सहनशीलता - सुख का आधार
👼👼👼👼👼👼👼👼👼👼 दुःख को सुख में बदलने की कला सहनशीलता - सुख का आधार (प्रेरणात्मक लेख) Image by Lee_seonghak from Pixabay एक युवक लोहार की कार्यशाला में गया, जहाँ वह लोहे को तपाकर निहाई पर रख कर घन के प्रहार से उसे मनचाहे आकार में मोड़ रहा था। फालतू लोहे के टुकड़े इधर-उधर बिखरे हुए थे। युवक ने लोहार से पूछा कि आप लोहे पर घन की चोट करते हो, तो वह टुकड़ों में टूट जाता है, लेकिन जिस निहाई पर रख कर घन चलाते हो, वह तो नहीं टूटती। इसका क्या कारण है ? लोहार ने कहा कि यह ज़मीन में गड़ी हुई है और स्वयं को डावाँडोल नहीं होने देती। इसने सहन करना सीख लिया है। इसमें बाहर के प्रहार सहन करने की शक्ति आ गई है। यह घन का प्रहार सह कर भी लोहे को सही आकार प्रदान कर सकती है। हमें घन की तरह प्रहार करने वाला नहीं, निहाई की तरह प्रहार सहने वाला बनना चाहिए। तभी हमारी आत्मा में औरों को सही दिशा दिखाने की ताकत आएगी। समर्थ बनना है तो सहन करो। गर्म लोहा बनोगे तो हथौड़े से पीट-पीट कर टुकड़े कर दिए जाओगे और सहनशील बनोगे तो निहाई की तरह अटूट बने रहोगे। स्वयं को ऊँचा उठाने के लिए Tolerance Power का होना बहुत ...