हम बदलेंगे, युग बदलेगा
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 हम बदलेंगे, युग बदलेगा Image by Couleur from Pixabay रंजना सिलाई मशीन के सामने बैठी कपड़े काट रही थी। साथ ही बड़बड़ाये जा रही थी - उफ़! ये कैंची तो किसी काम की नहीं रही। बित्ता भर कपड़ा काटने में ही उँगलियाँ दुःखने लगी हैं। पता नहीं वह सोहन ग्राइंडिंग वाला कहाँ चला गया ? हर महीने आया करता था तो कॉलोनी भर के लोगों के चाकू-कैंची पर धार चढ़ा जाता था। वह भी सिर्फ चंद पैसों में। सोहन एक ग्राइंडिंग करने वाला यही कोई 20-25 साल का एक युवक था, बहुत ही मेहनती और मृदुभाषी। चेहरे पर उसके हमेशा पसीने की बूंदें झिलमिलाती रहती लेकिन साथ ही मुस्कुराहट भी खिली रहती। जब कभी वह कॉलोनी में आता तो किसी पेड़ के नीचे अपनी विशेष प्रकार की साइकिल को स्टैंड पर खड़ा करता। जिसमें एक पत्थर की ग्राइंडिंग व्हील लगी हुई थी और सीट पर बैठ कर पैडल चला कर घुमाते हुए पत्थर की व्हील पर रगड़ देकर चाक़ू और कैंचियों की धार तेज कर देता। इसी बहाने कॉलोनी की महिलाएं वहाँ इकठ्ठा हो कर आपस में बातें किया करती। जब वह नाचती हुई ग्राइंडिंग व्हील पर कोई चाकू या कैंची रखता तो उससे फुलझड़ी की तरह चिंगारियां निकलती, जिसे बच्...