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Showing posts from March, 2026

world is duel in its nature.

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  दुनिया में हर वस्तु का पक्ष और विपक्ष होता है, दुनिया प्रकृति से ही द्विसूचक होती है।     There are pros and cons in every thing of the world, world is duel in its nature. यह संसार की परिभाषा है कि वह प्रकृति से ही द्वैत है अर्थात् हर बात के दो पहलू हैं जैसे-दिन-रात, जीवन-मृत्यु, गर्मी-सर्दी, नर-मादा, जवान-बूढ़ा, ख़ुशी-ग़म, सुख-दुःख, संयोग-वियोग। ये दोनों पहलू एक दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते। ये सांसारिक वस्तुओं की प्रकृति से ही निर्मित हुए हैं। ये एक सिक्के के दो पहलू हैं। इससे यह निष्कर्ष  निकलता है कि कोई वस्तु जो तुम्हें ख़ुशी देती है, वह दुःख भी अवश्य देगी। कोई व्यक्ति या वस्तु, जिसके साथ तुम्हारा संयोग हुआ है, उसका वियोग भी अवश्य होगा या तुम्हें लाभ हुआ है तो तुम्हें कभी न कभी हानि भी सहन करनी होगी। अंधेरा और रोशनी  एक गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था। उसके पास एक ही घोड़ा था। एक दिन, उसका घोड़ा जंगल में भाग गया।  गाँव वाले आए और बोले, “यह तो बहुत बुरा हुआ!“ किसान ने शांत भाव से कहा, “पता नहीं, क्या अच्छा है और क्या बुरा।“ अगले दिन, उसका घोड़ा वापस आ...

Be honest.

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  अपने कामों के प्रति ईमानदार, सत्यवादी और मार्मिक रहो। Be honest, truthful and righteous in your dealings. यह दैवीय नियम याद रखो-सत्य कभी गिरता नहीं और झूठ कभी टिकता नहीं। अस्थाई रूप से चाहे तुम असत्य की चकाचौंध से मुग्ध हो जाओ और बेईमानी से मोहित हो जाओ लेकिन अन्त में सत्य ही सफल होता है और जीतता है। सत्य की नाव जीवन की कठिनाइयों में डगमगा सकती है पर डूब नहीं सकती। झूठ, बेईमानी या धोखेबाजी के प्रभाव से किया गया बुरा काम उस व्यक्ति पर अवश्य ही विरुद्ध प्रतिक्रिया करता है, जहां से उस बुरे काम का जन्म होता है। हमारे अच्छे कामों का परिणाम ईनाम द्वारा और बुरे कामों का फल अनिवार्य रूप से दंड के रूप में अवश्य मिलता है। एक छोटे से गाँव में राम नाम का एक लड़का रहता था। राम बहुत ही ईमानदार और मेहनती था। वह हमेशा सच बोलता और अपने काम में पूरी निष्ठा रखता था। गाँव के लोग उसे बहुत पसंद करते थे क्योंकि वह कभी झूठ नहीं बोलता था और हमेशा दूसरों की मदद करता था। एक दिन गाँव में एक बड़ी समस्या आई, जब किसी ने अपनी फसल की चोरी की घटना की शिकायत की। सभी लोग परेशान थे कि चोर कौन हो सकता है। राम जानता था ...

Avoid suspicius, doubts; have faith.

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  शक और अविश्वास को दूर करो, विश्वास करना सीखो। Avoid suspicius, doubts; have faith. दूसरों को शक और अविश्वास की दृष्टि से न देखो। अपने विचारों को इस पक्षपात से आरम्भ न करो कि दूसरा व्यक्ति धोखेबाज़ है और निश्चय ही तुम्हें धोखा देगा व लूट लेगा। विश्वास रखो, यदि कोई तुम्हें धोखा देता है, वह वास्तव में पहले अपने आप को धोखा दे रहा है। जो हानि उसने तुम्हें पहुँचाई है, वह उस कार्य से ‘कर्मों’ के नियम के अनुसार तुमसे भी अधिक दुःखी होगा।  अंधेरे का भ्रम गाँव में रमन और श्याम नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। रमन की आर्थिक स्थिति श्याम से बेहतर थी। एक दिन, रमन का कीमती पेन खो गया। उसे शक हुआ कि उसके घर आए श्याम ने ही पेन चुराया है। इस शक के कारण रमन ने श्याम से बातचीत बंद कर दी और उसका व्यवहार रूखा हो गया। श्याम परेशान था, लेकिन उसने रमन से इसका कारण पूछा। रमन ने हिचकिचाते हुए कहा, “कल तुम आए थे और उसके बाद से मेरा पेन गायब है।“ श्याम मुस्कुराया और बोला, “दोस्त, क्या शक करना भरोसे से बड़ा है? याद है, जब कल तुम मेरे घर आए थे, तब वह पेन तुम्हारे हाथ में था।“ वह रमन को अपने घर ले गया और उसने ...

Take initiative in setting things right.

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  अव्यवस्थाओं को ठीक तरह व्यवस्थित करने की पहल करो।   Take initiative in setting things right. बहुत से लोग विभिन्न अव्यवस्थाओं और समाज की समस्याओं के लिए सरकार या लोगों को कोसने लगते हैं लेकिन वे अपनी ओर से इन अव्यवस्थाओं को नियंत्रित करने में कोई योगदान नहीं देते। केवल दूसरों को कोसने से कोई मदद नहीं करेगा। अपने क्षेत्र की समाजसेवी संस्थाओं की मदद से अपने क्षेत्र में विकास के काम किए जा सकते हें। बदलाव की पहल राजीव का कमरा किसी कबाड़खाने से कम नहीं था। किताबें मेज पर, कपड़े बिस्तर पर, और ज़रूरी कागज़ात कहीं फर्श के किसी कोने में। वह अक्सर अपनी ज़रूरी चीज़ें समय पर नहीं ढूँढ पाता था, जिससे उसका काम पेंडिंग रहता और तनाव बढ़ता। एक दिन इंटरव्यू के लिए निकलते समय, वह अपना महत्वपूर्ण दस्तावेज़ (Documents) नहीं ढूँढ पाया। खीझकर उसने अपनी माँ से कहा, “पता नहीं ये सब चीज़ें कहाँ गायब हो जाती हैं!“ माँ ने शांत स्वर में कहा, “अव्यवस्था को व्यवस्थित करो, राजीव। घर नहीं, पहले अपने काम करने के तरीके को बदलो।“ माँ की बात राजीव को चुभ गई। उसने ठान लिया कि अब और नहीं। अगले दिन, उसने एक योजना बनाईः पहच...