विश्वास

 विश्वास

मशहूर सूफी संत उमर अपने पास आने वाले हर व्यक्ति की किसी न किसी रूप में परीक्षा लेते थे। वे ऐसे प्रश्न करते कि सामने वाला उलझन में पड़ जाता लेकिन उमर खुद ही उसका समाधान भी कर देते थे। 

एक बार वह जंगल की ओर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक चरवाहा मिला, जो बकरियां चरा रहा था। उमर उसके पास पहुंच गए और बोले, ‘एक बकरी मुझे दे दो।’ चरवाहे ने कहा कि वह उन्हें बकरी नहीं दे सकता क्योंकि उसका मालिक नाराज हो जाएगा। तब उमर ने कहा, ’अरे इतनी बकरियां हैं, एक कम हो भी गई तो मालिक को थोड़े ही पता चलेगा।’ चरवाहा बोला, ’मेरा मालिक तो यहां नही है, लेकिन जो सारी दुनिया का मालिक है, वह तो हमें देख रहा है। उसके विश्वास को मैं नहीं तोड़ सकता। मुझे माफ करें। मैं आपको बकरी नहीं दे सकता।’ 

उमर उससे बेहद प्रभावित हुए। वह उसके साथ उसके मालिक के पास पहुंचे। चरवाहा गुलाम था। उमर ने उसके मालिक से कहा, ‘तुमने इस नेक बंदे को गुलाम बनाकर गुनाह किया है।’ 

मालिक को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने चरवाहे को आजाद कर दिया और उसे ढेर सारे उपहार भी दिए। 

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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