चिड़िया से सीख

  चिड़िया से सीख


बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी..जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था।

चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए, लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था।..

चिड़िया गाती हुई उड़ने लगी - 

मेरा दाना पेड़ ने रख लिया।

पेड़ दाना देवे ना।

दाना तो मैं लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वह उसका दाना नहीं दे रहा...।

भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था......

चिड़िया गाती हुई उड़ने लगी - 

मेरा दाना पेड़ ने रख लिया।

पेड़ दाना देवे ना।

बढ़ई पेड़ काटे ना।

दाना तो मैं लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो, क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा...।

राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है। चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी...।

चिड़िया गाती हुई उड़ने लगी - 

मेरा दाना पेड़ ने रख लिया।

पेड़ दाना देवे ना।

बढ़ई पेड़ काटे ना।

राजा बढ़ई को सजा देवे ना।

दाना तो मैं लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

वह महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा, तो तुम उसे गिरा देना,क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता..बढ़ई पेड़ नहीं काटता...पेड़ उसका दाना नहीं देता..महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया...।

चिड़िया गाती हुई उड़ने लगी - 

मेरा दाना पेड़ ने रख लिया।

पेड़ दाना देवे ना।

बढ़ई पेड़ काटे ना।

राजा बढ़ई को सजा देवे ना।

महावत राजा को गिरावे ना।

दाना तो मैं लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वह राजा को गिराने को तैयार नहीं...।

महावत राजा को गिराने को तैयार नहीं, राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं...बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं...पेड़ दाना देने को राजी नहीं।

अब हाथी तो चिडिया की बात सुन कर ़िबगड़ गया... उसने कहा - ऐ छोटी चिड़िया..तू इतनी सी बात के लिए मुझे महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है?

चिड़िया गाती हुई उड़ने लगी - 

मेरा दाना पेड़ ने रख लिया।

पेड़ दाना देवे ना।

बढ़ई पेड़ काटे ना।

राजा बढ़ई को सजा देवे ना।

महावत राजा को गिरावे ना।

हाथी महावत को गिरावे ना।

दाना तो मैं लेऊँगी, पर छोड़ूँ ना।

चिड़िया आखिर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहरा कर कहा कि तुम हाथी की सूंड़ में घुस जाओ...चींटी ने चिड़िया से कहा, ‘चल भाग यहां से...बड़ी आई हाथी की सूड़ में घुसने को बोलने वाली।’

अब तक अनुरोध की मुद्रा में रही चिड़िया ने रौद्र रूप धारण कर लिया...उसने कहा कि ‘मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं...पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ...’

चींटी डर गई...भाग कर वह हाथी के पास गई - हाथी! हाथी! महावत को गिरा दो, वरना मैं तुम्हारी सूंड में घुस जाऊँगी।......हाथी भागता हुआ महावत के पास पहुंचा - तुम राजा को मुझ पर बैठने न दो, वरना मैं तुझे गिरा दूँगा। महावत राजा के पास गया और बोला कि हुजूर! चिड़िया का काम कर दीजिए, नहीं तो मैं आपको गिरा दूंगा....राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया और उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो तुम्हें सजा दूंगा.......बढ़ई पेड़ के पास कुल्हाड़ी लेकर पहुंचा.......बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो., मुझे मत काटो। मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा.........!! पेड़ ने कंदरे को चौड़ा किया और चिड़िया का दाना उसे मिल गया।

चिड़िया भी दाना लेकर गाती हुई उड़ गई -

मैंने अपना दाना ले लिया, पर छोड़ा नही।

निष्कर्ष

आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा...आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी-सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी...हर सेर को सवा सेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं...

आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे, तो वह काम होकर रहेगा यकीन कीजिए. हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं. हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..!!      

बड़े सपनो को सच करने वाले हर व्यक्ति को सफलता और असफलता के कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है!

पहले लोग मजाक उड़ाएंगे, फिर लोग साथ छोड़ेंगे, फिर विरोध करेंगे फिर वही लोग कहेंगे कि हम तो पहले से ही जानते थे कि एक न एक दिन तुम कुछ बड़ा अवश्य करोगे!

रख हौंसला वो मंजर भी आयेगा,

प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..!

थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफिर 

मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा!!

              द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद

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