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जीवन है एक खाली महल

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 जीवन है एक खाली महल Image by Ralph from Pixabay हमारा जीवन एक खाली महल की तरह है। अब हम चिंतन करें कि हमें अपने जीवन के महल को किस तरह से भरना है। एक राजा था। उसे अपने उत्तराधिकारी की चिंता हुई। विभिन्न राज्यों से तीनों राजकुमारों को आमंत्रित किया गया और अलग-अलग तीन महलों को बनवा कर उन्हें एक सप्ताह के अंदर भरने का आदेश दे दिया गया। तीनों को इस कार्य के लिए राशि सिर्फ एक हज़ार रुपए ही दी गई। पहले राजकुमार को उसके मित्र ने सलाह दी कि जुआ खेलो, जिससे ज्यादा रुपया आ जाएगा और किसी भी चीज से महल को भर लेना। वरना एक हज़ार रुपए में आएगा ही क्या? राजकुमार वह रुपए जुए में हार गया और उसका महल खाली ही रह गया। दूसरे राजकुमार के मन में यह भाव आया कि एक हज़ार रुपए में क्या होगा? और चिंतन करने पर उसने रास्ता निकाल लिया। तीसरे ने भी बहुत सोच-समझकर एक रास्ता तलाश किया। राजा ने पहले राजकुमार के महल को देखा, तो वह खाली पड़ा था। राजकुमार को उदास देखा तो उससे उसके कार्य की सारी जानकारी ली और उसके कुसंस्कारों को कोसता हुआ आगे बढ़ गया। दूसरा बहुत प्रसन्न था, परंतु यह क्या? उसके महल से बहुत द...

बुजुर्गों को समय चाहिए

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 बुजुर्गों को समय चाहिए Image by นายพิพัฒน์ศักดิ์ ไชยวงษ์ from Pixabay छोटे ने कहा, “भैया! दादी कई बार कह चुकी हैं, कभी मुझे भी अपने साथ होटल ले जाया करो।” गौरव बोला - “ले तो जायें, पर चार लोगों के खाने पर कितना खर्च होगा? याद है पिछली बार जब हम तीनों ने डिनर लिया था, तब सोलह सौ का बिल आया था। हमारे पास अब इतने पैसे कहाँ बचे हैं।” पिंकी ने बताया कि मेरे पास पॉकेट मनी के कुछ पैसे बचे हुए हैं। तीनों ने मिलकर तय किया कि इस बार दादी को भी लेकर चलेंगे। पर इस बार महंगी पनीर की सब्जी की जगह मिक्स वेज मंगवाएंगे और आइसक्रीम भी नहीं खायेंगे। छोटू, गौरव और पिंकी तीनों दादी के कमरे में गये और बोले, “दादी! इस संडे को लंच बाहर लेंगे। चलोगी हमारे साथ....?” दादी ने खुश होकर कहा, “तुम ले चलोगे अपने साथ....?” “हाँ, दादी!” संडे को दादी सुबह से ही बहुत खुश थी। आज उन्होंने अपना सबसे बढ़िया वाला सूट पहना। हल्का सा मेकअप किया। बालों को एक नये ढंग से बाँधा, आँखों पर सुनहरे फ्रेम वाला नया चश्मा लगाया। यह चश्मा उनका मंझला बेटा बनवाकर दे गया था, जब वह पिछली बार लंदन से आया था, किन्तु वह उसे प...

नेवला या मेंढक

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 नेवला या मेंढक Image by LUM3N from Pixabay सुरेश बहुत परेशान था। पिछले कुछ दिनों से एक के बाद एक उसे किसी न किसी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। कभी ऑफिस में बॉस के साथ बहस हो जाती, तो कभी घर पर पत्नी से, तो कभी उसे किसी सहकर्मी की बात ठेस पहुँचा रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। इसलिए वह एक आश्रम में अपने गुरु जी के पास पहुँचा और अपनी समस्या बता दी। गुरु जी ने उसकी बात सुनी और कहने लगे - “क्या तुम जानते हो कि नेवले सांप को मारकर खा जाते हैं?” “क्या?” “कितना अद्भुत है! ये छोटे से नेवले इतने ज़हरीले कोबरा सांप तक को मारकर खा जाते हैं! ऐसा लगता है कि इन नेवलों को साँपों ने इतनी बार काटा है कि उनके अन्दर एक प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गयी है और अब उनके ऊपर इस ज़हर का कोई असर नहीं होता।” “क्या?” सुरेश को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि गुरुजी क्या बात कर रहे हैं। “और क्या तुम जानते हो? जंगली इलाकों में एक प्रजाति के छोटे-छोटे मेंढक होते हैं, जो बेहद जहरीले होते हैं। वे पैदाइशी ऐसे नहीं होते। वे रोज़ थोड़ा-थोड़ा कर के ऐसा खाना खाते हैं कि उनके पूरे शरीर में ज़हर भर जाता ...

मांस का मूल्य

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 मांस का मूल्य Image by andrew kim from Pixabay मगध सम्राट् बिन्दुसार ने एक बार अपनी सभा में पूछा - देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है? मंत्री परिषद् तथा अन्य सदस्य सोच में पड़ गये। चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा आदि तो बहुत श्रम के बाद मिलते हैं और वह भी तब, जब प्रकृति का प्रकोप न हो। ऐसी हालत में अन्न तो सस्ता हो ही नहीं सकता। तब शिकार का शौक पालने वाले एक सामंत ने कहा - राजन्! सबसे सस्ता खाद्य पदार्थ मांस है। इसे पाने में  मेहनत कम लगती है और पौष्टिक वस्तु खाने को मिल जाती है। सभी ने इस बात का समर्थन किया, लेकिन प्रधानमंत्री चाणक्य चुप थे। तब सम्राट् ने उनसे पूछा - आपका इस बारे में क्या मत है? चाणक्य ने कहा - मैं अपने विचार कल आपके समक्ष रखूँगा। रात होने पर प्रधानमंत्री उस सामंत के महल में पहुंचे। सामन्त ने द्वार खोला। वह इतनी रात गये प्रधानमंत्री को देखकर घबरा गया। प्रधानमंत्री ने कहा - शाम को महाराज एकाएक बीमार हो गये हैं। राजवैद्य ने कहा है कि किसी बड़े आदमी के कलेजे का दो तोला मांस मिल जाए तो राजा के प्राण बच सकते हैं। इसलिए मैं आपके...

आराम ही तो करना है

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 आराम ही तो करना है Image by Светлана Бердник from Pixabay “माँ! मुझे थोड़ा आराम करना है -" स्कूल, क्लास और पढ़ाई से थक कर बेटी ने माँ से कहा। “अरी बिटिया! अच्छी पढ़ाई कर ले, बाद में आराम ही तो करना है!” बिटिया उठी, पढ़ने बैठी और फिर आराम करना तो रह ही गया। “माँ! मुझे थोड़ा समय दो, दो घड़ी आराम कर लूँ, मैं थक गई हूँ”, ऑफिस से थक कर आयी बिटिया ने कहा। “अरी! शादी कर ले और सैटल हो जा, फिर आराम ही करना है।” बिटिया शादी के लिए तैयार हो गई और आराम करना तो रह ही गया। “अरे! इतनी क्या जल्दी है - एकाध साल रुकते हैं न!” “अरी! समय के साथ बच्चे हो जायें तो टेंशन नहीं, फिर आराम ही आराम है।” बिटिया माँ बन गई और आराम करना तो रह ही गया। “तुम माँ हो, तुम्हें ही बच्चे के साथ जागना पड़ेगा, मुझे तो सुबह ऑफिस जाना है। बस थोड़े दिन! बच्चे बड़े हो जाएँ, फिर आराम ही आराम है।” वह बच्चों के लिए कई रातें जागी और आराम करना तो रह ही गया। “सुनो जी, बच्चे अब स्कूल जाने लगे हैं, अब तो दो घड़ी बैठने दो आराम से।” “बच्चों की तरफ ध्यान दो। उनको पढ़ा लो, फिर आराम ही आराम है।” बच्चों का प्रोजेक्ट बनाने बैठी औ...

प्रेम से जियो

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👼👼💧💧👼💧💧👼👼 प्रेम से जियो Image by Martin Winkler from Pixabay दो भाई थे। वे परस्पर बड़े ही स्नेह तथा सद्भावपूर्वक रहते थे। बड़ा भाई कोई वस्तु लाता तो छोटे भाई तथा उसके परिवार के लिए भी अवश्य ही लाता। छोटा भाई भी सदा उनको आदर तथा सम्मान की दृष्टि से देखता। पर एक दिन किसी बात पर दोनों में कहा-सुनी हो गई। बात बढ़ गई और छोटे भाई ने बड़े भाई के प्रति अपशब्द कह दिए। बस फिर क्या था? दोनों के बीच दरार पड़ ही गई। उस दिन से ही दोनों अलग-अलग रहने लगे और कोई किसी से नहीं बोला। कई वर्ष बीत गये। मार्ग में आमने-सामने भी पड़ जाते तो कतराकर दृष्टि बचा जाते। छोटे भाई की कन्या का विवाह का अवसर आया। उसने सोचा कि बड़े अंत में बड़े ही होते हैं। जाकर मना लाना चाहिए। वह बड़े भाई के पास गया और पैरों में पड़कर पिछली बातों के लिए क्षमा मांगने लगा। बोला - ‘भैया! अब चलिए और विवाह कार्य संभालिए।’ पर बड़ा भाई न पसीजा। चलने से साफ मना कर दिया। छोटे भाई को बहुत दुःख हुआ। अब वह इसी चिंता में रहने लगा कि कैसे भाई को मनाकर लाया जाए। इधर विवाह के भी बहुत ही थोड़े दिन रह गये थे। संबंधी आने लगे थे। किसी ने कहा - ‘उसका बड़ा भा...