अच्छाई का देवता
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अच्छाई का देवता Image by Manfred Richter from Pixabay मैं कई दिनों से बेरोजगार था। एक-एक रूपये की कीमत जैसे करोड़ों की लग रही थी। इस उठापटक में था कि कहीं नौकरी लग जाए। आज एक इंटरव्यू था, पर दूसरे शहर जाने के लिए जेब में सिर्फ दस रूपये थे। मुझे कम से कम दो सौ रुपयों की जरूरत थी। अपने इकलौते इन्टरव्यू वाले कपड़े रात में धो कर, पड़ोसी की प्रेस मांग कर तैयार की। उसे पहन कर अपनी योग्यताओं की मोटी फाइल बगल में दबाकर दो बिस्कुट खा कर निकला। कहीं पर लिफ्ट ली, कहीं पैदल चला और जैसे-तैसे चिलचिलाती धूप में पसीने से तरबतर इस उम्मीद में बस स्टैंड पहुँचा कि शायद कोई पहचान वाला मिल जाए, जिससे सहायता लेकर इंटरव्यू के स्थान तक पहुँच सकूँ। काफी देर खड़े रहने के बाद भी कोई नहीं दिखा। मन में घबराहट और मायूसी थी, क्या करूँगा? अब कैसे पहुँचूँगा इंटरव्यू देने? पास के मंदिर पर जा पहुँचा। दर्शन कर सीढ़ियों पर बैठा था। मेरे पास में ही एक साधु बैठा था। उसके कटोरे में मेरी जेब और बैंक एकाउंट से भी ज्यादा पैसे पड़े थे। मेरी नज़रें और हालात समझ कर वह बोला, “कुछ मदद चाहिए क्या?” मैं बनावटी मुस्कुराहट...