शाश्वत खुशी प्राप्त करने के उपाय
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Tips of Happiness
जानें कुछ व्यवहारिक सूत्र (16)
शाश्वत खुशी प्राप्त करने के उपाय
हमने ‘जीवन में खुशी प्राप्त करने के’ कुछ व्यवहारिक सूत्रों पर चर्चा की।
खुशी को पहचानें।
दूसरों की खुशी में खुशी का अनुभव करें।
‘Past’ को भूलने का प्रयास करो।
खुशी के स्रोत का ज्ञान होना।
खुशी प्राप्त करने के साधन कौन-से हैं?
मन को समभाव में रखने का उपाय।
स्वयं को ‘क्रोध’ से कैसे बचाएं?
स्वयं को ‘मान’ से कैसे बचाएं?
स्वयं को ‘माया’ से कैसे बचाएं?
स्वयं को ‘लोभ’ से कैसे बचाएं?
खुशी को प्राप्त करने के बाद उसमें वृद्धि कैसे की जाए?
खुशी का Long Term Fix Deposit
खुशी का सबसे बड़ा शत्रुः Upset Mind
अपने मन की शांति को कभी बाधित न होने दें।
अपनी इच्छाओं पर संयम का Break लगाइए।
यदि हम इन सूत्रों का अपने दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं तो 99% खुशी स्वयं ही हमारी झोली में आ जाएगी, लेकिन अभी भी हम स्वयं को ‘कभी खुशी, कभी गम’ वाली स्थिति में पाते हैं। यह तो ऐसी खुशी है जैसे हम प्यास लगने पर कभी नदी की ओर जाते हैं, कभी झरने या तालाब के पानी से अपनी प्यास बुझाने का प्रयत्न करते हैं। हमारी प्यास तो बुझ जाएगी पर थोड़े समय के लिए।
यदि हमें अपने अंदर खुशी का स्थाई स्रोत मिल जाए तो हम सदा खुश रह सकते हैं और यही नहीं, दूसरों को भी जी भर कर खुशियां बाँट सकते हैं।
इसके लिए हमें अपने अच्छे-बुरे सभी कर्म भगवान के चरणों में समर्पित कर देने चाहिए। जैसे एक नवजात शिशु स्वयं को अपनी माँ के हाथों में पूर्णतया समर्पित कर देता है। वह जानता है कि मेरी माँ को बिना बताए ही मेरी सब आवश्यकताओं का ज्ञान है। वह समय आने पर मेरे नहलाने-धुलाने से लेकर खाने-पीने-सोने तक का पूरा ध्यान रखेगी। क्या इतना विश्वास हम भगवान पर नहीं कर सकते?
माँ गलती करने पर हमें डांटती है तो भी उसके मन में हमारी भलाई का ही ध्यान रहता है, न कि कष्ट पहुँचाने का।
इसी प्रकार भगवान भी जानते हैं कि हमारी आवश्यकता क्या है और हमारी पात्रता कितनी है? दुःख भी हमें सावधान करने के लिए मिलता है और अपनी गल्तियों को सुधारने का एक अवसर प्रदान करता है। हर उपलब्धि के लिए भगवान का धन्यवाद करो।
तब अनायास ये पंक्तियाँ हमारे मुख से प्रस्फुटित होने लगेंगी -
“तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूँद के प्यासे हम।
लौटा जो दिया तुमने, चले जाएंगे जहाँ से हम।।”
यदि हम सदैव खुशी के सागर में निमग्न रहना चाहते हैं तो हमें ‘गीता के ज्ञान’ का आधार ही शाश्वत खुशी प्रदान कर सकता है, जिस के अनुसार ‘कोई भी कर्म करने में अपने तन, मन और धन को निष्ठापूर्वक लगा दो और फल देने का कार्य उस सर्वज्ञ अन्तर्यामी भगवान पर छोड़ दो।’
जैसे बीज बोने के बाद उसमें तुरन्त फल नहीं लगते, वैसे ही सच्ची खुशी तुरन्त मिलने वाली नहीं है। उसे पाने के लिए निरन्तर प्रयास करने होंगे और समय आने पर एक-न-एक दिन हमें खुश रहने का अभ्यास हो ही जाएगा।
एक बार मुनि महाराज नंगे पाँव, सधे कदमों से मोक्ष डगर पर, आत्म-कल्याण के लिए बढ़े चले जा रहे थे। न चिलचिलाती धूप की परवाह, न कड़कती ठंड की चिन्ता, न पैरों में पड़े छालों की पीड़ा, न भूख-प्यास की तड़प।
बस एक दृष्टि अपनी मंज़िल पर, अपने लक्ष्य पर।
उनके साथ उनके शिष्य, श्रावक, श्रेष्ठिजन कदम से कदम मिलाने की कोशिश कर रहे थे। एक श्रावक उनकी जय जयकार से बहुत प्रभावित हो रहा था। इतना सम्मान! इतना आदर! हर स्थान पर पाद-प्रक्षालन के लिए लोग होड़ लगा रहे थे। आरती करने का सौभाग्य पाने के लिए आतुर हो रहे थे।
वाह! धन्य हो महाराज!!
उसने भी ठान लिया कि मैं भी मुनि बन कर ही मरण को प्राप्त करूँगा।
अचानक उसकी नज़र मुनि महाराज के पैरों पर पड़ी। पैरों के छालों में से खून छलकने लगा था।
उसने महाराज से पूछा कि अभी तक आप कितने किलोमीटर चल चुके हैं?
अभी तो थोड़ा ही चल पाया हूँ।
अभी कितनी दूर और चलना है?
बेटा! अभी तो मंज़िल बहुत दूर है। अभी बहुत चलना बाकी है।
उसने महाराज से फिर पूछा कि आपके पैरों से खून रिस रहा है। आपको इससे पीड़ा नहीं होती?
बेटा! जन्म-मरण के भव-भवान्तरों की पीड़ा के सामने तो यह दुख लेश-मात्र भी नहीं है। मैं शाश्वत सुख और खुशी पाने के लिए ही तो इतना दुःख सहन कर रहा हूँ।
अब वह सोचने लगा कि क्या मैं इस तथाकथित लेश-मात्र पीड़ा को झेल भी पाऊँगा?
नहीं, नहीं, यह तो मुझसे नहीं हो पाएगा। चलो, महाराज जी से ही पूछता हूँ।
'अंऽऽ ........ महाराज जी, क्या कोई Short-cut रास्ता नहीं है खुशी पाने का? क्या खुशी ऐसे नहीं मिल सकती, जैसे बटन दबाते ही बल्ब जल जाता है या टोंटी घुमाते ही नल में से पानी आने लग जाता है।'
'हाँ, है न ऐसा उपाय हमारे पास! इसका अविष्कार तो हमारे ऋषि-मुनियों ने बहुत पहले से ही कर लिया था।'
'अरे वाह! तो फिर जल्दी से बता दीजिए। मुझे भी खुशी को प्राप्त करना है।'
'बेटा, तुमने तो वही बात कर दी कि उड़द, दाल बनने के लिए कष्ट तो उठाना नहीं चाहता और (दही) बड़ा बनना चाहता है। मैं वह रास्ता बताने से पहले तुम से कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ।'
'तुमने बल्ब जलाने वाला स्विच तो देख लिया पर क्या यह भी देखा है कि पीछे से वह एक तार से भी जुड़ा होता है?' 'क्या केवल स्विच दबाने से वह रोशनी दे सकता है?'
'तो क्या हुआ? हम स्विच को तार से भी जोड़ देंगे। तार जोड़ने में कितना समय लगता है?'
'वह तार भी तो बिजली के मीटर से जुड़ी होती है।'
'तो ठीक है। मीटर भी लगवा लेंगे।'
'मीटर में से एक मोटी तार बिजली के खंभे से जुड़ी होती है।'
'मोटी तार बिजली के खंभे से भी जुड़वा लेंगे।'
''बेटा, खंभे की तारें एक पावर हाउस से जुड़ी होती हैं।'
वह व्यक्ति निरुत्तर होता जा रहा था।
'बेटा! पावर हाउस में बिजली आती है उस कारखाने से जहाँ बिजली बनाई जाती है और जानते हो कि बिजली नदी के उस पानी से बनाई जाती है जो निम्नगामी होता है।'
'हैं! ...... '
'हाँ! निम्नगामी का मतलब है नीचे की ओर जाने वाला। हमारा मन भी तो निम्नगामी ही है। बुराइयों को जल्दी ग्रहण कर लेता है और अच्छाई के लिए Short-cut रास्ते खोजने लगता है।'
'हाँ बेटा! तुम ठीक ही सोच रहे हो कि स्वभाव से नीचे की ओर जाने वाले पानी को ऊपर की ओर ले जाना तो बहुत कठिन है।'
'पहले उस नीचे की ओर बहने वाले पानी को बाँध बना कर रोका जाता है ताकि वह नीचे जाने से रुक सके। फिर उसे ऊर्जा का प्रयोग करके ऊर्ध्वगामी बनाया जाता है तभी वह बिजली बनाने में सक्षम होता है।'
'हमारी यह साधना ही वह ऊर्जा है जो हमारे मन को, उसके विचारों को ऊर्ध्वगामी बनाती है और खुशी का मार्ग प्रकाशित करने के लिए बल्ब का काम करती है। फिर तो बटन दबाते ही खुशियों के बल्ब जगमगाने लगेंगे।'
जब तक हम खुश होने की प्रक्रिया से नहीं गुज़रेंगे तब तक हम खुशी को प्राप्त नहीं कर सकते।
'क्यों? क्या समझे?'
'हाँ महाराज, खुशी पाने का कोई Short-cut नहीं होता, कम से कम शाश्वत खुशी पाने के लिए तो बिल्कुल भी नहीं।'
आइए, मन को शांत करने के लिए मिलकर इन पंक्तियों को गुनगुनाएं -
“अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में।
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में।”
हमारी प्यारी मुस्कान में कृष्ण का माधुर्य है, राम की मर्यादा है, महावीर का मौन है और मीरा के घूँघरू की पवित्र झंकार है।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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विनम्र निवेदन
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धन्यवाद।
The story is very motivashional We all should follow heartly
ReplyDeleteThanks for inspiration
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