माता-पिता
माता-पिता
वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से
ऊपर जिसका अन्त नहीं उसे आसमाँ कहते हैं
संसार में जिसका अन्त नहीं उसे पिता और माँ कहते हैं
करो दिल से सिजदा, इबादत बनेगी
माँ बाप की सेवा, अमानत बनेगी
खुलेगा जब तुम्हारे कर्मों का खाता
तो माँ बाप की भक्ति, तुम्हारी जमानत बनेगी
माँ सत्य है, पिता विश्वास है
इस लिए माता-पिता परमात्मा के खास हैं
माँ आग में तपती है, पिता धूप में तपता है,
तब जा कर कहीं सन्तान पलती है.
वक्त का पता नहीं चलता अपनों के साथ
पर अपनों का पता चलता है वक्त के साथ
वक्त नहीं बदलता किसी के साथ
पर अपने बदल जाते हैं वक्त के साथ.
पुजारी कहता है कि भगवान नहीं मिलता
मुल्लाँ कहता है कि रहमान नहीं मिलता
मैं कहता हूँ कि आज इस इंसानों की दुनिया में
ढूंढने पर भी इन्सान नहीं मिलता.
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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धन्यवाद

अति उत्तम जी।
ReplyDeleteगुरू गोविंद दोऊ खङै कांके लागूं पांय, बलिहारी गुरू जी आपके ,जिन गोविंद दियो मिलाय।
राकेश छबीलदास विश्नोई अधिवक्ता सदलपुर आदमपुर 9968913009
rakeshvishnoiji@gmail.com