Posts

संगत का असर

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 संगत का असर Image by pkong88 from Pixabay एक अध्यापक अपने शिष्यों के साथ घूमने जा रहे थे। रास्ते में वे अपने शिष्यों को अच्छी संगत की महिमा समझा रहे थे, लेकिन शिष्य इसे समझ नहीं पा रहे थे। तभी अध्यापक ने फूलों से भरा एक गुलाब का पौधा देखा। उन्होंने एक शिष्य को उस पौधे के नीचे से तत्काल एक मिट्टी का ढेला उठाकर ले आने को कहा। जब शिष्य ढेला उठा लाया तो अध्यापक बोले - “इसे अब सूंघो।” शिष्य ने ढेला सूंघा और बोला - “गुरु जी! इसमें से तो गुलाब की बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है।” तब अध्यापक बोले - “बच्चों! जानते हो इस मिट्टी में यह मनमोहक महक कैसे आई?” दरअसल इस मिट्टी पर गुलाब के फूल, टूट-टूटकर गिरते रहते हैं, तो मिट्टी में भी गुलाब की महक आने लगी है। यह असर खुशबू की संगत का है। जिस प्रकार गुलाब की पंखुड़ियों की संगति के कारण इस मिट्टी में से गुलाब की महक आने लगी है, उसी प्रकार जो व्यक्ति जैसी संगत में रहता है उसमें वैसे ही गुण-दोष समा जाते हैं। शिक्षा - इस प्रसंग से सीख मिलती है कि यदि हम भी अपने जीवन को गुलाब की खुशबू के समान महकते हुए देखना चाहते हैं, तो हमें सदैव अपनी संगत अ...

विजेता मेंढक

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 विजेता मेंढक Image by Joe from Pixabay बहुत समय पहले की बात है। एक सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहते थे। सरोवर के बीचों-बीच एक बहुत पुराना धातु का खम्भा भी लगा हुआ था, जिसे उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने लगवाया था। खम्भा काफी ऊँचा था और उसकी सतह भी बिल्कुल चिकनी थी। एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया कि क्यों न एक रेस करवाई जाए। रेस में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को खम्भे पर चढ़ना होगा और जो सबसे पहले ऊपर पहुँच जाएगा वही विजेता माना जाएगा। रेस का दिन आ पहुँचा। चारों तरफ रेस देखने वालों की बहुत भीड़ थी। आस-पास के इलाकों से भी कई मेंढक इस रेस में हिस्सा लेने पहुँचे। माहौल में सरगर्मी थी। हर तरफ शोर ही शोर था। रेस शुरू हुई........। लेकिन चिकने खम्भे को देखकर भीड़ में एकत्र हुए किसी भी मेंढक को यह यकीन नहीं हुआ कि कोई भी मेंढक ऊपर तक पहुँच पायेगा। हर तरफ यही सुनाई देता - “अरे! ये रेस बहुत कठिन है....।” “मेंढक कभी भी ये रेस पूरी नहीं कर पायेंगे....।” “सफलता का तो कोई सवाल ही नहीं, इतने चिकने खम्भे पर चढ़ा ही नहीं जा सकता....।” और यही हो भी रहा था। जो भी मेंढक चढ़ने की कोशिश करता...

चित भी मेरी, पट भी मेरी

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 चित भी मेरी, पट भी मेरी Image by Angela C from Pixabay एक राजा था। अचानक दूसरे राजा ने उस पर आक्रमण कर दिया। उसका सारा राज्य छिन गया। कुछ समय पश्चात उसका एक संत से मिलना हुआ। उसकी व्यथा सुनकर संत ने कहा - “देख! घबरा मत। मेरे पास एक चमत्कारी सिक्का है। जब मैं सिक्के को उछालूँ तो तू चित या पट में से एक का चुनाव कर लेना। जो बोला वह आ गया तो समझ लेना तेरी जीत निश्चित है।” संत ने सिक्का उछाला, राजा ने चित कहा और चित आ गया। संत ने कहा, “जा! अब तेरी विजय सुनिश्चित है।” संत की प्रेरणा पाकर उसने अपने प्रतिपक्षी राजा पर हमला करके अपना खोया हुआ साम्राज्य जीत लिया। वह विजय प्राप्त करने के बाद सीधा संत के चरणों में गया और कहा, “गुरुदेव! मैं आपका बहुत आभारी हूँ।” संत ने कहा, “मेरा इसमें कुछ नहीं है।” संत ने अपने झोले से सिक्के को निकाला और उसकी हथेली पर रख दिया। राजा ने सिक्के को पलट कर देखा तो वह भौचक्का रह गया क्योंकि उस सिक्के के दोनों तरफ चित ही था। संत ने कहा, “मैंने कुछ नहीं किया, मैंने बस तेरे विश्वास को जगा दिया। आशीर्वाद का चमत्कार नहीं होता, श्रद्धा और विश्वास का चमत्...

संस्कारों पर नाज़

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 संस्कारों पर नाज़ Image by dewdrop157 from Pixabay बेटा अब खुद कमाने वाला हो गया था। इसलिए बात-बात पर अपनी माँ से झगड़ पड़ता था। यह वही माँ थी जो बेटे के लिए पति से भी लड़ जाती थी। मगर अब फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट बेटा पिता के कई बार समझाने पर भी इग्नोर कर देता और कहता, “यही तो उम्र है शौक पूरे करने की, खाने-पहनने की। जब आपकी तरह मुँह में दांत और पेट में आंत ही नहीं रहेगी तो क्या करूँगा।” बहू खुशबू भी भरे-पूरे परिवार से आई थी, इसलिए बेटे की गृहस्थी की खुशबू में रम गई थी। बेटे की नौकरी अच्छी थी तो फ्रेंड सर्किल उसी हिसाब से मॉडर्न था। बहू को अक्सर वह पुराने स्टाइल के कपड़े छोड़ कर मॉडर्न बनने को कहता, मगर बहू मना कर देती। वह कहता, “कमाल करती हो तुम! आजकल सारा ज़माना ऐसा करता है, मैं क्या कुछ नया कर रहा हूँ। तुम्हारे सुख के लिए सब कर रहा हूँ और तुम हो कि उन्हीं पुराने विचारों में अटकी हो। क्वालिटी लाइफ क्या होती है तुम्हें मालूम ही नहीं।” और बहू कहती, “क्वालिटी लाइफ क्या होती है, ये मुझे जानना भी नहीं है, क्योकि लाइफ की क्वालिटी क्या हो, मैं इस बात में विश्वास रखती हूँ।” आज ...

शब्दों का महत्व

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 शब्दों का महत्व Image by Steve Art from Pixabay एक बार एक राजा ने स्वप्न में देखा कि उसके सारे दाँत टूट गये हैं, केवल सामने का एक बड़ा दाँत ही मुँह में बचा है। सुबह राजा ने दरबार में अपना स्वप्न सुनाया और उसका प्रतिफल जानना चाहा। मंत्रियों ने सलाह दी कि स्वप्न विशेषज्ञों को बुलाकर स्वप्न का फलादेश पूछा जाए। राज्य में ढिंढोरा फिरवा कर घोषणा की गयी कि जो भी विद्वान, ज्ञानी, राजा को उनके स्वप्न का फलादेश बतायेगा, उसे उचित ईनाम दिया जायेगा। कई व्यक्ति दरबार में आये, परन्तु कोई भी राजा को सही जवाब से संतुष्ट नहीं कर सका। एक दिन एक विद्वान व्यक्ति, जिसने काशी से विद्या प्राप्त की थी, दरबार में आया और बोला - “महाराज! मैं आपके स्वप्न का सही फलादेश बता सकता हूँ।” राजा सहित सभी दरबारी जिज्ञासा से उस व्यक्ति की ओर देखने लगे। राजा ने अपना स्वप्न सुनाकर कहा, “बताइये मेरे इस स्वप्न का फलादेश क्या है?” उस व्यक्ति ने कहा, “राजन्! आपका यह स्वप्न तो बहुत बेकार है। इसके फलस्वरूप आपके सामने ही आपके परिवार के सभी सदस्य मर जाएंगे और आप सबके बाद मरेंगे।” यह सुनते ही राजा को क्रोध आ गया औ...

जमी हुई नदी

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 जमी हुई नदी Image by 5892437 from Pixabay डर पर जीत हासिल करने की सीख देती कहानी। सुमित और अमित लद्दाख के एक छोटे से गाँव में रहते थे। एक बार दोनों ने फैसला किया कि वे गाँव छोड़कर शहर जायेंगे और वहीं कुछ काम-धंधा खोजेंगे। अगली सुबह वे अपना-अपना सामान बांधकर निकल पड़े। चलते-चलते उनके रास्ते में एक नदी पड़ी। ठण्ड अधिक होने के कारण नदी का पानी जम चुका था। जमी हुई नदी पर चलना आसान नहीं था, पाँव फिसलने पर गहरी चोट लग सकती थी। इसलिए दोनों इधर-उधर देखने लगे कि शायद नदी पार करने के लिए कहीं कोई पुल हो। पर बहुत खोजने पर भी उन्हें कोई पुल नज़र नहीं आया। अमित बोला, “हमारी तो किस्मत ही खराब है। चलो वापस चलते हैं, अब गर्मियों में शहर के लिए निकलेंगे।” “नहीं”, सुमित बोला, “नदी पार करने के बाद शहर थोड़ी दूर पर ही है और हम अभी शहर जायेंगे।” और ऐसा कह कर वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। “अरे! ये क्या कर रहे हो....? पागल हो गए हो....तुम गिर जाओगे....”, अमित चिल्लाते हुए बोल ही रहा था कि सुमित पैर फिसलने के कारण गिर पड़ा। “कहा था न! मत जाओ....”, अमित झल्लाते हुए बोला। सुमित ने कोई जवाब नहीं दिय...

संत की पोशाक

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 संत की पोशाक Image by Ralph from Pixabay क्या आप जानते हैं कि एक संत केवल अपने प्रवचन से ही नहीं, अपनी पोशाक से भी लोगों को पवित्रता का संदेश देते हैं। एक संत की पोशाक उनके क्रोध, मान, माया और लोभ से मुक्त आचरण का प्रतीक होती है। वे एक ही धोती अर्थात् अखण्ड (बिना सिला) वस्त्र का प्रयोग करते हैं, जो अधो शरीर पर पहनने व ऊपरी शरीर पर ओढ़ने के काम आती है। उस धोती की पहली विशेषता यह है कि उसमें कमीज़ की तरह कॉलर नहीं होता। इससे मान का अभाव प्रकट होता है। हम थोड़ी सी सफलता प्राप्त करते ही अपनी कमीज़ का कॉलर ऊँचा करने लगते हैं, जिसे व्हाइट कॉलर्ड संस्कृति कहा जाता है। इससे सिद्ध होता है कि संत जन अपने मान और अपमान में समभाव रखते हैं। जब पोषाक में कॉलर ही नहीं होगा, तो वे अपने मान का कभी प्रदर्शन करने वाले नहीं हैं क्योंकि उनके मन में मान का अभाव है। हमारे मन में एक पोशाक धुली हुई होने पर भी रोज़ नई पोशाक पहन कर लोगों को दिखाने का भाव होता है ताकि हमारे मान की पुष्टि हो सके, वरना लोग क्या कहेंगे कि क्या इसके पास केवल एक ही पोशाक है, जो यह प्रतिदिन उसे ही पहन कर आ जाता है। उनकी...