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बर्थडे गिफ्ट

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 बर्थडे गिफ्ट Image by Veronika Andrews from Pixabay चारों ओर यही आवाज़ गूंज रही थी - ‘हैप्पी बर्थडे टू यू, राजू!!’ आज राजू कितना प्रसन्न है। आज केक कटेगा, मिठाई खाएंगे। आज का हीरो तो मैं ही होऊँगा। मम्मी आज मुझे कैमरा देगी। पापा स्कूटर दिलाएंगे और सभी रंग-बिरंगे उपहार देंगे। अभी जन्मदिन का समारोह चल ही रहा था कि राजू की दृष्टि दूर खड़े अपने मित्र चक्रेश पर पड़ गई, जो उसके पास आने में झिझक महसूस कर रहा था, क्योंकि वह बहुत गरीब था। ऐसी शानदार पार्टी में वह कभी गया नहीं था। राजू ने देखा कि चक्रेश वही गरम कोट पहने हुए था, जो उसने आज सुबह ही उसे दिया था, जब वह कड़कड़ाती ठंड में केवल एक कच्छा और बनियान पहने सरकारी नल पर पानी भर रहा था। राजू की मम्मी ने भी चक्रेश को गर्म कोट पहने देखा। वह एकदम आपे से बाहर हो गई - ‘राजू! तुम जानते हो न! यह कोट कितने में बना था? पूरे 1000 रुपए लगे थे। तुमने यह कोट उसे क्यों दिया?’ राजू ने कहा - ‘मम्मी! मेरे पास तो कई कोट हैं। यह पुराना भी हो गया था और वह जाड़े में कंपकंपा रहा था। इसलिए मैंने....।’ राजू हकलाते हुए बोला। मम्मी ने कहा - ‘कई कोट थे ...

अपने तो अपने होते हैं

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अपने तो अपने होते हैं Image by Teodor Buhl from Pixabay अशोक हॉस्पिटल के एक वार्ड में माथा पकड़े बैठा था। उसकी गोद में एक साल की बेटी सो रही थी। तीन साल का बेटा उसकी बांह पकड़े खड़ा था। पास में ही उसकी पत्नी बैड पर लेटी हुई थी। पत्नी को बीमार हुए एक महीना हो गया था, मगर अभी भी वह गंभीर रूप से बीमार थी। पत्नी बी.पी. लो होने के कारण बेहोश हो गई थी। हॉस्पिटल लाने के दो दिन बाद उसे होश आया था। मगर इतनी देर तक बी.पी. लो रहने के कारण हार्ट, फेफड़े, किडनी और अन्य अंगों का बुरा हाल हो गया था। इलाज चल रहा था मगर सुधार बहुत धीरे हो रहा था। वह एक महीने से बीमार बीवी और दो छोटे बच्चों को अकेला सम्भाल रहा था। वह पिछले चार दिनों से नहाया भी नहीं था। उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह कहीं अकेला बैठकर रोना चाहता था। शुरू में कुछ यार-दोस्त और मोहल्ले के कुछ लोग मिलने आये थे। उसके बाद तो लोगों ने फोन उठाना भी बन्द कर दिया था कि वह कहीं पैसे न मांग ले। शहर में वह ज्यादा लोगों को जानता भी नहीं था, क्योंकि तीन साल पहले वह माँ-बाप और भाई-भाभियों से लड़कर इस शहर में आया था। तभी से बीवी-बच्चों के ...

भक्त चरित्र

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 भक्त चरित्र Image by Karsten Paulick from Pixabay जब भगवान रात में राशन खरीदने आए। श्री अयोध्या जी में ‘कनक भवन’ एवं ‘हनुमानगढ़ी’ के बीच में एक आश्रम है, जिसे ‘बड़ी जगह’ अथवा ‘दशरथ महल’ के नाम से जाना जाता है। काफी पहले वहाँ एक संत रहा करते थे, जिनका नाम था श्री रामप्रसाद जी। उस समय अयोध्या जी में इतनी भीड़-भाड़ नहीं होती थी। ज्यादा लोग नहीं आते थे। श्री रामप्रसाद जी ही उस समय ‘बड़ी जगह’ के कर्ता धर्ता थे। वहाँ बड़ी जगह में मन्दिर है, जिसमें पत्नियों सहित चारों भाईयों (श्री राम, श्री लक्ष्मण, श्री भरत एवं श्री शत्रुघ्न जी) एवं हनुमान जी की सेवा होती है। चूँकि सब के सब फक्कड़ सन्त थे, तो नित्य मन्दिर में जो भी थोड़ा बहुत चढ़ावा आता था, उसी से मन्दिर एवं आश्रम का खर्च चला करता था। प्रतिदिन मन्दिर में आने वाला सारा चढ़ावा एक बनिए को (जिसका नाम था पलटू बनिया) भिजवाया जाता था। उसी धन से थोड़ा बहुत जो भी राशन आता था, उसी का भोग-प्रसाद बनाकर भगवान को भोग लगता था और जो भी सन्त आश्रम में रहते थे, वे खाते थे। एक बार प्रभु की ऐसी लीला हुई कि मन्दिर में कुछ चढ़ावा आया ही नहीं। अब इन साधु...

एक साधु की रोचक गाथा

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 एक साधु की रोचक गाथा Image by Ruslan Sikunov from Pixabay एक बार की बात है। किसी गाँव में एक पंडित जी रहते थे। वैसे तो पंडित जी को वेदों और शास्त्रों का बहुत ज्ञान था, लेकिन वह बहुत ग़रीब थे। न ही रहने के लिए अच्छा घर था और न ही अच्छे भोजन के लिए पैसे। एक छोटी सी झोपड़ी थी, उसी में रहते थे और भिक्षा माँगकर जो मिल जाता, उसी से अपना जीवन यापन करते थे। एक बार वह पास के किसी गाँव में भिक्षा माँगने गये, उस समय उनके कपड़े बहुत गंदे थे और काफ़ी जगह से फट भी गये थे। जब उन्होंने एक घर का दरवाजा खटखटाया, तो सामने से एक व्यक्ति बाहर आया। उसने जब पंडित को फटे-चिथड़े कपड़ों में देखा, तो उसका मन घृणा से भर गया और उसने पंडित को धक्के मारकर घर से निकाल दिया। बोला - “पता नहीं कहाँ से गंदा पागल चला आया है?” पंडित जी दुःखी मन से वापस चले आये। जब अपने घर वापस लौट रहे थे, तो किसी अमीर आदमी की नज़र पंडित जी के फटे कपड़ों पर पड़ी तो उसने दया दिखाई और पंडित जी को भोजन और पहनने के लिए नये कपड़े दे दिए। अगले दिन पंडित जी फिर से उसी गाँव में उसी व्यक्ति के पास भिक्षा माँगने गये। व्यक्ति ने नये कपड़ों ...

क्या हम पूर्ण सुखी हैं?

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 क्या हम पूर्ण सुखी हैं? Image by Ulrike Mai from Pixabay पुराने समय में एक राजा था। राजा के पास सभी सुख-सुविधाएं थी और असंख्य सेवक-सेविकाएं हर समय उनकी सेवा में उपलब्ध रहते थे। उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी। फिर भी राजा अपने जीवन में सुखी नहीं था, क्योंकि वह अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी परेशान रहता था। वह सदा बीमारियों से घिरा रहता था। राजा का उपचार सभी बड़े-बड़े वैद्यों द्वारा किया गया, परंतु राजा को स्वस्थ नहीं कर सके। समय के साथ राजा की बीमारी बढ़ती जा रही थी। इतने अच्छे राजा की बढ़ती हुई बीमारी से राजदरबार चिंतित हो गया। राजा की बीमारी दूर करने के लिए दरबारियों द्वारा नगर में ऐलान करवा दिया गया कि जो भी राजा का स्वास्थ्य ठीक करेगा, उसे असंख्य स्वर्ण मोहरें दी जाएंगी। यह सुनकर एक वृद्ध राजा का इलाज करने राजा के महल में गया। वृद्ध ने राजा के पास आकर कहा - ‘महाराज! आप आज्ञा दें, तो आपकी बीमारी का इलाज मैं कर सकता हूँ।’ राजा की आज्ञा पाकर वह बोला - ‘आप किसी पूर्ण सुखी मनुष्य के वस्त्र पहनिए, आप अवश्य स्वस्थ और सुखी हो जाएंगे।’ वृद्ध की बात सुनकर राजा के सभी मंत्री और ...