हमारा सच्चा साथी
हमारा सच्चा साथी एक छोटे से गाँव में श्रीधर नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह स्वभाव से थोड़ा कमजोर और डरपोक किस्म का व्यक्ति था! एक बार वह एक महात्मा जी के आश्रम में गया और उन्हें अपनी कमजोरी बताई और उनसे प्रार्थना करने लगा कि हे देव! मुझे कोई ऐसा साथी मिल जाये जो सबसे शक्तिशाली हो और विश्वास पात्र भी। जिस पर मैं आँखें बँद करके विश्वास कर सकूँ। जिससे मैं मित्रता करके अपनी कमजोरी को दूर कर सकूँ! हे देव! भले ही एक ही साथी मिले, पर ऐसा मिले कि वह मेरा साथ कभी न छोड़े! तो महात्मा जी ने कहा - पूर्व दिशा में जाना और तब तक चलते रहना, जब तक तुम्हारी तलाश पूरी न हो जाये। और हाँ! तुम्हें ऐसा साथी अवश्य मिलेगा, जो तुम्हारा साथ कभी नही छोडे़गा, बशर्ते कि तुम उसका साथ न छोड़ो! श्रीधर ने कहा - बस! एक बार वह मुझे मिल जाये, तो फिर मैं उसका साथ कभी न छोडूंगा। पर हे देव! मेरी तलाश तो पूरी होगी न! महात्माजी ने कहा - हे वत्स! यदि तुम सच्चे दिल से उसे पाना चाहते हो तो वह बहुत सुलभता से तुम्हें मिल जायेगा, लेकिन है वह बहुत दुर्लभ! फिर उसने महात्मा जी को प्रणाम किया, आशीर्वाद लिया और चल पड़ा अपनी राह पर...