Useful या Useless
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दुःख को सुख में बदलने की कला
Useful या Useless (प्रेरणात्मक लेख)
Image by S. Hermann & F. Richter from Pixabay
इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो अपने बेटे को विरासत के रूप में कुछ न कुछ सौंप कर न जाता हो। ऐसे ही एक व्यक्ति ने मरने से पहले अपने बेटे को एक Box सौंपते हुए कहा कि बेटा! यह अपने खानदान में पीढ़ी-दर-पीढ़ी संभाल कर रखा जाता है। तुम भी इसे संभाल कर रखना।
दीपावली की सफ़ाई चल रही थी। उसमें वह Box बेटे के हाथ लगा। बेटा था आधुनिक ख्यालों का। उसे ध्यान में भी नहीं था कि पिता ने यह Box उसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी संभालने के लिए दिया था। उसने सोचा कि इस टूटे फूटे Box को संभाल कर रखने से क्या लाभ? ऐसा सोच कर उसने वह Box कूड़ेदान पर फैंक दिया। तभी वहाँ से गुज़रते हुए एक आदमी की निगाह उस पर पड़ी और उसने वह Box उठाया और खोल कर देखा। उसमें एक वीणा थी जिसके कुछ तार टूटे हुए थे। उस आदमी ने उसके तार जोड़े और उस पर हाथ फिराने लगा।
यह क्या? उसमें से तो मधुर ध्वनि निकलने लगी। उसका मन वह संगीत सुन कर भाव-विभोर हो गया। वास्तव में वह वीणा पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह संदेश देने के लिए संभाल कर रखी जाती थी कि जीवन में मधुर ध्वनि का कितना महत्त्व है? बेटा उसकी मधुर आवाज सुनकर बाहर भागा पर अब तक बहुत देर हो चुकी थी और वह वीणा की आवाज किसी और के खानदान की विरासत बन चुकी थी। वह लक्ष्मी का उपासक सरस्वती से हाथ धो बैठा था।
वस्तु एक ही होती है, पर किसी के लिए Useless और किसी के लिए Useful हो जाती है। एक के लिए सिरदर्द और दूसरे के लिए उपयोगी हो जाती है। यही स्थिति हमारे जीवन की है। जिसने उसका सही Use किया उसके लिए जीवन संगीत है और जिसने Misuse किया उसके लिए सिरदर्द बना हुआ है। जो वीणा का सही उपयोग जानता है, वह उसमें संगीत पैदा कर सकता है और जो उसे बोझ मानता है, Useless समझता है, वह उसे कचरा बना कर फेंक देता है।
आज हम बात करेंगे - Useful, Misuse, Perfect Use और Useless
प्राप्त का सदुपयोग -
हमें जो कुछ प्राप्त है, चाहे वे संसाधन हों या अच्छा शरीर, अच्छी बुद्धि, अच्छा स्वास्थ्य, सौभाग्य से मिले अच्छे संस्कार, परिश्रम से उपार्जित विद्या या पुण्य से प्राप्त धन; हम उसका उपयोग कैसे कर रहे हैं?
संत कहते हैं कि हमें मूल्यवान जीवन मिला है, इसका सही उपयोग करेंगे तो उद्धार हो जाएगा, वरना नीच गति में जाना पड़ेगा। शरीर से चाहे इन्द्रिय सुखों का उपभोग कर लो, चाहे अपने आत्म-उद्धार में उपयोग कर लो। आपकी दृष्टि में क्या सही है? उपभोग या उपयोग।
तन मिला तो तप करो, करो कर्म का नाश।
रवि शशि से भी अधिक है, तुम में दिव्य प्रकाश।।
जीवन कड़वी तुम्बी के समान है, जिसे खाने पर Food Poison हो जाता है और उसके सहारे पानी में कूद जाओ तो वह नदी पार भी करा सकती है क्योंकि वह पानी में नहीं डूबती। हम चाहें तो तन और धन से किसी की सेवा कर लें और चाहें तो किसी को सताने में Misuse कर लें। यदि बिना कोई काम किए निठल्ले होकर बैठ जाएं तो यह Useless हो जाएगा।
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियां हैं -
नर हो न निराश करो मन को,
कुछ काम करो, कुछ काम करो।
जग में रह कर कुछ नाम करो।
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो!
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो।
कुछ तो उपयुक्त करो तन को,
नर हो न निराश करो मन को।
कुछ लोग दस हज़ार रुपए दान देने के लिए दस बहाने बनाते हैं और मौज-मस्ती में दस लाख भी उड़ाने में संकोच नहीं करते। यह धन का Misuse है। कमाने की कला आने के साथ-साथ व्यय करने की भी कला आनी चाहिए। सदुपयोग करने से वही धन जीवन का आभूषण बन जाता है।
कुछ लोग एक सेठ के पास गऊशाला के लिए चन्दा लेने गए। उन्होंने देखा कि सेठजी अपनी धर्मपत्नी को डाँट लगा रहे थे कि तुमने स्टोव जलाने के लिए दियासिलाई की चार तीलियां बरबाद कर दी। चन्दा मांगने वाले लोग निराश हो गए कि यहाँ से कुछ मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। फिर भी उन्होंने अपनी बात कही कि यदि आपसे 21 हज़ार रुपए का सहयोग मिल जाता तो हमें गऊशाला चलाने में सुविधा हो जाती। सेठ ने कहा कि 21 हज़ार क्यों? मैं आपको 51 हज़ार रुपए का सहयोग दूंगा। आगे भी कोई मदद करनी हो तो मेरे पास आ जाना ताकि मैं भी पुण्य-लाभ पा सकूँ।
सबने हैरान होकर पूछा कि अभी तो आप 25 पैसे की तीलियां बरबाद होने पर क्रोधित हो रहे थे, ऐसा क्यों? वे बोले कि मेहनत से कमाए गए पैसे का Perfect Use होना चाहिए, Misuse नहीं।
कहा भी गया है -
विद्या विवादाय, धनं मदाय
शक्तिः परेषां परिपीड़नाय।
खलस्य साधोर्विपरीतमेतत्
ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय।।
खल अर्थात् दुष्ट की विद्या विवाद के लिए, धन मद के लिए और शक्ति दूसरों को पीड़ा देने के लिए होती है। इसके विपरीत साधु की विद्या ज्ञान के लिए, धन दान के लिए और शक्ति दूसरों की रक्षा करने के लिए होती है।
आज तो Use का अर्थ ही बदल गया है। अब तो लोग और उनसे जुड़े रिश्ते भी Use किए जाने लगे हैं। केवल Use ही नहीं, Use & Throw किए जाने लगे हैं।
यदि हम जीवन में सफलता पाना चाहते हैं तो हमें प्राप्त प्रत्येक वस्तु का Misuse नहीं करना अपितु Perfect Use करना है और उसे Useless मान कर कचरे के ढेर पर नहीं फेंकना है।
एक व्यक्ति अपने तीन पुत्रों में से योग्य पुत्र को अपनी सम्पत्ति का उत्तराधिकारी बनाना चाहता था। उसने तीनों को बीजों की एक-एक थैली देते हुए कहा कि मैं तीर्थ-यात्रा पर जा रहा हूँ। मुझे लौटने में 3 वर्ष लग जाएंगे। तब तक तुम ये बीज संभाल कर रखना।
बड़े बेटे ने सोचा कि 3 वर्ष तक कौन संभालेगा? अभी इन्हें बाज़ार में बेच देता हूँ। पिता के आने पर पुनः खरीद कर दे दूंगा। उसने ऐसा ही किया। दूसरे आज्ञाकारी पुत्र ने उन्हें तिजोरी में बंद करके हिफाजत से रख दिया और तीसरे पुत्र ने घर के पीछे की ज़मीन खेती लायक बना कर उसमें वे बीज बो दिए।
3 वर्ष बाद पिता ने आकर वे बीज मांगे तो बड़े बेटे ने बाज़ार से खरीद कर दे दिए। पिता ने कहा कि ये बीज वो नहीं हैं, जो मैंने तुम्हें दिए थे। तुमने उनका Misuse किया है। दूसरे पुत्र ने उन्हें तिजोरी में बंद बीज लाकर दिए तो पिता ने कहा कि इन बीजों को घुन लगा हुआ है। अब ये किसी काम के नहीं हैं। तुमने मूल्यवान बीजों को Unuse करके व्यर्थ कर दिए हैं।
तीसरे पुत्र ने घर के पीछे की ज़मीन के पास ले जाकर दिखाया तो फसल लहलहा रही थी। दूर से ही सुगंध आ रही थी। वे एक थैली बीज पहले वर्ष 10 गुणा, दूसरे वर्ष 20 गुणा और तीसरे वर्ष 40 गुणा हो गए थे। पिता ने उसे सीने से लगा लिया और उसे अपनी सम्पत्ति का उत्तराधिकारी बना दिया क्योंकि उसने बीजों का Perfect Use किया था।
इसी प्रकार यदि हम भी अपने जीवन के बीज से निहाल और मालामाल होना चाहते हैं तो इसका Perfect Use करना सीखें और अपने जीवन को Update करें, Upgrade करें, Uplift करें।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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