Take initiative in setting things right.

 अव्यवस्थाओं को ठीक तरह व्यवस्थित करने की पहल करो।
 Take initiative in setting things right.

बहुत से लोग विभिन्न अव्यवस्थाओं और समाज की समस्याओं के लिए सरकार या लोगों को कोसने लगते हैं लेकिन वे अपनी ओर से इन अव्यवस्थाओं को नियंत्रित करने में कोई योगदान नहीं देते। केवल दूसरों को कोसने से कोई मदद नहीं करेगा। अपने क्षेत्र की समाजसेवी संस्थाओं की मदद से अपने क्षेत्र में विकास के काम किए जा सकते हें।

बदलाव की पहल

राजीव का कमरा किसी कबाड़खाने से कम नहीं था। किताबें मेज पर, कपड़े बिस्तर पर, और ज़रूरी कागज़ात कहीं फर्श के किसी कोने में। वह अक्सर अपनी ज़रूरी चीज़ें समय पर नहीं ढूँढ पाता था, जिससे उसका काम पेंडिंग रहता और तनाव बढ़ता।

एक दिन इंटरव्यू के लिए निकलते समय, वह अपना महत्वपूर्ण दस्तावेज़ (Documents) नहीं ढूँढ पाया। खीझकर उसने अपनी माँ से कहा, “पता नहीं ये सब चीज़ें कहाँ गायब हो जाती हैं!“

माँ ने शांत स्वर में कहा, “अव्यवस्था को व्यवस्थित करो, राजीव। घर नहीं, पहले अपने काम करने के तरीके को बदलो।“

माँ की बात राजीव को चुभ गई। उसने ठान लिया कि अब और नहीं।

अगले दिन, उसने एक योजना बनाईः

पहचानः जो चीज़ जहाँ की है, उसे वहीं रखने का नियम।

छँटाईः अनावश्यक चीज़ों को हटाना (Decluttering)।

क्रमः हर चीज़ के लिए एक जगह तय की।

उसने मेज को साफ किया, कपड़ों को अलमारी में रखा, और कागज़ों को फाइल में लगाया।

हफ़्ते भर बाद, राजीव का कमरा ही नहीं, उसका जीवन भी व्यवस्थित हो गया। अब उसे कोई भी चीज़ ढूँढने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ता था। उसने महसूस किया कि अव्यवस्था केवल वस्तुओं की नहीं, बल्कि अव्यवस्थित विचारों की भी होती है।

सीखः छोटी-सी अव्यवस्था जब दूर की जाती है, तो काम आसान हो जाता है और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। कुछ लोग सोचते हैं कि समाज की सांझी समस्याओं के लिए केवल उन्हें ही क्यों पहल करनी चाहिए। यह मन की  संकीर्णता है कि तुम्हें केवल उन बातों के लिए ही परेशान होना चाहिए जिनसे प्रत्यक्ष रूप से तुम्हें लाभ मिले। प्रत्येक व्यक्ति के लाभ के लिए सोचने की चेतना का विस्तार करो। आख़िरकार यदि सारे समाज को लाभ मिलेगा, तो तुम भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित ही होंगे। इसलिए ओरों के द्वारा आरम्भ करने की प्रतीक्षा मत करो। अपने क्षेत्र की

सफ़ाई-व्यवस्था, पार्कों इत्यादि के रख-रखाव आदि की ओर भी ध्यान दिया जा सकता है।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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