Posts

स्वार्थ की पतंग

Image
  स्वार्थ की पतंग   एक बार किसी गांव में एक सन्त आये और झोपड़ी बना कर रहने लगे। लोगों से उनका बहुत मतलब नहीं रहता था, सन्त को प्रपंच से क्या मतलब? अतः वे अपनी साधना में ही रमे रहते थे। गांव वालों ने जब सन्त को देखा, तो वे पूरे गांव में कौतूहल का विषय बन गये। लोग कहने लगे कि बहुत पहुँचे हुए महात्मा हैं, किसी से कोई मतलब नहीं रखते। अपनी धुन में ही मस्त हैं। गांवों वालों ने सन्त का खूब आदर सत्कार किया। सन्त बिल्कुल शांत रहे, गांव वालों के आदर सत्कार का उनके ऊपर कोई प्रभाव न हुआ। सन्त की झोपड़ी पर दिन भर भीड़ रहती, आरती करने वालों की संख्या भी बहुत बढ़ गयी, संत की खूब वाहवाही होती। सन्त उस गांव में लगभग छः माह तक रहे फिर अन्यत्र यात्रा पर निकल गये। पीछे उनकी झोपड़ी वहीं वैसे ही रह गयी। इसी बीच गांव में एक कुँवारी कन्या को बच्चा हो गया। जब लोगों ने पूछा कि बच्चा किसका है? तब लड़की ने उसी सन्त का बता दिया। गांव वाले संत के ऊपर बहुत क्रोधित हुये, उनके झोपड़े को जला दिया। कुछ समय बीतने के बाद सन्त उसी स्थान पर आकर, फिर झोपड़े को ठीक कर अपनी साधना करने लगे। जब गांव वालों को इस बात की जानकारी ह...

भाईचारा

Image
  भाईचारा महाभारत का प्रसंग है। जुए में हारने के बाद पाँचों पांडव बारह वर्ष के वनवास के दिन वनों एवं पर्वतों में व्यतीत कर रहे थे। एक समय वे द्वैतवन के समीप ब्रह्मणों के साथ निवास कर रहे थे कि शकुनि और कर्ण ने दुर्योधन को सलाह दी - हमारा विचार है कि तुम खूब ठाट-बाट से द्वैतवन को चलो और अपने वैभव और ऐश्वर्य से पांडवों को चमत्कृत कर दो। धृतराष्ट्र से आज्ञा लेकर दुर्योधन कौरव-सेना के साथ उस जंगल के पास सरोवर पर पहुँचा। वहाँ सरोवर पर गन्धर्वराज चित्ररथ जलक्रीड़ा करने के लिए आए हुए थे। दुर्योधन ंने अपने सेवकों-साथियों को आज्ञा दी कि गन्धर्वों को वहाँ से निकाल दो। आपसी संघर्ष में गन्धर्वों ने दुर्योधन और दुःशासन आदि को पकड़ लिया। गन्धर्वों की लड़ाई से हारी हुई कौरवों की सेना ने पांडवों की शरण ली। उस समय दुर्योधन के मंत्रियों ने बहुत गिडगिड़ाकर धर्मराज युधिष्ठर से दुर्योधन की रक्षा करने की प्रार्थना की।  धर्मराज युधिष्ठर ने अपने वीर भाइयों- योद्धा भीम और अर्जुन को उसे छुड़ाने की आज्ञा दी। उस समय भीम ने कहा- “हम बहुत कोशिश करके सेना के बल पर जो कार्य करते, वह गन्धर्वों ने कर दिया है। यह प...

निर्जला एकादशी

Image
👼👼💧💧👼💧💧👼👼 निर्जला एकादशी Image by Werner Weisser from Pixabay निर्जला एकादशी में एक दिन का पुण्य ही क्यों? निर्जला एकादशी से अगले दिन एक भिखारी एक सज्जन की दुकान पर भीख मांगने पहुँचा। सज्जन व्यक्ति ने 1 रुपये का सिक्का निकाल कर उसे दे दिया। भिखारी को प्यास भी लगी थी, वह बोला - बाबूजी! एक गिलास पानी भी पिलवा दो, गला सूखा जा रहा है। सज्जन व्यक्ति ने गुस्से में कहा - तुम्हारे बाप के नौकर बैठे हैं क्या हम यहां? पहले पैसे, अब पानी, थोड़ी देर में रोटी मांगेगा, चल भाग यहाँ से। भिखारी बोला - बाबूजी! गुस्सा मत कीजिये। मैं आगे कहीं पानी पी लूंगा। पर जहाँ तक मुझे याद है, कल आपने निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ किया था तथा कल इसी दुकान के बाहर मीठे पानी की छबील लगी थी और आप स्वयं लोगों को रोक-रोक कर जबरदस्ती अपने हाथों से गिलास पकड़ा रहे थे। मुझे भी कल आपके हाथों से दो गिलास शर्बत पीने को मिला था। मैंने तो यही सोचा था कि आप बहुत बड़े धर्मात्मा आदमी हैं, पर आज मेरा भरम टूट गया। कल की छबील तो शायद आपने लोगों को दिखाने के लिये लगाई होगी? मुझे आज आपने कड़वे वचन बोलकर अपना कल का सारा पुण्य खो दि...

घमंडः हमारा सबसे बड़ा दुश्मन

Image
  घमंडः हमारा सबसे बड़ा दुश्मन  एक लड़का था। उसके पापा की इतनी बड़ी कंपनी थी कि अमरीका में बैठे-बैठे, अफ्रीका की सरकार को गिरा दे। उनके पास किसी चीज़ की कमी नहीं थी। पैसा, सत्ता सब उनके हाथ में था, लेकिन पैसा कमाते-कमाते वो अपने बच्चे को समय नहीं दे पाए। इसके बदले में बच्चे ने अपनी मनमानी करना शुरू किया। उसको कोई कुछ कहने वाला नहीं था। जैसे-जैसे बड़ा होता चला गया, उसको लगने लगा कि उसका कोई क्या बिगड़ सकता है? वह अपने सामने किसी को कुछ समझता ही नहीं था।  एक दिन वह एक बड़ी होटल में कॉफ़ी पीने के लिए गया। वहाँ एक नौकर नज़दीक से गुज़र रहा था। नौकर के हाथ से एक कॉफ़ी का गिलास गिर गया। उस लड़के के नज़दीक गिलास गिरने की वजह से वह लड़का चिल्लाया और कहा कि साले! अंधे! तुझे दिखाई नहीं देता? बेवफ़ूक कहीं का। न जाने कहाँ-कहाँ से चले आते हैं? इतना बोल कर उसने कहा कि तुम्हारे मैनेजर को बुलाओ।  नौकर के बहुत माफी मांगने पर भी वह नहीं माना। उतनी देर में वहां पर मैनेजर आ पहुँचा। मैनेजर को लड़के ने कहा कि मुझे तुम्हारे कर्मचारी बिलकुल पसंद नहीं आये। मैं ये होटल खरीद कर अपने कर्मचारी रखूँगा। मुझे इस हो...

बाँस का पेड़

Image
  बाँस का पेड़ एक संत अपने शिष्य के साथ जंगल में जा रहे थे। ढलान पर से गुजरते वक्त अचानक शिष्य का पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की ओर लुढ़कने लगा।  वह खाई में गिरने ही वाला था कि तभी उसके हाथ में बांस का एक पौधा आ गया। उसने बांस के पौधे को मजबूती से पकड़ लिया और वह खाई में गिरने से बच गया। बांस धनुष की तरह तो मुड़ गया लेकिन न तो वह जमीन से उखड़ा और न ही टूटा. वह बांस को मजबूती से पकड़कर लटका रहा। थोड़ी देर बाद उसके गुरु वहीं पहुंच गए। उन्होंने हाथ का सहारा देकर शिष्य को ऊपर खींच लिया। दोनों अपने रास्ते पर आगे बढ़ चले। राह में संत ने शिष्य से कहा- ’“जान बचाने वाले बांस ने तुमसे कुछ कहा, तुमने सुना क्या?“ शिष्य ने कहा- “नहीं गुरुजी, शायद प्राण संकट में थे इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया और मुझे तो पेड-पौधों की भाषा भी नहीं आती. आप ही बता दीजिए उसका संदेश।“ गुरु मुस्कुराए- “खाई में गिरते समय तुमने जिस बांस को पकड़ लिया था, वह पूरी तरह मुड़ गया था, फिर भी उसने तुम्हें सहारा दिया और तुम्हारी जान बची ली। संत ने बात आगे बढ़ाई- “बांस ने तुम्हारे लिए जो संदेश दिया वह मैं तुम्हें दिखाता हूं।“ गुरु ने र...

पत्नी की चिट्ठी

Image
 पत्नी की चिट्ठी शादी को 3 साल हुए थे और एक दिन पत्नी के मन में ख्याल आया कि क्या होगा, अगर मैं अपने पति को छोड़कर चली जाऊं?   पति का रिएक्शन क्या होगा? फिर वह क्या करेगा? इसी विचार के चलते पति की परीक्षा लेने के लिए उसने एक चिट्ठी लिखी.. उसमें लिखा, “आपके साथ रहकर बोर हो गई हूं। मुझे अब इस गृहस्थी से कोई लगाव नहीं है। मैं तुम्हारे साथ एक पल भी नहीं रह सकती, इसलिए मैं तुम्हें और इस घर को छोड़ कर जा रही हूं।“  उसने वह चिट्ठी टेबल पर रखी और खुद बेड के नीचे जाकर छुप गई! थोड़ी देर बाद पति ऑफिस से घर लौटा। उसे घर में अपनी पत्नी कहीं नहीं दिखी।   फिर उसकी नजर टेबल पर रखी चिट्ठी पर पड़ी। चिट्ठी को उठाकर उसने पढ़ा। थोड़ी देर तक वह बिल्कुल शांत रहा, कुछ नहीं बोला। फिर उसने उसी चिट्ठी में पीछे कुछ लिखा और अपने मोबाइल में गाने बजा कर जोर-जोर से नाचने लगा!   फिर उसने अपने कपड़े बदले और अपनी एक फ्रेंड को फोन लगाया और कहने लगा... “मैं आज आजाद हो गया हूं!! मेरी बीवी को आखिरकार ये एहसास हो गया कि वह मेरे काबिल नहीं है.. इसलिए वह खुद ही मुझे छोड़कर हमेशा के लिए चली गई है ...

मृतक की उम्र

Image
  मृतक की उम्र  एक बार एक आदमी किसी गाँव के पास से गुजर रहा था। उस रास्ते में श्मशान भूमि थी। उसने श्मशान भूमि में पत्थरों के ऊपर मरने वाले की उम्र लिखी हुई देखी 5 वर्ष, 8 वर्ष, 10 वर्ष, 20 वर्ष आदि।  उस आदमी ने सोचा कि क्या इस गांव में सभी की मृत्यु अल्प आयु में ही हो जाती है? वह आदमी गांव में गया, तो गांव वालों ने उस आदमी की बहुत सेवा सत्कार किया। वह आदमी कुछ दिन उस गांव में ठहरने के बाद वहां से जाने के लिए तैयार हुआ और गांव वालों को बताया कि मैं कल जा रहा हूँ। उसकी बात सुनकर गांव वाले बहुत दुःखी हुए और कहने लगे - हमारे से कोई गलती हुई है तो बताओ, लेकिन आप यहाँ से न जाओ। आप इसी गाँव में रुक जाओ।  वह आदमी कहने लगा कि इस गांव में मैं और अधिक नहीं रह सकता, क्योंकि इस गांव में इंसान की अल्प आयु में ही मृत्यु हो जाती है। उसकी बात सुनकर गांव वाले हँसने लगे और बोले - देखो! हमारे बीच में कोई 60 वर्ष, 70 वर्ष औऱ 85 वर्ष का भी है।   उस आदमी ने पूछा कि श्मशान भूमि के पत्थरों पर लिखी मृतक की आयु का क्या कारण है?  गांव वाले कहने लगे कि हमारे गांव में रिवाज़ है कि ...

विश्वास की शक्ति- हरिनाम

Image
  विश्वास की शक्ति- हरिनाम  एक गांव में एक नौजवान को सत्संग सुनने की बहुत लगन थी। किसी से पता चला कि गांव के बाहर नदी के उस पार परम संत तुलसी दास जी ने डेरा लगाया हुआ है और आज संध्या को उनका सत्संग का आयोजन है। वह नौजवान नौका के द्वारा नदी पार करके सत्संग में पहुंच गया। प्रेमी था, बड़े प्यार से सत्संग सुना और बहुत आनंद आया! जब वह जाने लगा, तो थोड़ा अंधेरा हो गया था। उसने देखा कि तूफान बहुत ज्यादा था और बारिश के कारण नदी बड़े ऊफान पर चल रही थी। अब जितनी नौका वाले मल्लाह थे, सब डेरे में रुक गए। नौका से आने-जाने का कोई साधन नहीं है।  वह संत तुलसी दास जी के पास पहुंचा और बोला - महाराज! मेरी नई-नई शादी हुई है, मेरी पत्नी भी उस गांव में अनजान है और मेरे घर में कोई नहीं है। उसके पास गहना वगैरा बहुत है, नकदी भी है और हमारे गांव में चोर लुटेरे भी बहुत हैं। तो किसी भी हालत में मुझे वहां जाना ही पड़ेगा, नहीं तो पता नहीं क्या हो जाएगा।  संत तुलसी दास जी ने एक कागज पर कलम से कुछ लिखा और बिना बताए उस कागज को मोड़कर और उसके हाथ में पकड़ा दिया और कहा - इसको खोलकर मत देखना कि इसमें क्या लि...

पुत्र पर अधिकार

Image
  पुत्र पर अधिकार पत्नी किसी अन्य पुरुष से पुत्र प्राप्त कर ले, तो उस पर किसका अधिकार.? एक गाँव में एक गरीब आदमी रहता था। उसकी शादी हो गई। कुछ दिनों बाद वह पत्नी से बोला - मैं बाहर व्यापार करने जा रहा हूँ, आज ही के दिन एक बरस बाद लौट आऊँगा!!  ऐसा कह कर वह चला गया.! पति वहाँ व्यापार में व्यस्त हो गया. पत्नी यहाँ अकेली थी, जो रोज सुबह नहा धोकर पैदल ही सब्जी खरीदने जाती थी। उसी बाजार में एक धनवान पुरुष भी रोज़ कार से सब्जी खरीदने आता था, वह रोज इस महिला को आते हुए देखता था. एक दिन वह उस महिला से बोला - आओ मैं आपको घर तक छोड़ दूँगा. नहीं! मै चली जाऊँगी.! डरो मत!! मेरा घर भी अगली गली में है, मैं आपको सकुशल पहुँचा दूँगा. वह स्त्री कार में बैठ गई. उस पुरुष ने शांति शालीनता के साथ उस स्त्री को उसके घर के सामने उतारा और चला गया. अब यह रोज का क्रम बन गया. एक दिन उस पुरुष ने उस स्त्री से स्नेह तथा आदर से कहा - आओ! चाय पीकर चली जाना. स्त्री ने उसका आग्रह स्वीकार कर लिया तथा चाय पीकर चली गई. सिलसिला आगे बढ़ा भोजन भी होने लगा, उन दोनों के मध्य प्रेम उत्पन्न हो गया और परिणाम हुआ - एक सुन्दर पुत...

निवाला

Image
निवाला पिछली रात बड़ी बेचैनी से कटी....बमुश्किल सुबह एक रोटी खाकर घर से अपनी दुकान के लिए निकला..... आज किसी के पेट पर पहली बार लात मारने जा रहा हूं, यह बात अंदर ही अंदर कचोट रही है.... जिंदगी में यही फ़लसफ़ा रहा मेरा .... अपने आस-पास किसी को रोटी के लिए तरसना न पड़े..... पर इस विकट काल में अपने पेट पर ही आन पड़ी है... दो साल पहले ही अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर कपड़े का शोरूम खोला था, मगर दुकान के सामान की बिक्री, अब आधी हो गई है। अपनी कपड़े की दुकान में दो लड़कों और दो लड़कियों को रखा है मैंने ग्राहकों को कपड़े दिखाने के लिए... लेडीज डिपार्टमेंट की दोनों लड़कियों को निकाल नहीं सकता...  एक तो कपड़ो की बिक्री उन्हीं की ज्यादा है, दूसरे वे दोनों बहुत ग़रीब हैं। दो लड़कों में से एक पुराना है और वह घर में इकलौता कमाने वाला है।  जो नया वाला लड़का है दीपक....मैंने विचार उसी पर किया है। शायद उसका एक भाई भी है, जो अच्छी जगह नौकरी करता है और वह खुद, तेजतर्रार और हँसमुख भी है। उसे कहीं और भी काम मिल सकता है...  पिछले सात महीनों में....मैं बिलकुल टूट चुका हूं। स्थिति को देखते हुए एक वर्कर कम करना मे...

जीवन रथ

Image
  जीवन रथ एक संत एक छोटे से आश्रम का संचालन करते थे। एक दिन पास के रास्ते से एक राहगीर को पकड़कर अंदर ले आए और शिष्यों के सामने उससे प्रश्न किया कि यदि तुम्हें सोने की अशर्फियों की थैली रास्ते में पड़ी मिल जाए, तो तुम क्या करोगे?  वह आदमी बोला - “तत्क्षण उसके मालिक का पता लगाकर उसे वापस कर दूंगा, अन्यथा राजकोष में जमा करा दूंगा।“  संत हंसे और राहगीर को विदा कर शिष्यों से बोले - “यह आदमी मूर्ख है।“  शिष्य बड़े हैरान हुए कि गुरुजी क्या कह रहे हैं? इस आदमी ने ठीक ही तो कहा है तथा सभी को ही यह सिखाया गया है कि ऐसे किसी परायी वस्तु को ग्रहण नहीं करना चाहिए।    थोड़ी देर बाद फिर संत किसी दूसरे को अंदर ले आए और उससे भी वही प्रश्न दोहरा दिया।  उस दूसरे राहगीर ने उत्तर दिया कि क्या मुझे निरा मूर्ख समझ रखा है, जो स्वर्ण मुद्राएं पड़ी मिलें और मैं लौटाने के लिए मालिक को खोजता फिरूं? तुमने मुझे समझा क्या है?          वह राहगीर जब चला गया तो संत ने कहा - “यह व्यक्ति शैतान है।“ शिष्य बड़े हैरान हुए कि पहला मूर्ख और दूसरा शैतान, फिर गुरुजी चाहते क्...

आ अब लौट चलें

Image
आ अब लौट चलें “यदि हमने जीवन के 50 वर्ष पार कर लिए हैं, तो अब लौटने की तैयारी प्रारंभ करें... इससे पहले  कि देर हो जाये...इससे पहले कि सब किया धरा निरर्थक हो जाये..“ लौटना क्यों है? लौटना कहाँ है? लौटना कैसे है? इसे जानने, समझने एवं लौटने का निर्णय लेने के लिए आइये! टॉलस्टाय की मशहूर कहानी एक बार फिर से पढ़ते हैं।... आज पुनः एक बार फिर आपके साथ हम इस कहानी को साझा कर रहे हैं :- “लौटना कभी आसान नहीं होता“ एक आदमी राजा के पास गया और कहा कि वह बहुत ग़रीब है, उसके पास कुछ भी नहीं है, उसे मदद चाहिए...राजा दयालु था।...उसने पूछा कि “क्या मदद चाहिए...?“ आदमी ने कहा.. “थोड़ा-सा भूखंड...“ राजा ने कहा, “कल सुबह सूर्योदय के समय तुम यहां आना...खाली ज़मीन पर तुम दौड़ लगाना। जितनी दूर तक दौड़ पाओगे, वह पूरा भूखंड तुम्हारा। परंतु ध्यान रहे,....जहां से तुम दौड़ना शुरू करोगे, सूर्यास्त तक तुम्हें वहीं लौट आना होगा, जितना भूखंड नापा, सब तुम्हारा।... अन्यथा तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा...!“ ”यह भी याद रहे कि भूखंड की भूख जीवन से कभी मूल्यवान नहीं होती। जीवन है, तो भूखण्ड की कीमत है, जीवन नहीं, तो वह भूख...