान्त

 आनन्दमयी जीवन के मूलभूत सिद्धान्त

वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से

जीवन में सुख, शांति, संतोष और आनन्द के मूलभूत सिद्धान्त हैं - ईमानदारी, सच्चाई, त्याग और निमित्त भाव से परिवार, संसार में रह कर जीवन यापन करना- यही वेद ग्रन्थों का सार है। हमें क्या त्यागना है?

त्याग- काम, क्रोध, लोभ, मोह का

त्याग- अहंकार, मद, मत्सर का

त्याग- ईर्ष्या, द्वेष का

त्याग- तेरी-मेरी, झूठ, बेईमानी का

त्याग- धन, भय और कायरता का

त्याग- नशे, बुरी संगति, मांस, मदिरा का

त्याग- आलस्य, चोरी, धोखेबाजी का

त्याग- चापलूसी, गुलामी, निन्दा-चुगली का

त्याग- वाद-विवाद, तर्क-कुतर्क, कट्टरता का

त्याग- अंधविश्वास, कर्मकाण्ड, कुरीतियों का

त्याग से - निश्चिन्तता आती है

त्याग से - सुख-शांति-संतोष बढ़ता है

त्याग से - सेवाभाव, परहित का भाव बढ़ता है

त्याग से - धन, समय, शक्ति का सदुपयोग होता है

त्याग से - आत्म-बल, आत्म-ज्ञान, आत्मानुभूति होती है

त्याग से - आत्म-दर्शन, परमात्म-दर्शन होता है

त्याग से ही भवसागर, संसारसागर जीवनमुक्त होता है

ईमानदारी, सत्य मुक्ति है; बेईमानी, झूठ बन्धन है

ईमानदारी, सत्य स्वर्ग है; बेईमानी, झूठ नरक है।

।।अनुभूत एवं इति सिद्धम्।।

वेद गावड़ी

प्रेषिका- सरिता जैन 

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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