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सफलता का रहस्यः धैर्य

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सफलता का रहस्यः धैर्य यदि हम जीवन में सफल होना चाहते हैं तो केवल धैर्य ही वह कुंजी है जो हर सफलता का ताला खोल सकती है। चाहे हम किसी काम में निपुण हों या न हों, धैर्य से किया गया काम हमें हर काम में निपुण बना सकता है। जो लोग असफलता के डर से काम को आरम्भ ही नहीं करते या बीच में छोड़ देते हैं, उनमें सफल होने के सभी गुण विद्यमान होते हैं, बस कमी रहती है तो केवल धैर्य की। मान लो हमने आम प्राप्त करने का लक्ष्य बनाया और आम की गुठली जमीन में बो दी। हम चाहते हैं कि तुरन्त काम किया और तुरन्त ही उसका फल मिल जाए। पर वही हुआ। हमारे अन्दर धैर्य की कमी थी। रोज पानी भी देते, खाद भी डालते लेकिन यह कोई बबूल का पेड़ तो था नहीं कि इधर बोया और उधर उग आया।   एक दिन धैर्य ने जवाब दे दिया और जब हमने देखा कि आम का पेड़ तो उग ही नहीं रहा तो हमने मेहनत से बचने के लिए वह आम की गुठली ही जमीन में से बाहर निकाल कर फेंक दी कि न होगा बाँस और न बजेगी बाँसुरी। न गुठली बोएंगे और न मेहनत करनी पड़ेगी। लेकिन भैया, फिर तो आम के मिलने की सारी सम्भावनाएं भी समाप्त हो जाएंगी, पर हमें क्या? बैठे रहो यों ...

लोभ पाप को बाप बखानो

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 लोभ पाप को बाप बखानो Image by Pezibear from Pixabay हमारे आचार्यों ने यूँ ही लोभ को पाप का बाप नहीं कहा है। जैसे ही मन में लोभ का प्रवेश होता है वैसे ही सभी पाप मन में जन्म लेने लगते हैं। आदमी हिंसा, झूठ, चोरी आदि की प्रवृत्ति की ओर बढ़ने लगता है। एक राजा बहुत कुशलता से अपने राज्य का संचालन कर रहा था। उसके राज्य में सब सुखी और सम्पन्न थे। एक बार उसके राज्य में खूब वर्षा हुई। जल-थल एक हो गया। एक लकड़हारा लकड़ियां काट कर अपना जीवन-यापन करता था। वर्षा के कारण कोई भी अपने काम पर नहीं जा पाया, पर वह लकड़हारा अपनी कुल्हाड़ी लेकर जंगल की ओर चल पड़ा। कुछ लोगों की नज़र उस पर पड़ी। राजा तक भी यह समाचार पहुँचा। उसने अपने झरोखे में से देखा कि नदी के तेज़ प्रवाह में एक ग़रीब लकड़हारा बहते हुए लक्कड़ को अपनी पूरी ताकत लगा कर किनारे तक लाने की कोशिश कर रहा है। राजा ने अपने आदमियों को यह देखने के लिए भेजा कि क्या यह लकड़हारा इतना गरीब है जो इसके पास इतनी बरसात में अपने परिवार को खिलाने के लिए एक दिन का भी भोजन नहीं है ? आदमियों ने खोजबीन की तो पता चला कि उसके पास एक ही बैल है। वह अपनी बैलों क...

राम वनवास

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 रामायण के प्रसंगः आज के सन्दर्भ में राम वनवास सारी अयोध्या में उत्सव का माहौल था। कल रामचंद्र जी का राजतिलक होगा। अरे! राम-राज्य हो जाएगा अयोध्या में, इससे बढ़कर खुशी की बात क्या हो सकती है ? सब नाच रहे थे, गा रहे थे। हर तरफ बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के मन में उल्लास था। लेकिन विधि के विधान का किसी को ज्ञान नहीं था। रानी कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने पूर्व इच्छित वरदान के बदले अपने बेटे भरत के लिए अयोध्या का राज्य मांग लिया। यहाँ तक तो फिर भी ठीक था। पर दूसरे वरदान ने तो सब के अरमानों को धराशायी कर दिया। ‘रानी! तुम यह क्या मांग रही हो ? राम के लिए 14 वर्ष का वनवास! अपन जिगर के टुकड़े को राजमहल से निष्कासित कर दूँ ? और वह भी 14 वर्ष के लिए ? ’ रानी अपने वरदानों की पूर्ति कराने के लिए पूर्णतया कटिबद्ध थी। राजा दशरथ के समझाने का उस पर  कोई प्रभाव नहीं हुआ और वह काले अध्याय को लिखने के लिए काले वस्त्र पहन कर कोप भवन में जा कर बैठ गई। अंततः राजा को अपनी स्वीकृति देनी पड़ी लेकिन हाय! वही स्वीकृति उसका काल बन गई। राजा के महल से केवल राम का ही वनवास नहीं हुआ, राजा के तन से...

सीता-हरण

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 रामायण के प्रसंगः आज के सन्दर्भ में सीता-हरण दुनिया में ऐसा कौन व्यक्ति होगा जिसका हृदय सीता-हरण के प्रसंग को सुन कर द्रवित न होता हो। राम के साथ जंगल के कंटीले रास्तों पर चलते हुए सीता को 13 वर्ष व्यतीत हो गए थे। वनवास का अंतिम वर्ष चल रहा था। सीता अपने पति राम की सेवा करती और राम उसकी सुरक्षा में तत्पर रहते। छोटा भाई लक्ष्मण रात भर पहरा देता ताकि माता-पिता समान भाई-भाभी के आराम में कोई विघ्न न आने पाए। नारी-प्रताड़ना व सीता-हरण जैसी घटनाएं हर युग में होती आई हैं। दोष चाहे स्त्री का हो या न हो पर यातना सदैव स्त्री को ही भुगतनी पड़ती है। जुए में युधिष्ठिर ने द्रोपदी को दांव पर लगा दिया लेकिन चीर-हरण की पीड़ा से तो द्रोपदी को ही गुज़रना पड़ा न! कंस को अपने प्राणों का भय था पर कारागार की यातनाएं तो उसकी बहिन देवकी ने ही भोगी। हनुमान के पिता पवनंजय की बेरुखी का परिणाम उसकी माता अंजना सती ने 22 वर्ष तक भोगा। असुर के षड्यन्त्र का शिकार होकर अहिल्या पाषाण की शिला बन कर रह गई। सीता-हरण में सीता का क्या दोष था ? सुन्दर वस्तु या व्यक्ति के प्रति आकर्षण किस को नहीं होता ? सी...