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मनुष्य के भाग्य में क्या है?

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मनुष्य के भाग्य में क्या है? Image by -Rita-👩‍🍳 und 📷 mit ❤ from Pixabay एक बार महर्षि नारद बैकुंठ की यात्रा पर जा रहे थे। नारद जी को रास्ते में एक औरत मिली और बोली - मुनिवर! आप प्रायः भगवान नारायण से मिलने जाते हैं। मेरे घर में कोई औलाद नहीं है। आप प्रभु से पूछना कि मेरे घर औलाद कब होगी? नारद जी ने कहा - ठीक है। पूछ लूँगा। इतना कह कर नारदजी ‘नारायण-नारायण’ कहते हुए यात्रा पर चल पड़े। बैकुंठ पहुँच कर नारायण जी ने नारद जी से जब कुशलता पूछी, तो नारद जी बोले - जब मैं आ रहा था तो रास्ते में एक औरत मिली, जिसके घर कोई औलाद नहीं है। उसने मुझे आपसे पूछने को कहा कि उसके घर पर औलाद कब होगी? नारायण बोले - तुम उस औरत को जाकर बोल देना कि उसकी किस्मत में औलाद का सुख नहीं है। नारद जी जब वापिस लौट रहे थे तो वह औरत बहुत बेसब्री से नारद जी का इंतज़ार कर रही थी। औरत ने नारद जी से पूछा कि प्रभु नारायण ने क्या जवाब दिया? इस पर नारद जी ने कहा - प्रभु ने कहा है कि आपके घर कोई औलाद नहीं होगी। यह सुन कर औरत दहाड़ें मार कर रोने लगी। नारद जी चले गये। कुछ समय बीत गया। गाँव में एक योगी आया औ...

अनोखा दोस्त

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अनोखा दोस्त Image by -Rita-👩‍🍳 und 📷 mit ❤ from Pixabay एक कौए और एक किसान में अनोखी दोस्ती थी। कौआ उस किसान के घर के आँगन के पेड़ पर रहता था। किसान रोज़ सुबह उसे खाने के लिए पहले कुछ देकर बाद में खुद खाता था। किसान के खेत में चले जाने के बाद कौआ रोज़ उड़ते-उड़ते ब्रह्मा जी के दरबार तक पहुँचता था और दरबार के बाहर जो नीम का पेड़ था, उस पर बैठकर ब्रह्मा जी की सारी बातें सुना करता था। शाम होते ही कौआ उड़ता हुआ किसान के पास पहुँचता और ब्रह्मा जी के दरबार की सारी बातें उसे सुनाया करता था। एक दिन कौए ने सुना कि ब्रह्मा जी कह रहे हैं कि इस साल बारिश नहीं होगी, अकाल पड़ जायेगा। उसके बाद ब्रह्मा जी ने कहा - “पर पहाड़ों में खूब बारिश होगी।” शाम होते ही कौआ किसान के पास आया और उससे कहा - “इस साल बारिश नहीं होगी। अभी से सोचो क्या किया जाये।” किसान ने खूब चिन्तित होकर कहा - “तुम ही बताओ दोस्त! क्या किया जाये?” कौए ने कहा - “ब्रह्मा जी ने कहा था कि पहाड़ों में ख़ूब बारिश होगी। क्यों न तुम पहाड़ पर खेती की तैयारी करना शुरु करो?” किसान ने उसी वक्त पहाड़ पर खेती की तैयारी की। आस-पास के लोग ...

दुःख का कारण

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 दुःख का कारण Image by ALBERTO MIÑARRO from Pixabay एक व्यक्ति ने एक शहर में एक आलीशान और शानदार घर बनाया। वह शहर का सबसे ख़ूबसूरत घर माना जाता था। लोग उसे देखते, तो तारीफ़ किये बिना नहीं रह पाते। एक बार घर का मालिक किसी काम से कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर चला गया। वहाँ से आने के बाद उस मकान में शिफ्ट होना तय हुआ। कुछ दिनों बाद जब वह वापस लौटा, तो उसने देखा कि उसके मकान से धुआँ उठ रहा है। करीब जाने पर उसे घर से आग की लपटें उठती हुई दिखाई दी। उसका ख़ूबसूरत घर जल रहा था। वहाँ तमाशबीनों की भीड़ जमा थी, जो उस घर के जलने का तमाशा देख रही थी। अपने ख़ूबसूरत घर को अपनी ही आँखों के सामने जलता हुए देख वह व्यक्ति चिंता में पड़ गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे? कैसे अपने घर को जलने से बचाये? वह लोगों से मदद की गुहार लगाने लगा कि वे किसी भी तरह उसके घर को जलने से बचा लें। उसी समय उसका बड़ा बेटा वहाँ आया और बोला, “पिताजी! घबराइए मत। सब ठीक हो जायेगा।” इस बात पर कुछ नाराज़ होता हुआ पिता बोला, “कैसे न घबराऊँ? अपना इतना ख़ूबसूरत घर जल रहा है।” बेटे ने उत्तर दिया, “पिताजी! माफ़ क...

सब कुछ तुम्हारे हाथ में है

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 सब कुछ तुम्हारे हाथ में है Image by 피어나네 from Pixabay एक आदमी रेगिस्तान से गुज़रते वक़्त बुदबुदा रहा था - “कितनी बेकार जगह है ये। बिल्कुल भी हरियाली नहीं है और हो भी कैसे सकती है? यहाँ तो पानी का नामो-निशान भी नहीं है।” तपती रेत में जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रहा था, उसका गुस्सा भी बढ़ता जा रहा था। अंत में वह आसमान की तरफ देख कर झल्लाते हुए बोला - क्या भगवान! आप यहाँ पानी क्यों नहीं देते? अगर यहाँ पानी होता तो कोई भी यहाँ पेड़-पौधे उगा सकता था और तब ये जगह भी कितनी खूबसूरत बन जाती। ऐसा बोल कर वह आसमान की तरफ ही देखता रहा, मानो वह भगवान के उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा हो। तभी एक चमत्कार होता है। नज़र झुकाते ही उसे सामने एक कुँआ नज़र आता है। वह उस इलाके में बरसों से आ-जा रहा था, पर आज तक उसे वहाँ कोई कुँआ नहीं दिखा था। वह आश्चर्य में पड़ गया और दौड़ कर कुँए के पास गया। कुँआ लबालब पानी से भरा था। उसने एक बार फिर आसमान की तरफ देखा और पानी के लिए धन्यवाद करने की बजाय बोला, “पानी तो ठीक है लेकिन इसे निकालने के लिए कोई उपाय भी तो होना चाहिए।” उसका ऐसा कहना था कि उसे कुँए की बगल में पड़ी ...

हथौड़ा और चाबी

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 हथौड़ा और चाबी Image by Bruno from Pixabay नैतिक शिक्षा देती है यह हिंदी कहानी। शहर की तंग गलियों के बीच एक पुरानी ताले की दुकान थी। लोग वहाँ से ताला-चाबी खरीदते और कभी-कभी चाबी खोने पर डुप्लीकेट चाबी बनवाने भी आते। ताले वाले की दुकान में एक भारी-भरकम हथौड़ा भी था, जो कभी-कभार ताले तोड़ने के काम आता था। हथौड़ा अक्सर सोचा करता कि आखिर इन छोटी-छोटी चाबियों में कौन-सी खूबी है, जो इतने मजबूत तालों को भी चुटकियों में खोल देती हैं; जबकि मुझे इसके लिए कितने प्रहार करने पड़ते हैं? एक दिन उससे रहा नहीं गया और दुकान बंद होने के बाद उसने एक नन्ही चाबी से पूछा - बहन! ये बताओ कि आखिर तुम्हारे अन्दर ऐसी कौन सी शक्ति है जो तुम इतने जिद्दी तालों को भी बहुत आसानी से खोल देती हो; जबकि मैं इतना बलशाली होते हुए भी ऐसा नहीं कर पाता? चाबी मुस्कुराई और बोली - दरअसल तुम तालों को खोलने के लिए बल का प्रयोग करते हो। उनके ऊपर प्रहार करते हो और ऐसा करने से ताला खुलता नहीं अपितु टूट जाता है। जबकि मैं ताले को बिलकुल भी चोट नहीं पहुँचाती, बल्कि मैं तो उसके मन में उतर कर उसके हृदय को स्पर्श करती हूँ औ...

अंत समय

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अंत समय Image by donations welcome from Pixabay एक साधक ने नम्रतापूर्वक गुरु से प्रश्न पूछा - हे नाथ! हे मेरे प्यारे गुरुवर! यदि अंत समय में भगवान याद न आये तो क्या होगा? मेरा कहाँ, किस योनि में जन्म होगा? कृपा कर बताइये। गुरु भगवान जी ने प्रेम भरी वाणी में समझाया - वत्स! गीता जी में भगवान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन से कहा है - हे पार्थ! जो मेरे मार्ग में आ गया, उसका तो कल्याण ही कल्याण है और कल्याण के मार्ग पर सदा प्राणी का हित ही हित है। अन्त समय में यदि तुझे किसी कारण से मेरी याद न आई तो तेरे अभ्यास के बल से मैं तुझे अपनी याद दिला दूँगा और मैं ही तुझे लेने भी आऊँगा। तू नाम सिमरन करने का अभ्यास तो कर। हे पार्थ! अभ्यास करने का सरल तरीका है कि अपना हर कर्म मेरे समर्पित हो कर किया कर। मुझे हर पल याद रख। तू बस मेरी शरण में आ जा। शरणागत होकर पूर्णतया समर्पित हो जा। हे पार्थ! सब यज्ञों में जप यज्ञ मैं हूँ। तू नामजप कर। बार-बार कर। नियम से कर और जब अभ्यास होगा, तभी मेरी याद बनी रहेगी। अभ्यास होगा तो मैं अवश्य आऊँगा। आओ, हम सब भी प्रार्थना करें - हे नाथ! आप मुझे सदैव याद र...

बिटिया राधा रानी

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 बिटिया राधा रानी Image by Albrecht Fietz from Pixabay बरसाने में एक सेठ रहते थे। उनकी तीन-चार दुकानें थी। बहुत अच्छी तरह चलती थी। तीन बेटे और तीन बहुएं थी। सब आज्ञाकारी थे पर सेठ के मन में एक इच्छा थी। उनके बेटी नहीं थी। संतों के दर्शन से उसकी चिन्ता कम हुई। संत बोले - मन में अभाव हो, तो उसमें भगवान का भाव स्थापित कर लो। सुनो सेठ तुमको मिल्यो बरसाने का वास। यदि मानो नाते राधे सुता, काहे रहत उदास॥ सेठ जी ने राधा-रानी का एक चित्र मंगवाया और अपने कमरे में लगा कर उसके साथ पुत्री भाव से रहते। रोज सुबह राधे-राधे कहते, भोग लगाते और दुकान से लौटकर राधे-राधे कहकर सोते। तीन बहू बेटे हैं घर में, सुख सुविधा है पूरी। संपत्ति भरि भवन रहती, नहीं कोई मजबूरी॥ कृष्ण कृपा से जीवन पथ पे, आती न कोई बाधा। मैं बहुत बड़भागी पिता हूँ, मेरी बेटी है राधा॥ एक दिन एक मनिहारी चूड़ी पहनाने सेठ के अहाते में दरवाज़े के पास आ गयी। चूड़ी पहनने की गुहार लगाई। तीनों बहुएँ बारी-बारी से चूड़ी पहन कर चली गयी। फिर एक हाथ और बढ़ा तो मनिहारी ने सोचा कि कोई रिश्तेदार आया होगा। उसने उसे भी चूड़ी पहनाई और चली गयी। उ...