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कर्म का महत्व

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 कर्म का महत्व Image by Frauke Riether from Pixabay एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहाँ गए। शाम को किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। गांव के लोगों में कानाफूसी होने लगी कि कैसा भक्त है कि प्रवचन का आयोजन करके स्वयं गायब हो गया। प्रवचन खत्म होने के बाद सब लोग घर चले गए। रात में किसान घर लौटा। बुद्ध ने पूछा - कहां चले गए थे? गांव के सभी लोग तुम्हें पूछ रहे थे। किसान ने कहा - दरअसल प्रवचन की सारी व्यवस्था हो गई थी, पर तभी अचानक मेरा बैल बीमार हो गया। पहले तो मैंने घरेलू उपचार करके उसे ठीक करने की कोशिश की, लेकिन जब उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो मुझे उसे लेकर पशु चिकित्सक के पास जाना पड़ा। अगर नहीं ले जाता तो वह नहीं बचता। आपका प्रवचन तो मैं बाद में भी सुन लूंगा। अगले दिन सुबह जब गांव वाले पुनः बुद्ध के पास आए तो उन्होंने किसान की शिकायत करते हुए कहा, ‘यह तो आपका भक्त होने का दिखावा करता है। प्रवचन का आयोजन कर स्वयं ही गायब हो जाता है।’ बुद्ध ने उन्हे...

कर्मों का हिसाब-किताब

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 कर्मों का हिसाब-किताब Image by hartono subagio from Pixabay एक स्त्री थी जिसे 20 साल तक संतान नहीं हुई। फिर कर्म संजोग से 20 वर्ष के बाद उसे पुत्र संतान की प्राप्ति हुई। किन्तु दुर्भाग्यवश 20 दिन में ही वह संतान मृत्यु को प्राप्त हो गयी। वह स्त्री हद से ज्यादा रोई और उस मृत बच्चे का शव ले कर एक सिद्ध महात्मा जी के पास पहुँच गई। वह महात्मा जी से रो-रो कर कहने लगी, मुझे मेरा बच्चा एक बार जीवित कर के दीजिये। मात्र एक बार मैं उसके मुख से “माँ” शब्द सुनना चाहती हूँ। स्त्री के बहुत जिद करने पर महात्मा जी ने 2 मिनट के लिए उस बच्चे की आत्मा को वापिस बुलाया। तब उस स्त्री ने उस आत्मा से कहा - तुम मुझे क्यों छोड़ कर चले गए मेरे बच्चे? मैं तुम से सिर्फ एक बार “माँ” शब्द सुनना चाहती हूँ। तभी उस आत्मा ने कहा - कौन माँ? कैसी माँ? मैं तो तुम से कर्मों का हिसाब-किताब करने आया था। स्त्री ने पूछा - कैसा हिसाब-किताब? आत्मा ने बताया - पिछले जन्म में तुम मेरी सौतन थी और मेरी आँखों के सामने तू मेरे पति को ले गई। मैं बहुत रोई। तुम से अपना पति मांगा। पर तुम ने मेरी एक नहीं सुनी। तब मैं रो ...

अदभुत कहानी

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 अदभुत कहानी Image by Ralph from Pixabay एक दिन मेरे पिता ने हलवे के 2 कटोरे बनाये और उन्हें मेज़ पर रख दिया। एक के ऊपर 2 बादाम थे, जबकि दूसरे कटोरे में हलवे के ऊपर कुछ नहीं था। फिर उन्होंने मुझे हलवे का कोई एक कटोरा चुनने के लिए कहा। क्योंकि उन दिनों तक हम गरीबों के घर बादाम आना मुश्किल था, मैंने 2 बादाम वाले कटोरे को चुना। मैं अपने बुद्धिमान विकल्प/निर्णय पर खुद को बधाई दे रहा था और जल्दी-जल्दी मुझे मिला 2 बादाम वाला हलवा खा रहा था। परंतु मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं था, जब मैंने देखा कि मेरे पिता वाले कटोरे के हलवे के नीचे 8 बादाम छिपे थे। बहुत पछतावे के साथ मैंने अपने निर्णय में जल्दबाजी करने के लिए खुद को डांटा। मेरे पिता मुस्कुराए और मुझे यह याद रखना सिखाया कि आपकी आँखें जो देखती हैं, वह हरदम सच नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि आप स्वार्थ की अपनी आदत बना लेते हैं, तो आप जीत कर भी हार जाएंगे। अगले दिन, मेरे पिता ने फिर से हलवे के 2 कटोरे पकाए और टेबल पर रखे। एक कटोरे के शीर्ष पर 2 बादाम और दूसरा कटोरा जिसके ऊपर कोई बादाम नहीं था। फिर से उन्होंने मुझे अपने लिए क...

त्योहार

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 त्योहार Image by Sergio Cerrato - Italia from Pixabay त्योहार आ रहे हैं। ऑफिस से निकल कर शर्मा जी ने स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया कि पत्नी ने कहा था, एक दर्ज़न केले लेते आना। तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा केले बेचते हुए एक बीमार-सी दिखने वाली बुढ़िया माई दिख गयी। वैसे तो वह फल हमेशा “राम आसरे फ्रूट भण्डार” से ही लेते थे, पर आज उन्हें लगा कि क्यों न बुढ़िया माई से ही खरीद लूँ? उन्होंने बुढ़िया माई से पूछा, ‘माई, केले कैसे दिए?’ बुढ़िया माई बोली, ‘बाबूजी 20 रूपये दर्जन।’ शर्मा जी बोले, ‘माई 15 रूपये दूंगा।’ बुढ़िया माई ने कहा, ‘18 रूपये दे देना, दो पैसे मैं भी कमा लूंगी।’ शर्मा जी बोले, ‘15 रूपये लेने हैं तो बोल।’ बुझे चेहरे से बुढ़िया ने ‘न’ कहा। शर्मा जी बिना कुछ कहे चल पड़े और राम आसरे फ्रूट भण्डार पर आकर केले का भाव पूछा तो वह बोला, ‘28 रूपये दर्जन हैं। बाबूजी, कितने दर्जन दूँ?’ शर्मा जी बोले, ‘5 साल से फल तुमसे ही ले रहा हूँ, भाव ठीक लगाओ।’ तो उसने सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा कर दिया। बोर्ड पर लिखा था - ‘मोल भाव करने वाले माफ़ करें।’ शर्मा जी को उसका ...

हंसमुख डॉक्टर

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 हंसमुख डॉक्टर Image by Susann Mielke from Pixabay एक हंसमुख डॉक्टर बहुत ही होशियार थे। उनके बारे में यह कहा जाता था कि वह मौत के मुंह में से भी बीमार को वापस ले आते थे। डॉक्टर के पास जो भी मरीज आता, वह उससे एक फॉर्म भरवाते थे। मरीज से यह पूछते कि आप इस फार्म में लिखें कि यदि आप बच गए तो किस तरह से बाकी जिंदगी जियेंगे और आपके जीवन में क्या करना शेष रह गया है, जो आप करना चाहेंगे? सभी मरीज अपने मन की बात लिखते। अगर मैं बच गया तो अपने परिवार के साथ अपना समय बिताउंगा। मैं अपने पुत्र और पुत्री की संतानों के साथ जी भर कर खेलूंगा। मैंने अपने पति और उनके माता-पिता का बहुत दिल दुखाया है, ऑपरेशन के बाद मैं उन सबसे माफी मांगूंगी और उनके साथ हंसी-खुशी मिलकर रहूँगी। किसी ने जी भर कर पर्यटन, घूमने का शौक पूरा करने का लिखा। किसी ने तो यह भी लिखा कि मेरे द्वारा जिंदगी में यदि किसी को ठेस पहुंची है तो मैं उससे माफी मागूँगा। किसी ने लिखा कि मैं अपनी जिंदगी में हँसी की मात्रा बढ़ा दूंगा। जिंदगी में किसी से भी शिकायत नहीं करूँगा और न किसी को शिकायत का मौका दूंगा। किसी का भी मन न दुखे, ...

समाधान वृक्ष

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 समाधान वृक्ष Image by Sabine from Pixabay सरला नाम की एक महिला थी। रोज वह और उसके पति सुबह ही काम पर निकल जाते थे। दिन भर पति ऑफिस में अपना टारगेट पूरा करने की ‘डेडलाइन’ से जूझते हुए साथियों की होड़ का सामना करता था। बॉस से कभी प्रशंसा तो मिली नहीं और तीखी-कटीली आलोचना चुपचाप सहता रहता था। पत्नी सरला भी एक प्राइवेट कम्पनी में जॉब करती थी। वह अपने ऑफिस में दिन-भर परेशान रहती थी। ऐसी ही परेशानियों से जूझकर सरला लौटती है, खाना बनाती है। शाम को घर में प्रवेश करते ही बच्चों को वे दोनों नाकारा होने के लिए डाँटते थे। पति और बच्चों की अलग-अलग फरमाइशें पूरी करते-करते बदहवास और चिड़चिड़ी हो जाती है। घर और बाहर के सारे काम उसी की जिम्मेदारी हैं। थक-हार कर वह अपने जीवन से निराश होने लगती है। उधर पति दिन पर दिन खूंखार होता जा रहा है। बच्चे विद्रोही हो चले हैं। एक दिन सरला के घर का नल खराब हो जाता है। उसने प्लम्बर को नल ठीक करने के लिए बुलाया। प्लम्बर ने आने में देर कर दी। पूछने पर बताया कि साइकिल में पंक्चर के कारण देर हो गई। घर से लाया खाना मिट्टी में गिर गया, ड्रिल मशीन खराब हो...