माता-पिता

 माता-पिता

वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से


ऊपर जिसका अन्त नहीं उसे आसमाँ कहते हैं

संसार में जिसका अन्त नहीं उसे पिता और माँ कहते हैं


करो दिल से सिजदा, इबादत बनेगी 

माँ बाप की सेवा, अमानत बनेगी

खुलेगा जब तुम्हारे कर्मों का खाता

तो माँ बाप की भक्ति, तुम्हारी जमानत बनेगी 


माँ सत्य है, पिता विश्वास है

इस लिए माता-पिता परमात्मा के खास हैं

माँ आग में तपती है, पिता धूप में तपता है,

तब जा कर कहीं सन्तान पलती है.


वक्त का पता नहीं चलता अपनों के साथ

पर अपनों का पता चलता है वक्त के साथ

वक्त नहीं बदलता किसी के साथ

पर अपने बदल जाते हैं वक्त के साथ.


पुजारी कहता है कि भगवान नहीं मिलता

मुल्लाँ कहता है कि रहमान नहीं मिलता

मैं कहता हूँ कि आज इस इंसानों की दुनिया में

ढूंढने पर भी इन्सान नहीं मिलता.



सपने वो नहीं होते जो सोने पे आते हैं, 

सपने वो होते है जो सोने नहीं देते. 

अपने वो नहीं होते, जो रोने पे आते हैं, 

अपने वो होते हैं जो कभी रोने नहीं देते.


सच बोलू तो अपने रूठ जाते हैं, 

झूठ बोलू तो शब्द रूठ जाते हैं. 

ईमानदार बनूं  तो जग रूठ जाता है, 

बेईमान बनूं  तो रब रूठ जाता है. 

हे प्रभु अब तूही बता मैं क्या बोलूं , 

इसी कशमकश में जीवन बीता जाता है.


धूप में छाया बड़ी चीज होती है,

गरीबी में माया बड़ी चीज़ होती है. 

हमेशा रहे हम पर प्रभु तेरा साया, 

बच्चों के लिए मां बाप का साया बड़ी चीज़ होती है.


दूध पानी को न परखे, वो पारखी क्या है, 

जो तत्व को न समझे, वो तार्किक क्या है. 

जिस ने जाना नहीं स्वयं और माता पिता को, 

उस की भक्ति, पूजा अरदास व आरती क्या है.


सूरज सागर को सुखा सकता नहीं,

पवन पर्वत को हिला सकता नहीं.

जिन के दिलों में रहती है माता-पिता की याद,

उन्हें दुनिया में कोई मिटा सकता नहीं.


यूँ तो लाखों खुदा के बन्दे,

जंगलों में फिरते हैं मारे-मारे.

मैं तो उस का बन्दा बनूंगा,

जो खुदा के बन्दों से प्यार करता है.

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद

Comments

  1. अति उत्तम जी।
    गुरू गोविंद दोऊ खङै कांके लागूं पांय, बलिहारी गुरू जी आपके ,जिन गोविंद दियो मिलाय।
    राकेश छबीलदास विश्नोई अधिवक्ता सदलपुर आदमपुर 9968913009
    rakeshvishnoiji@gmail.com

    ReplyDelete

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