समस्या
समस्या
हर किसी के पास समस्याओं को सुलझाने के अपने-अपने तरीके होते हैं...!!
एक पुराने खंडहर के बीच से भेड़ों का झुंड रास्ता पार कर रहा था। टूटी दीवारें, बिखरे पत्थर, और बीच रास्ते में एक रस्सी बंधी हुई। रस्सी बहुत ऊँची नहीं थी… पर इतनी भी छोटी नहीं कि अनदेखी की जा सके।
अब दृश्य दिलचस्प था।
कुछ भेड़ें आईं — बिना ज़्यादा सोचे सीधे रस्सी के ऊपर से फांद गईं। उनका तरीका साफ था —
“रुकना नहीं, बस छलांग लगाओ!”
कुछ दूसरी भेड़ें आईं — उन्होंने झुककर रस्सी के नीचे से निकलना बेहतर समझा।
उनका अंदाज़ अलग था —
“क्यों कूदना? झुको और निकल जाओ।”
तभी दो भेड़ें रुकीं। एक छोटी, दूसरी सबसे सीनियर ।
छोटी भेड़ ने रस्सी को देखा, सीनियर भेड़ को निहारा… समझा…और फिर अपने सिर से उसे किनारे खिसका दिया।
रस्सी हट गई। अब रास्ता सबके लिए खुल गया।
सबसे अंत में वह बुजुर्ग, सीनियर भेड़ आई। न उसने छलांग लगाई… न झुककर निकली… न रस्सी हटाई…
वह आराम से सीधे चलती हुई पार हो गई — क्योंकि समस्या अब थी ही नहीं।
अब प्रसंग को समझे
यही जीवन है।
* कुछ लोग हर मुश्किल को ताकत से पार करते हैं।
* कुछ लोग लचीलापन अपनाते हैं।
* कुछ लोग समस्या की जड़ को ही हटा देते हैं।
और
* कुछ लोग अनुभव से इंतज़ार करते हैं —क्योंकि उन्हें पता है, हर बाधा स्थायी नहीं होती।
सवाल यह नहीं कि तरीका कौन सा सही है।
सवाल यह है कि आप परिस्थिति को समझकर कौन सा तरीका चुनते हैं।
हर किसी का दिमाग अलग, अनुभव अलग, साहस अलग।
इसलिए हर समस्या का हल भी अलग।
और कभी-कभी…सबसे समझदार वही होता है, जो जानता है —
* कब कूदना है,
* कब झुकना है,
और
* कब बस धैर्य से आगे बढ़ जाना है।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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