Posts

स्त्रियों का सम्मान करें

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 स्त्रियों का सम्मान करें Image by David Mark from Pixabay क्या आप ऐसा मानते हैं कि स्त्रियों में भी आत्मा होती है? और क्या आप ऐसा भी मानते हैं कि दुःख-सुख का अनुभव करने की जैसी भावना पुरुषों में होती है, वैसी ही स्त्रियों में भी होती है? यदि हाँ, तो ज़रा विचार करें कि जब पुरुष लोग सम्मान चाहते हैं तो क्या स्त्रियाँ सम्मान नहीं चाहेंगी? देखने में तो यही आता है कि जैसे पुरुष सुख चाहते हैं वैसे ही स्त्रियाँ भी सुख चाहती हैं। जैसे पुरुष दुःख नहीं चाहते, ऐसे ही स्त्रियाँ भी दुःख नहीं चाहती। इस व्यवहार से यह पता चलता है कि पुरुषों और स्त्रियों में एक जैसी ही आत्मा होती है। बल्कि पशु-पक्षी आदि सभी प्राणियों में एक जैसी ही आत्मा होती है, क्योंकि वे सब प्राणी भी सुख ही चाहते हैं। दुःख तो कोई भी नहीं चाहता। अस्तु। जब पुरुष लोग विवाह कर लेते हैं, तब विवाह से पूर्व तो वे स्त्रियों का बहुत सम्मान करते हैं, परंतु विवाह करने के बाद वह बात नहीं रहती। फिर तो वे स्त्रियों को अपनी संपत्ति समझ कर उनके साथ चाहे जैसा व्यवहार करने लगते हैं। ऐसा करना उचित नहीं है। विवाह के बाद स्त्रियाँ, ...

मिट्टी का दिल

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मिट्टी का दिल Image by Carl from Pixabay पंकज एक गुस्सैल लड़का था। वह छोटी-छोटी बात पर नाराज़ हो जाता और दूसरों से झगड़ा कर बैठता। उसकी इसी आदत की वजह से उसके अधिक दोस्त भी न थे। पंकज के माता-पिता और सगे-सम्बन्धी उसे अपना स्वभाव बदलने के लिए बहुत समझाते पर इन बातों का उस पर कोई असर नहीं होता। एक दिन पंकज के पेरेंट्स को शहर के करीब ही किसी गाँव में रहने वाले एक संन्यासी बाबा का पता चला जो अजीबो-गरीब तरीकों से लोगों की समस्याएं दूर किया करता था। अगले दिन सुबह-सुबह वे पंकज को बाबा के पास ले गए। बाबा बोले, “जाओ और चिकनी मिट्टी के दो ढेर तैयार करो।” पंकज को ये बात कुछ अजीब लगी लेकिन माता-पिता के डर से वह ऐसा करने को तैयार हो गया। कुछ ही देर में उसने ढेर तैयार कर लिया। बाबा बोले, “अब इन दोनों ढेरों से दो दिल तैयार करो।” पंकज ने जल्द ही मिट्टी के दो हार्ट शेप तैयार कर लिए और झुंझलाते हुए बोला, “हो गया बाबा, क्या अब मैं अपने घर जा सकता हूँ?” बाबा ने उसे इशारे से मना किया और मुस्कुरा कर बोले, “अब इनमें से एक को कुम्हार के पास लेकर जाओ और कहो कि वो इसे भट्ठी में डाल कर पका दे।...

सुधार और दुलार

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सुधार और दुलार Image by KBCH from Pixabay एक आंख सुधार की, एक आंख दुलार की। मिडिल क्लास फैमिली में पली-बढ़ी खुशबू अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा गुस्सा अपने पापा से थी। पापा के लिए उसके मन में नफरत के अलावा कुछ न था। 22 साल की हो चुकी खुशबू ने आज तक एक भी वेलेंटाइन डे नहीं मनाया था, जबकि उसकी क्लास मेट्स हर साल अलग-अलग बॉयज के साथ वेलेंटाइन डे मनाती थी। खैर! आज खुशबू की आग्नेय के साथ शादी हो रही थी। शादी के वक़्त वह सबसे ज्यादा खुश थी कि आखिर इस बेहद स्ट्रिक्ट, कड़क और अनुशासन प्रिय पापा से छुटकारा तो मिला। यह न करो, वह न करो। ऐसे कपड़े न पहनो। लेट नाईट पार्टियाँ नहीं। लड़कों से दोस्ती नहीं। आज तक एक स्मार्टफ़ोन तक नहीं खरीद कर दिया पापा ने। सारे सपनों और अरमानों को अपने नैरो माइंडेड सोच के कारण कुचलकर रख दिया था। अब मैं आग्नेय के साथ रह कर अपनी सारी दबी इच्छाएँ पूरी करूँगी। आग्नेय और खुशबू पिछले तीन सालों से एक ही कॉलेज में साथ-साथ पढ़ते थे और एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। एक दूसरे की पसंद-नापसंद का अच्छे से ख्याल रखते थे। खुशबू ने बहुत डरते-डरते पापा से आग्नेय के साथ श...

सुख का स्त्रोत

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सुख का स्त्रोत Image by bess.hamiti@gmail.com from Pixabay एक आदमी संन्यासी के पास गया और धन की याचना की। संन्यासी ने कहा - ‘मेरे पास कुछ भी नहीं है।’ उसने बहुत आग्रह किया तो संन्यासी ने कहा - ‘जाओ! सामने नदी के किनारे एक पत्थर पड़ा है, वह ले आओ।’ वह गया और पत्थर ले आया। संन्यासी ने कहा - ‘यह पारसमणि का पत्थर है। इससे लोहा सोना बन जाता है।’ वह बहुत प्रसन्न हुआ। संन्यासी को प्रणाम कर वह वहाँ से चला। थोड़ी दूर जाने पर उसके मन में एक विकल्प उठा। पारसमणि ही यदि सबसे बढ़िया होती, तो संन्यासी इसे क्यों छोड़ता? हो सकता है कि संन्यासी के पास इससे भी बढ़िया कोई वस्तु है। वह फिर आया और प्रणामकर बोला - बाबा! मुझे यह पारसमणि नहीं चाहिए। आप मुझे वह दो, जिसे पाकर आपने इस पारसमणि को ठुकरा दिया।’ संत उसकी बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें ऐसे ही शिष्य की तलाश थी, जो उनके मार्ग पर उनके साथ चल सके और सुख के सच्चे स्त्रोत को पहचान कर औरों को भी उसका पता बता सके। संत के पास रह कर उसने सुख का वह झरना पा लिया, जिसके सामने दुनिया की सारी दौलत फीकी पड़ने लगी। वह जान गया कि सुख का स्त्रोत संग...

दड़बे की मुर्गी

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 दड़बे की मुर्गी Image by Anna from Pixabay एक शिष्य अपने गुरु के पास पहुँचा और बोला, “लोगों को खुश रहने के लिए क्या चाहिए?” “तुम्हें क्या लगता है?”, गुरु ने शिष्य से खुद इसका उत्तर देने के लिए कहा। शिष्य एक क्षण के लिए सोचने लगा और बोला, “मुझे लगता है कि अगर किसी की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो रही हों.... खाना-पीना मिल जाए.... रहने के लिए जगह हो.... एक अच्छी सी नौकरी या कोई काम हो.... जीवन की सुरक्षा हो.... तो वह खुश रहेगा।” यह सुनकर गुरु कुछ नहीं बोले और शिष्य को अपने पीछे आने का इशारा करते हुए चलने लगे। वे एक दरवाजे के पास जाकर रुके और बोले, “इस दरवाजे को खोलो।” शिष्य ने दरवाजा खोला। सामने मुर्गी का दड़बा था। वहाँ मुर्गियों और चूजों का ढेर लगा हुआ था। वे सभी बडे-बड़े पिंजरों में कैद थे। “आप मुझे ये क्यों दिखा रहे हैं?”, शिष्य ने आश्चर्य से पूछा। इस पर गुरु शिष्य से ही प्रश्न करने लगे - “क्या इन मुर्गियों को खाना मिलता है?” “हाँ।” “क्या इनके पास रहने को घर है?” “हाँ! कह सकते हैं।” “क्या ये यहाँ कुत्ते-बिल्लियों से सुरक्षित हैं?” “हम्म।” “क्या इनके पास कोई काम है?” “हा...

जैसे को तैसा

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 जैसे को तैसा Image by Petra from Pixabay एक बार बड़ी कंपनी के अंदर एक कर्मचारी से एक छोटी-सी गलती हो गई। उस गलती की वजह से कंपनी का थोड़ा सा नुकसान भी हुआ। नुकसान होने की वजह से कंपनी का मालिक मैनेजर पर चिल्लाया। सब के सामने मालिक ने मैनेजर की ऐसी की तैसी कर दी। इस बात का मैनेजर को बहुत ज्यादा गुस्सा आया। मैनेजर गुस्से से लाल-पीला हो गया। मैनेजर सीधा उस कर्मचारी के पास गया जिसने ये गलती की थी। वहाँ जाकर मैनेजर उस कर्मचारी को सबके सामने एक खींच के झापड़ लगाता है। सब ये देख कर हक्के-बक्के रह गए। कर्मचारी बेचारा करता तो क्या करता? उसको भी बहुत गुस्सा आया। उसने घर जाकर अपना गुस्सा अपनी पत्नी पर निकाला। कुछ बात होने पर उसने अपनी पत्नी को खींच कर रैपटा मारा। इस बात का पत्नी को भी बहुत गुस्सा आया।  अपने पति के सामने तो कुछ कर नहीं सकती थी। इसलिए उसने अपना गुस्सा अपने बड़े बेटे के ऊपर निकाला। बड़े बेटे ने अपने छोटे भाई के ऊपर गुस्सा निकाला। अब छोटा बच्चा करता तो क्या करता? उसने अपने खिलौने पर गुस्सा निकाला और उसे ज़ोर से सड़क पर फेंक दिया। वह खिलौना सड़क पर चल रहे कुत्ते को ल...

मयूर पंख

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मयूर पंख Image by 1195798 from Pixabay वनवास के दौरान माता सीता जी को प्यास लगी। तभी श्री राम जी ने चारों ओर देखा, तो उनको दूर-दूर तक जंगल ही जंगल दिख रहा था। कुदरत से प्रार्थना की - हे वन देवता! आसपास जहाँ कहीं पानी हो, वहाँ जाने का मार्ग कृपा कर सुझाइए। तभी वहाँ एक मयूर ने आकर श्री राम जी से कहा कि आगे थोड़ी दूरी पर एक जलाशय है। चलिए मैं आपका पथ प्रदर्शक बनता हूँ, किंतु मार्ग में हमारी भूल-चूक होने की संभावना है। श्री राम जी ने पूछा - वह क्यों? तब मयूर ने उत्तर दिया कि क्योंकि मैं उड़ता हुआ जाऊँगा और आप चलते हुए आएंगे। इस का भी एक उपाय है। मार्ग में मैं अपना एक-एक पंख बिखेरता हुआ जाऊँगा। उस के सहारे आप जलाशय तक पहुँच ही जाओगे। यहाँ पर एक बात स्पष्ट करनी है कि मयूर के पंख एक विशेष समय एवं एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं। अगर वह अपनी इच्छा विरुद्ध पंखों को बिखेरेगा, तो उसकी मृत्यु हो जाती है। और वही हुआ। अंत में जलाशय तक पहुँचते- पहुँचते मयूर के सारे पंख बिखर गए और वह अपनी अंतिम सांस लेने लगा। तब उसने मन में कहा कि वह कितना भाग्यशाली है कि जो जगत की प्यास बुझाते हैं...