सच या झूठ

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सच या झूठ

Image by Peggychoucair from Pixabay

एक बार बुरी आत्माओं ने भगवान से शिकायत की कि उनके साथ इतना बुरा व्यवहार क्यों किया जाता है। अच्छी आत्माएं इतने शानदार महल में रहती हैं और हम सब खंडहरों में। आखिर ये भेदभाव क्यों है। जबकि हम सब आप ही की संतान हैं।

भगवान ने उन्हें समझाया, “मैंने तो सभी को एक जैसा ही बनाया पर तुम ही अपने कर्मों से बुरी आत्माएं बन गयी।”

पर भगवान के समझाने पर भी बुरी आत्माएं भेदभाव किये जाने की शिकायत करती रही।

इस पर भगवान ने कुछ देर सोचा और सभी अच्छी-बुरी आत्माओं को बुलाया और बोले, “बुरी आत्माओं के अनुरोध पर मैंने एक निर्णय लिया है। आज से तुम लोगों को रहने के लिए मैंने जो भी महल या खंडहर दिए थे, वो सब नष्ट हो जायेंगे और अच्छी और बुरी आत्माएं अपने अपने लिए दो अलग-अलग शहरों का निर्माण करेंगी।”

तभी एक आत्मा बोली, “लेकिन इस निर्माण के लिए हमें ईंटें कहाँ से मिलेंगी?

“जब पृथ्वी पर कोई इंसान सच या झूठ बोलेगा तो यहाँ पर उसके बदले में ईंटें तैयार हो जाएंगी। सभी ईंटें मजबूती में एक सामान होंगी। अब ये तुम लोगों को तय करना है कि तुम सच बोलने पर बनने वाली ईंटें लोगे या झूठ बोलने पर”, भगवान ने उत्तर दिया।

बुरी आत्माओं ने सोचा - पृथ्वी पर झूठ बोलने वाले अधिक लोग हैं इसलिए अगर उन्होंने झूठ बोलने पर बनने वाली ईंटें ले ली तो एक विशाल शहर का निर्माण हो सकता है और उन्होंने भगवान से झूठ बोलने पर बनने वाली ईंटें मांग ली।

दोनों शहरों का निर्माण एक साथ शुरू हुआ। पर कुछ ही दिनों में बुरी आत्माओं का शहर विशाल रूप लेने लगा। उन्हें लगातार ईंटों के ढेर मिलते जा रहे थे और उससे उन्होंने एक शानदार महल बना लिया। वहीं अच्छी आत्माओं का निर्माण धीरे-धीरे चल रहा था। काफी दिन बीत जाने पर भी उनके शहर का एक ही हिस्सा बन पाया था।

कुछ दिन और ऐसे ही बीते। फिर एक दिन अचानक एक अजीब सी घटना घटी। बुरी आत्माओं के शहर से ईंटें गायब होने लगी, दीवारों से, छतों से, इमारतों की नीवों से। हर जगह से ईंटें गायब होने लगी और देखते-देखते उनका शहर खंडहर का रूप लेने लगा। परेशान आत्माएं तुरंत भगवान के पास भागी और पूछा, “हे प्रभु! हमारे महल से अचानक ये ईंटें गायब क्यों होने लगी। हमारा महल जैसा शहर तो फिर से खंडहर बन गया।”

भगवान मुस्कुराये और बोले, “ईंटें गायब होने लगी!! अच्छा-अच्छा। लगता है जिन लोगों ने झूठ बोला था, उनका झूठ पकड़ा गया और इसीलिए उनके झूठ बोलने से बनी ईंटें भी गायब हो गयी।”

मित्रों! इस कहानी से हमें कई ज़रूरी बातें सीखने को मिलती हैं। जो हम बचपन से सुनते भी आ रहे हैं पर शायद उसे इतनी गंभीरता से नहीं लेते -

झूठ की उम्र छोटी होती है। आज नहीं तो कल झूठ पकड़ा ही जाता है।

झूठ और बेईमानी के रास्ते पर चल कर सफलता पाना आसान लगता है पर अंत में वो हमें असफल ही बनाता है।

वहीं सच्चाई से चलने वाले धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं पर उनकी सफलता स्थायी होती है। अतः हमें हमेशा सच्चाई की बुनियाद पर अपनी सफलता की इमारत खड़ी करनी चाहिए। झूठ और बेईमानी की बुनियाद पर तो बस खंडहर ही बनाये जा सकते हैं, महल नहीं।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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