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समृद्ध बनाने का पवित्र मंत्र

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 समृद्ध बनाने का पवित्र मंत्र Photo by Francesco Ungaro from Pexels एक गरीब औरत एक साधु के पास गई, “स्वामी जी! कोई ऐसा पवित्र मन्त्र लिख दीजिये जिससे मेरे बच्चों का रात को भूख से रोना बन्द हो जाये।” साधु ने कुछ पल एकटक आकाश की ओर देखा फिर अपनी कुटिया में अन्दर गया और एक पीले कपड़े पर एक मन्त्र लिखकर उसे ताबीज की तरह लपेट-बाँधकर उस महिला को दे दिया। साधु ने कहा, “इस मन्त्र को घर में उस जगह रखना, जहाँ अपनी नेक कमाई का धन रखती हो।” महिला खुश होकर चली गई। ईश्वर की कृपा से उस दिन उसके पति की आमदनी ठीक हुई और बच्चों को भोजन मिल गया। रात शान्ति से कट गई। अगले रोज़ भोर में ही उन्हें पैसों से भरी एक थैली घर के आंगन में मिली। थैली में धन के अलावा एक पर्चा भी निकला, जिस पर लिखा था, कोई कारोबार कर लें। इस बात पर अमल करते हुए उस औरत के पति ने एक छोटी सी दुकान किराए पर ले ली और काम शुरू किया। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा, तो दुकानें भी बढ़ती गई। जैसे पैसों की बारिश सी होने लगी। पति की कमाई तिजोरी में रखते समय एक दिन उस महिला की नज़र उस मन्त्र लिखे कपड़े पर पड़ी। “न जाने, साधु महाराज न...

सुख की तलाश

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सुख की तलाश Photo by Dianne from Pexels हफ़ीज अफ्रीका का एक़ किसान था। खेती करता और जो ईश्वर इच्छा से प्राप्त हो जाता, रब का शुक्रिया किया करता। वह अपनी ज़िन्दगी से ख़ुश और सन्तुष्ट था। अफ्रीका में हर जगह हीरे की खदानें थी। जहां से लोग हीरे तलाश कर दुनिया भर में बेचते और धनवान होते जाते। पर हफीज अपनी मेहनत से जो बन पड़ता, अपना और अपने परिवार के लिये पूर्ण पाता और उसमें ही अपने परिवार के साथ खुशी से सुख पूर्वक गुज़र बसर करता। एक दिन हफीज का एक रिश्तेदार उसके घर पर आया। वह हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी था। उसने हफीज को अफ्रीका में रहते हुये इस तरह गरीबी में रहते देखा तो उसे समझाने लगा - तुम हीरों का काम करो! जितनी मेहनत तुम खेती में करते हो, उसके मुकाबले में कमाते ज़रूरत भर हो। अगर इतनी मेहनत तुम हीरे ढूंढने में लगाओ तो कहाँ से कहाँ पहुँच जाओगे। छोटे से छोटा हीरा भी बेशकीमती होता है और अगर कहीं अपने अंगूठे भर का भी हीरा पा लो तो तुम एक पूरा शहर खरीद सकते हो। और कहीं मुट्ठी भर हीरा मिल जाये तो पूरा अफ्रीका तुम्हारा होगा। सोचो क्या सुख नहीं होगा तुम्हारे पास। हर सुख और ...

मेरे साथ, मेरा क्या जाएगा

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मेरे साथ, मेरा क्या जाएगा Photo by Jess Bailey Designs from Pexels अपने अन्तर्मन में झाँके। एक विद्वान साधु थे जो दुनियादारी से दूर रहते थे। वह अपनी ईमानदारी, सेवा तथा ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार वह पानी के जहाज से लंबी यात्रा पर निकले। उन्होंने यात्रा में खर्च के लिए पर्याप्त धन तथा एक हीरा संभाल कर रख लिया। ये हीरा किसी राजा ने उन्हें उनकी ईमानदारी से प्रसन्न होकर भेंट किया था सो वे उसे अपने पास न रखकर किसी अन्य योग्य राजा को देने के लिए ही यह यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान साधु की पहचान दूसरे यात्रियों से हुई। वे उन्हें ज्ञान की बातें बताते गए। एक फ़क़ीर यात्री ने उन्हें नीचा दिखाने की मंशा से नजदीकियां बढ़ा ली। एक दिन बातों-बातों में साधु ने उसे विश्वासपात्र ‘अल्लाह का बन्दा’ समझकर हीरे की झलक भी दिखा दी। उस फ़क़ीर को और लालच आ गया। उसने उस हीरे को हथियाने की योजना बनाई। रात को जब साधु सो गया तो उसने उसके झोले तथा उसके वस्त्रों में हीरा ढूंढा पर उसे नहीं मिला। अगले दिन उसने दोपहर के भोजन के समय साधु से कहा कि इतना कीमती हीरा है। आपने संभाल कर रखा है न!...

अनमोल उपहार

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अनमोल उपहार Image by Manfred Richter from Pixabay पापा जी.... पापा जी.... आपसे कुछ पूछूं ? हां मेरी प्यारी-सी राजकुमारी! पूछो। आप रोज रात में इतनी देरी से क्यों आते हो ? मैं और आराध्या दोनों सो जाती हैं। हम दोनों बहनों का बड़ा मन होता है कि हम भी परी और शानू की तरह अपने पापा के साथ खेलें। छः वर्षीय आध्या ने अपने पापा मोहनबाबू के गालों को चूमते हुए पूछा। बिटिया मन तो मेरा भी करता है आप दोनों के साथ खेलने का। मगर क्या करूँ ? मजबूरी ऐसी है कि.... मजबूरी! कैसी मजबूरी पापा जी! पांच वर्षीय आराध्या भी मोहनबाबू के गले लगकर बडे प्यार से बोली। अच्छा! तो आपको भी जानना है। बेटा, मेरी फैक्ट्री हमारे घर से बहुत दूर है। वहाँ से पैदल आता हूँ न! तो पापाजी आप भी एक साईकिल ले लो न! शानू के पापा की तरह। वो ट्रिन-ट्रिन करते हुए आते हैं। अच्छा मेरी बेटियों! ले लूँगा जब पैसे इकट्ठे हो जाएंगे। जाओ, अब तुम दोनों जाकर खेलो। आध्या .... आराध्या .... चलो, अपने पापा को सोने दो बेटा। आज रविवार का ही तो दिन मिलता है उन्हें। चलो शाबाश। बाहर खेलो। सुधा दोनों बेटियों से बोली। दोनों मुँह बनाते हुए ...

संतान के लिए विरासत

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 संतान के लिए विरासत Image by Jörg Möller from Pixabay मृत्यु के समय टॉम स्मिथ ने अपने बच्चों को बुलाया, और अपने पद चिह्नों पर चलने की सलाह दी, ताकि उनको अपने हर कार्य में मानसिक शाँति मिले। उसकी बेटी सारा ने कहा - डैडी! यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप अपने बैंक में एक पैसा भी छोड़े बिना मर रहे हैं। यह घर भी जिसमें हम रहते हैं, किराये का है। Sorry . ... मैं आपका अनुसरण नहीं कर सकती। कुछ क्षण बाद उसके पिता ने अपने प्राण त्याग दिये। तीन साल बाद सारा एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में इंटरव्यू देने गई। इंटरव्यू में कमेटी के चेयरमैन को सारा ने उत्तर दिया - मैं सारा स्मिथ हूँ। मेरे पिता टॉम स्मिथ अब नहीं रहे। चेयरमैन, कमेटी के अन्य सदस्यों की ओर घूमकर बोले - यह आदमी स्मिथ वह था, जिसने प्रशासकों के संस्थान में मेरे सदस्यता फार्म पर हस्ताक्षर किये थे, और उसकी सिफारिश से ही मैं वह स्थान पा सका हूँ, जहाँ मैं आज हूँ। उसने यह सब, कुछ भी बदले में लिये बिना किया था। फिर वे सारा की ओर मुड़े, मुझे तुमसे कोई सवाल नहीं पूछना। तुम स्वयं को इस पद पर चुना हुआ मान लो। कल आना। तुम्हारा नियुक्ति पत्र...